मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास की जंग : लीगल नोटिस भेजने के बाद अब याचिका दायर

Yashwant Singh : पिछले कुछ हफ्तों से सांस लेने की फुर्सत नहीं. वजह. प्रिंट मीडिया के कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उनका हक दिलाने के लिए भड़ास की पहल पर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया में इनवाल्व होना. सैकड़ों साथियों ने गोपनीय और दर्जनों साथियों ने खुलकर मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास के साथ सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला लिया है. सभी ने छह छह हजार रुपये जमा किए हैं. 31 जनवरी को दर्जनों पत्रकार साथी दिल्ली आए और एडवोकेट उमेश शर्मा के बाराखंभा रोड स्थित न्यू दिल्ली हाउस के चेंबर में उपस्थित होकर अपनी अपनी याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने के बाद लौट गए. इन साथियों के बीच आपस में परिचय हुआ और मजबूती से लड़ने का संकल्प लिया गया.

(भड़ास की पहल पर मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर शुरू हुई लड़ाई के तहत मीडिया हाउसों के मालिकों को लीगल नोटिस भेज दिया गया. दैनिक भास्कर के मालिकों को भेजे गए लीगल नोटिस का एक अंश यहां देख पढ़ सकते हैं)

ताजी सूचना ये है कि लीगल नोटिस संबंधित मीडिया संस्थानों को भेजे जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की प्रक्रिया चल रही है. पांच और छह फरवरी को पूरे दिन यह प्रक्रिया चली और चलेगी. बचा-खुचा काम सात फरवरी को पूरा हो जाएगा जो कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में याचिका दायर करने का अंतिम दिन है. जितने भी साथियों ने खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने के लिए आवेदन किया है, उन सबके नाम पता संस्थान आदि को चेक करते हुए उनकी एक फाइल बनाकर अपडेट रखने का काम हम लोग करते रहे. कोई संस्थान नोटिस भेजने और याचिका में छूट न जाए इसलिए हर एक के अथारिटी लेटर व आवेदन को बार-बार चेक करते रहे. उधर, एडवोकेट उमेश शर्मा लीगल नोटिस बनाने, भेजने से लेकर याचिका तैयार करने में दिन रात जुटे रहे. अपने सहायक यशपाल के साथ एडवोकेट उमेश शर्मा ने दिन के अलावा रात-रात भर काम किया. परसों रात 11 बजे मैं खुद बाराखंभा रोड से लौटा क्योंकि गोपनीय रूप से लड़ने वाले लोगों की याचिका पर मुझे साइन करना था, साथ ही सभी याचिकाओं पर संबंधित संस्थानों के मालिकों के नाम-पते सही हों, यह चेक करना था.

इस तरह कड़ी मेहनत रंग लाने लगी है. नई खबर ये है कि कई पत्रकार साथियों ने अलग-अलग वकीलों के जरिए भी अपने अपने संस्थानों के खिलाफ खुलकर याचिकाएं दायर की हैं. जो याचिकाएं पहले से दायर हो चुकी हैं, उन पर आज सुनवाई है. जो याचिकाएं कल और आज में दायर हो रही हैं या दायर की जा चुकी हैं, उनकी लिस्टिंग आदि की प्रक्रिया होने के बाद पता चलेगा कि सुनवाई की तारीख कब है. यह संभावना जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़ी सारी याचिकाओं को एक साथ मिलाकर सुनवाई करने का फैसला लिया जाएगा ताकि सुनवाई में देरी न हो, सुप्रीम कोर्ट का भी टाइम बचे और मीडिया मालिकों को अलग-अलग झूठ बोलने गढ़ने का मौका न मिल सके. इस तरह सभी पीड़ितों के साथ न्याय होने की पूरी संभावना है.

