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दिल्ली

राफेल मामले की सुनवाई कर रहे देश के चीफ जस्टिस के साथ ‘खेल’ हो गया!

Prashant Tandon : सवालों के घेरे में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई – पूर्व महिला कर्मचारी ने लगाया योन शोषण का आरोप… जिस वक़्त इसे लिख रहा हूं चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष सुनवाई कर रही है. महिला कर्मचारी जस्टिस गोगोई के निवास के दफ्तर में कार्यरत थी और उसने गोगोई पर योन शोषण के गंभीर आरोप लगाये हैं. आरोप एक एफ़िडेविट में लगाए हैं जिसकी कॉपी कल सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को भेजी गई है.

महिला के एफ़िडेविट के मुताबिक योन शोषण की दोनों घटनाये अक्टूबर 2018 की हैं यानि गोगोई के चीफ जस्टिस बनने के कुछ दिन पहले की. महिला ने ये भी आरोप लगाया है कि विरोध के बाद उसे नौकरी से निकाला गया, उसके पति और भाई जो दिल्ली पुलिस में है, सस्पेंड किया गया और उसके उपर आपराधिक मुकदमे कायम किए गये. इस कर्मचारी के मुताबिक उसे गिरफ्तार करे तिलक मार्ग थाने में पैरों में हथकड़ी डाल कर बेंच पर दिन भर बैठाया गया और तिहाड़ जेल भेजा गया. हालांकि अगले दिन उसे जमानत मिल गई.

हालांकि जस्टिस गोगोई की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. जस्टिस गोगोई उन चार जजों में थे जिन्होने न्यायपालिका के काम में दखलंदाजी के आरोप लगाते हुए प्रेस कान्फ्रेंस की थी. चीफ जस्टिस बनने के बाद गोगोई से उम्मीद थी कि वो राफ़ेल, सहारा बिड़ला डायरी, जज लोया की संदिग्ध मौत जैसे उन तमाम मामलों को दुरुस्त करेंगे जो चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्यकाल में दबाये गये. पर ऐसा हुआ नहीं. सरकार को इन आरोपों के बारे में पहले से जानकारी थी.

Pankaj Chaturvedi : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की चेतावनी को हल्के में न लें। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है. इस आरोप से मैं बेहद आहत हुआ हूं. इस पूरे मामले पर मीडिया को संयम बरतने की सलाह दी गई है. विदित हो जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ एक महिला द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष बेंच में सुनवाई हुई. इस दौरान चीफ जस्टिस गोगोई ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं.

जस्टिस गोगोई ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘मैंने आज अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठाया है क्योंकि चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं. मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा. 20 साल की सेवा के बाद यह सीजेआई को मिला इनाम है’.

चीफ जस्टिस ने कहा कि इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं. लेकिन न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता.रंजन गोगोई ने कहा, ‘यह अविश्वसनीय है. मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए. कोई मुझे धन के मामले में नहीं पकड़ सकता है, लोग कुछ ढूंढना चाहते हैं और उन्हें यह मिला. न्यायाधीश के तौर पर 20 साल की निस्वार्थ सेवा के बाद मेरा बैंक बैलेंस 6.80 लाख रुपये है’. जस्टिस गोगोई ने स्पष्ट कहा कि मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा.

वहीं, जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि इस तरह के अनैतिक आरोपों से न्यायपालिका पर से लोगों का विश्वास डगमगाएगा. इस दौरान कोर्ट के अंदर जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इस महिला को यहां (सुप्रीम कोर्ट) में नौकरी कैसे मिल गई जबकि उसके खिलाफ आपराधिक केस है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पुलिस द्वारा कैसे इस महिला को क्लीन चिट दी गई. अब उस दृश्य को याद करें जब सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर देश की न्यायपालिका पर खतरा बताया था।

क्या यह रफॉल मामले में न्यायिक सक्रियता ओर एक तरह की ” जज लोया ” प्रतिक्रिया है? यदि यह हकीकत है तो ये मतदान बेमानी है। लोकतंत्र पर बड़ा खतरा है।सारी प्रक्रिया सत्ता हथियाने की औपचारिकता मात्र है। केंचुआ का व्यवहार जाहिर है, ईवीएम के खेल सामने आ ही रहे है एयर अब सुप्रीम कोर्ट की रिगिंग हो रही है। देश पर इतना बड़ा संवैधानिक संकट और ख़ुद को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहने वाला मीडिया बिहार से लाइव चुनाव रैली दिखा कर विज्ञापन के दाम चुका रहा है। नागरिक समाज को आगे आना होगा।

