पूर्व जिला जज के मानहानि मुकदमे में शोभना भरतिया को लखनऊ पीठ से राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हिंदुस्तान टाइम्स की मालकिन शोभना भरतिया और एचटी के ही पूर्व-वर्तमान कर्मी राजीव वर्मा, राजीव बंसल, राजन भल्ला, एस रंगनाथन आदि के खिलाफ लखनऊ के एसीजेएम फोर्थ कोर्ट नंबर 28 की अदालत में चल रहे मानहानि के मुकदमें में सुनवाई की अगली तारीख तक आवेदकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कारवाई नहीं करने का आदेश दिया है ।

लखनऊ खंडपीठ में हिंदुस्तान टाइम्स की मालकिन शोभना भरतिया, राजीव वर्मा, राजीव बंसल, राजन भल्ला, एस रंगनाथन आदि ने धारा 482 Cr.P.C के तहत वाद दायर किया है। इसमें 2017 के कंप्लेंट केस नंबर 2800 विशेष न्यायाधीश (प्रदूषण) सी.बी.आई. लखनऊ के समक्ष धारा 500, 501, 502 आई.पी.सी., पी.एस. गोमती नगर, जिला लखनऊ के तहत दाखिल इस्तगासा को निरस्त करने की मांग की गयी है ।

आवेदकों ने कहा है कि एक समाचार आइटम हिंदुस्तान टाइम्स में गायत्री प्रजापति को जमानत देने के संबंध में प्रकाशित किया गया था। इस मामले में विपक्षी संख्या 2 राजेंद्र सिंह तत्कालीन जिला जज लखनऊ सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों की कार्रवाई के संबंध में एक जांच आयोजित की गई थी। इन सभी समाचारों को विभिन्न समाचार प्लेटफार्मों पर रिपोर्ट किया गया था। आवेदकों के वकील का कहना है कि आवेदक एचटी मीडिया की अध्यक्ष और निदेशक हैं। इस समाचार के प्रकाशन के लिए एचटी मीडिया लिमिटेड जिम्मेदार नहीं है क्योंकि पोर्टल संपादकीय टीम द्वारा संचालित किया जाता है, और इस प्रकार, धारा 500/ 501/ 502 I.P.C के तहत कोई अपराध आवेदकों ने कारित नहीं किया है।

केवल पीड़ित करने के इरादे से कई अखबारों के साथ-साथ समाचार चैनलों के खिलाफ भी विपक्षी संख्या 2 राजेंद्र सिंह द्वारा कई शिकायतें दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि 2017 की आपराधिक संख्या नं. 2942 (राजेन्द्र सिंह बनाम टाइम्स ऑफ इंडिया और अन्य) की कार्यवाही विपक्षी संख्या 2 राजेंद्र सिंह द्वारा दायर की गई थी जिसकी कार्रवाई न्यायालय के आदेश दिनांक 28 फरवरी 2018 द्वारा स्थगित कर दी गयी है। इसलिए आवेदक भी समानता का हकदार है। एजीए ने आवेदकों के लिए वकील की प्रार्थना का विरोध किया और कहा है कि आवेदक अदालत के समक्ष अपना तर्क दे सकता है।

जस्टिस राजीव सिंह की एकल पीठ ने आदेश पारित किया कि लिस्टिंग की अगली तारीख तक, आवेदकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 18 नवम्बर को होगी।

दरअसल यह मामला लखनऊ के तत्कालीन जिला जज राजेन्द्र सिंह का है जिनके खिलाफ बलात्कार के आरोपी और खनन घोटाले के मास्टर माइंड गायत्री प्रजापति की पाक्सो एक्ट में जमानत देने का आरोप लगाकर खबर उछाल दी गयी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय का जज बनने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नाम अग्रसारित होने के बावजूद उनकी फ़ाइल रद्दी की टोकरी में डाल दी गयी। जबकि गायत्री प्रजापति की जमानत विशेष न्यायाधीश पाक्सो ओमप्रकाश मिश्र ने मंजूर की थी और उन्हें अवकाशग्रहण करने के एक दिन पहले ही निलम्बित कर दिया गया था।

यह खबर टाइम्स ऑफ़ इंडिया से लेकर हिंदुस्तान टाइम्स, अमर उजाला, इलेक्ट्रानिक मीडिया, डिजिटल मीडिया सभी जगह प्रमुखता से छपवाई गयी और टेलीकास्ट कराई गयी। पूर्व जज राजेन्द्र सिंह ने अपनी लड़ाई जारी रखी और न्यायपालिका से लेकर मीडिया तक को नहीं छोड़ा। मीडिया को नोटिस देने के बाद तमाम लोगों ने खबरें छापकर माफ़ी मांगी, लेकिन जिन लोगों या संस्थानों ने माफ़ी नहीं मांगी उनके खिलाफ लखनऊ के एसीजेएम फोर्थ कोर्ट नंबर 28 की अदालत में मानहानि का मुकदमा चल रहा है। इसी प्रकरण में एसीजेएम फोर्थ कोर्ट नंबर 28 के जज ने हिंदुस्तान टाइम्स की मालकिन शोभना भरतिया राजीव वर्मा, राजीव बंसल, राजन भल्ला, एस रंगनाथन आदि के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।यह सारी झूठी खबरें जून 2017 की हैं।

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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Posted by Bhadas4media on Monday, October 21, 2019
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