आज यानि छह फरवरी को मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई केसों की सुनवाई है.. आज सुप्रीम कोर्ट में अखबार मालिकों के खिलाफ अवमानना के तीन और मामले सुनवाई के लिए आ रहे हैं. इन मामलों की सुनवाई माननीय न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्‍यायमूर्ति अरूण मिश्रा की खंडपीठ वाली अदालत संख्‍या 7 में होगी. केस नंबर 33, 34 और 38 ऑफ 2015 को सुनवाई का आइटम नंबर 10 है. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डिटेल इस प्रकार है…

COURT NO. 7
HON’BLE MR. JUSTICE RANJAN GOGOI
HON’BLE MR. JUSTICE ARUN MISHRA
PART A – MISCELLANEOUS MATTERS
10. CONMT.PET.(C) NO. 33/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
1ST LISTING
LAKSHMAN RAUT AND ORS
VS.
SHOBNA BHARTI AND ORS
(WITH OFFICE REPORT)
MR. AVIJIT
BHATTACHARJEE
WITH
CONMT.PET.(C) NO. 34/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
JAGJEET RANA
VS.
SANJAY GUPTA AND ANR
(OFFICE REPORT)
MR. DINESH KUMAR GARG
CONMT.PET.(C) NO. 38/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
RAJIV RANJAN SINHA & ANR.
VS.
CHAIRMAN D.B. CORP. LTD. & ANR.
(OFFICE REPORT)
DR. KAILASH CHAND

ज्ञात हो कि 6 फरवरी को हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की मालकिन याोभना भरतिया के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने के मामले की सुनवाई है. भरतिया के खिलाफ कोर्ट नंबर 7 में आइटम नंबर 10 के तहत सुनवाई होगी. इसका केस नंबर 33 है. इसके शिकायतकर्ता लक्ष्‍मण राउत एवं अन्‍य हैं. हिमांशु शर्मा ने फेसबुक पर लिखा है: ”There are 6 fresh Contempt petitions filed in Supream Court of india. Three are against Daink Jagran with Diary No. 2515/15, 2795/15 and 3370/15. Two are against Dainik Bhaskar DN. 3633/15 and 3634/15 . And one against Patrika DN 2643/15. I hope many more to come in few days.”

कुल मिलाकर कहने का आशय ये है कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अखबारों के मालिक बुरी तरह घिर गए हैं और इन्हें अब दाएं बाएं करके निकल लेने का मौका नहीं मिलने वाला. रही सही कसर भड़ास ने पूरी कर दी है. खासकर गोपनीय लोगों की लड़ाई को लड़ने का तरीका इजाद कर भड़ास ने मीडिया मालिकों को बुरी तरह बैकफुट पर ला दिया है. इस पूरे अभियान के लिए तारीफ के जो असली हकदार हैं वो हैं एडवोकेट उमेश शर्मा. इन्होंने यूं ही बातचीत के दौरान एक रोज एक झटके में यह फैसला ले लिया कि वह बेहद कम दाम पर देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ेंगे. उनके फैसला लेते ही भड़ास ने इस पहल को हर मीडियाकर्मी तक पहुंचाने का फैसला लिया और इस तरह हम सब आप मिल जुल कर अभियान में लग गए, जुट गए.  

(मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा ने दिन-रात एक कर लीगल नोटिस भिजवाने के बाद अब याचिका दायर करा दिया है. उमेश शर्मा का कहना है कि उन्हें पीड़ित मीडिया कर्मियों को जीत दिलाने और मालिकों को हारत-झुकता देखने में खुशी होगी, ताकि एक मिसाल कायम हो सके कि जो न्याय के लिए लड़ेगा, वह जीतेगा और बेइमानी करने वाले अंततः हारेंगे.)

एक बात और कहना चाहूंगा. वो ये कि जिन लोगों ने अभी तक खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें भी साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. एडवोकेट उमेश शर्मा जी ने आश्वासन दिया है कि जो साथी बच गए हैं या सोचते ही रह गए हैं, उनके लिए भी रास्ता निकाला जाएगा. इस बारे में सूचना जल्द दी जाएगी. इसलिए जो साथी जुड़ चुके हैं, वो तो प्रसन्न रहें ही, जो नहीं जुड़ पाए हैं, वो निराश न हों, उनके लिए एक नया फारमेट तैयार किया जा रहा है, जिसकी सूचना जल्द भड़ास के माध्यम से दी जाएगी.

