‘नेशनल दुनिया’ अखबार के कर्मी न्याय के लिए आज भी भटक रहे, मालिक शलैंद्र भदौरिया पूरे तंत्र को मुंह चिढ़ा रहा

सेवा में,
उप श्रमायुक्त
श्रम विभाग
गौतमबुद्ध नगर, नोएडा
(उत्तर प्रदेश)

विषय- कर्मचारियों को एसबी मीडिया प्रा. लि. प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के प्रति अनियमितताएं एवं वेतन भुगतान न होने के संबंध में ज्ञापन

महोदय,

आपके ध्यानार्थ निवेदन है कि अधोलिखित कर्मचारी डब्ल्यू-23 सेक्टर-11 स्थित एसबी मीडिया प्रा. लि. द्वारा संचालित नेशनल दुनिया सामाचार पत्र में कार्यरत रहे हैं। अप्रैल 2012 से संस्थान द्वारा बकायादा नौकरी पर रखे गए। ये सभी लोग गैर पत्रकार एवं पत्रकार कर्मचारियों का लगातार कार्य करते रहे। हम सभी लोगों के साथ घोर अनियमितताएं की गईं। हम लोग निरंतर दैनिक रूप से हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराते रहे। हालांकि शुरू में इलेक्ट्रानिक माध्यम से उपस्थिति दर्ज होती थी, तब बायो मैट्रिक विधि थी। हम लोग नियमित रूप से दैनिक समाचार पत्र नेशनल दुनिया के प्रत्येक विभाग के कार्य को संपादित करते रहे।

लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यालय में ताला लगा दिया गया। हम सभी लोगों को मासिक सैलरी का पिछले 15 महीनों से भुगतान नहीं किया गया। कर्मचारियों का विगत चार वर्षोंं से लगातार प्रोविडेंट फंड काटा जाता रहा लेकिन संबंधित कार्यालय में जमा नहीं कराया गया। इनकम टैक्स काटा गया लेकिन फार्म 16 आदि नहीं दिया गया। तरह-तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

कई निकाले गए लोगों के फुल एंड फाइनल का चेक दिया गया जो बैंक में बाउंस हो गया। कुछ लोगों ने इस्तीफा दिया उनका भी बकाया नहीं दिया गया है। इसको लेकर कई बार निदेशक श्री शैलेंद्र भदौरिया तथा श्रीमति सुरभि भदौरिया के साथ बैठकों व अन्य उच्च अधिकारियों से मिलने के बाद भी आश्वासन दिया गया लेकिन कार्यान्वन नहीं किया गया। यही नहीं समय-समय पर कंपनी से निकालने, कंपनी बंद करा देने, मरवा देने आदि प्रकार की धमकियां दी गईं। हमारे पास आज न तो रोजगार है और न ही आमदनी का कोई सोत्र। ऐसे में परिवार को चला पाना बेहद मुश्किल है। आपसे विनम्र निवेदन है कि आप हमारी समस्या समझते हुए बकाया वेतन, प्रोविडेंट फंड, टैक्स सर्टिफिकेट, निकाले गए कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल दिलाने का कष्ट करें। साथ ही मार्गदर्शन करें।

धन्यवाद सहित

भवदीय (सभी प्रार्थी और प्रताड़ित कर्मचारी)

-श्री चंद्र कुमार (श्री चंद्र)
-प्रभात कुमार मिश्रा
-धीरेंद्र कुमार मिश्रा
-गणपत सिंह चौहान
-रंजीत सिंह
-बसंत जोशी
-दीपांकर जैन
-त्रिलोक रावत
-राकेश शर्मा
-नंदन उप्रेती
-अनूप पांडे
-ज्योति दुबे
-ओंकार सिंह
-अनिल शर्मा
-जगदीश चंद्रा
-अनिल पांडे
-अरूण कुमार
-अमलेंदू भूषण
-प्रकाश सिंह
-सुरेश
-मनोजअग्रवाल
-संगीता काला

प्रतिलिपि :
प्रधानमंत्री कार्यालय
मुख्यमंत्री कार्यालय
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
मानव संसाधन मंत्रालय
एसएसपी (गौतमबुद्ध नगर)
जिला अधिकारी (गौतमबुद्ध नगर)
निकट थाना अध्यक्ष,

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प्रतिमा भार्गव केस में प्रेस काउंसिल ने दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट को दोषी ठहराते हुए लताड़ा, …लेकिन बेशर्मों को शर्म कहां!

आगरा की रहने वाली प्रतिमा भार्गव ने मीडिया के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई जीत ली है. लेकिन दुख इस बात का है कि बेशर्म मीडिया वाले इस खबर को कतई नहीं छापेंगे. अगर इनमें थोड़ी भी नैतिकता होती तो प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के इस फैसले को न सिर्फ प्रकाशित करते बल्कि खुद के पतने पर चिंता जताते, विमर्श करते. प्रतिमा भार्गव के खिलाफ एक फर्जी खबर दैनिक जागरण आगरा और आई-नेक्स्ट आगरा ने प्रमुखता से प्रकाशित किया. अनाप-शनाप आरोप लगाए.

