जी मीडिया का कारनामा : स्टिंग किया कोबरा पोस्ट ने, लीगल नोटिस भेजा भड़ास को

Yashwant Singh : ये जी ग्रुप वाले पूरे मूर्ख हैं क्या? स्टिंग किया कोबरा पोस्ट ने और लीगल नोटिस भेज रहे हैं भड़ास को. लगता है इनका कपार पूरा का पूरा फिर गया है. अरे भाई हम तो साभार छापे हैं भड़ास पर. मूल कंटेंट तो कोबरा पोस्ट का है. फिर काहें चले आए धमकाने… Continue reading

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पत्रकारों की तुलना कुत्ते से की तो अर्पण जैन ‘अविचल’ ने विधायक को भेजा 25 लाख का नोटिस

इंदौर : सरदारपुर के भाजपा विधायक वैलसिंग भूरिया को इंदौर हाई कोर्ट के वकील के माध्यम से इंदौर के पत्रकार अर्पण जैन ‘अविचल’ ने 25 लाख का नोटिस भेजा है। ज्ञात हो कि 20 सितम्बर को भूरिया ने सरदारपुर में आयोजित खंड स्तरीय कृषक सम्मेलन में मंच से पत्रकारों को अपशब्द कहे थे। उन्होंने पत्रकारों की तुलना कुत्ते से की थी। इससे आहत होकर पत्रकार अर्पण जैन ‘अविचल’ ने 25 लाख का नोटिस भेजा है.

नोटिस की एक कॉपी देखें-पढ़ें…

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जिस पत्रकार ने देह व्यापार का खुलासा किया, दैनिक जागरण ने उसे ब्लैकमेलर बता दिया… पीड़ित ने भेजा लीगल नोटिस

Ranjeet Yadav : मित्रों दैनिक जागरण के प्रधान संपादक / स्थानीय संपादक को मैंने लीगल नोटिस भेज दिया है. 15 दिनों के अंदर गलत ख़बर पर खेद प्रकाशित नही करेंगे तो मानहानि का मामला कोर्ट में किया जाएगा. गोरखपुर में बीते दिनों मैंने एक देह व्यापार को लेकर पोस्ट डाली थी. उस प्रकरण को मैंने बड़ी गंभीरता से उठाया था जिसे गोरखपुर पुलिस ने संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही की और सभी अखबारों ने इस प्रकरण पर खबर लिखी. किन्तु दैनिक जागरण ने अपने खबर में मुझे ही ब्लैकमेलर बना दिया. उनकी खबर में क्या लिखा गया है, मैं बताता हूँ. साथ ही, मेरे मन मे उठे सवालों को भी आप जानिए.

(1) अखबार लिखता है कि सोशल नेटवर्क पर ये प्रकरण कई दिनों से चल रहा था।

-लेखक साहब, आखिर चल रहा था तो आपने संज्ञान में लेकर ख़बर क्यों नहीं लिखी… डेली अखबार है आपका.. समाज को जागरूक करने का दायित्व बनता है…

(2) अखबार ने लिखा है कि वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया गया।

-आखिर वीडियो जब हमने डाली ही नहीं तो आपने कहाँ से वीडियो का जिक्र किया… अगर वीडियो डाली गई तो कब, कहाँ कैसे देखी आपने.. सोशल नेटवर्क की लिंक का जिक्रक्यों नहीं किया… उसी आधार पर ब्लैकमेलर से बात करनी चाहिए थी…

(3) ख़बर में लिखा गया है कि होटल के कर्मचारी ने बताया कि वे हमें ब्लैकमेल कर रहे थे।

-भाई आपसे एक अपराधी कहता है कि वीडियो बनाने वाले ने हमें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया तो आपने जरूर ब्लैकमेल करने वाले के खिलाफ पुख्ता सबूत लिए होंगे.. फिर आपने उन सबूतों का जिक्र अपने ख़बर में क्यों नहीं किया।

(4) अखबार ने निर्णय कर दिया कि ब्लेकमेलर पोस्ट डालने वाला ही है…

-भाई तब भी आपको मेरा पक्ष लेना बनता है… आपने एक पक्ष की ही ख़बर क्यों लिखी जबकि आप लिख रहे हैं कि मामला कई दिनों से सोशल मीडिया पर चल रहा है.. तब तो आपको मेरे बारे में विधिवत जानकारी थी क्योंकि लगातार आप मेरी पोस्ट को वाच कर रहे थे।

सबसे बड़ा सवाल —

मित्रों, पुलिस चौकी महज 200 मीटर की दूरी पर है और अखबारों ने पुलिस की कार्य प्रणाली पर अंगुली उठाई… फिर आपके अख़बार के कालम से ये विशेष हिस्सा कैसे छूट गया और जो खबर का हिस्सा ही नहीं बना। मेरे जैसे व्यक्ति ने जान जोखिम में डाल कर इतना बड़ा रिस्क इस शहर के परिवारों के लिए उठाया, फिर आपके अखबार में मेरे लिए स्थान क्यों नहीं? मित्रों ये सब प्लानिंग कर मुझे बदनाम करके होटल मालिकों के हृदय में स्थान बनाने का एक प्रयास था? हो भी सकता है कि इस संस्थान के ज़िम्मेदारों द्वारा मेरे खिलाफ कोई बड़ा षड्यंत्र रच कर फंसाया जाए या फिर हत्या भी कराई जा सकती है… जैसा कि प्रतीत होता है.. अगर कभी कोई अप्रिय घटना मेरे साथ होती है तो इसके प्रथम जिम्मेदार यह अखबार होगा.. उसके बाद कोई अन्य होगा.. इस पूरे प्रकरण के गवाह आप सभी हैं।

गोरखपुर के युवा पत्रकार रंजीत यादव की एफबी वॉल से.

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अखंड गहमरी ने अमर उजाला के स्थानीय संवाददाता से दुखी होकर प्रधान संपादक को भेजा लीगल नोटिस

हमारे गहमर में एक समाचार पत्र है अमर उजाला जिसके स्‍थानीय संवाददाता को कार्यक्रम में बुलाने के लिए जो मानक है वह मानक मैं पूरा नहीं कर पाता। इस लिए वह न तो हमारे कार्यक्रम की अग्रिम सूचना छापते हैं और न तो दो दिनो तक कार्यक्रम के समाचार। तीसरे दिन न जाने उनको क्‍या मिल जाता है जो आनन फानन में मुझसे बात कर न करके अन्‍य लोगो से व्‍यक्ति विशेष के बारे में सूचना मॉंगते है और मनगढ़त खबर बना कर प्रकाशित कर देते है।

अब इस मनगढ़त समाचार पर अमर उजाला समाचार पत्र के संवाददाता, ब्‍यूरो और संपादक के खिलाफ मानहानि और पेड-न्‍यूज का मुकदमा तो बनता ही है। हमारे संवाददाता महोदय ने पूरे के पूरे कार्यक्रम को बदल दिया… देखें कैसे…

(1) कार्यक्रम गहमर के आशीर्वाद पैलसे में किया गया परन्‍तु श्रीमान जी उसका नाम भूल गये एक जगह तो उन्‍होेनें लिखा ” एक” पैलसे और दूसरी जगह चित्र के नीचे लिख दिया ” गहमर पैलेस”। कम से कम बैनर तो देख लिया होता।

(2) उन्‍होंनेे बड़ी आसानी से मेरे मेहनत पर पानी फेरते हुए कवि सम्‍मेलन को काव्‍य-गोष्‍ठी बना दिया, अब जब श्रीमान जी को काव्‍य सम्‍मेलन या काव्‍य गोष्‍ठी में फर्क नहीं मालूम है तो किसी से पूछ लेना चाहिए था।

(3) उनके अनुसार कार्यक्रम में जो सम्‍मान दिये गये थे वो काव्‍य गोष्‍ठी के बाद तय किये गये थे, जब कि श्रीमान को यह पता नहीं कि मेरे सारे सम्‍मान 9 अगस्‍त 2017 को ही तय किये जा चुके थे, जिसकी सूचना सोशलमीडिया से लेकर समाचार पत्रों को प्रेस नोट के द्वारा दे दिया गया था।

(4) श्रीमान जी को आये हुए अतिथियों के नाम नहीं मिले और जो सम्‍मान न आने के कारण मंच से निरस्‍त कर दिये गये वही नाम उन्‍होनें प्रकाशित कर दिया। जिन्‍हेें सम्‍मान मिला ही नहीं, जो सम्‍मान पाये उनका नाम हवा में।

(5) श्रीमान जी ने रविता पाठक, सुलक्षणा अहलावत, बीना श्रीवास्‍तव, डा0 चेतना उपाध्‍याय, कमला पति गौतम, डा0 ज्‍योति मिश्रा को अलग अलग सम्‍मान दिया जाना लिखा है जबकि इन सभी को साहित्‍य सरोज शिक्षा प्रेरक सम्‍मान दिया गया। यहॉं तक की आरती का सम्‍मान न आने के कारण दिया ही नहीं गया।

(6) भाई साहब ने फोटो में भी लिखा है कि बीना श्रीवास्‍तव को सम्‍मानित करते साहित्‍यकार जबकि फोटो में साफ दिख रहा है कि बीना श्रीवास्‍तव जी को मुख्‍य अतिथि कमल टावरी जी सम्‍मानित कर रहे हैं।

(7) पूरे समाचार में आप कही भी इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाली संस्‍था या आयोजक का नाम और साथ में यह कार्यक्रम कब हुआ उसका पता नहीं।

(8) जो सम्‍मान दिया जा रहा है वह शिक्षक दिवस के अवसर पर दिया गया 5 सितम्‍बर को और जो समाचार की हेडिंग बनी है वह है चार सितम्‍बर की।

(9) 4 सितम्‍बर को आयोजित ” आखिर क्‍यो कटघडे में मीडिया” परिचर्चा के अन्‍य वक्‍ताओं, सभा अध्‍यक्ष, मुख्‍यअतिथि सबके नाम गायब।

और भी बहुत कुछ है जिसकी चर्चा मैंने अपने कोर्ट नोटिस में किया है।

भाई, आपको मुझसे एलर्जी थी तो आप मत छापते मेरा समाचार. मैं आपके चरण तो पखार नहीं रहा था. और न ही आपको किसी डाक्‍टर ने मेरा समाचार छापने को कहा था। और यदि किसी मजबूरी या लालच के आधार पर छाप भी दिया तो सही सही छापना था। क्‍यों गलत सही छाप कर मेरे कार्यक्रम की तौहीन कर दिये। आपको किसने हक दिया था इसका।
अब आप सब खुद समझदार हैं। मैं अधिक बोलूगॉं तो आप सब यही कहेंगे कि मैं बेफजूल की बात कर रहा हूँ।

चलिये मैंने वीडियो रिकार्डिग और फोटो के आधार पर कोर्ट की नोटिस तो दिनांक 08 सितम्‍बर 2017 को प्रधान संपादक के नाम भेज कर कापी टू संपादक, ब्‍यूरो, कर दिया है। आगे देखते हैं क्‍या हेाता है। कुछ हो न हो पर मन को तसल्‍ली तो मिलेगी कि मैंने आवाज उठाई।

अखंड गहमरी

गहमर

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)

akhandgahmari@gmail.com

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ईनाडु इंडिया : पत्रकार को वित्तीय मदद का झूठा दावा करने वाले अधिकारियों की हो रही किरकिरी

११ अगस्त / २०१५ को मेरी जिंदगी में जबरदस्त भूचाल आया। एक नई जिम्मेदारी के साथ सूर्योदय हुआ। राजा सिकंदर भी खाली हाथ आए थे, और खाली हाथ ही दुनिया से पर्दा कर गए। शायद उस रोज़ भी कायनात को मेरे अब्बू का जिंदा रहना नागवार गुज़रा हो! वे फेफड़े के कर्क रोग के चलते इंतकाल फरमा गए। दुनिया का नियम है, जीवन और फिर उसका मृत्यु। कोई अमर नहीं हैं।

अब्बाजान ने तो मरकर कब्र में मलैकुल मौत को जवाब दे दिया। लेकिन ईनाडु डिजिटल के खास तीन अधिकारी (प्रसनजीत रोय-जीएम, अजीज़ अहमद खान-डिआई, मुरलीधर बंदारू-एचआर) ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा। वे लगातार मेरी तमीज का कमीज़ उतारते रहे! मेरी कानूनी नोटिस के जवाब में भी उन्होंने गलत जवाब दिया। आइए एक हकीकत से रूबरू करवाता हूं।

इन अधिकारीगण का कहना है मेरे अब्बू की बीमारी के वक्त उन्होंने मुझे वित्तीय मदद की थी। हद है! इन लोगों को ये​ झूठा दावा करने में जरा भी शर्म नहीं आई। जनाब मैंने तो आप लोगों के सामने कभी अपनी झोली नहीं फैलाई। तो आपको इलहाम कैसे हुआ कि मुझे मदद की जरूरत है! किस माध्यम से आपने​ मुझे भुगतान किया?  

