कुमार कृष्णा-
सिर्फ चार सवाल-
1) भूमिहार जाति ने 1857 की लड़ाई में भाग क्यों नहीं लिया?
2) भूमिहार का शूद्र वर्ण में गिनती क्यों हुआ था?
3) भूमिहार किससे ब्राह्मिण (अयआचक) का दर्जा मांग रहे थे?
4) ब्राह्मण क्यूं भूमिहार की मांग का विरोध किये?

In this article:
6 Comments
6 Comments
Leave a Reply
Cancel reply
Leave a Reply
भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team
भड़ास मेल: [email protected]
Latest 100 भड़ास
- कोबरापोस्ट के ताजे खुलासे में उत्पाद एवं सेवा कर (खुफिया महा-निदेशालय) के पूर्व-अधिकारी रविंदर सिंह सांगवान पर गंभीर आरोप
- ‘भगवा गुंडागर्दी’ हेडलाइन मामला: आनंदबाजार पत्रिका (ABP) के पत्रकारों की गिरफ्तारी पर रोक!
- विजय स्वामी, मनोज देवगन के बाद वरिष्ठ फोटो पत्रकार राजन सक्सेना भी चले गए!
- हटाना था ज्ञानेश कुमार को, हटाया गया गुल्लू (अमीश देवगन)! देखें वीडियो
- चुनाव आयोग पर इन दो कार्टूनिस्टों ने अपने कार्टून से ‘केंचुआ’ के कसकर कान उमेठे हैं!
- आज के अखबार : चुनाव आयोग के लचर जवाब से भरे हैं यह नहीं कहते कि जो हुआ सुप्रीम कोर्ट की सहमति से!
- ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का OpenAI के एजेंट पर Medicare पोर्टल में सेंधमारी का बड़ा आरोप!
- इंडियन एक्सप्रेस में रितिका चोपड़ा ने आज फिर चुनाव आयोग का भांडा फोड़ा है!
- एनडीटीवी, नेटवर्क18 और लल्लनटॉप में कई पदों पर नौकरी का मौका
- इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद सरकार चाहती थी कि ज्ञानेश, सुखबीर संधू और विवेक जोशी एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहें कि SIR पर आयोग के अन्दर कोई विवाद नहीं है!
- तीन दशक के अनुभव के साथ दिलीप तिवारी ने संभाली News Darpan के एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी!
- उत्तर प्रदेश सूचना विभाग की सूची में रीजनल न्यूज चैनल घटे, ये दो चैनल बाहर!
- राजत शर्मा लगातार दूसरी बार NBDA के अध्यक्ष चुने गए, बोर्ड में तीन नए सदस्य शामिल!
- सुभाष चंद्रा अपनी संपत्ति बेचना चाहते हैं, NCLT ने रोक लगा दी, अब आगे क्या हुआ पढ़िए?
- नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) में संपादकीय सहयोगियों की वैकेंसी!
- अब इस न्यूज़ चैनल में नफरती फसल उगाते देखे जा सकते हैं अमीश देवगन!
- वाराणसी में पत्रकारों ने पुलिसिया दादागिरी के खिलाफ किया अर्धनग्न प्रदर्शन!
- हजारों खबरें लिखने वाला ‘राजनीतिक संवाददाता’ गुमनामी की मौत मर गया, आखिरी समय परिवार का कोई अपना भी नहीं आया!
- माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि की रजिस्ट्रार पी. शशिकला की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती, सात पक्षकारों को नोटिस!
- अलीगढ़ में भारत समाचार, टीवी9, भारत एक्सप्रेस और हिंदुस्तान के पत्रकारों पर चौथ वसूली का मुकदमा, देखें एफआईआर
- नोएडा की डीएम मेधा रूपम को अब अपनी तनख्वाह से पईसा नहीं भरना पड़ेगा, ये जज महोदय उनके काम आ गए!
- ज्ञानेश कुमार को कवर फायर देने के लिए दर्जनों पत्रकार एक्टिव हो गए हैं, रितिका चोपड़ा को हर सच्चा पत्रकार दे रहा बधाई!
