योगी सरकार में चोर उच्चके, जुगाड़ू और ढीलेढाले अफसरों की बल्लेबल्ले!

Surya Pratap Singh : योगी सरकार में एक तो इतने विलम्ब से, २ माह बाद प्रमुख सचिव स्तर के ट्रान्स्फ़र हुए, लेकिन सब ढाक-के-तीनपात …. सब गुड़गोबार …..चोर उच्चके, जुगाड़ू, ढीलेढाले लोग़ों की बल्लेबल्ले….! सरकार ने किए अनेक IAS के ‘उल्ज़लुल’ ट्रान्स्फ़र…. पता नहीं कौन ‘कटियाज्ञानी’ ऐसा परामर्श दे रहा है इस सरकार को कि संवेदनशील पदों पर ईमानदार कर्मशील अधिकारी पोस्ट नहीं कर पा रही। सम्भवतः कोई चांडाल-चौकड़ी योगी सरकार की ‘अनुभवहीनता’ का नाजायज़ फ़ायदा उठाकर इसे फ़ेल कराने की शाज़िश रच रही है!

योगी सरकार अति त्वरित गति से काम करना चाहती है, लेकिन सरकार काम वाले विभागों में अच्छे ट्रैक रिकोर्ड वाले कर्मशील ईमानदार अधिकारी नहीं तैनात कर पा रही है …. जुगाड़बाज़ी का जलवा आज भी क़ायम है। पता नहीं कौन ‘ग़लत-सलत’ परामर्श देकर व्यवस्था को सुधारने नहीं दे रहा …. इस सरकार का तो अब भगवान ही मालिक है। चोर उच्चके लोग अभी भी PWD जैसे विभाग में बने रहेंगे, शायद वहाँ के मंत्री जी को ऐसे ही लोग ज़्यादा सूट करते हों… गृह (Home) जैसे संवेदनशील विभाग में aggressive approach वाले गतिशील अधिकारी की आवश्यकता थी, जो तेज़ी से गिरती क़ानून व्यवस्था को संभाल सके…पता नहीं क्यों गृह विभाग को ऐसा अधिकारी नहीं मिल पाया।

लोग कह रहे हैं कि जो अधिकारी चिकित्सा विभाग में कुछ नहीं कर पाया और जिसपर पूर्व मंत्री-पुत्र के साथ संलिप्तता के दाग़ भी लगे थे, वह भला गृह विभाग कैसे संभाल पाएगा…मेरी समझ से भी बाहर है। मुख्य सचिव के पास से गन्ना विभाग क्यों नहीं हटाया गया ? शायद ‘शुगर डैडी’ इस पद को स्वमँ छोड़ना नहीं चाहते। वैसे भी अब नये मुख्य सचिव को लाने की तैयारी होनी चाहिए, ताकि ढीलेढाले प्रशासन को गतिशील बनाया जा सके….CAG ने वर्तमान मुख्य सचिव के प्रमुख सचिव, वित्त विभाग के कार्यकाल में ख़राब/ढुलमुल वित्तीय प्रबंध पर बड़ी ही adverse टिप्पणी की है।

आवास विभाग में भी एक सफल ट्रेक रिकोर्ड के ईमानदार कर्मशील व्यक्ति की आवश्यकता थी, जो विकास प्राधिकरणों के भ्रष्टाचार पर चाबुक चला सके …. अफ़सोस कि यह नहीं हो पाया। जिस प्रमुख सचिव को एक विभाग में असफलता भ्रष्टाचार के कारण हटाया गया हो, तो उसे शिक्षा या PWD जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पुनः क्यों तैनात किया गया/ बना रहने दिया गया ? समझ से बाहर है।

ऐसा लगता है कि अपनी धुन के पक्के योगी जी को काम करने का फ़्री हैंड नहीं मिल रहा है या फिर किन्हीं चाटुकार ‘स्वार्थी’ तत्वों की चांडाल चौकड़ी योगी जी पर हावी हो गयी है…यह तो इन स्थानंतरणों से तय दिखता है।

