कलेक्टर ने निरस्त की भोपाल पत्रकार भवन की लीज

भोपाल : जिला कलेक्टर निशान्त बरवडे ने पत्रकार भवन समिति की शिकायत पर ‘पत्रकार भवन, भोपाल’ की लीज निरस्त कर दी है। इससे पूर्व कलेक्टर ने पत्रकार भवन में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पत्रकार भवन प्रबंधन को एक नोटिस दिया था।

सन् 1969 में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल नाम की पत्रकारों की प्रतिष्ठित संस्था थी। इसी संस्था को म.प्र. सरकार ने कलेक्टर सीहोर के माध्यम से राजधानी परियोजना के मालवीय नगर स्थित प्लाट नम्बर एक पर 27007 वर्ग फिट भूमि इस शर्त पर आवंटित की थी कि यूनियन पत्रकारों के सामाजिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक उत्थान व गतिविधियों के लिये इमारत का निर्माण व उसका सुचारू संचालन करेगी। उस समय मुख्य मंत्री पं श्यामाचरण शुक्ल थे।

उसी समय दिल्ली में सक्रिय आईएफडब्लूजे विभिन्न प्रान्तों में पत्रकार संगठनों को सम्बद्धता दे रहा था। इसके अध्यक्ष उस समय स्व.रामाराव थे। आईएफडब्लूजे ने वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल को सम्बद्धता दे दी थी। शर्त ये थी कि सम्बद्धता दोनों में से कोई भी एक पक्ष समाप्त कर सकता था। रामाराव की मृत्यु के बाद अध्यक्ष बदले, फिर उनके पुत्र के विक्रमराव ने विरासत सम्हाली, जो अद्यतन अध्यक्ष हैं। 

पत्रकार भवन की इमारत के निर्माण के लिये स्व. धन्नालाल शाह, स्व. प्रेम श्रीवास्तव, स्व.नितिन मेहता आदि नामचीन पत्रकारों ने अपनी झोली फैलाकर एक एक पाई संचित कर पत्रकारों का स्वप्न महल खड़ा कर दिया। इमारत बनने के बाद इसकी विशालता व भव्यता के चर्चे देश विदेश में होने लगे। इसके बाद आपस में आरोपों प्रत्यारोपों का दौर शुरू हुआ। उस समय पत्रकार भवन समिति के अध्यक्ष लज्जा शंकर हरदेनिया ने पत्रकार भवन को शादी विवाह समारोह आदि के लिये देने का प्रस्ताव पारित करा लिया। खींचतान और बढ़ गई। 

बाद में इसे संचालित करने वाले संबंधित संगठन का नाम बदल कर श्रमजीवी पत्रकार संघ कर लिया गया। शलभ भदौरिया ने 1992 में म.प्र.श्रमजीवी पत्रकार संघ नाम से अपना अलग पंजीयन करा लिया। पिछले साल पत्रकार भवन समिति के अध्यक्ष एन पी अग्रवाल और वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष अवधेश भार्गव बने।

इसी बीच शासन से भार्गव को नोटिस दिया गया कि संस्था आवंटित भूमि का दुरुपयोग कर रही है। इसके बाद संस्था की बैठक में पत्रकारों के हित में पुनः लीज स्वीकारने का प्रस्ताव पारित कर पदाधिकारी आयुक्त एस के मिश्रा एवं मुख्यमंत्री से मिले। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पर अमल का आश्वासन दिया। उधर, कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई के दौरान शलभ भदौरिया ने अपने दो प्रतिनिधियों के माध्यम से दावा किया कि वे ही सर्वे सर्वा हैं। विक्रमराव की ओर से जवाहर सिंह ने दावा किया कि बिना विक्रमराव से चर्चा किये कोई निर्णय न लिया जाये, किन्तु कलेक्टर ने भार्गव के दावे को मानते हुए लीज निरस्त कर 2 फरवरी 2015 को कब्जा वापस सौंपने के आदेश पारित कर दिए। आगामी 18 मार्च को कब्जा वापस सौंपने का निर्णय लिया गया है।

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