प्रतिमा से कोई पक्ष नहीं लिया गया. खबर छपने के बाद जब प्रतिमा ने अपना पक्ष छपवाना चाहा तो दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट के संपादकों ने इनकार कर दिया. प्रतिमा ने लीगल नोटिस भेजा अखबार को तो इसकी भी परवाह नहीं की. अंत में थक हारकर प्रतिमा ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया में केस किया और वकीलों के साथ प्रजेंट हुई. अपनी पूरी बात बताई. प्रेस काउंसिल ने कई बार दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट के संपादकों को बुलाया लेकिन ये लोग नहीं आए.

अब जाकर प्रेस काउंसिल ने आदेश किया है कि दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट ने प्रतिमा भार्गव के मामले में पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन किया है. इस बाबत उचित कार्रवाई के लिए RNI एवं DAVP को आर्डर की पूरी कापी प्रेषित की है. साथ ही आदेश की कापी दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट के संपादकों-मालिकों को भी रवाना कर दिया है. क्या दैनिक जागरण का संपादक संजय गुप्ता और आई-नेक्स्ट का संपादक आलोक सांवल इस फैसले को अपने अखबार में छाप सकेंगे? क्या इनमें तनिक भी पत्रकारीय नैतिकता और सरोकार शेष है? क्या ये एक पीड़ित महिला ने सिस्टम के नियम-कानून को मानते हुए जो न्याय की लड़ाई लड़ी है और उसमें जीत हासिल की है, उसका सम्मान करते हुए माफीनामा प्रकाशित करेंगे व उसकी खराब हुई छवि को दुरुस्त करने के लिए प्रयास करेंगे?

शायद नहीं. इसलिए क्योंकि इसी को कहते हैं कारपोरेट जर्नलिज्म, जहां सरोकार से ज्यादा बड़ा होता है पैसा. जहां पत्रकारिता के मूल्यों से ज्यादा बड़ा होता है धन का अहंकार. जहां आम जन की पीड़ा से ज्यादा बड़ी चीज होती है अपनी खोखली इज्जत. प्रतिमा ने जो लड़ाई लड़ी है और उसमें जीत हासिल की है, उसके लिए वह न सिर्फ सराहना की पात्र हैं बल्कि हम सबका उन्हें एक सैल्यूट भी देना बनता है. अब आप सब सजेस्ट करें कि आगे प्रतिमा को क्या करना चाहिए.

क्या उन्हें दिल्ली आकर पूरे मामले पर प्रेस कांफ्रेंस करना चाहिए? क्या उन्हें सुप्रीम कोर्ट में इस बात के लिए केस करना चाहिए कि अगर ये दोषी अखबार माफीनामा नहीं छापते हैं तो कोई पीड़ित क्या करे? आप सभी अपनी राय दें, सुझाव दें क्योंकि ये कोई एक प्रतिमा का मामला नहीं है. ऐसे केस हजारों की संख्या में हैं लेकिन लोग लड़ते नहीं, देर तक अड़े नहीं रह पाते, लड़ाई को हर स्टेज तक नहीं ले जा पाते. प्रतिमा ने ऐसा किया और इसमें उनका काफी समय व धन लगा, लेकिन उन्होंने अपने पक्ष में न्याय हासिल किया. अब उन्हें आगे भी लड़ाई इस मसले पर लड़नी चाहिए तो कैसे लड़ें, कहां लड़ें या अब घर बैठ जाएं?

कहने वाले ये भी कहते हैं कि संजय गुप्ता और आलोक सांवल दरअसल संपादक हैं ही नहीं, इसलिए इनकी चमड़ी पर कोई असर नहीं पड़ता. संजय गुप्ता चूंकि नरेंद्र मोहन के बेटे हैं इसलिए जन्मना मालिक होने के कारण उन्हें संपादक पद दे दिया गया, पारिवारिक गिफ्ट के रूप में. आलोक सांवल मार्केटिंग और ब्रांडिंग का आदमी रहा है, साथ ही गुप्ताज का प्रियपात्र भी, इसलिए उसे थमा दिया गया आई-नेक्स्ट का संपादक पद.

यही कारण है कि इनमें संपादकों वाली संवेदनशीलता और सरोकार कतई नहीं हैं. ये सिर्फ अपनी कंपनी का बिजनेस इंट्रेस्ट देखते हैं और अखबार का प्रसार अधिकतम बना रहे, इसकी चिंता करते हैं. इनके पहाड़ जैसे अवैध साम्राज्य के नीचे हजार दो हजार आम जन दम तोड़ दें तो इनको क्या फरक पड़ने वाला है. खैर, न्याय सबका होता है, सिस्टम नहीं करेगा तो प्रकृित करेगी. वक्त जरूर लग सकता है लेकिन प्राकृतिक न्याय का सामना तो करना ही पड़ेगा. जिस कदर ये महिला प्रतिमा भार्गव पेरशान हुई है, उससे कम परेशानियां ये दोनों शख्स न झेलेंगे, ये तय है, मसला चाहे जो रहे. जै जै. 

