हाईकोर्ट ने पूछा- टीवी कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए कोई नियामक संस्था क्यों नहीं है?

बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से पूछा कि टेलीविजन समाचार चैनल के माध्यम से प्रसारित सामग्री को विनियमित करने के लिए कोई वैधानिक संस्था क्यों नहीं होनी चाहिए। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के उन्मादी मीडिया कवरेज के परिप्रेक्ष्य में अदालत की यह टिप्पणी आई है।

अदालत ने जानना चाहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को अपने कवरेज में क्यों खुली छूट होनी चाहिए। उच्च न्यायालय ने पूछा, ”क्या (टीवी समाचार) प्रसारकों के लिए कोई वैधानिक व्यवस्था है?

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने कहा, ”जिस तरीके से प्रिंट मीडिया के लिए भारतीय प्रेस परिषद् है, आप (केंद्र सरकार) इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए इसी तरह की परिषद् के बारे में क्यों नहीं सोचते? उनको खुली छूट क्यों होनी चाहिए?

पीठ कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें प्रेस और खास तौर पर टीवी समाचार चैनलों को निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि वे सुशांत राजपूत (34) की मौत और कई एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच की रिपोर्टिंग के मामले में संयम बरतें।

याचिकाएं कई सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने दायर की है और दावा किया है कि मामले में प्रेस मीडिया ट्रायल कर रहा है, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो रही है।

केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) अनिल सिंह ने अदालत से कहा कि खबरिया चैनलों को इस तरह की कोई खुली छूट नहीं है।

सिंह ने कहा, ”ऐसा नहीं है कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। वह शिकायतों (चैनलों के खिलाफ) पर कार्रवाई करती है।

उन्होंने कहा, ”लेकिन सरकार हर चीज पर नियंत्रण नहीं कर सकती है। प्रेस की स्वतंत्रता है और इसके अपने अधिकार हैं।

बहरहाल, पीठ ने कहा कि सरकार ने अदालत में पहले दायर अपने हलफनामे में कहा है कि कई अवसर पर वह प्राप्त शिकायतों को न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (एनबीएफ) जैसे निजी निकायों को अग्रसारित कर देती है।

उच्च न्यायालय मामले में सुनवाई बुधवार को भी जारी रखेगा।



भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate






भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code