कैश, चेक, डीडी, मनी आर्डर, नेट बैंकिंग, क्रेड़िट कार्ड, पोस्टल आर्डर, बैंक चलन, आंगड़िया पीढ़ी, हवाला या आप तीनों स्वयं पैसों की बोरी मेरे घर उड़ेल गए थे? अगर किया है तो प्रमाण दें। आपकी रहम का नकली बोझ मुझसे उठाया नहीं जा रहा।

पीड़ित कंटेंट एडिटर

ज़हीर भट्टी

नोट : संलग्न प्रति

१. अगस्त २०१५ पगार स्लिप

२. ईनाडु की जवाबी नोटिस का एक हिस्सा

मूल खबर…

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खबर छपने पर पश्चिम बंगाल के सांसद ने रिपोर्टर को भेजा नोटिस

द संडे गार्जियन के संवाददाता कुंदन झा ने एक खबर का प्रकाशन किया. इसके बाद पश्चिम बंगाल के सांसद अभिषेक बनर्जी ने रिपोर्टर को धमकाया कि वो उसके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा करेंगे. अपने कहे पर अमल करते हुए सांसद ने अखबार और रिपोर्टर को कानूनी नोटिस भी भेज दिया है. कुंदन झा का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर की गई खोजबीन और मिली जानकारियों के आधार पर खबर का प्रकाशन किया. पर सांसद ने जिस तरीके से उन्हें धमकाया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है.

नीचे है सांसद द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस की प्रति…

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‘गौ आतंकी’ शीर्षक से कार्यक्रम प्रसारित करने पर इंडिया टुडे ग्रुप को विहिप ने लीगल नोटिस भिजवाया

विश्व हिंदू परिषद ने इंडिया टुडे ग्रुप को एक लीगल नोटिस भिजवाया है. यह नोटिस ‘गौ आतंकी’ नाम से एक कार्यक्रम ‘इंडिया टुडे’ पर प्रसारित करने को लेकर था. लीगल नोटिस में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के जरिए विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल की छवि को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया गया है. लीगल नोटिस की एक कापी सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भी भेज दिया गया है.

लीगल नोटिस की एक प्रति भड़ास के पास भी है, जिसे नीचे दिया जा रहा है….

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चर्चित मैग्जीन ‘इकनामिक एंड पोलिटिकल वीकली’ को गौतम अडानी की तरफ से भिजवाया गया लीगल नोटिस

इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली यानि ईपीडब्ल्यू मैग्जीन के संपादक जाने माने पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता हैं. ईपीडब्ल्यू पत्रिका में 17 जून के अंक में एक स्‍टोरी केंद्र सरकार के वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के खिलाफ छपी. इसमें मंत्रालय द्वारा नियम कायदे बदलकर अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के बारे में विस्तार से बताया गया. Continue reading

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इनाडु डिजिटल के एमडी, जीएम, एचआर और डेस्क इंचार्ज को लीगल नोटिस

सेवा में

१. श्रीमान मैनेजिंग डायरेक्टर
किरन राव

२. श्रीमान जनरल मैनेजर
प्रसनजीत राय

३. श्रीमान डेस्क इंचार्ज
अजीज अहमद खान

५. श्रीमान एग्जीक्यूटिव एचआर​
मुरलीधर बंदारू

एसपी २ बिल्डिंग, फोर्थ फ्लोर
हिंदी डेस्क​, ईनाडु डिजिटल
रामोजी फिल्म सिटी
हैदराबाद
तेलंगाना
५०१५१२

मैं अधिवक्ता मेहुल पी गोंडलिया बीए एलएलबी​ निवासी गांव भेंकरा में तहसील सावरकुंडला जिला अमरेली के और मेरे मुवक्किल भट्टी ज़हीर रुस्तमभाई निवासी ४७, लीमडी चोक, तलीनाका तहसील सावरकुंडला कि सूचना और फरमाइश के मुताबिक उक्त चारों लोगों को नोटिस देकर सूचीत किया जा रहा है कि लीगल नोटिस में मेरे मुवक्किल को काम न करने देने, मानसिक अवसाद, मानसिक प्रताड़ना, मानहानि करने के बिंदु पर प्रकाश डालेंगे…

१. आप चारों पक्षकार ईनाडु डिजिटल नाम की प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। और आप उस कंपनी में न्यूज़ और एडवर्टाइजमेंट जैसे काम​ कर रहे हैं। इस प्राइवेट कंपनी को जरुरत पड़ने पर वैसे कर्मचारियों की भर्ती भी करते हैं, जो आपके लायक हैं।

२. मेरे मुवक्किल गुजरात राज्य के अमरेली जिले के सावरकुंडला तहसील का निवासी है। वे नौकरी की तलाश में आपकी कंपनी में आए और आपकी कंपनी में आपने उनको दिनांक ०१ / ११ / २०१६ के दिन हिंदी डेस्क में कंटेंट एडिटर और सोशल मीडिया के पद पर नियुक्त किया। कंपनी की ओर से हमारे मुवक्किल को मासिक १९०८८ रुपये दिए जा रहे हैैं।

३. मेरे मुवक्किल को आपकी कंपनी में जिस पद पर नियुक्त किया गया है, वे उस पद पर पूरी निष्ठा के साथ प्रमाणिकता से काम करते थे। उसके अलावा संस्थान के हीत में जो भी कार्य था वो भी उन्होंने अच्छे से किया। उसके अलावा मेरे मुवक्किल का कोई कार्य नहीं था वे भी ईमानदारी से किया मेरे मुवक्किल कंपनी के समयानुसार ओवरटाइम भी करके कंपनी का नाम और इमेज पर आंच न आए इसलिए दिन रात काम करते रहे।

४. बावजूद दिनांक ०७/०५/२०१७ के दिन मेरे मुवक्किल डी१ शिफ्ट में काम कर रहे थे। उस दिन कई सहकर्मियों का साप्ताहिक अवकाश होता है। मैनेजमेंट की गाइडलाइंस पर हमेशा हमारे मुवक्किल सिखाए गए कार्य अनुसार काम करते हैं। लेकिन उसी दिन मनोरंजन और फिचर न्युज की खबरें फेसबुक के सभी स्टेट पेज पर शेयर होनी है इस बात की जानकारी न तो शिफ्ट इंचार्ज, डेस्क इंचार्ज,जनरल मैनेजर ने बताई। जिस कारण वह कार्य नहीं हो सका। डेस्क के बीच कम्युनिकेशन गैप के कारण वह सूचना मुझ तक नहीं पहुंच पाई। जिस सूचना को आपने मेरे मुवक्किल को बताया ही नहीं वो काम करने का उनको कैसे पता चलेगा? ऐसी परिस्थितियों​ में हमारे मुवक्किल के बेस्ट काम करने के बावजूद उनके काम कि कंपनी के किसी भी कर्मीने दरकार नहीं की। उल्टा उसी दिन करीब ३:३० या ४:३० बजे हिंदी डेस्क के लैंडलाइन पर जनरल मैनेजर​ प्रसनजीत राय का फोन आता है और हमारे मुवक्किल को अमर्यादित शब्द सुनाएं, और कहा कि नहीं कर सकते हो घर चले जाओ। उनके इस व्यवहार से मेरे मुवक्किल कि मानहानि हुई और मानसिक प्रताड़ित​ करनेेे के कारण वे गहरेेे मानसिक अवसाद में चले गए हैं। जबकि मेरे मुवक्किल का कोई दोष नहीं था।

५. इससे पहले भी मेरे मुवक्किल के साथ कई बार प्रसनजीत रोय और अज़ीज़ अहमद खान बेअदबी कि है, लेकिन उन्होंने उस समय नजरअंदाज कीया। उस समय से ही मेरे मुवक्किल कि मानसिक स्थिति खराब हो न लगी। जिससे उसका पूरा परिवार तनाव में है। आप किसी को काम करने के लिए नियुक्त करते हैं या ज़लील करने के लिए रखते हैं?

६.मेरे मुवक्किल को काम नहीं करने दिया जा रहा। उनका CMS भी षड्यंत्र कर बंद कर दिया गया जिसका स्क्रीन शॉट उनके मेल पर उपलब्ध है

७. आपने मेरे मुवक्किल कि मानहानि क्यों​ की?

८. इस पूरे घटनाक्रम​ के बाद मेरे मुवक्किल मानसिक रुप से गहरे सदमे में है। और सोच रहे हैं कि मेरा कोई दोष नहीं होने के कारण ऐसा क्यों हुआ? सदर इस बाबत मेरे मुवक्किल​ मानसिक रुप से टूट चुके हैं। इस कारण उन्होंने एग्जीक्यूटिव एचआर और ग्रुप एडिटर को लिखित में सूचित किया और सुझाव मांगा कि मेरा​ क्या दोष है। मेरे साथ इस तरह का बर्ताव क्यों किया जा रहा है। तो एचआर ने मुझे नौकरी से निकाल दिया। हमारे मुवक्किल ने कहा कि मेरी कोई गलती है तो इस संबंध में मुझे कुछ कहने का मौका दीजिए। लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ और हमारे मुवक्किल का आईकार्ड जबरन ले लिया गया और इस्तीफा देने के लिए मानसिक दबाव देने लगे।

९. इस संबंध में मेरे मुवक्किल ने चेयरमेन, मैनेजिंग डायरेक्टर, एचआर वाइस प्रेसिडेंट तक को चिट्ठी लिखी हैं। लेकिन किसी ने अब तक उनके वाजिब सवालोंं का प्रत्युत्तर देने की​ जहमत नहींं उठाई हैं। पूरा मैनेजमेंट एकतरफा होकर काम कर रहा है।

१०. मानहानि, काम न करने देना, जनरल मैनेजर डेस्क इंचार्ज, एचआर का तानाशाही भरा रवैया इस संस्थान के लोगों कि विशेषता है!

११. इसके अलावा भी मुझे एक दो तरह से डेस्क इंचार्ज के साथ-साथ मैनेजमेंट द्वारा प्रताड़ित कीया गया। जिस संबंध में मैं आने वाले समय में उचित अथॉरिटी से संपर्क करने जा रहा हूं।

१२. इस घटना के कारण मेरे मुवक्किल मानसिक रुप से खूब पीड़ित, तनाव में हैं। मेरे मुवक्किल को आपने अपनी कंपनी में रखा लेकिन किसी के गलतफहमी के कारण आपने उनको निकाल दिया। परंतु हकीकत में मेरे मुवक्किल का कोई दोष नहीं है। आपने समस्या का निवारण किए बिना ही यह कदम उठा लिया है। जिस कारण हमारे मुवक्किल मानसिक रूप से अस्वस्थ है।
 

१३. आपने हमारे​ मुवक्किल को जब नौकरी से निलंबित किया तब आपके द्वारा लिखित मैं कोई जाानकारी​ नहीं दी गई। और न ही नियम के तहत कार्रवाई हुई। जब आपने काम पर रखा तो कंपनी द्वारा उनको एक कंफर्मेशन लेटर देकर नौकरी में रखा। आज दिन तक उनको टर्मिनेशन लेटर नहीं दिया है। जिसका मतलब है कि हमारे मुवक्किल को षड्यंत्र से आपकी कंपनी से निलंबित कर दिया है। उनका अपराध क्या है? और न ही ऐसा कोई कारण कि आप उसे निकाल दें। यह एक मात्र हमारे मुवक्किल के प्रति आपका और अपने कर्मचारियों का पूर्वाग्रह और षड्यंत्र है​। मेरे मुवक्किल का आप मानसिक शोषण करना चाहते हैं।

१४. मेरे मुवक्किल से आईकार्ड ले लेने के लिए इन लोगों ने दूर-दूर से गार्ड को भी बुलवा लिया था अगर वे आईकार्ड नहीं देते तो यह लोग उनके​ साथ मारपीट भी कर सकते थे। डर के मारे मुवक्किल ने आईकार्ड दे दिया और मुश्किल से वहां से भाग निकले। क्योंकि अगर वे ऐसा नहीं करते तो यह लोग उनके साथ कुछ भी कर सकते थे।

१५. १०/५/१७ को ये लोग मेरे मुवक्किल को बार-बार खोज रहे थे। चूंकि ऑफिस शहर से दूर ऐसी जगह लोकेटेड है कि वे पुलिस को भी इन्फॉर्म भी नहीं कर सकते थे। आप किसी को काम करने के लिए रखते हैं या बंधक बनाने?