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


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एबीपी न्यूज के एडिटर इन चीफ शाजी जमां अपने चैनल में न्याय क्यों नहीं कर रहे?

: कानाफूसी : एबीपी न्यूज चैनल से खबर है कि पीसीआर में कार्यरत एक वरिष्ठ महिला मीडियाकर्मी को इन दिनों न्याय की तलाश है. एडिटर इन चीफ शाजी जमां को सब कुछ पता है. लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा. हुआ ये कि पीसीआर में कार्यरत वरिष्ठ महिला मीडियाकर्मी ने एक रोज अपने फेसबुक पेज पर बिना किसी का नाम लिए यह लिख दिया कि ‘एंकर ने कितना घटिया सवाल पूछा’.

बस, इतना लिखते ही एबीपी न्यूज चैनल की एंकर महोदय इस स्टेटस के नीचे कमेंट बाक्स में अपनी भड़ास निकालने लगीं. सूत्रों का कहना है कि एंकर ने वाकई बहुत घटिया सवाल पूछा था और इस तरह के सवाल का कल्पना कम से कम एबीपी न्यूज के एंकर से तो नहीं की जा सकती थी. फेसबुक पर विवाद बढ़ता देख बाद में आफिस के लोगों ने बीच-बचाव कर एंकर का कमेंट और महिला मीडियाकर्मी का स्टेटस हटवाया व दोनों को शांत कराया. लेकिन इसके बाद बौखलाई एंकर ने एक ग्रुप मेल भेज दिया ढेर सारे लोगों को जिसमें महिला मीडियाकर्मी पर कई तरह के आरोप लांछन लगाए गए थे.

इसे देख पीसीआर की महिला मीडियाकर्मी गुस्सा हो गईं और पुलिस में कंप्लेन कराने को तत्पर हो गईं. तब चैनल के सीनियर्स, जिसमें शाजी जमां भी शामिल हैं, ने महिला मीडियाकर्मी को शांत कराया और आफिस के अंदर ही कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराने और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया. पर कई हफ्ते बीत गए, अब तक न तो आंतरिक जांच कमेटी बनी और न ही कोई कार्रवाई हुई. ऐसे में लोग कहने लगे हैं कि मीडिया के मसलों पर बढ़ चढ़ कर जांच कराने और न्याय दिलाने वाले शाजी जमां अपने चैनल के आंतरिक विवाद में न्याय दिलाने को क्यों तत्पर नहीं हो पा रहे हैं?

कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी सुनाई बातों पर आधारित होती है. कृपया इस पर यकीन करने से पहले अपने स्तर पर तथ्यों को जांच ले. जिस किसी को उपरोक्त बातों में कोई गल्ती / असहमति नजर आती है तो वह अपनी बात नीचे कमेंट बाक्स के जरिए कह सकता है.

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मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास की जंग : लीगल नोटिस भेजने के बाद अब याचिका दायर

Yashwant Singh : पिछले कुछ हफ्तों से सांस लेने की फुर्सत नहीं. वजह. प्रिंट मीडिया के कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उनका हक दिलाने के लिए भड़ास की पहल पर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया में इनवाल्व होना. सैकड़ों साथियों ने गोपनीय और दर्जनों साथियों ने खुलकर मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास के साथ सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला लिया है. सभी ने छह छह हजार रुपये जमा किए हैं. 31 जनवरी को दर्जनों पत्रकार साथी दिल्ली आए और एडवोकेट उमेश शर्मा के बाराखंभा रोड स्थित न्यू दिल्ली हाउस के चेंबर में उपस्थित होकर अपनी अपनी याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने के बाद लौट गए. इन साथियों के बीच आपस में परिचय हुआ और मजबूती से लड़ने का संकल्प लिया गया.

