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मंदी के साइड इफेक्ट : CCD फाउंडर ने चिट्ठी लिखने के बाद सुसाइड किया, बजाज आटो चेयरमैन की ‘विकास’ पर भड़ास!

Girish Malviya : देश की सबसे मशहूर कॉफी रेस्टोरेंट चेन ‘कैफे कॉफी डे’ यानि CCD के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ ने सुसाइड कर लिया है. उनके ड्राइवर का कहना है कि सिद्धार्थ बैंगलोर के उलाल शहर में स्थित पुल तक घूमने के लिए आए थे. वहां उन्होंने कार रुकवाई और पैदल ही निकल गए. मैं उनका इंतजार कर रहा था. 90 मिनट तक वापस नहीं आए तो पुलिस को सूचना दे दी. पुलिस अब नदी में उनकी तलाश कर रही है. बाद में कैफे कॉफी डे के संस्थापक वी जी सिद्धार्थ का शव कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में नेत्रावती नदी में मिला।

सिद्धार्थ का 27 जुलाई को कंपनी के नाम लिखा पत्र सामने आया है. इसमें कर्जदाताओं और प्राइवेट इक्विटी पार्टनर के दबाव का जिक्र है. उन्होंने लिखा है कि मैं बतौर व्यवसायी नाकाम रहा. पत्र में सिद्धार्थ ने लिखा,‘‘बेहतर प्रयासों के बावजूद मैं मुनाफे वाला बिजनेस मॉडल तैयार करने में नाकाम रहा। मैं लंबे समय तक संघर्ष किया लेकिन अब और दबाव नहीं झेल सकता। एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर 6 महीने पुराने ट्रांजेक्शन से जुड़े मामले में शेयर बायबैक करने का दबाव बना रहा है। मैंने दोस्त से बड़ी रकम उधार लेकर ट्रांजेक्शन का एक हिस्सा पूरा किया था। दूसरे कर्जदाताओं द्वारा भारी दबाव की वजह से मैं टूट चुका हूं। आयकर के पूर्व डीजी ने माइंडट्री की डील रोकने के लिए दो बार हमारे शेयर अटैच किए थे। बाद में कॉफी डे के शेयर भी अटैच कर दिए थे। यह गलत था जिसकी वजह से हमारे सामने नकदी का संकट आ गया।’’

कल बजाज ऑटो के चेयरमैन राहुल बजाज ने बजाज ऑटो की आम वार्षिक बैठक (AGM) में सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने कहा है कि सरकार कहे या न कहे लेकिन आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन-चार सालों में विकास में कमी आई है. दूसरी सरकारों की तरह वे अपना हंसता हुआ चेहरा दिखाना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यही है.”

मारुति ओर टाटा मोटर्स को भी इस साल बड़ा घाटा झेलना पड़ा है हम लगातार लिख रहे हैं कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से देश बर्बादी की कगार पर आ गया है अब देश के बड़े उद्योगपति भी इस बात को स्वीकार कर रहे है

Krishna Kant : राहुल बजाज का सवाल है कि क्‍या विकास स्‍वर्ग से गिरेगा? बजाज ऑटो के चेयरमैन राहुल बजाज ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा, ”ऑटो सेक्टर बेहद मुश्किल हालात से गुजर रहा है. कार, कमर्शियल व्हीकल्स और टूव्हीलर्स सेग्‍मेंट की हालत ठीक नहीं है. कोई मांग नहीं है और कोई निजी निवेश भी नहीं है, तो ऐसे में विकास कहां से आएगा? क्‍या विकास स्‍वर्ग से गिरेगा? ”

बजाज ने कहा, ”सरकार कहे या न कहे लेकिन आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन-चार सालों में विकास में कमी आई है. दूसरी सरकारों की तरह वे अपना हंसता हुआ चेहरा दिखाना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यही है.”

