कोरोना वायरस चीन क्यों तैयार कर रहा था और यह वहां से कैसे लीक हुआ?

shyamsingh rawat
श्याम सिंह रावत

कल रात हॉलीवुड की एक फिल्म देखी थी जिसमें कृत्रिम जैविक विषाणुओं के जरिए दुश्मन देशों को तहस-नहस करने और उसके लीक होने की कहानी थी।

संभवतः ऐसी ही काल्पनिक कहानी को साकार करने की कोशिश का नतीजा है चीन से फैला खतरनाक कोरोना वायरस। इससे चीन में ही संक्रमित 98 और लोगों की मौत हो जाने से आज मंगलवार तक वहां मरने वालों की संख्या 1,868 हो गई और इससे प्रभावित कुल 72,436 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। जिनमें से 12,800 की हालत गंभीर है। चीन से यह घातक बीमारी जापान, कोरिया, हांगकांग, मकाऊ, ताइवान सहित दुनिया के विभिन्न देशों में फैल चुकी है। इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक आपातकाल घोषित कर दिया है।

चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अनुसार अकेले हुबेई प्रांत में ही इसके 1,807 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही इस प्रांत में इस विषाणु से संक्रमित लोगों की संख्या 59,989 हो गई है। कोरोना के खौफ ने दुनियाभर में लोगों को हिला दिया है और हर दिन इससे संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

चीन की सरकारी लैब से फैला कोरोना वायरस

दुनिया के सामने महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) की शुरुआत चीन की एक सरकारी लैब से हुई है। जहां दुनिया की नजरों से छिपा कर चुपचाप इसे तैयार किया जा रहा था। संसार भर में हड़कंप मचने के बाद स्वयं चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान की एक लैब से इस वायरस की शुरुआत हुई। वुहान को इस बीमारी का केंद्र माना गया है। चीनी वैज्ञानिकों का मानना है कि हो सकता है कोरोना वायरस की शुरुआत वुहान के फिश मार्केट से कुछ दूर स्थित एक सरकारी रिसर्च लैब से हुई हो।

चीन की सरकारी साउथ चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी के अनुसार हुबेई प्रांत में वुहान सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (WHCDC) ने रोग फैलाने वाली इस बीमारी के वायरस को जन्म दिया हो। स्कॉलर बोताओ शाओ और ली शाओ का दावा है कि WHCDC ने लैब में ऐसे जानवरों को रखा जिनसे बीमारियां फैल सकती हैं, इनमें 605 चमगादड़ भी शामिल थे। उनके मुताबिक, “हो सकता है कि 2019-CoV कोरोना वायरस की शुरुआत यहीं से हुई हो।” इसके अलावा इनके रिसर्च पेपर में यह भी कहा गया है कि कोरोना वायरस के लिए जिम्मेदार चमगादड़ों ने एक बार एक रिसर्चर पर हमला कर दिया था और चमगादड़ का खून उसकी त्वचा में मिल गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘रोगियों में मिले जीनोम सीक्वेंस 96 या 89 फीसदी थे, जो चमगादड़ CoC ZC45 कोरोना वायरस के समान हैं लेकिन ये मूल रूप से राइनोफस एफिनिस में पाए जाते हैं।’ रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां मौजूद देसी चमगादड़ वुहान के सीफूड मार्केट से लगभग एक हजार किलोमीटर दूर पाए जाते हैं और यूनन व झेजियांग प्रांत से उड़कर आए चमगादड़ों की संख्या शायद बहुत कम रही होगी। इसके अलावा, स्थानीय लोगों को चमगादड़ खाने की सलाह बहुत कम दी जाती है। 31 निवासियों और 28 विजिटर्स ने इस बारे में गवाही भी दी है।

फिश मार्केट से कुछ ही दूर थी लैब

इसके अलावा इन वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि यह अनुसंधान WHCDC की सिर्फ कुछ गज बड़ी एक लैब में किया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार WHCDC में एक रिसर्चर ने बताया था कि एक चमगादड़ का खून उसकी त्वचा में आने के बाद उसने खुद को दो हफ्तों तक अलग रखा था। इसी व्यक्ति ने एक चमगादड़ द्वारा पेशाब किए जाने के बाद भी खुद को अलग रखा था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि WHCDC को पास के यूनियन हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां डॉक्टर्स का पहला ग्रुप कोरोना वायरस से संक्रमित था। यह मुमकिन है कि वायरस आसपास फैल गया और इनमें से कुछ ने इस खतरनाक बीमारी के शुरुआती मरीजों को अपनी चपेट में ले लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि हो सकता है वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने वायरस लीक किया हो। इससे पहले भी इस तरह की खबरें सामने आ चुकी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘इस लैब ने ही यह बताया था कि चीनी हॉर्सशू चमगादड़ ही 2002-2003 में फैले सीवियर अक्यूट रेस्पायरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (SARS-CoV) के लिए जिम्मेदार थे।’ इस रिपोर्ट के आखिर में कहा गया है कि हो सकता है जानलेवा कोरोना वायरस की शुरुआत वुहान की एक लैब से हुई हो।

गौर करने वाली बात है कि दुनियाभर में अब तक 69,000 से ज्यादा लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं चीन में 1,868 लोगों की कोरोना से जान जा चुकी है। अधिकतर मौतें हुबेई प्रांत में हुई हैं जो इस बीमारी का केंद्र है।

बहरहाल, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह जानलेवा वायरस उक्त प्रयोगशाला में क्यों तैयार किया जा रहा था और यह वहां से कैसे लीक हुआ? इस पर भी यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि इसके पीछे चीन सरकार की कोई संदिग्ध भूमिका नहीं है।

लेखक श्याम सिंह रावत उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट हैं.

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