(भड़ास की पहल पर मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर शुरू हुई लड़ाई के तहत मीडिया हाउसों के मालिकों को लीगल नोटिस भेज दिया गया. दैनिक भास्कर के मालिकों को भेजे गए लीगल नोटिस का एक अंश यहां देख पढ़ सकते हैं)

ताजी सूचना ये है कि लीगल नोटिस संबंधित मीडिया संस्थानों को भेजे जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की प्रक्रिया चल रही है. पांच और छह फरवरी को पूरे दिन यह प्रक्रिया चली और चलेगी. बचा-खुचा काम सात फरवरी को पूरा हो जाएगा जो कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में याचिका दायर करने का अंतिम दिन है. जितने भी साथियों ने खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने के लिए आवेदन किया है, उन सबके नाम पता संस्थान आदि को चेक करते हुए उनकी एक फाइल बनाकर अपडेट रखने का काम हम लोग करते रहे. कोई संस्थान नोटिस भेजने और याचिका में छूट न जाए इसलिए हर एक के अथारिटी लेटर व आवेदन को बार-बार चेक करते रहे. उधर, एडवोकेट उमेश शर्मा लीगल नोटिस बनाने, भेजने से लेकर याचिका तैयार करने में दिन रात जुटे रहे. अपने सहायक यशपाल के साथ एडवोकेट उमेश शर्मा ने दिन के अलावा रात-रात भर काम किया. परसों रात 11 बजे मैं खुद बाराखंभा रोड से लौटा क्योंकि गोपनीय रूप से लड़ने वाले लोगों की याचिका पर मुझे साइन करना था, साथ ही सभी याचिकाओं पर संबंधित संस्थानों के मालिकों के नाम-पते सही हों, यह चेक करना था.

इस तरह कड़ी मेहनत रंग लाने लगी है. नई खबर ये है कि कई पत्रकार साथियों ने अलग-अलग वकीलों के जरिए भी अपने अपने संस्थानों के खिलाफ खुलकर याचिकाएं दायर की हैं. जो याचिकाएं पहले से दायर हो चुकी हैं, उन पर आज सुनवाई है. जो याचिकाएं कल और आज में दायर हो रही हैं या दायर की जा चुकी हैं, उनकी लिस्टिंग आदि की प्रक्रिया होने के बाद पता चलेगा कि सुनवाई की तारीख कब है. यह संभावना जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़ी सारी याचिकाओं को एक साथ मिलाकर सुनवाई करने का फैसला लिया जाएगा ताकि सुनवाई में देरी न हो, सुप्रीम कोर्ट का भी टाइम बचे और मीडिया मालिकों को अलग-अलग झूठ बोलने गढ़ने का मौका न मिल सके. इस तरह सभी पीड़ितों के साथ न्याय होने की पूरी संभावना है.

आज यानि छह फरवरी को मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई केसों की सुनवाई है.. आज सुप्रीम कोर्ट में अखबार मालिकों के खिलाफ अवमानना के तीन और मामले सुनवाई के लिए आ रहे हैं. इन मामलों की सुनवाई माननीय न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्‍यायमूर्ति अरूण मिश्रा की खंडपीठ वाली अदालत संख्‍या 7 में होगी. केस नंबर 33, 34 और 38 ऑफ 2015 को सुनवाई का आइटम नंबर 10 है. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डिटेल इस प्रकार है…

COURT NO. 7
HON’BLE MR. JUSTICE RANJAN GOGOI
HON’BLE MR. JUSTICE ARUN MISHRA
PART A – MISCELLANEOUS MATTERS
10. CONMT.PET.(C) NO. 33/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
1ST LISTING
LAKSHMAN RAUT AND ORS
VS.
SHOBNA BHARTI AND ORS
(WITH OFFICE REPORT)
MR. AVIJIT
BHATTACHARJEE
WITH
CONMT.PET.(C) NO. 34/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
JAGJEET RANA
VS.
SANJAY GUPTA AND ANR
(OFFICE REPORT)
MR. DINESH KUMAR GARG
CONMT.PET.(C) NO. 38/2015 IN
W.P.(C) NO. 246/2011
X FRESH-E
RAJIV RANJAN SINHA & ANR.
VS.
CHAIRMAN D.B. CORP. LTD. & ANR.
(OFFICE REPORT)
DR. KAILASH CHAND

ज्ञात हो कि 6 फरवरी को हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की मालकिन याोभना भरतिया के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने के मामले की सुनवाई है. भरतिया के खिलाफ कोर्ट नंबर 7 में आइटम नंबर 10 के तहत सुनवाई होगी. इसका केस नंबर 33 है. इसके शिकायतकर्ता लक्ष्‍मण राउत एवं अन्‍य हैं. हिमांशु शर्मा ने फेसबुक पर लिखा है: ”There are 6 fresh Contempt petitions filed in Supream Court of india. Three are against Daink Jagran with Diary No. 2515/15, 2795/15 and 3370/15. Two are against Dainik Bhaskar DN. 3633/15 and 3634/15 . And one against Patrika DN 2643/15. I hope many more to come in few days.”