- चुनाव आयोग के प्रेस नोट ने इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी को गलत नहीं कहा, हर जगह हो रही रितिका चोपड़ा की सराहना!
- यह पहली बार है जब इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की किसी कुलपति को पूरा दूसरा कार्यकाल मिला है!
- आज इंडियन एक्सप्रेस में रितिका चोपड़ा की शानदार रिपोर्ट के बाद ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा देकर ‘केंचुआ’ को विवाद रहित बनाने की पहल करनी चाहिए!
- India’s Got Latent सीजन 2 के एक एपिसोड को लेकर महाराष्ट्र साइबर पुलिस में कंप्लेन, कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा और नेटफ्लिक्स आरोपी!
- अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक पद से हटाया गया!
- वरिष्ठ पत्रकार सुधीर केएस दीक्षित भारत सरकार की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य मनोनीत!
- डॉक्टरों से ब्लैकमेलिंग के आरोपी पत्रकार ने मीडिया को भेजा मानहानि नोटिस!
- हिंदी कवि श्रीकांत वर्मा के नाम पर उनके बेटे द्वारा शुरू किए गए सम्मान पर दो टके की बहस!
- आज इंडियन एक्सप्रेस ने ग़ज़ब की पत्रकारिता की है, ‘केंचुआ’ की पोल खुली!
- आज यह खबर मेरे 10 अखबारों में हिन्दी के इन दो अखबारों के अलावा अंग्रेजी में द टेलीग्राफ और दि एशियन एज के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू में लीड है!
- पत्रकारिता में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए भारत एक्सप्रेस के CMD उपेंद्र राय अमेज़ अवॉर्ड से सम्मानित!
- इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मोदी के इशारे पर चुनाव आयोग के ज्ञानेश ही कर रहे हैं वोट चोरी!
- विनोद कापड़ी को बहुत-बहुत बधाई, दस साल में उन्होंने केवल अपनी सिनेमाई भाषा नहीं बदली है, उन्होंने उस ख़ामोशी को सुनना सीख लिया है, जहां पहुंचने में कई फ़िल्मकारों को पूरी उम्र लग जाती है!
- टाटा ट्रस्ट और शापुरजी पालोनजी के कारपोरेट वॉर में लगता है कोई ‘तीसरी शक्ति’ अपना गेम खेल रही है!
- चुनाव आयोग में CEC ज्ञानेश कुमार की मनमानी और तुगलकी फैसलों पर इंडियन एक्सप्रेस का बड़ा खुलासा
- इंडिया टीवी में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप, चार हिरासत में!
- वरिष्ठ पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता ने मांगी माफी, सौरभ शुक्ला की SIR पर ये रिपोर्ट भी देखिए!
- अगस्त में 4पीएम यूट्यूब चैनल बना नायक, नंबर एक की कुर्सी पर काबिज, देखें लिस्ट
- पत्रकार निशांत कुमार, कैरवी लुक्का और नंदिता मिश्रा के बारे में सूचनाएं!
- आईआईटी बांबे का मामला भाजपा की राजनीति से तो जुड़ा है लेकिन हिन्दी पट्टी का नहीं कहा जा सकता है, फिर भी यह अमर उजाला में लीड है, अंग्रेजी अखबारों में यह टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड है!
- इस पत्रकार को भाषा सुधारने का पब्लिकली ज्ञान दे रही हैं मृणाल पांडे!
- जिस पत्रकार को लोकतंत्र का प्रहरी बताया जा रहा है, क्या उसकी अपनी आजादी बची हुई है?
- दैनिक जागरण के उप राज्य संपादक का तुगलगी फरमान!
- वरिष्ठ पत्रकार डॉ अनिल सिंह Top Story के संपादक बने, ये जिम्मेदारी भी संभालेंगे!
- द पायनियर में फर्जी इंटरव्यू छपने पर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के VC ने इस्तीफा दिया!
- काव्या कलानिधि मारन को सन टीवी नेटवर्क में फिर मिली डायरेक्टर की कुर्सी!
- एनडीटीवी में इस नए शो की कमान संभालेंगी पद्मजा जोशी!