आखिर में… मजीठिया के लिए भड़ास की लड़ाई पर एक साथी ने भड़ास के पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए जो मेल भेजा है, उसे नीचे दिया जा रहा है. इस उदगार में नोटिस मिलने वाला है, का जो जिक्र किया गया है, उसको लेकर यह बता दूं कि इन दोनों अखबारों के मालिकों समेत ज्यादातर मीडिया मालिकों को लीगल नोटिस जा चुका है और याचिका दायर लगभग की जा चुकी है… पढ़िए, भड़ास के साथ मजीठिया के लिए लड़ रहे एक साथी के उदगार…


” हल्ला बोल : जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, बारां, बूंदी, झालावाड़ के पत्रकार हुए एकजुट… अब क्या बतायें. जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि राजस्थान के इन खबरदारों के अंदर कभी खुद के लिये भी कोई इंकलाब आएगा। लेकिन जो खो गया था या मर गया था, वो जिंदा हो गया है। देर से ही सही, दोनों अखबारों के पत्रकारों ने अबकी बार हल्ला बोल मचा दिया है। जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, बारां, बूंदी, झालावाड़ से सूचना है कि राजस्थान पत्रिका व दैनिक भास्कर के पत्रकार भाईयों ने प्रबंधन के खिलाफ एकजुट होकर मजीठिया आयोग की सिफारिशों को लागू करने की एकजुट मांग को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में गुहार लगा दी है। जल्द ही मालिकों को नोटिस पर नोटिस मिलने वाले है। इस गुहार के बाद प्रबंधन का प्रकोप अब किस रूप मे और कैसे निकलता है, ये देखना होगा। इसके इंतजार में वे तमाम पत्रकार कैसे हल्ला बोल करते हैं, ये उनके ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेवारी है क्योंकि अब सबसे बड़ा सवाल उनकी एकजुटता तोड़ने के लिये किया जायेगा। पत्रकारों का बढा हुआ कदम अब आगे और कितना पुख्ता होगा यह सब भविष्य की मुट्ठी में कैद है।

जो हाथों में कलम और कंधो पे आँखे रखते है
राजनीति कि भट्टी में जो गर्म सलाखें रखते है
ऐसे देश के वीरों को में शत शत शीश झुकाता हूँ
आंसू भी लिखना चाहूँ तो अंगारे लिख जाता हूँ

अखबारों के दफ्तरों की ऊँची अट्टालिकाओं पे तुमने ये जो इंकलाब की झंडियां लगाई है, ये बड़े हिम्मत की कोशिश है, इन कोशिशों को बनाये रखना। उपर वाला करे, इन्साफ तुम्हारे हक में हो…। यशवंत सिंह, आपके नाम का इस्तमाल करने की गुस्ताखी कर रहा हूं… माफ़ करना बड़े भाई… लेकिन आज आपकी वजह से हमें हिम्मत है…. अब हम आपके नाम को जिंदा रखेंगे…. अखबार के मालिकों, अब करो मुकाबला… अब यहां का हर पत्रकार यशवंत सिंह है… ”


भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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Comments on “मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास की जंग : लीगल नोटिस भेजने के बाद अब याचिका दायर

  • Divya Bhaskar + Dainik Bhaskar ke khilaf Gujarat High Court me 4 case Dakhil Ho gaye he, karib 125 log (pakka) high court me case dakhil karva chuke he- Gujarat Divya Bhaskar management charo taraf bhagam bhag karke pareshan ho gayee he……..jai ho…

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  • सुप्रीम कोर्ट में केस जाते ही भास्कर के कोटा ऑफिस में प्रबंधन ने कर्मचारियों में फूट डालना और धमकाना शुरू कर दिया है।

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  • मजीठीया से बचने के लिए ड़राने धमकाने,पटाने,नकली महोब्बत करने के सिवाय मालिकों के पास अब कोई रास्ता ही नहीं बचा है और ये सभी दावपेच अहमदाबाद के भास्कर युनिट में असफल हो चुके है उसका उदाहरण कुछ समय पहेले प्रशांत दयाल वाले केस में कंपनी ने घुटने टेक कर कोर्ट के बाहर समझौता कर के पुरी टीम को काफी बड़ी रकम का भुगतान कीया। 13-14 लोगों का एक और ग्रुप है जीसने कोर्ट में केस कर रखा है उनके साथ भी यह सब हो चुका है और अाज भी कंपनी में कार्यरत है ,तो कंपनी के हथकंड़े से विचलीत न होकर कोर्ट केस करें और अपना हक्क़ मांगे। लड़ाई तो लड़नी ही पड़ेगी ।

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  • purushottam asnora says:

    bhadas ki muhim ka bahut bahut swagat, sampadak ji kripya avgat kara sakai to kripa hogi ki majethiya mamle mai Amar Ujala ki kya sthiti hai.

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