१६. मेरे​ मुवक्किल को इस बात का खेद है कि ईनाडु भी बाकी संस्थानों की तरह उस रास्ते चल पड़ा है।

१७. ऑफिस में किस तरीके की तानाशाही फैली है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि आप फोन पर बात नहीं कर सकते, डेस्क पर किसी मिल नहीं सकते, वॉटररूम में नहीं जा सकते, नाश्ता करके १० मिनट में लौटना शामिल है।

१८. बार-बार मेरे मुवक्किल को एक्सट्रा रुकने के लिए धमकाया जाता था। प्रताड़ना के ५०० तरीके​ होते हैं। इनमें से ये भी उनका तरीका है।

१९. किसी भी कर्मचारी को कैसे प्रताड़ित करना है ? ये सीखना है तो कोई ईनाडु से सीख सकता है!

२०. लगातार कई लोगों के साथ इनका व्यवहार ऐसा ही रहा है। जिसमें सीनियर से लेकर जूनियर तक शामिल है। मेरे मुवक्किल तो आत्म सम्मान के साथ जीने वाले हैं, जिस कारण वह गहरे मानसिक अवसाद में चले गए हैं।

२१. आपको आगाह किया जाता है कि क्यों ना आपको खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूं?

२२. कर्मचारियों की शिफ्ट भी इस तरीके से लगाई जाती है जिससे वे बीमार पड़े। इसके चलते एक कर्मी की मौत भी हो चुकी है।

२३. एचआर के लोग कातिलाना तरीके से मुझसे आईकार्ड मांगते हैं। इसके दो दिन बाद एचआर अनुराग कौशिक मेरे मुवक्किल को रिजाइन न देने की बात करते हैं। मेरे मुवक्किल से मुरलीधर​ बंदारु ने रिजाइन मांगा। बताइए आखिर किस तरह का षड्यंत्र किया जा रहा है। इस संबंध में जरूरी चीजें मैं आपके सामने रख सकता हूं।

२४.मुवक्किल ने बताया कि ये लोग मानसिक दबाव देकर उनके पर्सनल ईमेल और पर्सनल facebook का भी ऑफिसियल​ इस्तेमाल करवाते हैं। बता दें कि कायदे से हर संस्थान में हर व्यक्ति का ऑफिसियल मेल बनता है।

२५. बार-बार डेस्क इंचार्ज किसी की पर्सनल लाइफ में हस्तक्षेप करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं! उनको यह अधिकार किसने दिया?

२६. डेस्क इंचार्ज पीठ पीछे सिनीयर-जूनियरों को अपशब्द बोलते हैं।

२७. भारत लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन यहां कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिससे मुझे प्रताड़ित किया गया है। मैं संबंध  में पता कर रहा हूं कि क्या वाकई आपके ऑफिस में ऐसा माहौल व्याप्त हैं?

२८. यह बात सच है कि md ऑफिस में कम आते हैं। लेकिन यह सारे काम करवाने की जिम्मेदारी इन 2-4 लोगों​ की ही है जिसका ये गलत फायदा उठाते है।

२९. कुल मिलाकर आपकी ऑफिस में काम करना का माहोल नहीं है। लोगों​ को बेइज्जत करते हैं, अपशब्द बोलते हैं, ज़लील करते हैं। जबकि गलती आपकी होती है। मैं अपना मानसिक संतुलन खो रहा हूं।

३०. उक्त तमाम बाबत को लेकर मेरे मुवक्किल गहरे​ मानसिक अवसाद में हैं। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके ऊपर घर की तमाम जिम्मेदारियां होने के कारण आप उन्हें बिना कारण निलंबित​ कर देंगे तो मेरे मुवक्किल कोई गलत कदम उठा लेते हैैं, तो उसकी तमाम जिम्मेदारियां आपके सिरे रहेंगी। मेरे मुवक्किल​ को आपने​ बिना कारण अपनी कंपनी में से निलंबित कर दिया है, जिससे मुवक्किल का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और बीमार है। अगर उसको कुछ भी हुआ तो तमाम तरह की जवाबदेही आपकी रहेगी। मेरे मुवक्किल को पहले की तरह बाइज्जत मान मरतबा लौटा कर गहरे अवसाद में से निकाल स्वस्थ करें। अगर आप ऐसे न करने में कसूरवार पाए गए तो सारी जवाबदेही आपकी रहेगी।

आपको आखिरी नोटिस देकर चेतावनी दि जा रही है कि नोटिस मिलने के तीस दिन में आप हमारे मुवक्किल को आप उनके समाधान हेतुु न्यायसंगत एवं न्यायोचित कारवाई करें। और आज दिन तक का हर्जाना सुपरत करें। अगर ऐसा न करने में कसूरवार पाए गए और आप को दि गई मुद्दत गुजर जाने के बाद मेरे मुवक्किल आपके विरुद्ध फौजदारी​ एवं दीवानी कोर्ट में क्रिमिनल केस दायर करनेे की कार्रवाई हाथ धरेंगे। अगर ऐसा होगा तो उसका तमाम खर्च और परिणाम कि जिम्मेदारी आपके सिरे रहेगी, जिससे इस नोटिस को गंभीरता से लें।

यह नोटिस आपके कसूर के कारण देनी पड़ी है। नोटिस का खर्च आपके सिरे रहेगा।

सावरकुंडला
दिनांक

मेरे मुवक्किल की सूचना और माहिती के आधार पर

एमपी गोंडलिया
(अधिवक्ता)

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महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स की मालकिन शोभना भरतिया को भेज दिया लीगल नोटिस!

उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (यूपीएसआईडीसी) के विवादित चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स अखबार को लीगल नोटिस भेज दिया है. हिंदुस्तान टाइम्स में कानपुर डेटलाइन से रिपोर्टर हैदर नकवी ने एक रिपोर्ट छापी कि कैसे एक लाख रुपये महीने तनख्वाह पाने वाला एक बाबू (यानि अरुण मिश्रा) देश के शीर्षस्थ वकीलों को अपना मुकदमा लड़ने के लिए हायर करने की क्षमता रखता है. ये शीर्षस्थ वकील हैं सोली सोराबजी, हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और अन्य.

एचटी में प्रकाशित खबर का शीर्षक यूं है : ”UP babu accused of corruption has Rs 1L pay, hires top lawyers Rohatgi, Sorabjee”

ज्ञात हो कि अरुण मिश्रा को सीबीआई ने 2011 में गिरफ्तार किया था. उस पर 65 से ज्यादा फर्जी बैंक एकाउंट संचालित करने का आरोप था. ऐसा माना जा रहा है कि उसने ब्लैक मनी को ह्वाइट करने के मकसद से विभिन्न शहरों के कई बैंकों में फर्जी बैंक एकाउंट खुलवा रखे थे. आय से अधिक संपत्ति के आरोपी अरुण मिश्रा जब तनख्वाह ही महीने का एक लाख रुपये पाता है तो वह कैसे इतने महंगे वकीलों को फीस देता होगा. इन वकीलों के बारे में सब जानते हैं कि ये एक एक सुनवाई के दौरान उपस्थित होने के लाखों रुपये लेते हैं.  अरुण मिश्रा के खिलाफ ढेर सारे केस हाई कोर्ट और सु्पीम कोर्ट में चल रहे हैं.

अरुण मिश्रा अपने को बचाने के लिए इन टाप वकीलों की सेवाएं ले रहा है. लेकिन इस सेवा लेने से एक सवाल खड़ा हो गया है कि वह इन्हें पैसा कहां से देता होगा? क्या अरुण मिश्रा से केंद्रीय एजेंसियों को यह नहीं पूछना चाहिए कि आखिर वह इतने बड़े बड़े वकीलों को प्रत्येक पेशी पर लाखों रुपये कहां से देता है? ज्ञात हो कि 2011 में सीबीआई ने अरुण मिश्रा को दिल्ली के पृथ्वीराज रोड और देहरादून में संपत्तियों को जब्त किया था. पृथ्वीराज रोड वाली लुटियन जोन इलाके की अकेली प्रापर्टी की कीमत करीब 300 करोड़ रुपये से ज्यादा है. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि यह महाभ्रष्टाचारी अरुण मिश्रा कहां से अपने टाप लेवल के वकीलों को फीस देता होगा. पहले हिंदुस्तान टाइम्स में छपी पूरी खबर पढ़िए… उसके ठीक बाद अरुण मिश्रा द्वारा अखबार को भेजे गए लीगल नोटिस को बांचिए…


एचटी में छपी मूल खबर….

UP babu accused of corruption has Rs 1L pay, hires top lawyers Rohatgi, Sorabjee

A bevy of legal luminaries have appeared multiple times in the Supreme Court and the Allahabad high court individually over the past three years to defend Arun Mishra, chief engineer with the UPSIDC.

Haidar Naqvi

Kanpur, Hindustan Times

What do India’s top lawyers — Soli Sorabjee, Harish Salve, Mukul Rohatgi and others — have in common? They have all defended a mid-level bureaucrat in Uttar Pradesh who is accused of amassing disproportionate assets worth crores and running scores of fake bank accounts.

A bevy of legal luminaries have appeared multiple times in the Supreme Court and the Allahabad high court individually over the past three years to defend Arun Mishra, chief engineer with the UP State Industrial Development Corporation (UPSIDC).

The unusual part — Mishra draws a monthly salary of just over Rs 1 lakh while it is understood that the lawyers often charge a fee ranging between five and twenty lakh per day. Despite repeated attempts, Mishra was not available for comment. A peon at his office said he wasn’t available and it wasn’t clear when he would arrive. The CBI arrested him in 2011 for allegedly operating 65 fake bank accounts with the Punjab National Bank, Dehradun, where he is supposed to have parked black money.

In 2011 also, the Enforcement Directorate (ED) seized his properties on Prithviraj Road in Delhi’s Lutyens Zone, and Dehradun. The Prithviraj Road property, apparently bought in the name of a company called Ajanta Merchants, where his wife and father are listed as directors, is alone worth an estimated Rs 300 crore.

Among his other alleged properties the ED is investigating, are 60 acres of land in UPSIDC Industrial Park on Kursi Road in Barabanki and the Asia School of Engineering and Management on another 52 acres of land. Court records show he and his family have two palatial houses in upscale Gomti Nagar of Lucknow, five properties in Dehradun and 100 acres of land in Barabanki. After the CBI investigation into the Dehradun fake accounts case, the SIT filed an FIR against Mishra over his alleged disproportionate assets in 2011 and the probe is ongoing.

The bureaucrat also faced charges in the 2007 Tronica City scam in Ghaziabad, where officers allegedly gave away more than 400 plots at throwaway prices. Mishra had joined UPSIDC as assistant engineer in 1986 and became chief engineer in 2002 — superseding many others — at a time he held the coveted charge of managing director of the corporation.

In the high court, he was defended by Shanti Bhushan, who apparently would fly down to Allahabad whenever there was a hearing, sources said. Soli Sorabjee, Harish Salve, Abhishek Manu Singhvi, Gopal Subramaniam, Nageshwar Rao, Shanti Bhushan argued against his dismissal, at different stages, in the Supreme Court, which stayed the high court’s order. Mishra rejoined as UPSIDC chief engineer within a month, in September 2014.