- व्हाइट हाउस में CNN, Politico और MS NOW को बैन कर डोनाल्ड ने खुद का ‘ट्रम्प टीवी’ लॉन्च किया
- नवभारत समूह के यूपी डिजिटल हेड नियुक्त हुए वरिष्ठ पत्रकार गोविंद पंत राजू
- प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आजमगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार संजय राय का सम्मान!
- हरिद्वार में धार्मिक संत को ‘अपराधी बाबा’ लिखने का मामला अदालत पहुंचा, कथित पत्रकार संजय कश्यप के खिलाफ FIR की मांग
- आज के अखबार : SIR के घपले की भयंकर खबर मेरे 10 में से दो अखबारों दि इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में पहले पन्ने पर नहीं है
- बिहार में जंगल राज : लड़की को उठाकर ले जाने का वीडियो वायरल, सम्राट सरकार को सोशल मीडिया पर पड़ रही गालियां!
- गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी लिखित में न देने पर गिरफ्तारी को गैरकानूनी माना जाएगा, पढ़े सुप्रीम कोर्ट के हाल के ये चार बड़े फैसले!
- शाहजहांपुर में पत्रकार गोविंद अवस्थी पर जानलेवा हमला, दो नामजद समेत आठ के खिलाफ FIR
- दैनिक भास्कर की खबर सही है या अमर उजाला की? बड़ा हैरान हूँ, आप सब भी देखिए!
- सूचना प्रसारण मंत्रालय का फैसला: फिल्मों में दारू सिगरेट गाँजा सेवन के सीन पर चेतावनी अनिवार्य है!
- हमलोग प्यार से पायल को ‘फूफी’ बुलाते थे, पर उसने हम सबको हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया!
- न्यूज़24 संचालित करने वाली कंपनी BAG में सुधीर शुक्ला और चंदन जैन फिर निदेशक बने!
- टीवी चैनलों के बाद अखबारों की हेडलाइन भी PMO से आ रही है क्या?
- महिला पत्रकारों ने हमलों और धमकियों के खिलाफ उठाई आवाज, प्रेस क्लब में सुनाई आपबीती!
- आज के अखबार : बंगाल उपचुनाव में TMC उम्मीदवारों की दशा, दिल्ली में SIR के कमल छाप कमाल की चर्चा
- एएनआई वाले भी मोदीजी की मिमिक्री का वीडियो चला रहे हैं!
- टाइम्स नाउ नवभारत में शमशेर सिंह को मैनेजिंग एडिटर का प्रभार!
- रिपब्लिक मीडिया के दो पत्रकारों को कलकत्ता हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत!
- वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह की टीआरपी की भूख ने तब एक ईमानदार चौकी इंजार्ज की जान ले ली थी!
- डोनाल्ड ट्रंप ने सीएनएन, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस में बैन करने की घोषणा की!
- CNN न्यूज़18 की वरिष्ठ पत्रकार पायल मेहता का मुंबई में निधन!
- एक व्यक्ति के कितने आयाम हो सकते हैं, इसका एक नमूना है पुस्तक: “80 के राय साहब”
- अशोक बाजपेयी को मिला 21 लाख रुपये का श्रीकांत वर्मा पुरस्कार कुछ लोगों के गले ही नहीं उतर रहा है!
- आदिवासी बच्चों की मौत की रिपोर्टिंग करने वाले इन चार पत्रकारों ने खुद की निगरानी कराए जाने का आरोप लगाया!
- पत्रकार संदीप के पांडे की पुस्तक ‘नेपाल Chapter’ को एक अनुभवी अपराध संवाददाता की तरह बुना गया है!
- अब टाटा संस निशाने पर; हिंदी और अंग्रेजी अखबार क्या कुछ छाप रहे हैं पढ़िए?
- AI safety को केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि सभ्यता-स्तर का प्रश्न माना जा रहा है!
- Gemini ने टेस्टिंग के दौरान तीन असली कंपनियों के सिस्टम में बनाई अनधिकृत एंट्री, Google ने घटना की पुष्टि की
- आज के अखबार (दो) : टाटा संस को बर्बाद करने की कोशिशें!
