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जागरण कर्मचारियों से सीखो हक़ के लिए लड़ना

नई दिल्ली : मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य राज्यों में विभिन्न प्रिंट मीडिया समूहों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। देश भर के मीडियाकर्मियों की नजर माननीय अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर है। लेकिन अत्याचारी अखबार मालिकानों से भिड़कर आंदोलन को इस मुकाम तक पहुँचाने वाले दैनिक जागरण के कर्मचारियों की हिम्मत की जितनी प्रशंसा की जाये, कम है।

नई दिल्ली : मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य राज्यों में विभिन्न प्रिंट मीडिया समूहों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। देश भर के मीडियाकर्मियों की नजर माननीय अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर है। लेकिन अत्याचारी अखबार मालिकानों से भिड़कर आंदोलन को इस मुकाम तक पहुँचाने वाले दैनिक जागरण के कर्मचारियों की हिम्मत की जितनी प्रशंसा की जाये, कम है।

जागरण की नोएडा, धर्मशाला, हिसार, जालंधर और लुधियाना यूनिट के आंदोलनकारी सिपाहियों ने यह तो दिखा दिया कि हक़-हुकूक के लिए संघर्ष कैसे किया जाता है। अखबार मालिकानों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि बरसों तक उनकी तानाशाही को बर्दाश्त करते रहे ये कर्मचारी मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेंगे। चर्चा यह भी है कि दैनिक जागरण के नोएडा प्रबंधन में बैठे कुछ कथित महान लोग कर्मचारियों की बरसों की मेहनत से खड़ी की गई इस यूनिट को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। ऐसे में निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि इनकी धूर्तता की वजह से ही कर्मचारियों को संगठित होने का मौका मिला और वर्तमान में कर्मचारियों के आंदोलन को 4 महीने पूरे हो चुके हैं। अदालती कार्यवाही से लेकर एरियर की रिकवरी डालने का काम भी कर्मचारी पूरा कर चुके हैं।

जागरण एम्प्लाइज यूनियन के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह कहते हैं कि जागरण कर्मचारी जिस जोश के साथ आंदोलन में उतरे थे वह अब कई गुना बढ़ चुका है और यह कहा जा सकता है कि कर्मचारी इतिहास लिखने जा रहे हैं। ऐसे में दिल्ली- एनसीआर के मीडिया संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों और इन संस्थानों के प्रबंधनों के बीच जागरण कर्मचारियों की हिम्मत के बारे में जमकर चर्चाएं हो रही हैं। अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ने के भगवान् कृष्ण के सिद्धान्त को आधार मानकर अपने हक़ की लड़ाई लड़ने वाले जागरण कर्मचारियों को सलाम।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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