Rohatgi, now the country’s attorney general, appeared for Mishra in the SC in the case related to the CBI probe against him. In 2016 Mishra was deprived of his powers as UPSIDC chief engineer and was restricted to oversee development work in nine revenue divisions. He then hired Kapil Sibal to fight his case in the SC.

Salman Khurshid appeared for Mishra in the SC in a case wherein the Allahabad HC had passed different orders relating to his alleged forged mark sheets and engineering degrees.

TAINTED TRACK RECORD

-Arun Mishra, chief engineer with the UP State Industrial Development Corporation, was arrested by the CBI in 2011 for allegedly operating 65 fake bank accounts with the Punjab National Bank, Dehradun, where he is supposed to have parked black money.

-The same year, the Enforcement Directorate seized his properties on Prithviraj Road in Delhi’s Lutyens Zone and Dehradun.

-After the CBI investigation into the Dehradun fake accounts case, the SIT filed an FIR against Mishra over his alleged disproportionate assets in 2011 and the probe is ongoing. The bureaucrat also faced charges in the 2007 Tronica City scam in Ghaziabad where officers allegedly gave away more than 400 plots at throwaway prices.

-In August 2014, Mishra was dismissed from UPSIDC on the orders of Allahabad high court for getting his job on forged degrees. But he moved the Supreme Court challenging the high court’s decision.


अरुण मिश्रा की तरफ से एचटी की मालकिन शोभना भरतिया को संबोधित कर भेजा गया लीगल नोटिस यूं है….

Dated May 13th 2017

Ms Shobhana Bhartia

Chairperson Editorial Director

HT Media Limited

Hindustand Times House

18-20, Kasturba Gandhi Marg

New Delhi 110001, India


अरुण मिश्र की पूरी कुंडली जानने पहचानने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें :

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इंडिया न्यूज के मालिक कार्तिकेय शर्मा ने भड़ास4मीडिया को लीगल नोटिस भिजवाया

सेलरी न देने पर चैनल मालिक को ड्राइवर द्वारा ‘ठोंके’ जाने से संबंधित खबर के भड़ास4मीडिया पर प्रकाशन के बाद इंडिया न्यूज चैनल के मालिक कार्तिकेय शर्मा उर्फ कार्तिक शर्मा ने भड़ास4मीडिया डाट काम को लीगल नोटिस भिजवाया है. इस लीगल नोटिस में कहा गया है कि जो कुछ भी भड़ास पर उनके बारे में छपा है, वह सब निराधार, मनगढ़ंत और मानहानिकारक है. लीगल नोटिस में तत्काल प्रभाव से खबर और संबंधित सारे लिंक हटाने को कहा गया है.

इस बारे में भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह का कहना है कि भड़ास पर जो कुछ छपा है, वह तथ्यों पर आधारित है. घटनाक्रम की तस्वीरें और अखबार में छपी खबर की कटिंग तक का भी प्रकाशन किया गया है. भड़ास की मंशा किसी की मानहानि करना नहीं बल्कि उस प्रवृत्ति पर चोट करना है जिसके कारण गरीब लोगों को नौकरी पर रखकर उनकी सेलरी आदि का भुगतान समय से नहीं किया जाता जिसके कारण वह मानसिक रूप से परेशान और हिंसक हो जाते हैं.

लीगल नोटिस के बारे में भड़ास संपादक यशवंत का कहना है कि हम इसका स्वागत करते हैं. जो भी किसी साइट या चैनल या अखबार की खबर को मानहानि कारक पाता है तो वह कानूनी प्रक्रियाओं के तहत पहले नोटिस भिजवाता है, फिर मुकदमा करता है. हम लोग इस लीगल नोटिस को भड़ास पर प्रकाशित करेंगे ताकि इस नोटिस के बहाने इंडिया न्यूज प्रबंधन का पक्ष भी सामने आ जाए.

लीगल नोटिस इस प्रकार है….


Legal Notice in relation to the false and defamatory statements in the article titled “सेलरी न देने वाले ‘इंडिया न्यूज’ चैनल के मालिक को ड्राइवर ने ‘ठोंक’ दिया! (देखें तस्वीरें) “ 

From DINESH BANTH ( dineshbanth@outlook.com )
To Yashwant Singh ( yashwant@bhadas4media.com )

BY REGISTERED AD/BY COURIER/BY EMAIL
STRICTLY WITHOUT PREJUDICE
April 03, 2017
 

Sub:  Legal Notice in relation to the false and defamatory statements in the article titled “सेलरी न देने वाले ‘इंडिया न्यूज’ चैनल के मालिक को ड्राइवर ने ‘ठोंक’ दिया! (देखें तस्वीरें) “ which is currently available at your website https://www.bhadas4media.com/tv/12291-kartik-sharma-ko-sabak-sikhaya .  Although the whole article is full of false and misleading statements and is defamatory, below mentioned are few of the paragraphs of the said article.
 

“कहने को तो ये बड़े लोग होते हैं लेकिन दिल इनका इतना छोटा होता है कि ये अपने इर्द-गिर्द रहने वालों के दुखों-भावनाओं को भी नहीं समझते. इंडिया न्यूज चैनल के मालिक कार्तिक शर्मा उर्फ कार्तिकेय शर्मा अरबों-खरबों के मालिक हैं. होटल, मीडिया समेत कई किस्म के बिजनेस हैं. इनके पिता विनोद शर्मा हरियाणा के बड़े नेता हैं. एक भाई मनु शर्मा इन दिनों तिहाड़ जेल में जेसिका लाल मर्डर केस की सजा काट रहा है. सारे कारोबार का दारोमदार कार्तिक शर्मा के कंधों पर है. लेकिन इनकी ओछी मेंटलटी के चलते इनसे काफी लोग नाराज रहते हैं.”

and goes on to state that

“इन महाशय ने अपने ड्राइवर तक को कई महीने की सेलरी नहीं दी थी. खफा ड्राइवर ने हिसाब बराबर करने का ऐसा खौफनाक प्लान बनाया कि सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. नोएडा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कार्तिकेय शर्मा अपने मित्र अशोक डोगरा के साथ इंडिया न्यूज चैनल के आफिस से दिल्ली के जोरबाग स्थित अपने घर जा रहे थे. बात 27-28 मार्च की रात की है”.
 

and in the last paragraph states that
 

“सवाल यह है कि क्या इससे मीडिया मालिक सबक लेंगे? वे कई महीनों तक लोगों से काम कराते हैं और सेलरी दिए बिना निकाल देते हैं. एक ड्राइवर ने जिस तरह से बदला लिया, उससे समझा जा रहा है कि उसने बाकियों को भी रास्ता दिखा दिया है. नोएडा दिल्ली जैसे महंगे इलाके में कोई कर्मचारी बिना सेलरी कैसे अपने परिवार को जिंदा रख सकता है. एक ब्वायलिंग प्वाइंट आता है जिसके बाद खुद को कीड़े मकोड़े की तरह जिंदा रखने की जगह आर-पार करने का फैसला लेते हुए मरने मारने पर उतारू हो जाता है”.

1. As a consequence of the false, incorrect and baseless above-quoted statements, a great deal of harm has been caused to my client’s name and reputation, painstakingly built over a decade.

2. That my client is the founder and promoter of ITV Network which owns and operates “NewsX” which is India’s Leading English News Channel and “India News” which is India’s Leading Hindi News Channel and four Hindi Regional News Channel. Mr. Sharma is responsible for providing livelihood to the families of more than 1500 employees most of whom have been working in his companies for more than half a decade or more.

3. The aforementioned contents of the article are false, malicious and defamatory and have caused severe harm to my client’s and his Companies/Channels’ reputation. Your mala fides, and the intention of harming the reputation of my client, are evident from the fact that instead of criticizing the illegal and life threatening attempt of the driver namely Ram Prakash you have made an attempt to create a public sympathy for an act which is totally illegal and criminal. It might not be wrong to say that you are attempting to criminally incite people against my client  by running a false, malicious and frivolous propaganda.  

4. In any event, it appears that you willfully omitted to check with my client or the company in which the said Driver is an employee or even verify facts through independent sources, before maligning my client’s reputation by publishing the above quoted false statements of the article, with the intent to cause damage to my client’s reputation. 

5. The whole Article is frivolous and malicious and every portion quoted in sentence of the above paragraphs is false.

(i) As mentioned above Mr. Sharma is the founder promoter of ITV Network. Like any other professionally run company there are separate departments with their respective Heads to look after and manage the day to day running of the Company. Mr. Sharma is definitely not involved in payment of monthly salary of an employee who is working as a driver in one of his several companies.

(ii) As per the record of the company in which Mr. Prakash is employed as a driver all his salaries have been paid till date and in fact he was given an advance in the month February 2017 which  he is liable to return over a period of six months.

6. Thus, the allegation of non-payment of salary is absolutely baseless, biased and unfounded.

7. You should have followed journalistic ethics and reached out to my client for his comments on those specific baseless statements which are false and defamatory.

8. However, it appears that for your own reasons, you decided not to let truth get in the way of your publishing the article without even attempting to get in touch with my client to verify the above quoted statements.

I therefore call upon you to:

(i) publish a retraction of the said statements in the article prominently on the website: https://www.bhadas4media.com/tv/12291-kartik-sharma-ko-sabak-sikhaya

(ii) publish an unqualified apology to my client for having carried the said article prominently on your website https://www.bhadas4media.com ; and
 
(iii) remove all the links of the said article from your website with immediate effect following your receipt of this letter.

My client reserves his right to initiate appropriate legal proceedings, civil and criminal, against you (jointly and severally) at your cost and consequences. You are hereby put to notice of the same.

Yours Sincerely
Dinesh Banth
Advocate, Delhi High Court
Mobile: 8745089424
Flat No. 1108, Shivalik Homes,
UPSIDC, Site C, Greater Noida

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लड़की के साथ फोटो छापने पर नवाजुद्दीन सिद्दकी ने फिल्मफेयर मैग्जीन पर मुकदमा कर दिया

चर्चित युवा एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिल्मफेयर मैग्जीन पर मुकदमा करने की तैयारी कर ली है. इसके तहत सबसे पहले मैग्जीन को लीगल नोटिस भेज दिया गया है. फिल्मफेयर मैग्जीन के इसी महीने के शुरुआती हफ्ते वाले अंक में प्रकाशित एक आर्टकिल में नवाज की एक लड़की के साथ दिखाया गया और लिखा गया है कि वे इस लड़की के साथ डेट कर रहे हैं.

नवाजुद्दीन ने अपने नोटिस में कहा है कि फिल्मफेयर की तरफ से उनके बारे में झूठी, अपुष्ट, भ्रामक और बेहूदा लेख को छापा गया है. इस लेख के कारण उन्हें मानसिक पीड़ा और आघात से गुजरना पड़ रहा है. नवाजुद्दीन ने फिल्मफेयर मैगजीन को सात दिन में माफी मांगने और खंडन छापने को कहा है.

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‘गोरख धंधा’ शब्द का इस्तेमाल करने पर एबीपी न्यूज को भेजा नोटिस

सेवा में,
श्री मान मुख्य सम्पादक महोदय जी,
ABP न्यूज़ चैनल

विषय :- ‘गोरख धंधा’ शब्द का इस्तेमाल ना करने और इस संबंध में स्पष्टीकरण प्रसारित करने के बारे में.

श्री मान जी,

उपरोक्त विषय में आपको सूचित किया जाता है कि आपके चैनल द्वारा पंजाब के मनसा की खबर “पेट्रोल पम्प पर गोरख धंधा” (समाचार क्लिप संलग्न है) दिखाई गई जिसमें कई बार आपके चैनल के रिपोर्टर / वायस ओवर करने वाले ने गोरखधंधा शब्द का प्रयोग किया है और इसके साथ-साथ मनसा पुलिस के प्रवर पुलिस अधीक्षक ने भी ‘गोरख धन्धा’ शब्द का प्रयोग किया है.

