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एयर इंडिया वाले लतखोर होते ही हैं!

Yashwant Singh : उपराष्ट्रपति के साथ वेनेजुएला जा रहा था तो एक मेरे पत्रकार मित्र एआई वन के मेल फीमेल एयरहोस्टेस की विनम्रता देख दंग थे. कहते थे यशवंत जी पहली बार इन्हें इतना विनम्र देखा हूं. जरूर इन्हें प्रायश्चित पोस्टिंग मिली है ये. वे कहते रहे कि ये ऐसे बात-बिहैव करते हैं जैसे ये खुदा हों. पत्रकार मित्र आने-जाने के दौरान एयर होस्टेस और एयर इंडिया स्टाफ की विनम्रता देख-देख आंखे फाड़ रहे थे.

Yashwant Singh : उपराष्ट्रपति के साथ वेनेजुएला जा रहा था तो एक मेरे पत्रकार मित्र एआई वन के मेल फीमेल एयरहोस्टेस की विनम्रता देख दंग थे. कहते थे यशवंत जी पहली बार इन्हें इतना विनम्र देखा हूं. जरूर इन्हें प्रायश्चित पोस्टिंग मिली है ये. वे कहते रहे कि ये ऐसे बात-बिहैव करते हैं जैसे ये खुदा हों. पत्रकार मित्र आने-जाने के दौरान एयर होस्टेस और एयर इंडिया स्टाफ की विनम्रता देख-देख आंखे फाड़ रहे थे.

तब मुझे लगा कि ये सरकारी जहाज कंपनी के लोग यात्रियों को रुला के रखते हैं. ऐसी हालत में जूता मारना तो ठीक लगता है भाया. 😀

वैसे भी, टिकट बिजनेस क्लास का है और बैठाते इकानामी क्लास में हो तो जूता मार काम तो है ही. ये अलग बात है जूता वही मार पाया जो प्रभावशाली है वरना कोई यात्री मारता तो न सिर्फ एअर इंडिया वालों से हिक भर लात खाया होता बल्कि सूजे मुंह के साथ जेल में होता. एयर इंडिया वाले अगर एक लाख बार बदतमीजी करें तो कम से कम एक बार तो जूता मारना बनता है भाऊ :) नो हाय हाय.. बी प्रैक्टिकल…

वैसे जूता मारने का यह काम कोई कामरेड किया होता तो बाकी कामरेड कहते कि जनता कितना बर्दाश्त करेगी, इन्हीं हालात में नक्सलवादी पैदा होता है… शिवसेना वाले ने जूता मार काम कर दिया तो गलत कैसे… जहां पानी रुक जाए, सड़ जाए, गंधला हो जाए… वहां कोई पत्थर मार दे ताकि यथास्थितिवाद खत्म हो, प्रवाह के नए रास्ते खुलें… माफ कीजिएगा… मैं भाजपाई बिलकुल नहीं हूं लेकिन चीजों को एक चश्मे से देखने की जगह मौलिक तरीके से देखने की कोशिश कर रहा हूं ताकि मूल समस्या, मूल बात सामने आ सके, न कि कौवा कान ले गया के आधार पर कौवे के पीछे पड़ जाएं, बगैर अपना कान देखे….

(अपने राइट विंग के फक्कड़ मित्र Kamal Kumar Singh की इस बारे में एफबी पोस्ट देखा तो वहीं कमेंट किया, उसी को यहां अलग से पोस्ट कर रहा हूं)

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. संपर्क : [email protected]

Chandan Srivastava : किसी की गुंडागर्दी के बारे में सुनकर गुस्सा आना स्वाभाविक है। लेकिन एक सांसद द्वारा एयर इंडिया के किसी कर्मचारी की चप्पल या सेंडिल से पिटाई की खबर पर मुझे गुस्सा आ नहीं रहा। अगर मैं कहूं कि यह कुछ और नहीं शेर को सवा शेर मिलने जैसी बात है और एयर इंडिया वाले कई बार यह या इससे थोड़ा कम तो डिजर्व करते ही हैं। (मतलब 25 नहीं चार-पांच चप्पल) तो अतिश्योक्ति या असहिष्णुता नहीं होगा।

तीन साल पहले एक दोस्त अमौसी एयरपोर्ट से अपने शहर जा रही थी। एक एयर इंडिया के कर्मचारी से चेक-इन के दौरान कुछ कहा-सुनी हुई। कर्मचारी ने उसके साथ अभद्रता की। हमने अमौसी एयरपोर्ट में ही बने एयर इंडिया के ऑफिस में जाकर घटना की लिखित शिकायत की। तीन साल बीत गए, अब तक उस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं हुई सिवाय कुछ दिनों बाद शिकायत प्राप्त होने का एक लेटर मिलने के। अब तो शिकायत की कॉपी पता नहीं मेरे पास भी सुरक्षित है भी कि नहीं। लेकिन इस बार एयर इंडिया वालों ने किसी ऐसे शख्स को उंगली कर दी जो उनसे भी बड़ा बद्तमीज था। That’s it. मामला बस इतना ही है।

लखनऊ के पत्रकार और वकील चंदन श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

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भड़ास मेल: [email protected]

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