अलीगढ़ के एसएसपी राजेश पांडेय की इस संवेदनशीलता को आप भी सलाम कहेंगे

आमतौर पर पुलिस महकमे से जुड़े लोगों को रुखा-सूखा और कठोर भाव-भंगिमाओं वाला आदमी माना जाता है. लेकिन इन्हीं के बीच बहुतेरे ऐसे शख्स पाए जाते हैं जिनके भीतर न सिर्फ भरपूर संवेदनशीलता होती है बल्कि वे अपने समय के साहित्य से लेकर कला और जनसरोकारों से बेहद नजदीक से जुड़े होते हैं. किसी जिले का पुलिस कप्तान वैसे तो अपने आप में दिन भर लूट हत्या मर्डर घेराव आग आदि तरह-तरह के नए पुराने अपराधों-केसों में उलझ कर रह जाने के लिए मजबूर होता है लेकिन वह इस सबके बीच अपने जिले की साहित्य की किसी बड़ी शख्सियत से इसलिए मिलने के लिए समय निकाल ले कि उनकी सेहत नासाज़ है तो यह प्रशंसनीय बात है.

अभिताभ ठाकुर के समर्थन में उमड़ा अलीगढ़, निलंबन वापसी की मांग

अलीगढ़ : सपा सुप्रीमो का कथित ऑडियो सार्वजानिक करने वाले आईपीएस अधिकारी अभिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई को अखिलेश सरकार की तानाशाही करार देते हुए अलीगढ़ के लोग अभिताभ ठाकुर के समर्थन में सड़कों पर उतर आये. 

मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति की मीटिंग में खूब लंबी-लंबी छोड़ गए वक्ता-प्रशासक

 अलीगढ़ : पिछले दिनो यहां जिलाधिकारी ने मान्यता प्राप्त पत्रकार स्थायी समिति की मीटिंग ली, जिसमें केवल न्यूज चैनलों के कुछ पत्रकार और जागरण के नवीन सिंह (उर्फ नवीन पटेल) पहुंचे। अमर उजाला, हिंदुस्तान से कोई पत्रकार शामिल नहीं हुआ। ऐसी स्थायी पत्रकार समिति की मीटिंग का क्या औचित्य रहा होगा, ये तो वही जानें, जो बैठक में लंबी लंबी छोड़ रहे थे और वे भी, जो उन्हें टुकर-टुकर ताक-सुन रहे थे।  

जगेंद्र हत्याकांड के खिलाफ अलीगढ़ में जुलूस निकाला, राज्यपाल को ज्ञापन

अलीगढ़ : बुधवार सुबह लगभग 11.00 बजे सेंटर पाइन्ट चैराहे पर मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, रीजनल इलैक्ट्रानिक मीडिया, अलीगढ़ इलैक्ट्रोनिक मीडिया, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन व गणेश शंकर विद्यार्थी प्रैस क्लब के पदाधिकारी, शहर के पत्रकारों ने जगेंद्र हत्याकांड पर जुलूस निकाल कर कड़ा विरोध प्रकट किय। 

पत्रकारों को इंसाफ चाहिए, राज्यपाल से गुहार, ज्वॉइंट कमिश्नर को ज्ञापन

अलीगढ़ : पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड के विरोध में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने अध्यक्ष सुबोध सुहृद के नेतृत्व में बुधवार को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन कमिश्नरी पर ज्वांइट कमिश्नर राजाराम को दिया। ज्ञापन में समिति के पदाधिकारियों ने मांग की कि प्रदेश में हो रहे पत्रकारों के उत्पीड़न को रोकने के लिए एक संस्था का गठन किया जाना चाहिए और मृत पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवारीजनों को मुआवजा व आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 

जगेंद्र सिंह हत्याकांड के विरोध में ज्वॉइंट कमिश्नर को ज्ञापन देते अलीगढ़ के पत्रकार