इस बारे में बताना यह है कि उक्त ‘गोरख धंधा’ का ‘गोरख’ शब्द मेरे गुरु श्री श्री महायोगी 1008 गुरु गोरख नाथ जी से सम्बन्ध रखता है और गुरु गोरखनाथ ने कभी भी कोई गलत कार्य नहीं किया.  गलत कामों के साथ मेरे गुरु का नाम जोड़ा जाना कष्टप्रद है. गोरख धंधा शब्द के इस्तमाल करने से मेरे गुरु के सम्मान को ठेस पहुंचती है और इस शब्द के प्रयोग से मेरी व मेरे सर्व जोगी समाज  की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है. ऐसा किया जाना कानूनन अपराध है और भारतीय दंड सहिता के अनुसार एक दंडनीय अपराध है.

यह है कि आप का चैनल व प्रवर पुलिस अधीक्षक लिखित में माफी मांगें कि इस शब्द का प्रयोग भविष्य में उनके द्वारा ना किया जायेगा. साथ ही इस सम्बन्ध में इस शब्द के प्रयोग का खंडन / स्पष्टीकरण प्रसारित करें. या फिर मुझे निजी तौर पर स्पष्टीकरण देकर बतायें कि आखिर गोरख धंधा शब्द का इस्तेमाल आप सब ने किन हालात में और किसलिए किया.

मेरा आपसे पुन: अनुरोध है कि उक्त शब्द का प्रयोग आगे से न करें. यहि भविष्य में गोरख धंधा शब्द का प्रयोग किया गया तो मजबूरन मुझे आपके चैनल व कर्मचारियों के खिलाफ न्याय हेतु माननीय न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा. इसके हर्जे खर्चे के आप स्वयं जिम्मेवार होंगे. इस पत्र को जोगी समाज जाग्रति मंच सभा हरियाणा की तरफ से नोटिस समझा जाये. उचित कार्यवाही ना होने पर देश की ४१ जोगी समाज संगठनों द्वारा इस पर क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी.

भवदीय
मयंक जोगी
प्रदेश मीडिया प्रभारी
जोगी समाज जाग्रति मंच
हरियाणा
+91-829-555-666-0
myankjogi@gmail.com

देखें संबंधित वीडियो…

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T H Tiger Holidays के फ्रॉड के खिलाफ खबर छापने पर भड़ास को भेजा नोटिस

Dear Sir/Mam,

Greeting From : T H Tiger Holidays

Please find the detail’s :

https://www.bhadas4media.com/article-comment/11635-fraud-company-t-h-tiger-holidays

Dear Team, you have written against company that company is as fraud. So we want to ask some question from you kindly give properly with policy/legal.

1. If any company customer face problems in product/service  may be by company executive mistake/customer planing changing. So in this case customer should be contact to company support team and vie email. So Mr. Santosh Singh contact us vie email and this case is on process till now. Mr. Santosh is on waiting for this case. So why did written this company is Fraud.

2. Company will be solved case on the given time but before that How can you written company is Fraud.

3. Customer purchase product/service from company and this deal with a customer and company. Company sell product/service according the terms & condition as t h tiger holidays sell packages as company policy kindly read here : http://www.thtigerholidays.com/2016/03/term-condition.html . According company policy we are on continue working.
But Why did you written this company is Fraud. 

4. If any news/Media written according customer against company so News/media contact to company vie Email after the response justify the case like may be wrong  customer/company executive. But you have never mail us and have written on your website you try to contact us wrong vie email but we have not got any email from you.

5. This company is running on company policy. We are continue with policy/legal.

6. If customer not satisfy with the service as per given by company policy. So in this case customer can go consumer court for help. Consumer court definitely help to customer as per law/legal. But you are not consumer court nor law/legal so how can you say this company is fraud.    

Dear Team we have many legal point against what you have written on your website. We would like to say kindly remove the all content from your website within 24 hours otherwise company will take legal action against you.

Thanks & Regards :
T H Tiger Holidays Team
Email id : support@thtigerholidays.com
Web : www.thtigerholidays.com

Kindly read here this company terms & condition :

GENERAL TERMS

1. All services provided and assured by the Company are subject to full realization of payment prior to departure. If payment to the Company is made by cheque, the Package/ tour component will b e delivered only after realization of cheque.

2. The Company has right at any time and for any reason: (a)To cancel a tour package/tour component prior to the date of departure and if it does so, its liability shall be limited to refunding all the money paid by the Tourist, towards the tour package / tour component. (b)To amend, alter, vary or withdraw any tour, holiday, excursion or facility, it has advertised or published, or to substitute a hotel of similar class if it is deemed advisable or necessary. In either case the Company shall not be liable for any damages, additional expenses or consequential loss suffered by the Tourist/Group.

3. No person, other than the Company, in writing has authority to vary, add, amplify or waive off any description, representation, terms and conditions set forth herein or in brochure of the Company, or other terms & conditions regarding tour booked by the Tourist with the Company.

4. In the event of the Company exercising its right to amend or alter any tour advertised in their brochure or any other media after such tour or holidays has been booked the Tourist shall have right: (a)To continue with the tour or holiday as amended or altered. (b)To accept any alternative tour or holiday which the Company may offer. In neither of the above cases shall the Company be liable to the Tourist/Group for any damages, additional expenses and consequential loss suffered by the Tourist/Group.

5. The Company shall in no circumstances whatsoever be liable to the Tourist/Group: (a)Any death, personal injury, sickness, accident, loss, delays, increased expenses or consequential damages by any misadventure or otherwise caused. (b)Any act, omission or default of any hotelier, carrier, travel component supplier or other person or by any servant or agent employed by the travel component supplier who may be engaged or concerned in the provision of accommodation, refreshment, carriage facility or service for the Tourist/Group, howsoever caused. In this clause the expression “however caused” includes negligence on the part of any person.

6. No liability on the part of the Company arising in any way out of this contract in respect of any tour, holiday or excursion facility shall exceed the total amount paid or agreed to be paid for the tour, holiday, package/ tour component or excursion, and shall in no case include any consequential damages or additional expenses whatsoever.

7. The prices quoted by the Company in its brochures / quotation are in US Dollars or equivalent in foreign currency (local currency of the foreign country / countries being visited). The Company reserves the right to amend these prices in case of currency fluctuation and changes in various rates of exchange and or fuel cost before departure, and to surcharge accordingly. All such increases in price must be paid for in full.

8. It is the responsibility of the Tourist/Group to check and hold valid travel documents like passport and Visa till the end of the tour. In case any travel document like visa is refused, expires or is cancelled by the authorities, the tour participant will have to meet all the contingencies arising therefrom and to meet all expenses consequential thereto. The Company will have no responsibility whatsoever in respect of the above matters. It is the responsibility of the Tourist/Group to check and hold valid travel documents like passport and Visa till the end of the tour. In case any travel document like visa is refused, expires or is cancelled by the authorities, the tour participant will have to meet all the contingencies arising therefrom and to meet all expenses consequential thereto. The Company will have no responsibility whatsoever in respect of the above matters.

9. The Cost of Ticket does not include any Insurance Premium. The Tourist/Group will have to pay any such premium at their own cost.

10. All tour programmes and packages/ tour components are subject to laws, rules and regulat/Group are on tour and back. The Company will have no responsibility in respect of any condition brought about by any such laws, etc., or due to act of God.

11. Any complaint by the Tourist (including complaint on behalf of passengers of the Group submitted by the Tourist) in connection with or arising out of the tour must be notified to the Company in writing within twenty one (21) days from the end of the tour. No claim or complaint made thereafter shall be entertained in any circumstances. No individual complaint of passenger of the Group shall be entertained directly and therefore same must be made only by The Tourist who is a leader of the Group.

12. All claims, disputes and litigation relating to the tours arranged or co-coordinated by the Company shall be construed according to current Indian laws only and shall be subject to jurisdiction of courts in Delhi only.

13. Check in / Check out. Most hotels worldwide observe 1400-1600 Hrs. as Check-in time & 1000-1200 Hrs. as Check out time. If the Tourist/Group arrival is before or departure is after the normal check-in or check-out time, the Company is not responsible for additional charges levied by the hotel or travel component supplier and such charges are to be settled by the Tourist/Group directly with the hotel or travel components supplier.

14. The Company will not be liable to any passenger for refund, compensation or claim for shortage of tour days or for cancellation, postponement or re-routing of any particular scheduled transport service due to any reasons including fog. The rules in respect of cancellation charges or refund will be applicable. The tickets are issued, subject to conditions herein.

15. Govt Service Tax will be exclude in every packages

16. If customer abuse with our company executives or any company person so in this case company will be cancelled packages and amount will not refund.

मूल खबर…

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मेदांता वालों ने भड़ास4मीडिया को भेजे लीगल नोटिस में क्या क्या कहा लिखा है, पूरा पढ़िए

गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल वालों ने भड़ास4मीडिया को लीगल नोटिस भेजा है. यह नोटिस मेदांता को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट को भड़ास पर प्रकाशित करने के चलते भेजा गया है. लीगल नोटिस में कहा गया है कि कर्नल आरके राहुल, जिनका उल्लेख सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया है, नामक कोई मरीज कभी मेदांता में एडमिट ही नहीं हुआ. पहले पढ़िए लीगल नोटिस में क्या क्या लिखा है, उसके बाद पढ़िए सोशल मीडिया की वो पोस्ट जिसे छापने पर मेदांता ने भडास को नोटिस भेजा है. सबसे पहले लीगल नोटिस….

भड़ास पर पोस्ट प्रकाशित होने के बाद मेदांता समूह के लोगों ने संबंधित पोस्ट के नीचे अपनी टिप्पणी / अपना पक्ष लिखकर अपलोड कर दिया था जिसे भड़ास पर प्रकाशित होने दिया गया ताकि जिन्हें आरोपी बताया गया है उनका भी पक्ष सामने आ सके…. नीचे वो कमेंट दिया जा रहा है जिसे मेदांता के लोगों ने संबंधित पोस्ट पर अपलोड किया था…

In response to the post above written by an individual identifying himself as Col. R.K. Rahul, it is important to inform people of the following facts:
• No patient by the name of Col. RK Rahul was ever admitted to Medanta hospital. The message claims to be his personal experience. This is incorrect and appears to be designed to mislead the recipients of the message.
• Based on dates mentioned in the message, the patient whose case appears to be referred to, was identified. On being contacted, the patient stated that he did not know an individual by the name of Col. RK Rahul.
• In any event, the message contains a distorted account of the diagnosis and treatment of the patient at Medanta. The correct position is as follows. The patient had severe narrowing or shrinkage of the Aortic Valve (Aortic Stenosis) and thickening and calcification of the mitral valve leaflets with significant leakage. This was a result of rheumatic heart disease in the past.
• A consequence of the severe disease in two left sided heart valves was decrease in overall heart function and increase in heart pressures. As a sign of advanced disease the pulmonary pressure had risen to 75 mmHg which is severe pulmonary hypertension.
• In the opinion of the entire treating team, including Dr. Kasliwal, since the aortic valve had to be replaced and the mitral valve was already damaged, it was the opinion of the treating team it is better to change both valves, since re-operation for mitral valve later, would carry a higher risk to the patient and increase expense for the patient in the long term.
• The treating team has over four decades of experience in cases such as these, and it is their considered medical opinion, that replacement of the leaking mitral valve, along with the replacement of the Aortic Valve, was the correct course of treatment, and was in the best interest of the patient.
• The allegations made the message are unfounded and unfortunate, and demonstrate a complete lack of understanding of the condition of the patient in particular and medical science in general.

– Team Medanta

और, ये है वो पोस्ट जिसे सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद भड़ास पर प्रकाशित किया गया था….

