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टीआरपी के खेल में फंसे न्यूज चैनल, खुद को नंबर वन दिखाने की होड़

टीआरपी के खेल में न्यूज चैनल इस कदर फंसते जा रहे हैं कि उनका आम जनता से जुड़ी खबरों से वास्ता कम हो रहा है। उनमें तो बस अपने चैनल के होलोग्राम के नीचे नं.1 लिखने की होड़ लगी है। सच में नं.1 कौन है, ये तो वो ही जानते है जो खुद को नं.1 कहते हैं। पिछले दो हफ्तों में ही अगर देखा जाऐ तो समझ सकते हैं कि यूपी उत्तराखण्ड के दो नए चैनल समाचार प्लस व एनएन उत्तरप्रदेश-उत्तराखण्ड ने नं.1 लिखने का सिलसिला शुरू किया है।

टीआरपी के खेल में न्यूज चैनल इस कदर फंसते जा रहे हैं कि उनका आम जनता से जुड़ी खबरों से वास्ता कम हो रहा है। उनमें तो बस अपने चैनल के होलोग्राम के नीचे नं.1 लिखने की होड़ लगी है। सच में नं.1 कौन है, ये तो वो ही जानते है जो खुद को नं.1 कहते हैं। पिछले दो हफ्तों में ही अगर देखा जाऐ तो समझ सकते हैं कि यूपी उत्तराखण्ड के दो नए चैनल समाचार प्लस व एनएन उत्तरप्रदेश-उत्तराखण्ड ने नं.1 लिखने का सिलसिला शुरू किया है।

मजे की बात इसमें एक यह भी है कि समाचार प्लस तो एनएन उत्तरप्रदेश-उत्तराखण्ड को किसी भी स्थान पर दिखा ही नहीं रहा जबकी एनएन उत्तरप्रदेश-उत्तराखण्ड खुद को नं.1 बता रहा है। समाचार प्लस को दूसरे स्थान पर दिखा रहा है। वहीं भडास4 मीडिया के हिसाब से देखें तो ईटीवी को नं.1 बताया गया है। और एनएन उत्तरप्रदेश-उत्तराखण्ड का तो कहीं नाम भी नहीं है। अब इस घालमेल में कौन किस पोजीशन पर खड़ा है इसका फैसला आम दर्शक तो बिलकुल नहीं कर पा रहा है। लेकिन इतना जरूर समझ में आ रहा है कि चैनल जब खुद को नं.1 कहते हैं तब ही इनका बिज़नेस बढ़ता है। आम आदमी फिर भी इस झमेले में नहीं पड़ना चाहता उसे तो बस उसके हक की आवाज उठती दिखे, इतना ही बहुत है।

 

राहुल राणा <[email protected]>

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