जून में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री में 24 फीसदी की गिरावट हुई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी की वजह से त्राहिमाम मचा हुआ है। टाटा मोटर्स में मंदी के चलते महीने में 5 बार ब्लॉक क्लोजर यानी कामकाज रोका गया है। बजाज, महिंद्रा, टाटा आदि सभी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों की मुसीबत बढ़ रही है। गाड़ियों की बिक्री और उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आई है, इसलिए लोगों की नौकरियां जाने का खतरा मंडरा रहा है। कॉरपोरेट जगत कह रहा है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में हालात खतरे के निशान तक पहुंच गये हैं।

इस मंदी के चलते ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े करीब 8 से 10 लाख लोगों की नौकरी ख़तरे में है. ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि बीते एक साल के दौरान वाहनों की बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिली है जिसका विपरीत प्रभाव कलपुर्जा उद्योग पर भी पड़ा है. इसके चलते करीब 10 लाख लोग नौकरियां गवां सकते हैं। सरकार की अस्पष्ट और भ्रामक नीतियों के चलते ऐसा हो रहा है।

मोबाइल हैंडसेट सेक्टर भी बर्बादी की कगार पर है। पिछले दो साल में इस सेक्टर में ढाई लाख से ज़्यादा नौकरियां चली गई हैं। 75 फीसदी बाजार पर चीनी कंपनियों ने कब्जा कर लिया है। चीनी कंपनियों ने स्थानीय उद्यमियों को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ईकॉमर्स वेबसाइट के चलते रिटेल स्टोर बंद हो रहे हैं जिससे तमाम लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है।

बजट में सरकार ने इलेक्ट्रिकल व्हीकल को लेकर जिस तरह हल्ला मचाया उस पर नाराज बजाज के एमडी राजीव बजाज ने कहा, ”मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि अगर कल को ग्राहक आपके इस मॉडल स्वीकार नहीं करते हैं, तो ऑटो इंडस्‍ट्री का क्या होगा? कहने का मतलब यह है कि आपने आईसी इंजन बंद कर दिया है. इससे जुड़े लोगों की नौकरियां खत्‍म हो रही हैं. इलेक्ट्रिक व्‍हीकल की बिक्री नहीं हो रही है. ऐसे में हम क्‍या करें? क्‍या हम दुकान बंद कर, घर बैठ जाएं?”

राजीव का कहना है कि ये रातों रात सब करना चाहते हैं लेकिन यह चाय की दुकान नहीं है कि सुबह खोल दिया और शाम को बंद कर दिया। अब लेकिन मोदी जी मोदी जी हैं। जब सारा देश उन्नाव पर सवाल पूछता है तो वे बाघों की संख्या बताने लगते हैं। बताते भी तो ठीक था, गलत आंकड़ा देकर झूठ का पहाड़ खड़ा कर देते हैं। बाकी तौ सब ठीकै है…

Satyendra PS : 4000 करोड़़ रुपये नेटवर्थ की कंपनी कैफे कॉफी डे भी बर्बाद हुई। उसके मालिक बीजी सिद्धार्थ खत में यह लिख कर लापता हैं और माना जा रहा है कि उन्होंने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। कैफे कॉफी डे में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों, प्रबंधकों, वेटरों, शेफ और उसमें निवेश करने वाले लोगों, उसके शेयरधारकों आदि आदि के प्रति पूरी सहानुभूति.

सिद्धार्थ ने लिखा-

‘आयकर के पूर्व डीजी ने दो अलग-अलग मौक़ों पर बहुत परेशान किया था, एक तो हमारे माइंडट्री सौदे को रोकने के लिए और दूसरे हमारे शेयरों को लेने के लिए… यह बहुत ही अनुचित था और इस कारण काफ़ी गंभीर लिक्विडिटी क्रंच आ गई।’

‘मैं उन सभी से बार बार माफी मांगता हूं जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मैंने उसे तोड़ दिया है.’ मैं एक असफल व्यापारी हूं. मैंने एक लंबी लड़ाई लड़ी लेकिन अब मैं हार गया हूं. मैं अब शेयर होल्डर का और दबाव नहीं झेल पा रहा हूं, क्योंकि प्राइवेट निवेशक मुझे शेयर खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं जो मैं नहीं कर सकता. हर तरफ से बढ़ते दबाव ने मुझे तोड़ कर रख दिया है. मैं पूरी कोशिशें करने के बाद भी एक सफल बिजनेस मॉडल नहीं खड़ा कर पाया. बढ़ते दबाव के चलते मैंने पैसा उधार लिया. पर मैंने कभी नहीं चाहा कि मैं किसी को धोखा दूं.’

सौजन्य : फेसबुक

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