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मोदी सरकार तानाशाही की ओर : मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन जो समिति करेगी उसमें अब CJI नहीं होंगे, लोकसभा में बिल पास!

लोकसभा में आज मुख्य चुनाव आयुक्त बिल पास हो गया. दिसंबर 2023 की शुरुआत में इसे राज्यसभा ने पहले ही मंजूरी दे दी थी. हालांकि इस बिल के विरोध में विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया था. लेकिन 141 सस्पेंड सांसदों की संख्या कम नहीं होती. जो बिल पास होने के दौरान सदन नहीं जा सके. तीन सांसदों को आज सस्पेंड किये जाने की सूचना है.

आज पास हुए बिल का नाम है ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) विधेयक, 2023.’ आसान भाषा में इसे आप CEC-EC बिल 2023 भी कह सकते हैं.

साल 2023 के मार्च में जस्टि केएम जोसेफ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने फैसला सुनाया था कि चुनाव आयुक्तों का चयन प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और मुख्य न्यायाधीश की एक कमेटी द्वारा किया जाएगा. हालांकि अदालत ने कहा था, जब तक संसद में इसपर कानून न बने, तब तक. जो अब बना लिया गया है.

नए विधेयक में सीजेआई को चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से हटा दिया गया है. पारित विधेयक के अनुसार, पैनल में अब प्रधान मंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधान मंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे. इसके अलावा नए बिल में पूर्व या वर्तमान सीईसी-ईसी के खिलाफ नागरिक या आपराधिक कार्यवाही पर विचार करने से अदालतों को रोका गया है.

इस बिल का उद्देश्य भारत के चुनाव आयोग के तीन सदस्यों की नियुक्ति के लिए क्या प्रक्रियाएं होंगी, यह स्थापित करना है. यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के विपरीत है. सुप्रीम कोर्ट को चयन प्रक्रिया से दूर रखने के प्रयास में नए विधेयक में भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से हटा दिया गया है.

इस बिल के पास हो जाने के बाद चुनाव आयोग और सदस्यों की नियुक्ति तथा कार्यकलापों में कितनी निष्पक्षता हुई या होगी..जानने में थोड़ा बहुत वक्त लग सकता है.

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