In response to the write-up by Nandini Sinha on Medanta, Col RK Rahul has the following to say. It’s his personal experience :

Shame on Dr. Trehan & Medanta

Col RK Rahul

बहुत अच्छा article लिखा नंदिनी जी आपने। बड़े- बड़े नामी hospitals का तो बुरा हाल है। मैं February 2015 में Noida के एक बहुत बड़े multi speciality हॉस्पिटल “MEDANTA-The Medicity” में अपनी Heart problem को लेकर Dr. Naresh Trehan से मिला। Rs.800/- उनकी consultation fees जमा की। Dr. Trehan ने मेरे Lucknow के records और पुरानी reports देख कर कहा कि आपके 3 valve ख़राब हैं। इन्हें replace करना होगा। खर्चा बताया 7.5 लाख रुपये। मेरा 2D echo test भी किया गया और तब भी यही बताया गया। Medanta के ही एक और Director हैं Dr. Kasliwaal.  हम लोग उनसे लखनऊ के एक उनके परिचित के reference से मिले। तब Dr Kasliwal ने Dr. Trehan से बात करी और हमको 5.75 लाख जमा करने को कहा। हम लोगों ने जमा कर दिए और admit हो गए। check-ups start हो गए। 12 March की date दे दी गयी surgery की।

11 March की रात में जो लिस्ट release की गयी, उसमें मेरा नाम नहीं था। अगली सुबह जब drs round पर आये तो पता चला कि आपके urine में infection है, उसका treatment होगा तब surgery होगी। treatment में सुबह-शाम antibiotic injections लगने थे। 6 दिन का course था। Medanta का room 8000/- per day का था। हम लोगों ने discharge ले लिया और बाहर guest house में रहकर treatment लेने लगे। 5 दिन बाद मेरे एक Delhi के मित्र ने कहा कि एक बार cross check के लिए कहीं और भी echo करा लो। हम लोग Delhi के National Heart Institute में गए और वहां 2D echo कराया 3000/- में। उन लोगों ने बताया कि आपका 01 valve खराब है। उसकी सर्जरी करके replace की cost बतायी 3.75 लाख। हम लोग बहुत confused हो गए क्योंकि Medanta में हमारा 5.75 जमा था। हम लोग Dr.Kasliwal से दोबारा मिले और उनको National Heart की echo report दिखाई।

Dr. Kasliwal सर पकड़ कर बैठे रहे, उनका पूरा staff करीब 8-9 लोग उस समय उनके चैम्बर में थे, Dr. करीब 30-40 सेकण्ड के pause के बाद बोले कि – “यार मैं तो Trehan से पहले दिन से कह रहा हूँ कि तेरा एक ही valve खराब है, लेकिन क्या करें, हम लोगों पर इतना pressure रहता है।” I was shocked to hear this. उनका सारा staff उनकी और हमारी शकल देख रहा। उनके चेहरे पर शर्मिंदगी और मेरे चेहरे पर असंतोष के भाव थे। मैंने कहा dr साहब मैं आपके पास फलाँ व्यक्ति के reference से आया था। कम से कम आप उसी का सोच कर मेरे से ईमानदारी रखते। खैर, हम लोगों ने बाद में अपने पैसे वहां से वापस लिए तो 80000/- काट कर हमको पैसे वापस किये गए। 80000/- hospital ने अपने expenses के काट लिए, जो हमारी जाँचे हुई थी और 4 दिन हम लोग 8 star हॉस्पिटल में रहे थे। फाइनली, हमने अपनी surgery Fortis Escorts में कराई Dr. Z. S.Meherwal ने करी। इस प्रकार से बड़े hospitals मरीज़ को cheat करते हैं। यह मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव रहा जो कि अत्यन्त दुखदायी है। इतना बड़ा hospital, इतने बड़े नाम वाला डॉक्टर और ये हाल! शनिदेव उनका कल्याण करें!

कर्नल आरके राहुल ने उपरोक्त पोस्ट जिस वायरल एफबी पोस्ट के जवाब में लिखा है, उसे पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें….

Medanta- The Medicity or The Murdercity!


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ये एसएमबीसी चैनल में क्या चल रहा है भाई, दनादन गिर रहे हैं नोटिस और लेटर….

सी मीडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिेटेड नामक कंपनी एसएमबीसी नामक एक न्यूज चैनल चलाती है. इस चैनल में अंदरखाने जबरदस्त बवाल चल रहा है. चैनल के सीएमडी श्रीराम तिवारी ने सुशील खरे को एक मेल भेजा है. सुशील खरे का पद इस मेल में आनरेरी सीईओ का दिखाया गया है. यानि सुशील खरे ऐसे सीईओ हैं जो अवैतनिक हैं. पत्र में क्या लिखा गया है, आप खुद पढ़ लीजिए. उधर, सुशील खरे ने सी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर मध्य प्रदेश और डा. प्रकाश शर्मा मैनेजिंग डायरेक्टर सी मीडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को तीन पन्ने का लीगल नोटिस भिजवाया है. सारे लेटर व लीगल नोटिल नीचे है, पढ़िए और बूझिए…

 

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Delhi HC issues notice to top editorial staff of UNI

New Delhi : Taking strong cognizance of the torture and humiliation of a dalit employee of United News of India (UNI), a prestigious news agency of the country, the Delhi High court yesterday issued notice to two high profile scribes of UNI including Joint Editor Neeraj Bajpayee, Journalist Ashok Upadhyay and an another employee of the agency Mohan Lal Joshi.

While hearing the case Delhi high court hon’bleJustice Pratibha Rani issued the notices directing the trio to file a reply by July 15, 2016 informed the counsel Jitendra kumar Jha and Shahid Iqbal. The counsels further said that after taking cognizance of non filing of any appeal by the government lawyer against acquittal of the accused by a lower court, judge asked the government lawyer about it and he admitted that no writ was filed against the decision of the lower court and he accepted the notice .

Earlier UNI Joint Editor Mr Bajpayee,journalist Mr Upadhyay and an another employee of UNI Mr Joshi were sent to tihar jail by lower court in 2013 in connection with the SC/ST case lodged at Parliament Street police station with FIR No. 61/2013. The trio who have unleashed a reign of terror in the organisation were put behind the bars for one week from 12/12/2013 to 18/12/2013.

As per the case these three acused had humiliated and had threatened the victim, (petitioner )Virender Verma, a Dalit employee of UNI in the office premises on 14/03/2013. The incident took place within the premises of the UNI located on 9, Rafi Marg, New Delhi situated within 200 meters of the Indian Parliament. The case was lodged Under Sec 3 of SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 in which the accused persons were acquitted by the lower court.

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पत्रिका ने अपने कर्मी को बर्खास्त किया तो कर्मी ने नोटिस भिजवाया और लेबर आफिस में शिकायत दर्ज कराई

राजस्थान पत्रिका समूह के अखबार पत्रिका के ग्वालियर संस्करण के सरकुलेशन डिपार्टमेंट में कार्यरत शैलेंद्र सिंह को प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के संस्थान से टर्मिनेट कर दिया. इससे दुखी महेंद्र ने प्रबंधन को वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भिजवाया है और लेबर आफिस में शिकायत दर्ज कराई है. इस प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज नीचे दिए जा रहे हैं…

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कस्बाई पत्रकार ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी न देने पर अपने अखबार मालिक को भेजा लीगल नोटिस

ऐसे दौर में जब बड़े बड़े पत्रकार पापी पेट की खातिर चुप्पी साधकर नौकरी कर रहे हैं और मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी न दिए जाने के मैनेजमेंट की मनमानी से आंखे फेरे बैठे हैं, मेरठ के एक कस्बे के पत्रकार ने हिंदुस्तान अखबार के मालिकों और मैनेजरों को लीगल नोटिस भेज दिया है. इस कस्बाई पत्रकार ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने की मांग की है. हिन्दुस्तान अखबरा मवाना (मेरठ) के प्रभारी संदीप नागर ने मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी नहीं दिए जाने पर अखबार को लीगल नोटिस दे दिया है. लगभग दो माह पूर्व दिये गये नोटिस का हिन्दुस्तान के प्रबन्ध तंत्र ने अभी तक जवाब नहीं दिया है.

हिन्दुस्तान मवाना के प्रभारी संदीप नागर ने बताया कि प्रबन्ध तंत्र से उन्होंने कई बार पत्र लिखकर मजीठिया वेज बोर्ड लागू कर उसके अनुसार वेतन देने का अनुरोध किया था. लेकिन हिन्दुस्तान प्रबन्ध तंत्र ने उन्हें अखबार से हटाने की धमकी दी तो अखबार की धमकी को स्वीकार करते हुए अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भिजवाया. इसमें मजीठिया वेज बोर्ड लागू करते हुए मजीठिया के अनुसार वेतन देने की मांग की. लगभग दो माह पूर्व दिये गये नोटिस का हिन्दुस्तान प्रबन्ध तंत्र अभी तक कोई जवाब नहीं दे सका है. संदीप नागर का कहना है कि हिन्दुस्तान प्रबन्ध तंत्र उन पर फैसला करने का दबाव बना रहा है.

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प्रबंधन के खिलाफ हिसार भास्कर यूनिट ने फूंका विद्रोह का बिगुल, मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट गए

मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने और अपना बकाया एरियर लेने के लिए दैनिक भास्कर की हरियाणा यूनिट भी एकत्र होनी शुरू हो गई है। इसकी पहल सबसे पहले हिसार यूनिट की ओर से की गई है। इसमें भिवानी ब्यूरो से प्रदीप महता, कुलदीप शर्मा, भूपेंद्र सिंह, राकेश भट्ठी, संजय वर्मा और सुखबीर ने सुप्रीम कोर्ट के वकील अक्षय वर्मा के माध्यम से भास्कर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल से लेकर भिवानी के ब्यूरो प्रमुख अशोक कौशिक तक लीगल नोटिस भिजवा दिए हैं।

उनके इस नोटिस के बाद से भास्कर प्रबंधन में खलबली मचनी शुरू हो गई है। भास्कर के इन छह कर्मचारियों द्वारा जारी नोटिस के बारे में खास बात यह है कि उन्होंने इस बारे में ब्यूरो प्रमुख अशोक कौशिक तक को पता नहीं चलने दिया। मगर जब उनके पास ये नोटिस पहुंचे तो भिवानी से लेकर भोपाल तक भास्कर प्रबंधन में खलबली मच गई है। बताया जा रहा है कि हिसार यूनिट के कार्यकारी संपादक हिंमाशू घिल्डियाल ने भिवानी के ब्यूरो प्रमुख से बात कर इस मामले में नोटिस जारी कराने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात कही है।

दूसरी ओर हिसार में कार्यरत कई मीडियाकर्मियों ने भी दैनिक भास्कर के मालिकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज करा दिया है। इन लोगों में जनक अटवाल, सुशील कुमार, जितेंद्र, शकूर खान, संदीप, मुन्ना प्रसाद, बिशन, धीरज कौशिक, राजेश जांगड़ा, सीपी छाबड़ा, मंजू शर्मा, अनुराधा, समीक्षा जैन, सतपाल, प्रेम, सुरेंद्र खन्ना के अलावा दादरी में कार्यरत सोमेश चौधरी, दादरी में पहले दैनिक भास्कर में पत्रकार रहे आदेश चौधरी, सुखदीप चाहर, दैनिक भास्कर में पूर्व मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव अशोक जांगड़ा शामिल हैं।

भास्कर में कार्यरत इन कर्मचारियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज करने के बाद भास्कर प्रबंधन में खलबली सी मची हुई है। बताया जा रहा है कि इनमें से जो कर्मचारी रिपोर्टर या सीनियर रिपोर्टर के पद पर कार्यरत हैं उनकी बाइलाइन खबरें भी देनी बंद कर दी हैं। मगर भास्कर वालों को यह नहीं पता कि इस तरह का काम कर वे अपने कर्मचारियों का कुछ नहीं बिगाड़ सकते। इसके अलावा सुनने में आया है कि भास्कर प्रबंधन पर मजीठिया को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले कर्मचारियों का फैमिली बैकग्राउंड भी इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। इससे तो ऐसा लग रहा है जैसे दैनिक भास्कर प्रबंधन इनमें से कुंआरे कर्मचारियों की शादी का इंतजाम भी कराने वाला है। मगर उन्हें यह नहीं पता कि अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले भास्कर के ये कर्मचारी किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं। दूसरी ओर अगर भास्कर प्रबंधन ने उन्हें किसी तरह प्रताड़ित करने का प्रयास किया तो इन कर्मचारियों ने भास्कर के मालिकों को नया नोटिस जारी कराने की दिशा में भी पूरी तैयारी की हुई है।

भास्कर टीम हिसार यूनिट की तरफ से भेजे गए मेल पर आधारित.

