अब सेक्यूलरिज़्म के दूसरे सूरमा प्रणव राय पर भी बन आई है…

: भारतीय पत्रकारिता में सेक्यूलरिज्म का तड़का और उस का यह हश्र : विजय माल्या और प्रणव राय की गलबहियां : भारतीय पत्रकारिता में सेक्यूलरिज्म का तड़का भी अजीबोगरीब स्थितियां पेश कर देता है। क़िस्से तो बहुतेरे हैं पर अभी दो लोगों को याद कीजिए। एक तुर्रम खां हैं तहलका के तरुण तेजपाल जो अर्जुन सिंह द्वारा दिए गए सरकारी अनुदान से वाया तहलका सेक्यूलर चैम्पियन बने। फिर जल्दी ही वह कुख्यात माफ़िया पोंटी चड्ढा की गोदी में जा गिरे और देखते-देखते अरबों में खेलने लगे।

बीते दिनों अपनी बेटी की उम्र की अपनी एक कर्मचारी के साथ गोवा में सरेआम दुराचार पर आमादा हो गए। वह भागती रही और यह उसे पूरे होटल में दौड़ाते रहे। मदिरा में धुत्त हो कर। जेल गए और सेक्यूलरिज्म के सीन से फरार हो गए। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा ने जान-बूझ कर फंसाया है। एनडीटीवी पर तब रवीश कुमार ने भी तरुण तेजपाल की ख़ूब पैरोकारी की थी, प्रणव राय के नेतृत्व में। लेकिन अब सेक्यूलरिज़्म के इन्हीं दूसरे सूरमा प्रणव राय पर भी बन आई है । कई सारे मामलों में फंसते जा रहे हैं।

टटका मामला विजय माल्या की गीदड़ भभकी का है। भारत से भागने के बाद विजय माल्या ने लंदन से ट्विट कर के भारतीय पत्रकारिता के संपादकों को धमकाया है कि मेरे बारे में उलटा सीधा लिखा तो सब को एक्सपोज कर दूंगा। तो क्या यह धमकी प्रणव राय के लिए थी? विजय माल्या और प्रणय राय की दो फ़ोटो वायरल हुई है। प्रणव राय के और भी कई मामले सामने आ रहे हैं। मनी लांड्रिंग, फेरा सहित और भी आरोप लग गए हैं। दिलचस्प यह कि एक राजनीतिक सेक्यूलर सूरमा और पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवगौड़ा ने भी माल्या की तरफदारी करते हुए लगभग माल्या के ट्वीट को दुहराया है कि माल्या भगोड़ा नहीं हैं, भागे नहीं हैं। और कि वह कर्नाटक की माटी के लाल हैं।

तो क्या माल्या के पैसे ने पत्रकारों सहित देवगौड़ा को भी ख़रीद लिया है? हमें तो माल्या के उस ट्वीट का इंतज़ार है जिस में वह देश की संसद को धमकाएगा कि मेरे मामले में संसद में बहुत मत बोलो, चुप रहो, नहीं तो एक-एक की पोल खोल दूंगा। माल्या ऐसी धमकी बैंक के चेयरमैनों और जजों को भी सकता है कि चुप रहो नहीं तो तुम्हारी पोल खोल दूंगा। सबके डॉक्यूमेंट्री प्रूफ़ हैं मेरे पास। क्यों कि सच यह है कि मनी में पावर बहुत है। मनी पावर मसल पावर से बड़ा है। पूरे सिस्टम को वह ख़रीद चुका है। संसद, मीडिया, अदालत, अफ़सर सबको।

लेखक दयानंद पांडेय लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हैं.

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Comments on “अब सेक्यूलरिज़्म के दूसरे सूरमा प्रणव राय पर भी बन आई है…

  • “Kaho ji Tum Kya-kya Khareedoge” sareekha Gana yaad aa gaya. Malya sab Khareedte-2 khud Bik gaye aur Desh tatha Bank ka Paisa bhi Bech (Maar Liya) diya. Lekin Congress kaal me wah itnaa badaa Ghapla kerta raha, to uskaa Sara Theekra Congress per Footna chahiye.
    BHRASHT CONGRESS KHUD ITNA BHRASHT HO GAI KI “TUM BHI KHAO, HUM BHI KHAYEN”. DESH JAYE BHAAND ME. DESH KI JANTA ISS “SURSAA PARTY” KO KAB SAMJHEGI, SAMAJH NAHI ATAA. CONGRESS KE “ANDH-BHAKTON” SE BHI SAVINAY NIVEDAN HAI KI DESH-HIT ME ISS PARTY SE JALD KINARA KAREIN, WARNA KAFI DER HO JAYEGI…
    YAHAN MODI SARKAR SE BHI CHOOK HUI HAI. INKEY KARYAKAAL ME WAH “BHAGODA MALYA” BHAG GAYA, DESH AUR BANKON KA LUTIYA DUBO GAYA. YE SAB GOVT. KI NAAK KE NEECHEY BAGAIR USKI JAANKARI ME KAISE SAMBHAV HO SAKAA. KAHIN NA KAHIN KUCHH TO GADBAD HAI. MODI JI KO PATAA LAGANA CHAHIYE KI UNKI SARKAAR ME KAUN MANTRI KE AASHIRVAD SE MALYA BHAG GAYA…..

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