अलीगढ़ में रिजल्ट की कवरेज के दौरान जागरण के रिपोर्टर की हार्ट अटैक से मौत

अलीगढ़ : दैनिक जागरण के रिपोर्ट मयंक त्यागी का सीबीएससी बोर्ड के रिजल्ट की खबर की कवरेज के दौरान आज अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह मात्र 32 वर्ष के थे। वह अपने पीछे अपनी पत्नी, एक छोटे बच्चा, मां और बड़े भाई को छोड़ गए हैं। अल्पायु में उऩके निधन से जिले के पत्रकारों में शोक की लहर फैल गई। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

अलीगढ़ में डॉक्टर परिवार पर पत्रकारों का हमला, कई घायल

अलीगढ़ : इंडिया टीवी, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ नेशन और टाइम्स नाऊ के लिए अकेले काम कर रहे पत्रकार प्रदीप सारस्वत और उनके पांच कथित पत्रकार साथियों ने दबंगई में प्रतिष्ठित डॉक्टर और उनके परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। एसएसपी के आदेश पर थाना सिविल लाइन में दोषी मीडियाकर्मियों के खिलाफ मुक़द्दमा दर्ज हो गया है। बताया गया है कि सारा विवाद दरवाजे पर गाड़ी खड़ी करने को लेकर हुआ। मारपीट में दूसरे पक्ष के अरुण, प्रदीप, श्रवण भी चुटैल हुए हैं। दूसरे पक्ष ने भी पुलिस को तहरीर दी है। 

जागरण अलीगढ़ में नवीन पटेल फिर बन गए सिटी चीफ रिपोर्टर

अलीगढ़ : यहां लंबे समय से दैनिक जागरण में कार्यरत नवीन पटेल को एक बार फिर डेस्क से स्थांतरित कर सिटी चीफ रिपोर्टर बना दिया गया है। दो वर्ष पूर्व जागरण प्रबंधन से एक गंभीर शिकायत के बाद उन्हें सिटी चीफ रिपोर्टर पद से हटाकर डेस्क पर लगा दिया गया था। उनके स्थान पर रमाकांत चतुर्वेदी को सिटी चीफ रिपोर्टर बना दिया गया था।

मौलाना आजाद की जयंती पर मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा पुरानी स्टोरी गरम करके परोसने के मायने

Vineet Kumar : आज यानी 11 नवम्बर को मौलादा अबुल कलाम आजाद की जयंती है. इस मौके पर मेनस्ट्रीम मीडिया ने तो कोई स्टोरी की और न ही इसे खास महत्व दिया. इसके ठीक उलट अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उनके ना से जो लाइब्रेरी है, उससे जुड़ी दो साल पुरानी बासी स्टोरी गरम करके हम दर्शकों के आगे न्यूज चैनलों ने परोस दिया. विश्वविद्यालय के दो साल पहले के एक समारोह में दिए गए बयान को शामिल करते हुए ये बताया गया कि इस लाइब्रेरी में लड़कियों की सदस्यता दिए जाने की मनाही है. हालांकि वीसी साहब ने जिस अंदाज में इसके पीछे वाहियात तर्क दिए हैं, उसे सुनकर कोई भी अपना सिर पीट लेगा. लेकिन क्या ठीक मौलाना आजाद की जयंती के मौके पर इस स्टोरी को गरम करके परोसना मेनस्ट्रीम मीडिया की रोचमर्रा की रिपोर्टिंग और कार्यक्रम का हिस्सा है या फिर अच्छे दिनवाली सरकार की उस रणनीति की ही एक्सटेंशन है जिसमे बरक्स की राजनीति अपने चरम पर है. देश को एक ऐसा प्रधानसेवक मिल गया है जो कपड़ों का नहीं, इतिहास का दर्जी है. उसकी कलाकारी उस दर्जी के रूप में है कि वो भले ही पाजामी तक सिलने न जानता हो लेकिन दुनियाभर के ब्रांड की ट्राउजर की आल्टरेशन कर सकता है. वो एक को दूसरे के बरक्स खड़ी करके उसे अपनी सुविधानुसार छोटा कर सकता है. मेनस्ट्रीम मीडिया की ट्रेंनिंग कहीं इस कलाकारी से प्रेरित तो नहीं है?