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मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास की जंग : लीगल नोटिस भेजने के बाद अब याचिका दायर

Yashwant Singh : पिछले कुछ हफ्तों से सांस लेने की फुर्सत नहीं. वजह. प्रिंट मीडिया के कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उनका हक दिलाने के लिए भड़ास की पहल पर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया में इनवाल्व होना. सैकड़ों साथियों ने गोपनीय और दर्जनों साथियों ने खुलकर मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास के साथ सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला लिया है. सभी ने छह छह हजार रुपये जमा किए हैं. 31 जनवरी को दर्जनों पत्रकार साथी दिल्ली आए और एडवोकेट उमेश शर्मा के बाराखंभा रोड स्थित न्यू दिल्ली हाउस के चेंबर में उपस्थित होकर अपनी अपनी याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने के बाद लौट गए. इन साथियों के बीच आपस में परिचय हुआ और मजबूती से लड़ने का संकल्प लिया गया.

(भड़ास की पहल पर मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर शुरू हुई लड़ाई के तहत मीडिया हाउसों के मालिकों को लीगल नोटिस भेज दिया गया. दैनिक भास्कर के मालिकों को भेजे गए लीगल नोटिस का एक अंश यहां देख पढ़ सकते हैं)

ताजी सूचना ये है कि लीगल नोटिस संबंधित मीडिया संस्थानों को भेजे जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की प्रक्रिया चल रही है. पांच और छह फरवरी को पूरे दिन यह प्रक्रिया चली और चलेगी. बचा-खुचा काम सात फरवरी को पूरा हो जाएगा जो कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में याचिका दायर करने का अंतिम दिन है. जितने भी साथियों ने खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने के लिए आवेदन किया है, उन सबके नाम पता संस्थान आदि को चेक करते हुए उनकी एक फाइल बनाकर अपडेट रखने का काम हम लोग करते रहे. कोई संस्थान नोटिस भेजने और याचिका में छूट न जाए इसलिए हर एक के अथारिटी लेटर व आवेदन को बार-बार चेक करते रहे. उधर, एडवोकेट उमेश शर्मा लीगल नोटिस बनाने, भेजने से लेकर याचिका तैयार करने में दिन रात जुटे रहे. अपने सहायक यशपाल के साथ एडवोकेट उमेश शर्मा ने दिन के अलावा रात-रात भर काम किया. परसों रात 11 बजे मैं खुद बाराखंभा रोड से लौटा क्योंकि गोपनीय रूप से लड़ने वाले लोगों की याचिका पर मुझे साइन करना था, साथ ही सभी याचिकाओं पर संबंधित संस्थानों के मालिकों के नाम-पते सही हों, यह चेक करना था.

इस तरह कड़ी मेहनत रंग लाने लगी है. नई खबर ये है कि कई पत्रकार साथियों ने अलग-अलग वकीलों के जरिए भी अपने अपने संस्थानों के खिलाफ खुलकर याचिकाएं दायर की हैं. जो याचिकाएं पहले से दायर हो चुकी हैं, उन पर आज सुनवाई है. जो याचिकाएं कल और आज में दायर हो रही हैं या दायर की जा चुकी हैं, उनकी लिस्टिंग आदि की प्रक्रिया होने के बाद पता चलेगा कि सुनवाई की तारीख कब है. यह संभावना जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़ी सारी याचिकाओं को एक साथ मिलाकर सुनवाई करने का फैसला लिया जाएगा ताकि सुनवाई में देरी न हो, सुप्रीम कोर्ट का भी टाइम बचे और मीडिया मालिकों को अलग-अलग झूठ बोलने गढ़ने का मौका न मिल सके. इस तरह सभी पीड़ितों के साथ न्याय होने की पूरी संभावना है.

आज यानि छह फरवरी को मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई केसों की सुनवाई है.. आज सुप्रीम कोर्ट में अखबार मालिकों के खिलाफ अवमानना के तीन और मामले सुनवाई के लिए आ रहे हैं. इन मामलों की सुनवाई माननीय न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्‍यायमूर्ति अरूण मिश्रा की खंडपीठ वाली अदालत संख्‍या 7 में होगी. केस नंबर 33, 34 और 38 ऑफ 2015 को सुनवाई का आइटम नंबर 10 है. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डिटेल इस प्रकार है…

COURT NO. 7
HON’BLE MR. JUSTICE RANJAN GOGOI
HON’BLE MR. JUSTICE ARUN MISHRA
PART A – MISCELLANEOUS MATTERS
10. CONMT.PET.(C) NO. 33/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
1ST LISTING
LAKSHMAN RAUT AND ORS
VS.
SHOBNA BHARTI AND ORS
(WITH OFFICE REPORT)
MR. AVIJIT
BHATTACHARJEE
WITH
CONMT.PET.(C) NO. 34/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
JAGJEET RANA
VS.
SANJAY GUPTA AND ANR
(OFFICE REPORT)
MR. DINESH KUMAR GARG
CONMT.PET.(C) NO. 38/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
RAJIV RANJAN SINHA & ANR.
VS.
CHAIRMAN D.B. CORP. LTD. & ANR.
(OFFICE REPORT)
DR. KAILASH CHAND

ज्ञात हो कि 6 फरवरी को हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की मालकिन याोभना भरतिया के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने के मामले की सुनवाई है. भरतिया के खिलाफ कोर्ट नंबर 7 में आइटम नंबर 10 के तहत सुनवाई होगी. इसका केस नंबर 33 है. इसके शिकायतकर्ता लक्ष्‍मण राउत एवं अन्‍य हैं. हिमांशु शर्मा ने फेसबुक पर लिखा है: ”There are 6 fresh Contempt petitions filed in Supream Court of india. Three are against Daink Jagran with Diary No. 2515/15, 2795/15 and 3370/15. Two are against Dainik Bhaskar DN. 3633/15 and 3634/15 . And one against Patrika DN 2643/15. I hope many more to come in few days.”

कुल मिलाकर कहने का आशय ये है कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अखबारों के मालिक बुरी तरह घिर गए हैं और इन्हें अब दाएं बाएं करके निकल लेने का मौका नहीं मिलने वाला. रही सही कसर भड़ास ने पूरी कर दी है. खासकर गोपनीय लोगों की लड़ाई को लड़ने का तरीका इजाद कर भड़ास ने मीडिया मालिकों को बुरी तरह बैकफुट पर ला दिया है. इस पूरे अभियान के लिए तारीफ के जो असली हकदार हैं वो हैं एडवोकेट उमेश शर्मा. इन्होंने यूं ही बातचीत के दौरान एक रोज एक झटके में यह फैसला ले लिया कि वह बेहद कम दाम पर देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ेंगे. उनके फैसला लेते ही भड़ास ने इस पहल को हर मीडियाकर्मी तक पहुंचाने का फैसला लिया और इस तरह हम सब आप मिल जुल कर अभियान में लग गए, जुट गए.  

(मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा ने दिन-रात एक कर लीगल नोटिस भिजवाने के बाद अब याचिका दायर करा दिया है. उमेश शर्मा का कहना है कि उन्हें पीड़ित मीडिया कर्मियों को जीत दिलाने और मालिकों को हारत-झुकता देखने में खुशी होगी, ताकि एक मिसाल कायम हो सके कि जो न्याय के लिए लड़ेगा, वह जीतेगा और बेइमानी करने वाले अंततः हारेंगे.)

एक बात और कहना चाहूंगा. वो ये कि जिन लोगों ने अभी तक खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें भी साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. एडवोकेट उमेश शर्मा जी ने आश्वासन दिया है कि जो साथी बच गए हैं या सोचते ही रह गए हैं, उनके लिए भी रास्ता निकाला जाएगा. इस बारे में सूचना जल्द दी जाएगी. इसलिए जो साथी जुड़ चुके हैं, वो तो प्रसन्न रहें ही, जो नहीं जुड़ पाए हैं, वो निराश न हों, उनके लिए एक नया फारमेट तैयार किया जा रहा है, जिसकी सूचना जल्द भड़ास के माध्यम से दी जाएगी.

आखिर में… मजीठिया के लिए भड़ास की लड़ाई पर एक साथी ने भड़ास के पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए जो मेल भेजा है, उसे नीचे दिया जा रहा है. इस उदगार में नोटिस मिलने वाला है, का जो जिक्र किया गया है, उसको लेकर यह बता दूं कि इन दोनों अखबारों के मालिकों समेत ज्यादातर मीडिया मालिकों को लीगल नोटिस जा चुका है और याचिका दायर लगभग की जा चुकी है… पढ़िए, भड़ास के साथ मजीठिया के लिए लड़ रहे एक साथी के उदगार…


” हल्ला बोल : जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, बारां, बूंदी, झालावाड़ के पत्रकार हुए एकजुट… अब क्या बतायें. जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि राजस्थान के इन खबरदारों के अंदर कभी खुद के लिये भी कोई इंकलाब आएगा। लेकिन जो खो गया था या मर गया था, वो जिंदा हो गया है। देर से ही सही, दोनों अखबारों के पत्रकारों ने अबकी बार हल्ला बोल मचा दिया है। जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, बारां, बूंदी, झालावाड़ से सूचना है कि राजस्थान पत्रिका व दैनिक भास्कर के पत्रकार भाईयों ने प्रबंधन के खिलाफ एकजुट होकर मजीठिया आयोग की सिफारिशों को लागू करने की एकजुट मांग को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में गुहार लगा दी है। जल्द ही मालिकों को नोटिस पर नोटिस मिलने वाले है। इस गुहार के बाद प्रबंधन का प्रकोप अब किस रूप मे और कैसे निकलता है, ये देखना होगा। इसके इंतजार में वे तमाम पत्रकार कैसे हल्ला बोल करते हैं, ये उनके ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेवारी है क्योंकि अब सबसे बड़ा सवाल उनकी एकजुटता तोड़ने के लिये किया जायेगा। पत्रकारों का बढा हुआ कदम अब आगे और कितना पुख्ता होगा यह सब भविष्य की मुट्ठी में कैद है।

जो हाथों में कलम और कंधो पे आँखे रखते है
राजनीति कि भट्टी में जो गर्म सलाखें रखते है
ऐसे देश के वीरों को में शत शत शीश झुकाता हूँ
आंसू भी लिखना चाहूँ तो अंगारे लिख जाता हूँ

अखबारों के दफ्तरों की ऊँची अट्टालिकाओं पे तुमने ये जो इंकलाब की झंडियां लगाई है, ये बड़े हिम्मत की कोशिश है, इन कोशिशों को बनाये रखना। उपर वाला करे, इन्साफ तुम्हारे हक में हो…। यशवंत सिंह, आपके नाम का इस्तमाल करने की गुस्ताखी कर रहा हूं… माफ़ करना बड़े भाई… लेकिन आज आपकी वजह से हमें हिम्मत है…. अब हम आपके नाम को जिंदा रखेंगे…. अखबार के मालिकों, अब करो मुकाबला… अब यहां का हर पत्रकार यशवंत सिंह है… ”


भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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लाला लाजपत राय को भाजपाई पटका पहनाने के मामले में कोर्ट ने किरण बेदी के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा मांगा

किरण बेदी अपनी मूर्खताओं, झूठ, बड़बोलापन और अवसरवाद के कारण बुरी तरह घिरती फंसती जा रही है. पिछले दिनों नामांकन से पहले किरण बेदी ने स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की प्रतिमा को भगवा-भाजपाई पटका पहना दिया. इस घटनाक्रम की तस्वीरों के साथ एक कारोबारी सुरेश खंडेलवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के जाने-माने वकील हिमाल अख्तर के माध्यम से किरण बेदी को कानूनी नोटिस भिजवाया फिर कोर्ट में मुकदमा कर दिया. इनका कहना है कि लाला लाजपत राय किसी पार्टी के प्रापर्टी नहीं बल्कि पूरे देश के नेता रहे हैं. ऐसे में किसी एक पार्टी का बैनर उनके गले में टांग देना उनका अपमान है.

