Connect with us

Hi, what are you looking for?

टीवी

स्नेहा ने अंजना को बाहर जाने को ज़रूर कहा पर इसे बेइज्जती नहीं माना जाएगा!

नवेद शिकोह-

बेटी दिवस पर एक बेटी की खिल्ली तो मत उड़ाइए! नहीं मानता कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे की कवरेज करने गईं आजतक चैनल की एंकर/रिपोर्टर अंजना ओम कश्यप की बेइज्जती हुई है। भारतीय विदेश सेवा की चर्चित अधिकारी स्नेहा दुबे ने अंजना को बाहर जाने को ज़रूर कहा पर इसे बेइज्जती नहीं कहा जाएगा, कम से कम ज़मीनी पेशेवर पत्रकार तो इस बात को सझते ही होंगे।

Advertisement. Scroll to continue reading.

जिस वीडियो को महिला पत्रकार की बेइज्जती बताकर सोशल मीडिया पर पेश किया जा रहा है वो बेइज्जती नहीं बल्कि फर्ज निभाने की बानगी है। सच ये है कि वायरल वीडियो में भारत की ये दोनों बेटियां (स्नेहा और अंजना) अपनी-अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हुए दिख रही हैं।

मेरा खुद का ज़मीनी अनुभव है कि जब हम पत्रकार खबर निकालने की जद्दोजेहद के दौरान भगाए जाते हैं तब लगता है कि हम अस्ल रिपोर्टिग या अस्ल पत्रकारिता कर रहे हैं। और जब हमें बाइट/बयान या खबर को थाल की तरह सजा कर परोस दिया जाए तो वो न तो अस्ल रिपोर्टिंग होती हैं और न ही अस्ल पत्रकारिता। परोसी हुई खबरों की पत्रकारिता करने वाला पोस्टमैन की भूमिका तक सीमित रहता है। आसानी से बाइट कलेक्शन करने वाले कभी बड़े पत्रकार नहीं बन पाते।

खबर निकालने की कशमकश, संघर्ष, बेचैनी.. के दौरान खालिस रिपोर्टर को अक्सर भगा दिया जाता है। बेइज्जत होना पड़ता है। जेल जाना पड़ता है। मार खानी पड़ती है। मुकदमें झेलने पड़ते हैं। और यहां तक कभी मर जाना भी पड़ता है।

Advertisement. Scroll to continue reading.

ताजुब है जिस आजतक की रिपोर्टर/एंकर से हम डेढ़ दशक से ज्यादा वक्त से देश-दुनिया की ख़बरों से रूबरू होते रहे हैं उसी महिला रिपोर्टर से अमेरिका में स्नेहा दुबे बाइट देने के बजाय बाहर जाने के लिए कहती हैं तो हम इस वीडियो को देखकर चटकारे ले रहे हैं। खिल्ली उड़ा रहे हैं। कह रहे हैं कि अच्छा हुआ जो भगाई गई। क्या मतलब है इन बातों का !

अमेरिका में कवरेज के दौरान देश की बेटी की एक वीडियो क्लिप अपमान के मज़ाक की सूरत में जब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है तो इत्तेफाक कि आज बेटी दिवस है। और इस तरह बेटी दिवस ख़ुद शर्मिंदा होता नज़र आ रहा है।
जिस देश की बेटियों को सदियों तक गोबर के उपले थापने के काम तक सीमित रखा गया है उस देश की एक बेटी (अंजना ओम कश्यप) इतनी बड़ी पत्रकार ऐसे ही नहीं बन गई होगी। मीडिया जैसे जटिल पेशे में एक बेटी के संघर्ष का अंदाज़ा लगाना भी कठिन हैं, हां किसी का मजाक उड़ाना बहुत आसान है। स्नेहा दुबे और अंजना ओम कश्यप जैसी भारत की बेटियों पर हमे नाज़ है।

देखें संबंधित video-

Advertisement. Scroll to continue reading.

https://twitter.com/roflgandhi_/status/1441739233039814668?s=21

  • नवेद शिकोह (वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ)
1 Comment

1 Comment

  1. सौरभ गुप्ता

    September 26, 2021 at 10:20 pm

    बेइज्जती बाहर निकालना नही थी, बेइज्जती तो जबरन अंदर घुसना था

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

भड़ास को मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप ग्रुप से जुड़ें- Bhadasi_Group_one

Advertisement

Latest 100 भड़ास

व्हाट्सअप पर भड़ास चैनल से जुड़ें : Bhadas_Channel

वाट्सअप के भड़ासी ग्रुप के सदस्य बनें- Bhadasi_Group

भड़ास की ताकत बनें, ऐसे करें भला- Donate

Advertisement