- आज के अखबार : नंदीग्राम उपचुनाव जीतने की भाजपा की ‘तैयारियों’ पर चार हिन्दी अखबारों के अलग रूप
- Mint में भानु प्रताप को नई जिम्मेदारी, नंदिता मिश्रा ने PTI छोड़ा!
- इंडिया टुडे ग्रुप में इन तीन मीडिया प्रोफेशनल्स के पोर्टफोलियो में बदलाव!
- बंगाल के नंदीग्राम में जो हुआ, वह चुनावी लूट का ऐसा खुला खेल है, जिसमें कोई पर्दा नहीं रह गया है!
- एनडीटीवी में बतौर एग्जीक्यूटिव एडिटर (स्पोर्ट्स) गौरव गाला की एंट्री
- बीजेपी आईटी सेल के हजारों गुर्गे भी बीबीसी हिंदी के कमेंट्स में आई गालियों का मुकाबला क्यों नहीं कर पाए?
- टाटा ट्रस्ट के रुख से Tata Group के शेयरों में भूचाल, एक दिन में ₹40 हजार करोड़ डूबे
- घर में शराब रखने के आरोप में रिपोर्टर TV के मैनेजिंग एडिटर गिरफ्तार, कोर्ट से याचिका भी खारिज!
- नेटवर्क18 में आदिल जैनुलभाई और राहुल जोशी फिर निदेशक बने!
- टाटा संस को अपने उद्योगपति मित्रों के हाथों कब्जा कराना चाहती है क्या मोदी सरकार?
- ब्रिक्स सम्मेलन पर भारत24 के कार्यक्रम ‘द JC शो’ में डॉ जगदीश चंद्र का बेबाक विश्लेषण!
- दिल्ली बीजेपी के मीडिया ग्रुप से करीब 200 पत्रकार रिमूव किए गये!
- भारत एक्सप्रेस के उर्दू आयोजन में पहुंचे केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, कहा- ‘ये भाषा व्यक्तित्व को संवारने का तरीक़ा सिखाती है!’
- आज के अखबार : 500 नई मोटर साइकिलों की रैली और स्कूलों को सरकारी आदेश नहीं है, टाटा संस छाया है
- डीयू कैंपस में महिला पत्रकार से बदसलूकी, ABVP समर्थकों पर DUJ ने धमकाने का लगाया आरोप!
- चार युवा पत्रकारों की खबरें; दो ने नए संस्थान में एंट्री ली, दो की टीवी9 और नेटवर्क18 से विदाई!
- नीरजा मोदी स्कूल को सम्मान देकर ‘टाइम्स नाउ’ भी 9 साल की बच्ची अमायरा के साथ हुए अन्याय का भागीदार बन गया!
- ज़ी समूह में इन पांच निदेशकों की पुनर्नियुक्ति को फिर मंजूरी मिली!
- लखनऊ में पत्रकारों ने डीसीपी साउथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया बहिष्कार, देखें वीडियो
- पत्रकार निकहत अली, करिश्मा अज़ीज़, वसीम अकरम त्यागी, सैयद कैफ हसन और नदीम सैफी के खिलाफ शामली पुलिस ने FIR दर्ज की!
- धन्या रंजन, प्रकृति पांडेय और रेशु उपाध्याय के बारे में सूचनाएं!
- देश में युवा पत्रकारों की एक पूरी फौज खड़ी हो गई है, जो बिना डरे कड़े सवाल पूछ रही है!



ashutosh anand
May 3, 2023 at 1:48 pm
1865 तक भूमिहारो को military (सैन्य ) ब्राह्मण या मगही ब्राह्मण लिखा जाता था और बाभन भी ( फ्रांसिस बुकानन 1811 रिपोर्ट और रोबर्ट मौंटगोमेरी मार्टिन रिपोर्ट १८३८ का देखे ) . 1872 में उन्हें ब्राह्मण जनसख्या से अलग किया गया military (सैन्य ) इतिहास के कारन और बाभन नाम से दर्ज किया जाने लगा | 1911 में भूमिहार ब्राह्मण सभा ( बाभन ज़मींदारो की एक सभा ) के कारन बाभन नाम में भूमिहार brahman शब्द जुड़ा और १९११ के बाद जाती का नाम बाभन (भूमिहार ब्राह्मण ) लिखा जाने लगा अब बस भूमिहार ही बचा है इसलिए इतना उल्टा विकिपीडिया पे लिखा जा रहा है |
Anand
May 7, 2023 at 5:54 pm
The man who has vomited 4 questions has no sense of history and has definitely enmity with Bhumi Agrahar Brahman. He is not aware with genealogical history of Chankya and Pushymitra.