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ऐ मेरी सरकार! शौक-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर और संभाल ले अपने गिरते इक़बाल को! मथुरा की दिन दहाड़े हुई लूट व हत्या की घटना ने उ.प्र. सरकार को हिला कर रख दिया है…सरकार को जवाब देते नहीं बन रहा ! प्रदेश में बदमाशों के होशले बुलंद हैं…व्यापारी वर्ग उद्वेलित है….प्रदेश की पुलिस/प्रशासनिक व्यवस्था चौपट नज़र आ रही है !! बनारस, गोरखपुर व मथुरा में व्यापारियों की लूट व हत्याओं से प्रदेश के व्यापारियों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। ताबड़तोड़ हत्याएँ, बलात्कार, लूट की घटनाओं ने योगी सरकार को परेशान कर दिया है। आज दो माह के बाद अखिलेश के क़रीबी प्रमुख सचिव (ग्रह), देवाशीष पंडा को बमुश्किल हटा पाए…..पूर्व सरकार के प्रिय दाग़ी उच्च अधिकारियों/ प्रमुख सचिवों ने CM योगी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं… आवास व पीडबल्यूडी के प्रमुख सचिव के पद पर सीबीआई की जाँच में फँसे एक दाग़ी आईएएस को रखना पता नहीं क्या मजबूरी बनी है ….चीनी मिल मालिकों को करोड़ों रु. का लाभ देने के कारण ‘शुगर डैडी’ के नाम से मशहूर मुख्य सचिव सहित बिजली, माध्यमिक शिक्षा, ट्रान्स्पोर्ट, चिकित्सा, परिवहन सभी विभागों में पूर्व सरकार के दाग़ी उच्च अधिकारी पंजे गढ़ाए बैठे हैं, सबने अपने-२ आकाओँ को भाजपा/आरएसएस में पकड़ लिया हैं। इस सब दागियों को समय रहते नहीं हटाया गया तो क़ानून व्यवस्था जैसा ही ख़ामियाज़ा इन विभागों के कार्यों मे भी भुगतना पड़ेगा। योगी जी शायद अब तक जान गए होंगे कि पिछले १० वर्षों में उत्तर प्रदेश की नौकरशाही highly politicised हो चुकी है। इन जुगाड़ू, भ्रष्ट नौकरशाहों को तत्काल हटाएँ, देर होने पर सरकार के तेज़ी से गिरते इक़बाल को बचाना मुश्किल हो जाएगा….सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया? लगता है कि या तो योगी जी को कार्य करने का फ़्री हैंड नहीं दिया जा रहा या फिर जो सलाह दी जा रही है वह अपरिपक्व / फूहड़ / समझ से परे है …प्रशासनिक अनुभव की कमी राजनीतिक सत्ताधीशों के कार्य में आड़े आ रही है….. १५ दिन के हनीमून ख़त्म होते ही, सरकार में बदहवासी की स्थिति लगती है। मंत्रीगणों को नौकरशाह टहला रहे हैं और चाटुकारिता चरम पर है…. मंत्रीगणों के भ्रष्टाचार की ख़बरें भी आने लगी हैं। इसी माह की १२ तारीख़ में मैंने एक उप मुख्यमंत्री को रु. २ करोड़ से अधिक क़ीमत की Jaguar (F-Type) कार में कानपुर जाते देखा था …. उसपर A/F लिखा था….मैं तो यह देख कर हिल गया था…. यह अच्छा संकेत नहीं है।  CM योगी के सत्ता के १५ दिन तक तो अपराधियों में सन्नाटा रहा था… फिर बड़ी तेज़ी से अपराधियों व नौकरशाहों के मन का डर निकाल गया …. याद हो कि योगी जी ने कहा था कि ‘अपराधी या तो प्रदेश छोड़ दें या फिर जेल की सलाखों के पीछे जाने को तैयार हो जायें’…. लेकिन ऐसा हुआ नहीं… अपराधियों का जेल की सलाखों के पीछे जाना तो दूर, ऐसे अपराधियों को अभी तक चिन्हित भी नहीं किया जा सका है…. कोई भी अपराधी या भूमाफ़िया रासुका/गेंगेस्टर ऐक्ट में जेल नहीं गया… सरकार के ‘कथनी व करनी’ के अंतर ने अपराधियों के मन से डर निकाल दिया और उन्होंने दिन दहाड़े मथुरा जैसा कांड कर दिया ….हद तो तब हो गयी, जब आज एक IAS अधिकारी का शव लखनऊ के वीआईपी गेस्ट हाउस के पास पड़ा मिला.. ऐ मेरी सरकार ! शौक-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर और संभाल ले गिरते इक़बाल को ….