इस मामले में दायर मुकदमें को संज्ञान लेने हुए आज कोर्ट ने पुलिस को किरण बेदी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के संबंधि में पूछा है कि पुलिस ने क्या क्या किया है अब तक, इस बारे में रिपोर्ट पेश करे. सुनवाई की अगली तारीख 18 फरवरी है. उपर कोर्ट का आदेश है. नीचे पूरे मामले से संबंधित तस्वीर, अखबारी कटिंग, कंप्लेन और लीगल नोटिस का प्रकाशन किया जा रहा है. इस मामले में किसी अन्य जानकारी के लिए वरिष्ठ वकील हिमाल अख्तर से संपर्क उनके मोबाइल नंबर 09810456889 के जरिए किया जा सकता है.

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किरण बेदी का पुलिसिया अंदाज़ देखकर मैं हैरान था : रवीश कुमार

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मजीठिया वेज बोर्ड पाने के लिए गोपनीय रूप से लड़ाई लड़ें, आखिरी मौका 31 जनवरी तक

मजीठिया वेज बोर्ड पाने के लिए भड़ास की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जाने हेतु आखिरी मौके की तारीख वकील उमेश शर्मा जी की सहमति से बढ़ाई जा रही है. अब आप 31 जनवरी तक इस लड़ाई में गोपनीय / हिडेन / रूप से शिरकत कर सकते हैं. आपको करना सिर्फ इतना है कि नीचे दिए गए अथारिटी लेटर को डाउनलोड कर / सेव एज करके प्रिंट कर लें और उसमें अपने इंप्लायमेंट डिटेल विस्तार से लिखकर (2010 से कब-कब कहां-कहां किन-किन पदों पर रहे हैं) रख लें.

इसके बाद छह हजार रुपये एडवोकेट उमेश शर्मा के निजी एकाउंट में जमा करा दें. एकाउंट नंबर है-

Name Umesh Sharma
Account no. 07081840000060
Bank HDFC
Branch Ground Floor, DCM Building, Barakhamba Road, New Delhi-110001
MICR No. 110240096
IFSC Code HDFC0000708

बैंक डिपोजिट स्लिप को अटैच करके भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के पास yashwant@bhadas4media.com मेल से भेज दें ताकि यह गारंटी हो सके कि आपने फीस जमा करा दिया है.

अथारिटी लेटर में ‘डिटेल्स आफ इंप्लायमेंट’ कालम में आप वर्तमान संस्थान में कार्य करने की तारीख और इसके पहले के संस्थानों में काम करने की अवधि का विवरण दें, साथ ही उन संस्थानों का पत्राचार का पता लिखें. अथारिटी लेटर भरने, साइन करने के बाद उसे दुबारा स्कैन करा लें और उस स्कैन अथारिटी लेटर को मेल से अटैच करके भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह yashwant@bhadas4media.com को मेल कर दें. ओरीजनल अथारिटी लेटर को कूरियर या स्पीड पोस्ट के जरिए नीचे दिए गए पते पर भेज दीजिए.

Yashwant c/o Advocate Umesh Sharma
112, New Delhi House
27, Barakhambha Road
Connaught Place
New Delhi-110001

ये तो रही उनकी बात जो गोपनीय रूप से लड़ना चाहते हैं. जो लोग खुलकर लड़ना चाहते हैं वे छह हजार रुपये नगद लेकर और अपने सारे डाक्यूमेंट्स की फोटोकापी लेकर 31 जनवरी को दिल्ली पहुंचे. अन्य जानकारियां इस शीर्षक पर क्लिक करके जान सकते हैं….

भड़ास के साथ मजीठिया वेज बोर्ड के लिए खुलकर लड़ने वालों के लिए सूचना, 31 जनवरी को दिल्ली पहुंचें

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हाईकोर्ट जज ने लीगल मैग्जीन छापने वाले विनय राय और राजश्री राय समेत पूरे संपादकीय व प्रकाशन स्टाफ को भेजा लीगल नोटिस

राजश्री राय और विनय राय एक मैग्जीन निकालते हैं. लीगल मामले की इस मैग्जीन में दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के बेटे के खिलाफ खबर छापी गई. जज ने इसे संज्ञान लिया और खबर को पूरी तरह गलत, निराधार और बेहूदा बताते हुए मैग्जीन के समस्त स्टाफ को लीगल नोटिस भेजा है. दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि मैग्जीन को जब्त कर लिया जाए और इसके वितरण को रोका जाए. अपने आठ पेज के आदेश में जज ने झूठी स्टोरी को लेकर अपनी सफाई देते हुए न्यायपालिका की गरिमा का हवाला दिया है और कहा है कि मनगढ़ंत खबर छापकर उनकी और उनके परिवार की छवि तो धूमिल किया जा रहा है.

मैग्जीन का प्रकाशन ई एन कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के बैनर तले होता है जिसके डायरेक्टर विनय राय हैं और मैनेजिंग डायरेक्टर राजश्री राय हैं. मैग्जीन के प्रधान संपादक इंद्रजीत बधवार, मैनेजिंग एडिटर रमेश मेनन, डिप्टी मैनेजिंग एडिटर शोभा जान, सीनियर एडिटर विश्वास कुमार, कांट्रीब्यूटिंग एडिटर गिरीश निकम, एसोसिएट एडिटर मेहा माथुर, डिप्टी एडिटर प्रबीर बिश्वास, असिस्टेंट एडिटर सोमी दास, सब एडिटर आर पार्वती, फोटोग्राफर अनिल शाक्य हैं. इन सभी लोगों को लीगल नोटिस जज की तरफ से भेजा गया है. साथ ही मैग्जीन को प्रकाशित करने वाले राजू सरीन और ग्राफिक्स आदि के काम देखने वाली कंपनी को भी लीगल नोटिस भेजा गया है. जज ने इन सभी को कोर्ट के आपराधिक अवमानना का दोषी बताया है.

पूरी खबर टाइम्स आफ इंडिया में प्रकाशित हुई है, जो इस प्रकार है….

HC judge slaps contempt charge against legal magazine

Dhananjay Mahapatra, TNN, Oct 27, 2014

NEW DELHI: Taking strong exception to a legal news magazine’s “mischievous and outrageous allegations” against his son, a Delhi high court judge has initiated contempt proceedings against the entire editorial staff of the periodical and gagged both print and electronic media from circulating the ‘false’ story.

In his October 10 order, the judge said: “On enquiry from my son, I have been informed that the club has been given licence by the company (sic) in favour of M/s Enriched Reality Developers Pvt Ltd vide licence deed dated March 6, 2014 and my son is in no way connected with the said club in any capacity or in any manner whatsoever.”

The magazine had alleged that because the judge’s son had a stake in the said club, it operated beyond the scheduled closure time in the night without inviting any penal action from police.

In the order, the judge said: “In the light of the above, I am of the considered view that the publishing house namely E N Communication Pvt Ltd, Rajashri Rai (managing director) for E N Communications Pvt Ltd, Vinay Rai (director), Inderjit Badhwar (editor-in-chief), Ramesh Menon (managing editor), Shonha John (deputy managing editor), Vishwas Kumar (senior editor), Girish Nikam (contributing editor), Meha Mathur (associate editor), Prabir Biswas (deputy editor), Somi Das (assistant editor), R Parvathy (sub-editor), Anil Shakya (photographer), Cirrus Graphics Pvt ltd and Raju Sarin (publisher) have committed gross criminal contempt of court.

“Accordingly, I issue notices to all the aforesaid persons… Since I have issued notices of criminal contempt against the noticee (respondents), the matter shall be placed before the roster bench dealing with criminal contempt after obtaining orders from the Chief Justice.”

“With a view to prevent any further onslaught on my image and the image of judiciary, I direct the respondents to stop publishing and circulating the said edition forthwith”, he said.

“I also direct the commissioner of police to immediately seize and confiscate the entire stock of this edition from all offices of the aforesaid publishing house whether located in Delhi or elsewhere as per the information given in the magazine itself and from the printing press of Cirrus Graphics Pvt Ltd, publishers on behalf of E N Communications Pvt Ltd,” he ordered.

“I also direct that no news containing this matter shall be published, appear, transmitted, communicated or aired in any manner or whatsoever in the print media or the electronic media or worldwide web/internet, emails, blogs and etc,” he said.

On the content of the report in the magazine, the judge said: “It is beyond my comprehension to gauge as to what objectives and at whose motivation and agenda such a scandalous, defamatory article has been published, but that there is no doubt in my mind that one of the objective appears to be to damage, discredit me and my family and above all to bring into disrepute the judiciary as a whole for some ulterior motives. Such an irresponsible, reckless and contemptuous article is bound to shatter the faith of the common man in the administration of justice,” he said in his eight-page order.

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बकाया पैसा मारे बैठे ‘नेशनल दुनिया’ को पत्रकार राजेंद्र सेन ने लीगल नोटिस भेजा

राजस्थान के बीकानेर निवासी पत्रकार राजेंद्र सेन ने सूचित किया है कि उनका बकाया पैसा नेशनल दुनिया अखबार नहीं दे रहा है. उन्होंने वर्ष 2013 के अगस्त में नेशनल दुनिया समाचार पत्र जयपुर के संपादक मनोज माथुर की सहमति से बीकानेर डिवीजन में ज्वाइन किया था. बीस हजार रुपये प्रतिमाह वेतन तय था और समाचर में छपने वाले फोटो के पचास रुपये अलग से देना तय हुआ.

इसके बाद अक्टूबर माह में राजेंद्र को एग्रीमेंट करने के लिए जयपुर बुलाया गया. उन्होंने एग्रीमेंट साइन कर दिया. प्रबंधन ने कहा कि उन्हें एग्रीमेंट डाक से भिजवा देंगे पर आजतक एग्रीमेंट नहीं भेजा गया और न ही मिला. विधानसभा चुनाव 2013 के दौरान जनरल मैनेजर मनीष अवस्थी ने विज्ञापन के नाम पर प्रताड़ित करने की कोशिश की. फरवरी माह में आजिज आकर प्रबंधन को राजेंद्र सेन ने अपना इस्तीफा भेज दिया. लेकिन आज तक दो माह का बकाया वेतन और सितंबर 2013 से फरवरी 2014 तक प्रति माह दो हजार रुपये की जो कटौती की गई उस पैसे का भुगतान नहीं मिला है. नेशनल दुनिया के पदाधिकारियों ने बकाया भुगतान के लिए फोन करने पर फोन उठाना बंद कर दिया है. ऐसे में राजेंद्र ने पिछले माह अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस लीगल भिजवा दिया है.

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नवीन जिंदल ने सुभाष चंद्रा को भेजा कानूनी नोटिस, भड़काऊ भाषण का आरोप, पेड न्यूज की शिकायत

हिसार : कांग्रेस प्रचार एवं प्रकाशन समिति के चेयरमैन और कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद नवीन जिंदल ने जी टेली मीडिया के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा पर भड़काऊ व जनता को गुमराह करने वाला भाषण देने का आरोप लगाते हुए उन्हें कानून नोटिस भेजा है। उन्होंने हिसार में चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई जाने का आरोप लगाते हुए हिसार शहर में 15 अक्तूबर तक जी न्यूज और सिटी केबल के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग भी की है। इस बारे में जिंदल हाउस से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि गत 4 अक्तूबर को जहाजपुल के पास हिसार आरा एसोसिएशन के कार्यक्रम में सुभाष चंद्रा ने भड़काऊ और जनता को गुमराह करने वाला भाषण देते हुए जिंदल परिवार पर इलियट क्लब से संबंधित जमीन के बारे में बेबुनियाद आरोप लगाया था।

नवीन जिंदल ने इस पर आपत्ति जताते हुए अपने कानूनी नोटिस में लिखा है कि यह जमीन अभी भी हरियाणा सरकार के नाम है जो पूर्व ऊर्जामंत्री ओपी जिदल को श्रद्धांजलि स्वरूप 31 अक्तूबर, 2005 को ओपी जिंदल स्मारक, योग केंद्र और सार्वजनिक पार्क बनाने के लिए ओपी जिंदल फाउंडेशन को दी गई थी।

हिसार शहर से कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री जिंदल ने भी सुभाष चंद्रा, जी टीवी एवं सिटी केबल पर पेड न्यूज चलाकर चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से शिकायत की है। कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि जी टीवी और सिटी केबल एक पार्टी के प्रत्याशी का लगातार प्रचार कर पेड न्यूज श्रेणी में चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं।

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