First, he should read a few ingenious researches on Indian history by Christopher Bayle and Anand Yang.
He must also go through British Report published as the Golden Book of India by Roper Lethbridge where in Bhumihar Brahmans have been called Ayachak Brahman.
He has mentioned 1857, the movement noted for massive revolt. This fellow should go through British records on Indian revolts.
After 1764, the Buxar battle, the first revolt was led by Raja of Chsmparsn, Yugal kishore, Fatah Sahi, king of Saran, etc by Bhumihars who are mentioned in Samual Charter Report only as Brahman kings.
This ignorant gentleman must read the autobiography of Warren Hastings where in
Hastings has called Military Brahmans led by Fatah Shah, Bhumihar Brahman as the greatest terror.
1857 : See records of Mangal Pandey,
Khusiyal Singh, Maigar Rai, Bheema Rai, etc.
Gajja Rai led revolt of 56th Nimachh Battalion.
Bhumihar Brahmans villages were targeted by British. Do you know the reason.
British supported them who supported them and wrote history in their favour.
Take a caste list of freedom fighters of Bihar from Bihar Archive.
Abstain from derogatory remarks.
Kamlendra
May 30, 2023 at 9:33 am
ब्रिटिश शासन के दौरान भूमिहार ब्राह्मण जो तब मुख्यतः मिलिट्री ब्राह्मण, बाभन, त्यागी, सरवरिया,आदि गौड़,अयाचक, भू देव एवम मगध ब्राह्मण कहे जाते थे..
ब्राह्मणो का भारत में युद्ध कौशल सिखाने का लम्बा इतिहास रहा है जिसमे पांडवो के गुरु रहे द्रोणाचार्य जिन्होंने मिलिट्री साइंस अर्थार्त धनुर्विद्या, युद्ध कौशल पांडवो को सिखाया था।
1857 में मंगल पांडेय द्वारा की कई पहली क्रांति को भी देश भली भांति जानता है। लेकिन जिस ब्राह्मण रेजिमेंट की आज बात हम कर रहे है उसे शायद ही कोई जानता हो।
ब्राह्मण केवल भारतीय सेना की दो वर्ग रेजिमेंटों में भर्ती होते हैं। भर्ती किया गया प्रकार शानदार काया का है; परेड में उनकी साफ-सफाई और चतुराई से उनकी नस्ल और नस्ल का गौरव झलकता है। वे अच्छे एथलीट, विशेषज्ञ पहलवान हैं, और ताकत के करतबों में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं; और साहस के लिए उनकी उच्च प्रतिष्ठा है।
पहली पूर्ण ब्राह्मण रेजिमेंट की शुरुआत वर्ष 1776 से हुई जिसको 30th बंगाल नेटिव इन्फेंट्री बटालियन के नाम से जाना जाता था। वहीं समय के साथ हुए बदलाव के साथ वर्ष 1901 में इसका नाम पहली बार 1st ब्राह्मण इन्फेंट्री पड़ा। 1Brahmans भारत की प्रोफेशनल सेनाओ में से एक थी जिसको उसकी आकर्षित वर्दी के लिए भी जाना जाता था।
1st Brahmans के साथ ही ब्रिटिश राज में 3rd Brahmans भी हुआ करती थी जोकि 1798 में गठित की गई थी। जिसे फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद दोनों रेजिमेंट भंग कर दिया गया था। यह पूर्वांचल के भूमिहार ब्राह्मण जो आज भी अपनी बहादुरी के कारण अपने नाम के साथ सिंह लिखते हैं, उनके लिए थी और उनकी संख्या इसमें 90% तक थी ।
