मृत्यु को महोत्सव बनाने का विलक्षण उपक्रम है संथारा

जैन धर्म में संथारा अर्थात संलेखना- ’संन्यास मरण’ या ’वीर मरण’ कहलाता है। यह आत्महत्या नहीं है और यह किसी प्रकार का अपराध भी नहीं है बल्कि यह आत्मशुद्धि का एक धार्मिक कृत्य एवं आत्म समाधि की मिसाल है और मृत्यु को महोत्सव बनाने का अद्भुत एवं विलक्षण उपक्रम है। तेरापंथ धर्मसंघ के वरिष्ठ सन्त ‘शासनश्री’ मुनिश्री सुमेरमलजी ‘सुदर्शन’ ने इसी मृत्यु की कला को स्वीकार करके संथारे के 10वें दिन चैविहार संथारे में दिनांक 4 अगस्त 2018 को सुबह 05.50 बजे देवलोकगमन किया। Continue reading

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अब यह जैन मुनि निकला रेपिस्ट, हुआ अंदर!

Shishir Soni : बहुरूपिये समाज के तेजी से स्खलित होने का परिणाम है जैन मुनि का कुकृत्य और उनकी गिरफ्तारी. इन्हे जूते की माला पहना कर सार्वजनिक अभिनन्दन करना चाहिए. आये दिन ये खबरें आती हैं की फलां करोड़पति सांसारिक वैभव को छोड़ जैन मुनि बन गया. लेकिन उन तपस्वी मुनियों के बीच से ऐसी बजबजाती दुर्गन्ध आये तो समाज का स्वरुप क्या होगा? मन सिहरता है ये सोच कर.

अपने एक जैन मित्र के साथ कई जैन मुनियों से मिला. यकीन मानिये किसी से प्रभावित नहीं हुआ. बातों में कोई गहराई नहीं. वाणी में माधुर्यता का रसखान नहीं. बेहद सतही प्रवचन. कई तो स्वनामधन्य महा-मूर्ख भी मिले. हो सकता है ऐसे मुनि हों जिन्हें सुनने का अवसर नहीं मिला हो और वो अच्छा ज्ञान रखते हों. अच्छा कनेक्ट करने की विधा में पारंगत हों. लेकिन ज़्यदातर मुनियों की एक ही लालसा होती है कि हमारे चातुर्मास या अन्य धार्मिक समागम में बड़े-बड़े राजनेता आएं.

क्यों भाई! ये नेताओं की लालसा क्यों? क्यूंकि मुनियों में आपसी प्रतिद्वंता जबरदस्त है. खुद को दूसरे मुनियों से श्रेष्ठ दिखाने के लिए वीवीआईपी आमद कैसे बैढे इसकी खुशामद में वे कुछ जैन धन्ना सेठों का बगलबच्चा बने रहते हैं. उसके ऐवज में, धर्म की आड़ में वो धन्ना सेठ अपना उल्लू सीधा करने में लगा रहता है. ऐसा कमोबेश हर धर्म में प्रचलित रहा है. सादगी की प्रतिमूर्ती माने जाने वाले जैन धर्म गुरुओं और जैन धर्मावलम्बियों में ऐसी गंदगी तेजी से घर कर रही है. जो सर्वथा शर्मनाक है. वृहत समाज के लिए घातक भी.

दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सोनी की एफबी वॉल से.

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हरिवंश को भव्य समागम में 2014 के आचार्य तुलसी सम्मान से सम्मानित किया गया

अध्यात्म साधना केंद्र, छतरपुर (नयी दिल्ली) में जैन परंपरा और सादगी के साथ आयोजित भव्य समागम में प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश को 2014 के ‘आचार्य तुलसी सम्मान’ से सम्मानित किया गया.  अनुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में आयोजित समारोह में गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. इस मौके पर 2013 का ‘आचार्य तुलसी सम्मान’ स्व. भूपतभाई वडोदरीया को प्रदान किया गया. समभाव ग्रुप के संस्थापक पत्रकार वडोदरीया ने गुजरात दंगों के दौरान साहसिक रिपोर्टिग की थी.

अपने आशीर्वचन में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि पत्रकार हवा के समान होते हैं. जैसे हवा सुगंध को वातावरण में फैलाने का काम करती है, वैसे ही पत्रकार सद्विचारों को समाज में फैलाते हैं. एक बेहतर समाज के निर्माण में पत्रकारों का अहम योगदान होता है.  गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने कहा कि आचार्य तुलसी ने आत्मा को न सिर्फ व्याख्यायित किया, बल्कि उसे जीया भी. वे जीवन मूल्यों के सृजन और साधना में आजीवन लगे रहे. सच्चे जीवन मूल्यों को चुन कर उसे आत्मसात करनेवाला साधु बन जाता है. इन मूल्यों को चुनने में पत्रकार और साहित्यकार समाज की मदद करते हैं. इसीलिए आचार्य तुलसी सम्मान के लिए ऐसे पत्रकारों का चयन किया जाता है, जिन्होंने बिना किसी प्रलोभन के निष्पक्ष और सरोकारी पत्रकारिता में अपना जीवन खपाया है. साध्वी कनकप्रभा ने कहा कि आज समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है. ऐसे में पत्रकार और साहित्यकार का दायित्व है कि वे देश और समाज को दिशा देते रहें.

मुनि गुरु सुमेरलाल जी स्वामी ने कहा कि प्रलोभन को ठुकराने वाले व्यक्ति विरले होते हैं. नैतिक मूल्यों के साथ सत्य पर चलनेवाले व्यक्ति आचार्य तुलसी को प्रिय थे. वरिष्ठ पत्रकार एवं सांसद हरिवंश ने कहा कि देश में चरित्र, नैतिकता और जीवन मूल्यों का संकट है. ऐसे वक्त में आचार्य तुलसी के विचार और मागदर्शन देश को नयी दिशा दे सकते हैं. इस मौके पर ‘आचार्य तुलसी सम्मान’ के रूप में उन्हें एक लाख रुपये, शॉल, शील्ड, चांदी का नारियल आदि देकर सम्मानित किया गया.

श्री हरिवंश ने कहा कि वे सम्मान के साथ प्राप्त राशि को फिक्स डिपोजिट के रूप में जमा करा देंगे और हर साल उससे मिलनेवाले ब्याज की राशि को गरीब बच्चों की पढ़ाई एवं इलाज आदि में खर्च करेंगे. समारोह को नवनीत के संपादक एवं नवभारत टाइम्स व धर्मयुग के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, नूतन सवेरा के संपादक व ब्लिट्ज के पूर्व संपादक नंदकिशोर नौटियाल, सांसद अश्विनी कुमार चौबे आदि ने भी संबोधित किया. इससे पहले स्वागत भाषण आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ विचार मंच के अध्यक्ष राजकुमार पुगलिया ने किया.

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