कुल मिलाकर कहने का आशय ये है कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अखबारों के मालिक बुरी तरह घिर गए हैं और इन्हें अब दाएं बाएं करके निकल लेने का मौका नहीं मिलने वाला. रही सही कसर भड़ास ने पूरी कर दी है. खासकर गोपनीय लोगों की लड़ाई को लड़ने का तरीका इजाद कर भड़ास ने मीडिया मालिकों को बुरी तरह बैकफुट पर ला दिया है. इस पूरे अभियान के लिए तारीफ के जो असली हकदार हैं वो हैं एडवोकेट उमेश शर्मा. इन्होंने यूं ही बातचीत के दौरान एक रोज एक झटके में यह फैसला ले लिया कि वह बेहद कम दाम पर देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ेंगे. उनके फैसला लेते ही भड़ास ने इस पहल को हर मीडियाकर्मी तक पहुंचाने का फैसला लिया और इस तरह हम सब आप मिल जुल कर अभियान में लग गए, जुट गए.  

(मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा ने दिन-रात एक कर लीगल नोटिस भिजवाने के बाद अब याचिका दायर करा दिया है. उमेश शर्मा का कहना है कि उन्हें पीड़ित मीडिया कर्मियों को जीत दिलाने और मालिकों को हारत-झुकता देखने में खुशी होगी, ताकि एक मिसाल कायम हो सके कि जो न्याय के लिए लड़ेगा, वह जीतेगा और बेइमानी करने वाले अंततः हारेंगे.)

एक बात और कहना चाहूंगा. वो ये कि जिन लोगों ने अभी तक खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें भी साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. एडवोकेट उमेश शर्मा जी ने आश्वासन दिया है कि जो साथी बच गए हैं या सोचते ही रह गए हैं, उनके लिए भी रास्ता निकाला जाएगा. इस बारे में सूचना जल्द दी जाएगी. इसलिए जो साथी जुड़ चुके हैं, वो तो प्रसन्न रहें ही, जो नहीं जुड़ पाए हैं, वो निराश न हों, उनके लिए एक नया फारमेट तैयार किया जा रहा है, जिसकी सूचना जल्द भड़ास के माध्यम से दी जाएगी.

आखिर में… मजीठिया के लिए भड़ास की लड़ाई पर एक साथी ने भड़ास के पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए जो मेल भेजा है, उसे नीचे दिया जा रहा है. इस उदगार में नोटिस मिलने वाला है, का जो जिक्र किया गया है, उसको लेकर यह बता दूं कि इन दोनों अखबारों के मालिकों समेत ज्यादातर मीडिया मालिकों को लीगल नोटिस जा चुका है और याचिका दायर लगभग की जा चुकी है… पढ़िए, भड़ास के साथ मजीठिया के लिए लड़ रहे एक साथी के उदगार…


” हल्ला बोल : जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, बारां, बूंदी, झालावाड़ के पत्रकार हुए एकजुट… अब क्या बतायें. जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि राजस्थान के इन खबरदारों के अंदर कभी खुद के लिये भी कोई इंकलाब आएगा। लेकिन जो खो गया था या मर गया था, वो जिंदा हो गया है। देर से ही सही, दोनों अखबारों के पत्रकारों ने अबकी बार हल्ला बोल मचा दिया है। जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, बारां, बूंदी, झालावाड़ से सूचना है कि राजस्थान पत्रिका व दैनिक भास्कर के पत्रकार भाईयों ने प्रबंधन के खिलाफ एकजुट होकर मजीठिया आयोग की सिफारिशों को लागू करने की एकजुट मांग को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में गुहार लगा दी है। जल्द ही मालिकों को नोटिस पर नोटिस मिलने वाले है। इस गुहार के बाद प्रबंधन का प्रकोप अब किस रूप मे और कैसे निकलता है, ये देखना होगा। इसके इंतजार में वे तमाम पत्रकार कैसे हल्ला बोल करते हैं, ये उनके ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेवारी है क्योंकि अब सबसे बड़ा सवाल उनकी एकजुटता तोड़ने के लिये किया जायेगा। पत्रकारों का बढा हुआ कदम अब आगे और कितना पुख्ता होगा यह सब भविष्य की मुट्ठी में कैद है।

जो हाथों में कलम और कंधो पे आँखे रखते है
राजनीति कि भट्टी में जो गर्म सलाखें रखते है
ऐसे देश के वीरों को में शत शत शीश झुकाता हूँ
आंसू भी लिखना चाहूँ तो अंगारे लिख जाता हूँ

अखबारों के दफ्तरों की ऊँची अट्टालिकाओं पे तुमने ये जो इंकलाब की झंडियां लगाई है, ये बड़े हिम्मत की कोशिश है, इन कोशिशों को बनाये रखना। उपर वाला करे, इन्साफ तुम्हारे हक में हो…। यशवंत सिंह, आपके नाम का इस्तमाल करने की गुस्ताखी कर रहा हूं… माफ़ करना बड़े भाई… लेकिन आज आपकी वजह से हमें हिम्मत है…. अब हम आपके नाम को जिंदा रखेंगे…. अखबार के मालिकों, अब करो मुकाबला… अब यहां का हर पत्रकार यशवंत सिंह है… ”


भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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मजीठिया के लिए भड़ास की जंग : दैनिक भास्कर, हिसार के महावीर ने सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए हस्ताक्षर किया

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संदर्भ- आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की सरकारी घेराबंदी : …नहीं तो शेर खा जाएगा!