.’इंडियंस इन द फर्स्ट वर्ल्ड वॉर’ के मुताबिक, 1857 के विद्रोह के बाद आर्मी में रिक्रूटमेंट की जो पॉलिसी बनाई गई वो एक कम्युनिटी को दूसरी कम्युनिटी से अलग करने के मकसद से बनाई गई थी। रेजिमेंट सिस्टम शुरू करने वाले अंग्रेजों ने यह पॉलिसी भी बनाई थी कि भर्ती एक ही जगह से न की जाए। इसके पीछे मकसद ये था कि किसी एक जगह से विद्रोह हो तो दूसरे को उसके खिलाफ खड़ा किया जा सके।
भारतीय सेना में 16 प्रतिशत ब्राह्मण हैं जो देश की रक्षा में अपना योगदान दे रहे …
Kamlendra
May 30, 2023 at 9:36 am
*भूमिहार समाज का देश के लिए योगदान*
पूरे झारखंड, बिहार व उत्तर प्रदेश में 72 लाख एकड़ ज़मीन भूमिहार समाज ने देश उत्थान हेतु दान कर दिया। इससे ये साबित होता है कि ये समाज कर्ण से भी बड़ा दानी है।
आज पूरे बिहार, उत्तर प्रदेश या झारखंड में जितनी भी भूमिहार बाहुल्य गाँव है वहाँ पर वर्तमान में जितनी भी दलित बस्तियाँ, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, मठ, मंदिर आज से लगभग 65 वर्ष पहले जिस ज़मीन पर बने है वो सब किसी न किसी भूमिहार के ही नाम का मिलेगा, आप चाहो तो कचहरी जाकर उनका खातियाँन या कुर्सिनामा निकलवा कर देख लो। ये बात उस समय की है जब 1951 में संत बिनोवा भावे ने भूदान नामक एक मुहिम चलाया था उस मुहिम के अन्तर्गत लोगो से ख़ासकर भूमिहार समाज आग्रह किया था की अगर *भूमिहार जमीदार* देश को आगे बड़ाना चाहता है तो दलित व अन्य पिछड़ो को बसने के लिए अपनी ज़मीन दान करो। स्कूल, अस्पताल, यूनिवर्सिटी, मठ, मंदिर के लिये भी अपनी ज़मीन दान करो क्योंकि सबसे बड़ी जमीदारी भूमिहार के पास थी और भूमिहार समाज ने उनके आग्रह को स्वीकार किया।
Kamlendra
May 30, 2023 at 9:41 am
क्रांतिकारियों का समर्थन करने वाली विद्रोही उच्च वर्गी जाति भूमिहार ब्राह्मण कि भर्ती प्रतिबंधित की गयी।
योद्धा जाति -1857 की क्रांति के बाद, ब्रिटिश कालीन भारत के सैन्य अधिकारियों बनाई गयी उपाधि थी। उन्होने समस्त जातियों को “योद्धा” व “गैर-योद्धा” जातियों के रूप मे वर्गीकृत किया था। उनके अनुसार, सुगठित शरीर व बहादुर “योदधा वर्ण” लड़ाई के लिए अधिक उपयुक्त था, जबकि आराम पसंद जीवन शैली वाले “गैर-लड़ाकू वर्ण” के लोगों को ब्रिटिश सरकार लड़ाई हेतु अनुपयुक्त समझती थी। हालांकि, योद्धा जातियाँ को राजनीतिक रूप से उप-प्रधान, बौद्धिक रूप से हीन माना जाता था, जिसमें बड़े सैन्य कमान के लिए पहल या नेतृत्व के गुणों का अभाव था। अंग्रेजों के पास उन भारतीयों को भर्ती करने की नीति थी, जिनकी शिक्षा तक कम पहुंच है क्योंकि उन्हें नियंत्रित करना आसान था।
