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उत्तर प्रदेश

बलिया पुलिस की दास्तान (पार्ट-3): बड़बोला SHO और ASI थाना छोड़ फरार हो गए

सिंघासन चौहान-

मेरी जमानत होने के बाद मैं अपनी बहन के पास चला गया था. वहां से सुबह अमिताभ सर को फोन किया और अपने बलिया आने के बारे में पुछा. उन्होंने कहा कि आपका ही सारा मैटर है और आप नहीं आओगे? मैं अपने बहनोई लल्लन चौहान के साथ स्कूटर से ही बलिया के लिए निकल गया और अपनी पत्नी को फोन कर ये कहा कि तुम भी बस पकड़कर बलिया आ जाओ.

फेफना में रुककर मैने अमिताभ सर को फोन किया और लोकेशन ली, वो बताये बस हम पहुँच रहे हैं उनका प्रोग्राम पहले थाना भीमपुरा जाने का था मगर मैंने उन्हें कहा सर पार्टी के लोग बलिया में इंतजार कर रहे हैं, पहले बलिया चलना ठीक रहेगा. हम लोग बलिया पहुंचे. हम लोगों के पहुँचने से पहले ही अमिताभ सर पुलिस लाइन बलिया पहुँच चुके थे व पुलिस अधीक्षक बलिया व डीएम को ज्ञापन दे चुके थे. वहाँ से हम लोग अधिकार सेना कार्यकारिणी बलिया के पदाधिकारी अध्यक्ष श्री बंटी राय, प्रदेश युवा सचिव श्री रितेश पाण्डेय, श्री केदारनाथ उपाध्याय व कुछ अन्य पदाधिकारी भीमपुरा थाने के लिए चल दिए.

गाडी से ही मैंने कुछ शुभचिंतकों को फोन किया कि अमिताभ सर के साथ हम लोग भीमपुरा थाना आ रहे हैं और एक घंटे में भीमपुरा थाना पहुँच जायेंगे.

हम लोगों के भीमपुरा थाना पहुंचने से पहले ही मीडिया को खबर हो गयी थी, क्योंकि 7 से 8 मीडिया वाले पहले ही पहुंचे हुए थे. अमिताभ सर को देखते ही लोगों के चहरे पर ख़ुशी कि एक लहर दौड़ गयी. लगभग 50 -60 की संख्या में लोकल ग्रामीण मेरे शुभचिंतक थाना भीमपुरा पहुँच चुके थे. जैसे ही हम लोग थाना गेट के अन्दर घुसे पता चला थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह छुट्टी पर चले गये हैं व उपनिरीक्षक वीरेन्द्र प्रताप दुबे आधे घंटे पहले ही दुम दबाकर निकल गये थे, बाकी पूरे थाना का स्टाफ जो मौजूद था सामने खड़ा हो गया. शायद अमिताभ सर का सामना करने कि उनकी हिम्मत नहीं थी.

उपनिरीक्षक अजय कुमार यादव आगे आकर सर को सैल्यूट किया और बोले सर थानाध्यक्ष महोदय छुट्टी पर हैं, इस समय मैं प्रभारी हूँ. सर ने मुझसे व मेरी पत्नी से पूरा वाकया पूछा और मेरी पत्नी से कहा कि इन पुलिस वालों में से किसी को पहचानती हो जिसने तुम लोगों को मारा. मेरी पत्नी ने सबकी तरफ देखा और बोली सर इसमें से कोई नहीं है वो दो वीरेन्द्र प्रताप दुबे व एक अन्य आरक्षी जिन्होंने मारा था वो इनमें नहीं थे.

मीडिया वालों ने सर से कुछ सवाल किये सर ने उनका जवाब दिया और मुझसे वो जगह व वाकया के बारे में पूछा यानि दुबारा सीन रिक्रिएसन. मैंने सर को बताया सर यहाँ पर संजय मिश्रा ने मुझे गाली व जान से मरने कि धमकी दी और इस रूम में थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह बैठे थे जिनको मैं आवेदन देने गया था और उन्होंने उसे लेने से इनकार कर दिया था. सर ने प्रभारी अजय कुमार यादव से थानाध्यक्ष जनसुनवाई रूम में जाने के लिए पूछा तो वो बोले सर इतने आदमी? सर ने कहा बाकि आदमी बाहर रूक जाते हैं हम कुछ लोग अन्दर जायेंगे.

हम 5-6 लोग अन्दर गए. मैंने सर को वो जगह दिखाई जहाँ पर मेरा आवेदन लेने से थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने मना कर दिया था.

उसके बाद हम लोग उस रूम से बाहर आये तो मैंने सर को बोला, सर मेरा मोबाइल व दो मोटरसाइकिल पुलिस ने जब्त कर ली हैं. अमिताभ सर ने प्रभारी अजय कुमार यादव से पुछा कि थोडा चेक करके बताइए कि ये रजिस्टर पर चढ़ी हुई हैं या ऐसे ही जब्त हैं?