बचपन में एक कहानी सुनी थी। हांलाकि कहानी तो कहानी ही यानि मनघड़ंत होती है…मगर उससे कुछ सीख मिल जाए तो क्या बुराई है! कहानी कुछ यूं थी कि एक जंगल में चार भैंसे रहते थे। आपस में बेहद प्यार और मिलजुल कर रहते थे। वहीं एक शेर भी रहता था। जिसका मन उनका शिकार करने को हमेशा बना रहता था। लेकिन उनकी एकता के आगे उसकी कभी न चली। जब भी शेर हमला करता चारों मिलकर उसको खदड़े देते। तभी एक लोमड़ी से शेर की वार्तालाप हुई। लोमड़ी को भी शेर के शिकार में अपने पेट भरने के आसार नज़र आए और उसने शेर से कुछ वादा किया।

लोमड़ी ने एक भैसे से जाकर कुछ देर बात की और उसको समझाया कि तुम इस झुंड के सबसे सीधे सादे सदस्य हो और तुम्हारे हिस्से की घास दूसरे भैंसे चट कर जाते हैं। ये लोग तुम्हारे दोस्त ज़रूर हैं…. मगर हैं मतलबी। लोमड़ी ने एक एक करके चारों भैसों के पास जाकर यही बात उनसे कही।

कुछ ही दिनों बाद चारों भैसों में मनमुटाव हो गया… सभी एक दूसरे से खिचें खिचें और दूर रहने लगे। सब की कोशिश यही रहती थी कि अपना पेट भरें और दूसरे से पहले घास चर लें।

इस दौरान एक दिन शेर ने एक भैंसे पर हमला किया तो बाक़ी तीन तमाशा देखते रहे। नतीजा वही हुआ जिसको शेर का इंतज़ार था। कुछ ही दिनों में बड़े ही आराम से एक एक एक करके चारों का शेर ने शिकार कर लिया।

कहानी याद आने की वजह…. फेसबुक पर उत्तर प्रदेश के एक जुझारु और कप्शन के खिलाफ लड़ने वाले आईपीएस की वॉल पर उनका लेख है…. जिसमें उन्होने अपने ऊपर लगे रेप के झूठे इल्ज़ाम का जिक्र करते हुए शिकायत की है… कि करप्ट सिस्टम के खिलाफ बोलने वालों को झूठे मामलों में फंसाया जाता है। साथ ही इस मामले अपनी पत्नी तक को झूठे आरोपों में फंसाए जाने पर बेहद चिंता ज़ाहिर की है। 

हमारी तमाम हमदर्दी और सहयोग उनके साथ है। ये भी हम जानते हैं कि वो ईमानदार और करप्शन के खिलाफ लड़ने वाले इंसान हैं। इस मौके पर मैं निजी तौर पर उनके साथ हूं और सभी से अपील करता हूं…. कि इस लड़ाई में सड़क पर उतर कर उनका भरपूर साथ दिया जाए। नहीं तो जंगल का करप्ट सिस्टम रूपी शेर….. हमारे ही बीच मौजूद लोमड़ियों की मदद से सभी को एक एक करके खा जाएगा।

साथ ही आज मैं अपने साथियों की कोई शिकायत भी नहीं करूंगा। क्योंकि इसी करप्ट सिस्टम के खिलाफ आवाज़ उठाने की सज़ा मुझको 3 मई 2011 को कई एफआईआर और पुलिस उत्पीड़न के तौर पर सहनी पड़ी थी। और हमारे कई साथी ख़ामोश रहे थे। मेरे खिलाफ झूठे मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस बेनक़ाब हो चुकी है…और हाईकोर्ट के दखल के बाद मामला आज भी कोर्ट में लंबित है। लेकिन मेरे कई साथियों को उस वक्त मेरी बर्बादी का इंतज़ार था। हांलाकि उस वक्त भी भाई यशवंत और भड़ास जैसे कई जाबांज़ पत्रकार साथी पहाड़ की तरह मेरे साथ खड़े थे और आज भी वही लोग ऐसे किसी भी मुक़ाबले को हमेशा तैयार नज़र आते हैं। 

आज ज़ररूत इस बात की है कि अगर एक परिवार झूठे मामलों में फंसाया गया है तो उसका साथ दिया जाए। इस मामले में आप लोगों की तरफ से मेरे लिए कोई भी आदेश या मुझसे संपर्क करने के लिए मेरे नंबर 9718361007 पर या azad11khalid@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

आज़ाद ख़ालिद टीवी पत्रकार हैं सहारा समय, इंडिया टीवी समेत कई न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही बतौर आरटीआई एक्टिविस्ट और समाजिक कार्यकर्ता सामाजिक मुद्दों को लिए संघर्ष करते हैं।


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यूपी में महिला आयोग और मंत्री की सांठगांठ से आईपीएस अमिताभ ठाकुर पर एक और बलात्कार का आरोप!

