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आयोजन

भड़ास के कार्यक्रम में जब ‘शेम शेम’ की आवाजें उठने लगीं….

(भड़ास की आठ साल की यात्रा पर 52 पृष्ठ की एक स्मारिका का विमोचन करते मंचासीन विशिष्ट जन. इस स्मारिका में भड़ास और यशवंत के सुख-दुख की चर्चा विस्तार से की गई. साथ ही यात्रा में आए उतार चढ़ावों के बारे में बताया गया है. इसमें यशवंत के लिखे कुछ पुराने आलेखों, इंटरव्यू आदि का संग्रह भी है)

कांस्टीट्यूटशन क्लब में भड़ास4मीडिया की स्थापना के आठ साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में मीडिया की मौजूदा भूमिका और उससे अपेक्षाओं पर अच्छी चर्चा हुई। शुरुआत ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी के म्यूजिक बैंड से हुई। श्री त्रिपाठी ने हिन्दी, भोजपुरी, फिल्मी गानों के साथ सूफी और लोक गीतों का शानदार समां बांधा। जलपान के बाद व्याख्यान और सम्मान खंड की शुरुआत हुई। भड़ास के संपादक यशवंत सिंह ने भिन्न क्षेत्रों में अलग तरह के काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया।

(भड़ास की आठ साल की यात्रा पर 52 पृष्ठ की एक स्मारिका का विमोचन करते मंचासीन विशिष्ट जन. इस स्मारिका में भड़ास और यशवंत के सुख-दुख की चर्चा विस्तार से की गई. साथ ही यात्रा में आए उतार चढ़ावों के बारे में बताया गया है. इसमें यशवंत के लिखे कुछ पुराने आलेखों, इंटरव्यू आदि का संग्रह भी है)

कांस्टीट्यूटशन क्लब में भड़ास4मीडिया की स्थापना के आठ साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में मीडिया की मौजूदा भूमिका और उससे अपेक्षाओं पर अच्छी चर्चा हुई। शुरुआत ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी के म्यूजिक बैंड से हुई। श्री त्रिपाठी ने हिन्दी, भोजपुरी, फिल्मी गानों के साथ सूफी और लोक गीतों का शानदार समां बांधा। जलपान के बाद व्याख्यान और सम्मान खंड की शुरुआत हुई। भड़ास के संपादक यशवंत सिंह ने भिन्न क्षेत्रों में अलग तरह के काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया।

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पत्रकारिता छोड़कर उद्यमिता के क्षेत्र में सफलतापूर्वक काम करने वाले अखबार कर्मचारियों के वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने के लिए लड़ने वाले योद्धाओं या “वन मैन आर्मी” और समाज सेवा से लेकर आईटीआई आदि के क्षेत्र में देश भर में अकेले मिशन भाव से काम करने वाले कई लोगों को सम्मानित किया और दूर-दराज के आए इन लोगों को सम्मानित करते हुए यशवंत ने कहा वह इसे अपना सम्मान मानते हैं। इन लोगों और इनके काम के बारे में भड़ास पर पहले प्रकाशित किया जा चुका है। आज उसका ऑडियो विजुअल प्रेजेंटेशन भी किया जाना था जो समय कम होने के कारण नहीं हो सका लेकिन जल्द ही उसे भी भड़ास पर अपलोड किया जाएगा।

यशवंत की इन अनूठी विशेषताओं को देखते हुए मौजूद वक्ताओं में एक, पत्रकार एवं ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एनके सिंह ने प्रस्ताव किया कि यशवंत का भी सम्मान किया जाना चाहिए और एक गुलदस्ता देकर उन्हें भी सम्मानित किया गया। सबसे पहले मीडिया और काला धन पर भारतीय राजस्व सेवा के चर्चित अधिकारी एसके (संजय कुमार) श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे और अपना अनुभव बताया। इसमें उन्होंने बताया कि एक मीडिया संस्थान (उन्होंने नाम नहीं लिया पर यशवंत ने बाद में साफ कर दिया कि बात एनडीटीवी की हो रही थी) में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कथित धन के निवेश और इससे संबंधित जांच के कारण उन्हें किन परेशानियों से जूझना पड़ा। इसमें तबादले के साथ-साथ छह बार मुअत्तल करना, नौकरी से बर्खास्त करने के प्रावधान का उपयोग किया जाना और अंत में पागल घोषित करके मानसिक अस्पताल में दाखिल करा दिया जाना शामिल है। उन्होंने बताया कि वे इन सबसे कैसे लड़े और कैसे मीडिया तथा सत्ता की ताकत का दुरुपयोग किया गया।

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आयोजन के मुख्य वक्ता आईआरएस संजय कुमार श्रीवास्तव.