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क्या योगी राज में कानून व्यवस्था बेपटरी हुई? मात्र दो माह में ही आशा व निराशा के बीच हिचकोले खाता जनमानस ….! बेख़ौफ़ हुए बदमाश !! कल मथुरा में दिन दहाड़े २० नक़ाबपॉशों के सवर्ण २ व्यवसायियों की हत्या व ४ करोड़ की लूट को अंजाम दिया…. गत माह PM मोदी के बनारस में १० करोड़ की डकैती.. मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के गोरखपुर में एक सर्राफा व्यापारी को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया गया… रेल मंत्री मनोज सिन्हा के गाजीपुर में वीआईपी ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस लूट ली गई…. दिनदहाड़े आगरा में एसओजी के सिपाही की हत्या …प्रतापगढ़ में एक सिपाही की हत्या….फिरोजाबाद में खनन माफिया द्वारा एक सिपाही की हत्या… क्या मुख्य मंत्री की नीयत और क्षमता की अग्नि परीक्षा ले रही है बेपटरी होती कानून व्यवस्था और बेलगाम, बेख़ौफ़ अपराधी ? क्या उम्मीद की जानी चाहिए कि धुन के पक्के योगी आदित्य नाथ इस अग्निपरीक्षा में खुद को खरा साबित कर पाएँगे? पुलिस की इस सरकार के प्रति तो प्रतिबद्धतायों पर तो पहले ही प्रश्न चिन्ह था ही, कहीं योगी जी को भ्रमित कर प्रदेश के उच्च नौकरशाहों ने पूर्व सरकारों के कई वफ़ादार दाग़ी छवि वाले आयुक्त/डीएम/SSP तो तैनात नहीं करा लिए ? लोग बता रहे हैं कि सत्ताधीश राजनीतिज्ञों की प्रशासनिक अनुभवहीनता का लाभ उठाकर ‘दो’ बड़े नौकरशाहों ने अपनी पसंद के जनपदों में पुलिस व प्रशासनिक तैनात करा लिए….. मंत्री/विधायकों की एक न चली..पूर्व सरकार के वफ़ादार उच्च नौकरशाह आज भी चाटुकारिता के बल पर टिके हैं…कहीं ये सब योगी सरकार को बट्टा तो नहीं लगा रहे? उत्तर प्रदेश के पिछले कई चुनावों में मूल भूत समस्यायें -बेरोज़गारी,ग़रीबी,किसान/मज़दूरों की बदहाली,ख़स्ता हाल उद्योग आदि हाशिये पर होती हैं नकारात्मक प्रचार फलक पर होता है। कभी सूबे को गुंडा राज से मुक्त कराने का भरोसा देकर सपा को बेदखल कर बसपा सत्ता पर काबिज होती है तो कभी गुंडाराज से मुक्ति के मुद्दे पर ही बसपा को अवाम बाहर का रास्ता दिखाते हुए सपा को सूबे की कमान सौंपती देती है। 2017 में भी इतिहास ने खुद को दोहराया, भाजपा का फोकस सूबे में सपा के कथित गुंडा राज पर था। प्रधानमंत्री से लेकर छुटभैय्ये नेता तक सूबे में राम राज लाने का राग अलापते रहे। अखिलेश सरकार के कामों की हार हुई और भाजपा को बड़े अरमानों से सत्ता सौंप दी…… और मात्र २ माह में ही जनमानस आशा व निराशा के बीच झूलने को मजबूर है….

यूपी कैडर के सीनियर आईएएस रहे और अब भाजपा नेता के रूप में सक्रिय सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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