 

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वाह रे लखनऊ पुलिस! : जो लड़की को बचा रहा था उसे एएसपी पर फायरिंग का आरोपी बना दिया

हमने हजरतगंज, लखनऊ में एएसपी दुर्गेश कुमार पर हुए कथित फायरिंग मामले में अपने स्तर पर जांच की. हमने आरोपी पुलकित के घर जाकर उसके पिता राम सुमिरन शुक्ला, माँ सावित्री शुक्ला, भाई पीयूष शुक्ला तथा अन्य परिचितों से मुलाकात की. इन लोगों ने बताया कि घटना प्रोवोग शॉप के पास हुई जिसमें परिचित लड़की को छेड़े जाते देख पुलकित और साथियों ने बीच-बचाव किया.

तभी पुलिस आ गयी और आपाधापी में बिना समझे पुलकित का एएसपी पर हाथ चल गया. फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया और थाने पर काफी मारा-पीटा गया. यह भी बताया कि गिरफ्तारी की सूचना अगले दिन 11.00 बजे दी गयी. उस रात भी वह लड़की थाना गयी थी पर पुलिस ने उसे भगा दिया था. उन्होंने कहा कि यदि प्रोवोग शॉप के पास के सीसीटीवी फुटेज ले लिए जाएँ तो पूरी बात खुदबखुद साफ़ हो जायेगी. पुलकित के पिता ने स्थानीय पुलिस पर कोई विश्वास नहीं रहने के कारण इसकी विवेचना सीबी-सीआईडी से करवाने की मांग की.

हमने एफआईआर तहरीर और गिरफ़्तारी प्रमाणपत्र देखा. इसमें फायरिंग का उल्लेख है जबकि ना कोई हथियार नहीं मिला और ना खोखा आदि. अतः हमने प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को पत्र लिख कर मामले की सीबी-सीआईडी जांच कराने और दस दिनों में मामले की प्रशासनिक जांच किसी सचिव स्तर के अधिकारी से कराने की मांग की है.

सेवा में,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय- थाना हजरतगंज पर एएसपी और पुलिस पर हुए कथित फायरिंग मामले में श्री पुलकित की गिरफ़्तारी विषयक

महोदय,

पिछले कुछ दिनों से थाना हजरतगंज, जनपद लखनऊ में 23/11/2014 एएसपी श्री दुर्गेश कुमार पर श्री पुलकित शुक्ला तथा तीन अन्य द्वारा फायरिंग करने की घटना के विषय में कई प्रकार की बातें लिखी जा रही थीं. हम अमिताभ और नूतन ठाकुर ने इस सम्बन्ध में दिन भर गहराई से मामले की अपने स्तर पर जांच की. हमने इसके लिए पुलकित के 5/25, 5ई, वृन्दावन कॉलोनी स्थित निवास स्थान भी गए जहां हमें उनके पिता श्री राम सुमिरन शुक्ला (फोन नंबर 098385-78971), माँ सुश्री सावित्री शुक्ला, भाई श्री पियूष शुक्ला (फोन नंबर 098391-30012), मामा बद्री प्रसाद शुक्ला पुत्र श्री महेश नारायण,  719, सीतापुर रोड महायोजना, निकट महादेव रोड, (फोन नंबर #098391-72505) तथा परिचित श्री ए के मिश्रा पुत्र श्री एस पी मिश्रा, 2ए/287, वृन्दावन कॉलोनी (फोन नंबर # 097951-67623 ), श्री आशुतोष ओझा पुत्र श्री गया प्रसाद ओझा, 5 ई, 3/24, वृन्दावन कॉलोनी तथा श्री राजेश कुमार पुत्र श्री दुर्गा प्रसाद, 5ई, 1/225, वृन्दावन कॉलोनी (फोन नंबर # 074088-10980) मिले.

इनमे श्री पुलकित के पिता श्री राम सुमिरन, भाई श्री पियूष, माँ सुश्री सावित्री श्री पुलकित से उनकी गिरफ़्तारी के बाद मिल चुके थे. उन्होंने हमें यह बताया कि श्री पुलकित का कहना है कि यह पूरी घटना हज़रातगंज से थोड़ी दूर पर स्थित Provogue शॉप के पास हुआ. घटना मूल रूप से यह हुई कि एक लड़की, जो उनकी परिचित थी, को कुछ अज्ञात लड़के छेड़ रहे थे, जिस पर इन लोगों ने बीच-बचाव किया जिसके बाद इनमे आपसी कहासुनी शुरू हो गयी. इतने में पुलिस आ गयी और उनमे एक ने श्री पुलकित पर हाथ चलाया. श्री पुलकित यह समझ नहीं पाए कि ऐसा किसने किया और उनका हाथ भी अकस्मात उठ गया. उसने कत्तई जानबूझ कर पुलिस पर हाथ नहीं उठाया था. जैसे ही उसे मालूम हुआ कि उन्होंने गलती से एएसपी साहब पर हाथ चला दिया है, वह एकदम से घबरा गया. फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया. उसने यह भी बताया कि उसे थाने पर काफी मारा-पीटा गया. उसने यह भी कहा कि यदि Provogue शॉप के पास के सीसीटीवी कैमरों के फूटेज ले लिए जाएँ तो पूरी बात खुदबखुद साफ़ हो जायेगी.