एसके श्रीवास्तव को तन्मय होकर सुनते लोग.

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मीडिया के भड़ासी साथियों ने इसे गौर से सुना, ताली बजाई और चिदंबरम-प्रणय राय को शेम-शेम कहकर एसके श्रीवास्तव का हौसला बढ़ाया। एनडीटीवी में पी चिदंबरम के निवेश की चर्चा, काले धन और वित्तीय अनियमितताओं की चर्चा होती रहती है। एनडीटीवी ने इस पर स्पष्टीकरण भी दिए हैं। पर राजस्व सेवा के अधिकारी ने जो कहा और उनके साथ जो सलूक हुआ वह, गडबड़ी नहीं होती तो आमतौर पर नहीं किया जाता। श्री श्रीवास्तव ने इस पर कहा कि आमतौर पर कारोबारी सरकारी अफसर से झगड़ा नहीं करते और ले-दे कर निपटाने के अलावा ऊपर अपील आदि का सहारा लेते हैं लेकिन वे किसी से झगड़ा नहीं करते। नाक का सवाल नहीं बनाते। उन्होंने नाम नहीं लिया और कहा कि चूंकि यह मामला एक बड़े पत्रकार से जुड़ा था इसलिए उसने नाक का सवाल बना लिया और इसमें सरकार ने मीडिया संस्थान का भरपूर साथ दिया। श्रोताओं में ज्यादातर मीडिया के लोग थे इसलिए उनके नाम न लेने के बावजूद समझ रहे थे, जानते थे कि बात किसकी हो रही है।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने पत्रकारिता की आजादी पर अपने विचार रखे और कहा कि आजादी लगातार कम हो रही है और बहुत कम हो गई है। उन्होंने कुछ उदाहरण दिए और यह तय करना श्रोताओं पर छोड़ दिया कि आजादी कितनी कम हुई है या है ही नहीं। इस क्रम में उन्होंने कहा कि पहले अखबार मालिकों का दूसरा धंधा नहीं होता था और अब दूसरे धंधे वालों के ही अखबार हैं। किसी का नाम लिए बगैर कहा कि संपादक अगर संपादन नहीं कर रहे हैं और उनका नाम संपादक के रूप में जा रहा है तो वे अपने नाम का उपयोग करने दे रहे हैं। और यह भी गलत है। ओमथानवी ने कहा कि रिलायंस जियो के विज्ञापन में प्रधानमंत्री की फोटो का उपयोग किया जाना गलत है पर पत्रकार का नाम संपादक के रूप में जाए और वह संपादक के अलावा दूसरे काम भी करे तो यह भी गलत है।

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पत्रकार एवं ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एनके सिंह ने मीडिया की स्थिति बताते हुए यह यकीन दिलाने की कोशिश की कि स्थिति उतनी बुरी नहीं है जितनी हम समझते हैं या बना दी गई है। इस क्रम में उन्होंने कहा कि भड़ास 4 मीडिया सिर्फ नकारात्मक खबरें प्रकाशित करता है और उसे झेलते हुए आठ साल हो गए। पता नहीं कब तक झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भड़ास को सकारात्मक खबरें भी देना चाहिए। भावी पत्रकारों के लिए जानकारी देना चाहिए आदि। इस क्रम में उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन लगातार कई दिनों तक कवर किया गया था और वह सरकार के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि फिल्मी और दूसरी खबरें कम हुई हैं राजनीतिक खबरों का प्रसारण बढ़ा है आदि।