जय कुमार यादव बोले सर अभी बताता हूँ वो गये और चेक करने के बाद बोले सर कहीं चढ़ा हुआ नहीं है, इनको मैं मोबाइल व गाडी दे देता हूँ. बाहर आने के बाद मीडिया के लोगों ने सर से कुछ सवाल पूछे व उसके बाद हम लोग बाहर आये. चाय की दुकान पर अमर उजाला के पत्रकार राजू राय बराबर साथ रहे, बल्कि चाय मिठाई वगैरह का पैसा उन्होंने ही दिया. बाकि लोगों से सर बहुत ही प्रेम पूर्वक मिले सबका परिचय व हालचाल लिया. पूरा भीमपुरा थाना चट्टी पर अमिताभ ठाकुर नाम का शोर हो गया. इतने चर्चित पूर्व अधिकारी को देखने को लोग उमड़ पड़े.

अमिताभ सर का भीमपुरा थाना आना लोगों के कौतुहल का विषय बन गया जगह जगह चर्चाएँ होने लग गयी कि नेता ऐसा होना चाहिए कि अपने एक पदाधिकारी-कार्यकर्ता की लड़ाई लड़ने लखनऊ से चलकर बलिया आ गये कभी दूसरी पार्टी के नेता ने ऐसा अपने कार्यकर्ता के लिए नहीं किया. लोगों को पता चल गया कि अधिकार सेना भी एक पार्टी है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के आते ही खुद को रघुवंशी कहने वाला बड़बोला थानाध्यक्ष (SHO) व दोषी उपनिरीक्षक (ASI) थाना छोडकर फरार हो गए.

साथियों इस पुरे घटनाक्रम में मेरे सभी शुभचिंतकों ने अपने स्तर से मेरा भरपूर सहयोग किया. मैं उनका आभारी हूँ जो बराबर पुलिस अधीक्षक बलिया व अन्य अधिकारीयों के साथ फोन पर मेरे सम्बन्ध में वार्ता करते रहे. जिससे पुलिस को बैकफूट पर आना पडा नहीं तो पुलिस ने मुझे फर्जी मुकदमें में दुबारा जेल भेजने कि पूरी तैयारी कर ली थी.

इस सम्बन्ध में मैंने पुलिस अधीक्षक बलिया व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को रजिस्टर्ड डाक व ऑनलाइन शिकायत की है. मेरी पत्नी द्वारा महिला आयोग को भेजी गयी शिकायत का उत्तर पुलिस अधीक्षक बलिया को जांच कर कार्यवाही के लिए आ चुका है, हो सकता है जल्द ही क्षेत्राधिकारी कार्यालय से बुलावा आए. मानवाधिकार आयोग में मैंने सभी बातों का जिक्र करते हुए दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच की मांग की है. आगे देखते हैं पुलिस अमिताभ सर के ज्ञापन व मेरी शिकायतों के ऊपर क्या कार्यवाही करती है. मुझे मारने वाले उप निरीक्षक वीरेन्द्र प्रताप दुबे व एक अन्य अज्ञात आरक्षी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए बलिया CJM कोर्ट से 156(3) के तहत आवेदन दे चुका हूँ. मुझे न्यायालय पर पूरा भरोसा है कि मुझे न्याय मिलेगा.

भीमपुरा थाना जिला मुख्यालय से 60-65 किलोमीटर दूर होने कि वजह से कोई बड़ा अधिकारी भी थाने नहीं आता है. इस सम्बन्ध में किसी बड़े अधिकारी को संज्ञान लेना चाहिए. मैं पुलिस कि हर बात का जवाब देने के लिए तैयार हूँ. पुलिस भी जान रही है कि मैं निर्दोष हूँ. कितनी बड़ी विडंबना है कि पुलिस अपना कर्तव्य भूलकर एक मरीज आदमी को फंसाने के ताने बना रही है जबकि वर्दी पहनते समय इन्हें जो कसम खिलाई जाती है उसका इनके लिए कोई मायने मकसद नहीं हैं.

जहाँ तक मैंने महसूस किया है कि एक मुजरिम को कैसे बचाया जाय और एक निर्दोष को फ़ंसाने के लिए क्या और कैसे जाल बुने जाते हैं. पुलिस कितने भी किस्से गढ़ ले मुझे पूरा भरोसा है अदालत में पुलिस के पास मेरे सवालों का कोई जवाब नहीं होगा. क्षेत्राधिकारी रसड़ा मो0 फहीम कुरैशी को मैं पहले ही बता चुका हूँ सर पुलिस ने मेरे उपर फर्जी मुकदमें दर्ज तो कर दिए हैं मगर अदालत में पुलिस कहीं भी टिक नहीं पायेगी. ये बात क्षेत्राधिकारी रसड़ा मो0 फहीम कुरैशी जान चुके हैं कि सच्चाई क्या है. आगे… हिम्मते मर्दा मददे ख़ुदा.

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