श्री राम सुमिरन से बताया कि उन्हें अपने बेटे की गिरफ़्तारी की सूचना दिनांक 24/11/2014 को लगभग 11.00 बजे हजरतगंज थाने के किसी तिवारी जी ने उनके मोबाइल पर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि श्री पुलकित ने कहा कि उसे थाने में बहुत मारा गया. इन लोगों ने यह भी बताया कि उस रात भी वह लड़की स्वयं थाना हजरतगंज गयी थी पर पुलिस ने उसे थाने से भगा दिया था.

हमने इस सम्बन्ध में लड़की से भी उसके मोबाइल नंबर पर बात की और उससे मिलना चाहा पर लड़की ने शायद घबराहट के कारण हमसे मिलने में हिचक दिखाई. लेकिन हमें उस लड़की द्वारा प्रमुख सचिव गृह को दिया प्रार्थनापत्र मिला जिसमे उन्होंने दिनांक 23/11/2014  को शाम की पूरी घटना स्वयं बतायी. उसने बताया कि गिरफ्तार श्री पुलकित आदि उसकी मदद कर रहे थे, ना कि उससे छेड़छाड़. उसने यह भी लिखा है कि पुलिस के अफसर सादे में थे जिनसे श्री पुलकित से झड़प हो गयी. हमने कल हजरतगंज थाने पर आ कर बयान देने वाले श्री विशाल तिवारी से उनके फोन नंबर 097944-15703 पर कई बार फोन किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.

हमने गोपनीय स्तर पर इस मामले के जानकार कई लोगों से बात की. हमने इस मामले में पंजीकृत एफआईआर संख्या 592/2014 धारा 307/354/ख/354घ आईपीसी का तहरीर और गिरफ़्तारी प्रमाणपत्र देखा. इनके अनुसार दिनांक 23/11/2014 को समय 19.40 शाम गिरफ़्तारी हुई है. एफआईआर में फायरिंग का उल्लेख हुआ जबकि अन्य किसी भी स्तर पर किसी भी प्रकार के फायरिंग की कोई बात सामने नहीं आई है. गिरफ़्तारी के फर्द से भी स्पष्ट है कि गिरफ्तार व्यक्ति के पास से कोई हथियार नहीं मिला. यह भी स्पष्ट है कि हथियार के अलावा कोई खोखा आदि भी मौके पर नहीं मिला. गिरफ़्तारी के फर्द में मा० उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार तत्काल गिरफ़्तारी की सूचना परिजनों को देने की बात कही गयी.

श्री पुलकित के पिता श्री राम सुमिरन ने हमें लिखित रूप से एक प्रार्थनापत्र दे कर सभी बातें लिखते हुए बताया कि उन्हें अब स्थानीय पुलिस पर कोई विश्वास नहीं रह गया है और उन्होंने हमें मामले की विवेचना सीबी-सीआईडी से करवाने में मदद करने की प्रार्थना की. उपरोक्त के दृष्टिगत निम्न तथ्य आवश्यक प्रतीत होते हैं-

1. चूँकि मामला लखनऊ पुलिस के एएसपी से सम्बंधित है, अतः इसमें स्थानीय पुलिस की जगह निश्चित रूप से सीबी-सीआईडी से विवेचना कराया जाना प्राकृतिक न्याय की दृष्टि से अनिवार्य प्रतीत होता है

2. विवेचना तत्काल/अविलम्ब सीबी-सीआईडी को दिया जाना न्याय की दृष्टि से अपरिहार्य प्रतीत होता है

3. इस पूरे मामले की प्रशासनिक जांच दस दिन के निश्चित समयावधि में शासन के किसी प्रमुख सचिव/सचिव स्तर के अधिकारी से अलग से करवाने की आवश्यकता प्रतीत होती है

अतः आपसे निवेदन है कि उपरोक्त बिंदु संख्या एक से तीन पर प्रस्तुत तीनों अनुरोधों को स्वीकार करते हुए तदनुसार आदेश निर्गत करने की कृपा करें

डॉ नूतन ठाकुर                          
अमिताभ ठाकुर
मोबाइल: 094155-34525 और 94155-34526
पता: 5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
प्रतिलिपि- पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु

 

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