सैन्य इतिहास पर आधुनिक इतिहासकार जेफरी ग्रीनहंट के अनुसार, “योद्धा जाति सिद्धांत में एक सुरुचिपूर्ण समरूपता थी। जो भारतीय बुद्धिमान और शिक्षित थे, उन्हें कायर के रूप में परिभाषित किया गया था, जबकि बहादुर के रूप में परिभाषित किए गए लोग अशिक्षित और पिछड़े थे”। अमिय सामंत के अनुसार, योद्धा जाति को भावात्मक भावना से चुना गया था, क्योंकि इन समूहों में एक विशेषता के रूप में राष्ट्रवाद का अभाव था। ब्रिटिश प्रशिक्षित भारतीय सैनिक उन लोगों में से थे जिन्होंने 1857 में विद्रोह किया था और उसके बाद, बंगाल सेना के कैचमेंट क्षेत्र से आए सैनिकों की अपनी भर्ती में लेना छोड़ दिया या कम कर दिया और एक नई भर्ती नीति बनाई, जिसमें उन जातियों का पक्ष लिया गया जिनके सदस्य ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति वफादार थे।
1857 की क्रांति क्रांति मे सिपाही मंगल पांडे के नेत्रत्व मे बंगाल नेटिव इंफेंटरी ने ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध बगावत कर दी थी। बंगाल सैनिक बिहार व उत्तर प्रदेश के राजपूत, भूमिहार आदि लड़ाकू जतियों से भर्ती होते थे। जबकि ब्रिटिश बफादार पस्तून, पंजाबी, कुमायूनी, गोरखा व गढ़वाली सैनिकों ने विद्रोह में भागीदारी नहीं की थी व ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से लड़े थे। तब से लड़ाकू जाति की भर्ती में इन लोगों को प्राथमिकता दी जाने लगी व क्रांतिकारियों का समर्थन करने वाली विद्रोही जातियों कि भर्ती प्रतिबंधित की गयी।
Dilip Kumar
April 14, 2025 at 7:18 am
“प्रारंभिक ब्रिटिश भारतीय जनगणना में भूमिहारों को शूद्र वर्ण के रूप में वर्गीकृत किया गया था” — एक झूठा और ऐतिहासिक तथ्यों से रहित कथन है। आइए इसे ऐतिहासिक संदर्भ में देखें:
ऐतिहासिक तथ्य:
ब्रिटिश जनगणना और जाति वर्गीकरण:
1871 से शुरू होकर, ब्रिटिश भारत में जनगणना में जातियों का वर्गीकरण प्रारंभ हुआ था।
जातियों को ‘वर्ण’ के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिति, पेशे, और स्थानीय परंपराओं के अनुसार वर्गीकृत किया गया।
जनगणना रिपोर्टों में जातियों की स्थिति पर स्थानीय लोगों की धारणाएं और ब्रिटिश अधिकारियों की अपनी समझ अधिक प्रभावी रही।
भूमिहार ब्राह्मणों की स्थिति:
भूमिहार समुदाय को भूमिहार ब्राह्मण कहा जाता रहा है, विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल क्षेत्र में।
ब्रिटिश जनगणना में भूमिहारों ने स्वयं को ब्राह्मण वर्ण का हिस्सा माना, और कई क्षेत्रों में उन्हें इसी रूप में स्वीकृति मिली।
उदाहरण के लिए, 1901 की जनगणना में कई स्थानों पर भूमिहारों को ब्राह्मणों की उपश्रेणी में रखा गया था।
जातीय आंदोलन और पहचान:
19वीं सदी के उत्तरार्ध और 20वीं सदी की शुरुआत में भूमिहार समुदाय ने अपनी ब्राह्मण पहचान के लिए आंदोलन भी किए और कई संगठनों की स्थापना की (जैसे भूमिहार ब्राह्मण महासभा)।
इसलिए यह कहना कि “भूमिहारों को शूद्र वर्ण में रखा गया था” ऐतिहासिक रूप से गलत, भ्रामक और बिना प्रमाण का कथन है।
यदि कोई इस तरह की बात कह रहा है, तो वह या तो:
ऐतिहासिक संदर्भों को गलत समझ रहा है,
या फिर सामाजिक-राजनीतिक कारणों से जानबूझकर गलत प्रचार कर रहा है।