उन्होंने कहा कि समाज को जानकारी देने और राय बनाने में सहायता करने के लिए चर्चा वाले कार्यक्रम कराए जाते हैं। वह पूरी तरह सफल या अच्छा नहीं है पर उसका मकसद अच्छा है। उन्होंने यहा भी कहा कि टीवी समाज को काफी कुछ सकारात्मक दे रहा है जिसकी चर्चा नहीं होती है औऱ सिर्फ नकारात्मक बातें बताई जाती हैं। उन्होने यह भी बताया कि नए उम्मीदवार कैसे आते हैं और उन्हीं में से काम के लोगों को चुनना पड़ता है। उन्होंने कहा कि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा खेती पर आश्रित है लेकिन उसपर खबरें नहीं होती हैं। इसपर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

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समकालीन तीसरी दुनिया के संपादक आनंद स्वरूप वर्मा ने श्री सिंह से असहमति जताई और कहा कि स्थिति निराशाजनक है। लगातार खराब हो रही है। मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है पर अपने उद्देश्य में बिल्कुल असफल है। उसका काम तीन अन्य स्तंभों पर नजर रखना है पर वह ऐसी स्थिति में पहुंच गया है कि ठीक होने की संभावना नहीं लगती। उन्होंने बताया कि वे 50 वर्षों से सिर्फ पत्रकारिता कर रहे हैं और उनके सामने पत्रकारिता सीखने वाले अब कई गुना पैसे कमाने लगे हैं। उनके अपने खर्चे हैं। उन्हें किस्तें चुकानी हैं। इसलिए वे कमाएंगे, कमा रहे हैं।

अपनी पत्रिका के बारे में उन्होंने बताया कि कई बार उसका प्रकाशन धनाभाव के कारण रोकना पड़ा है। पर 2010 से नियमित प्रकाशित हो रहा है और अब पाठक ही उसका खर्च देते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया अपना काम ठीक नहीं कर रहा है तो उसपर नजर रखने के लिए एक पांचवां स्तंभ बनाना चाहिए। जो मीडिया को उसकी गलतियां बताए। एनके सिंह की बात काटते हुए उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन को लगातार कवर किया जाना तय योजना का हिस्सा था।

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व्याख्यान के बाद अंतिम सत्र में कृष्ण कल्पित ने शराबी की सूक्तियां शीर्षक के तहत कविता पाठ किया। लोगों ने इसका भी खूब आनंद लिया। आखिर में जेएनयू से पढ़े, कई किस्म के प्रयोग कर चुके प्रत्यूष पुष्कर ने मीडिया और आध्यात्म पर अपनी बात रखी औऱ जीवन को एक यात्रा कहा। आध्यात्म मतलब बताया कि वह जो आपको आजाद करे किसी भी बंधन में न रखे, उससे मुक्त करे को कहा। उन्हें बेहद मौलिक बातें रखीं और लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट. ANUVAAD COMMUNICATION के हेड Sanjaya Kumar Singh से संपर्क 9810143426 के जरिए किया जा सकता है.

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कार्यक्रम का संचालन करते यशवंत और यशवंत को पुरस्कृत करते मंचासीन विशिष्ट जन व दूसरे प्रदेशों से आए पत्रकार साथी.

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2 Comments

2 Comments

  1. Arif beg

    September 13, 2016 at 7:43 pm

    Bahut hi shandaar karyakram raha,kafi kuch sikhne wa kafi kuch jaanne ko mila.thanx phakkad baba

  2. Sanjay Agnihotri

    March 14, 2019 at 2:25 pm

    इनकम टैक्स कमिश्नर संजय कुमार श्रीवास्तव, सरकारी तन्त्र/निकाय का एक ऐसा सिपाही जो निकाय के साथ तो काम करता है लेकिन उसका हिस्सा बन कर नहीं । दुनियाँ जहान की गाली खा कर भी वो टस से मस नहीं होता । He knows how to make a difference in this world.
    दुनियां इन जैसों से चल रही है न कि रोज पेट का दोज़ख भरने और सबेरे खाली कर…
    भारत के इस सपूत को मेरा हार्दिक अभिनन्दन ।
    संजय अग्निहोत्री
    उपन्यासकर

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