Nadim Akhtar : चीफ जस्टिस के साथ खेल! जब अनिल अंबानी की शह पे सुप्रीम कोर्ट का कर्मचारी कोर्ट के फैसले को बदलकर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पे लगा सकता है और जब जज को पता चलता है तो आनन-फानन में फैसले को ठीक करवा के वेबसाइट पे अपलोड किया जाता है और सम्बंधित कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त किया जाता है तो….

जब देश का चुनाव जीतना हो और सुप्रीम कोर्ट दोबारा #राफेल भ्रष्टाचार की सुनवाई के लिए तैयार हो गया हो, चीफ जस्टिस ने इसके लिए हामी भर दी हो तब

सुप्रीम कोर्ट की एक महिला कर्मचारी द्वारा चीफ जस्टिस पे यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया जाता है। मामले के तार जोड़िए। जिस कर्मचारी ने कोर्ट के फैसले को बदलकर वेबसाइट पे लगाया, उसे पता था कि अब उसकी नौकरी जाएगी। पर सोचिये उसे अम्बानी से कितना पैसा मिला होगा इस काम के लिए, जितना वह जीवनभर में नहीं कमा सकता था।

इसके बाद एक महिला कर्मचारी ने चीफ जस्टिस पे यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया है। वह भी पूरे 7-8 महीने बाद। खुद जजों के साथ काम कर रही हैं। उनको किसका डर था? इतनी देर से मुंह क्यों खोला? कई सवाल हैं। उनको भी पता होगा कि चीफ जस्टिस पे आरोप लगा रही हैं, अगर वह गलत निकली तो नौकरी भी जाएगी और सज़ा भी मिलेगी।

खेल तो हो गया। अब सुप्रीमकोर्ट राफेल को छोड़कर चीफ जस्टिस के यौन उत्पीड़न वाले मामले से जूझता रहे। पर ये मामला backfire भी कर सकता है। जज भी इंसान होते हैं। क्या हम उम्मीद करें कि अब सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार और बीजेपी पे बहुत सख्त होने जा रहा है! उदाहरण देता हूँ। राफेल के अलावा चुनाव में VVPAT की 50 फीसद पर्चियों के मिलान का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है। अगर कोर्ट ने इसे मान लिया तो evm में खेल करना संभव नहीं हो पायेगा। तब सोचिये क्या होगा?

दूसरी बात। चुनाव आयोग ने बिना किसी क़ानून के मोदी जी का हेलीकॉप्टर चेक करने वाले IAS को सस्पेंड कर दिया जिसकी आलोचना पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त क़ुरैशी सब ने भी की है। अब अगर कांग्रेस इस मामले को तुरन्त लेकर सुप्रीम कोर्ट जाती है तो कोर्ट ना सिर्फ चुनाव आयोग को नाप देगा, इस बात की जांच भी करवा देगा कि मोदी जी के हेलीकॉप्टर से जो रहस्यमय काला बक्सा उतारा गया था, उसे एक प्राइवेट गाड़ी में क्यों रखा गया और कहां ले जाया गया? नमो टीवी से लेकर हर चीज़ में सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग और बीजेपी को नाप सकता है। फटाफट। एकदम ताड़ा-ताड़ी। बस सुप्रीम कोर्ट के पास एक याचिका लेकर जाने की देरी है, कोर्ट तुरन्त एक्टिव हो जाएगा।

ये मामूली बात नहीं। भाई लोगों ने देश के चीफ जस्टिस के गिरेबां में हाथ डाला है। उनपे यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। आपको क्या लगता है सुप्रीम कोर्ट और दूसरे हाई कोर्ट के जज चुप रहेंगे? चुन-चुन के मामले निकाले जाएंगे और इनको नापा जाएगा। पूरा का पूरा। ऊपर से नीचे तक। प्रज्ञा ठाकुर के बाद एक और ब्लंडर। इसे कहते हैं विनाश काले विपरीत बुद्धि। एक बात का यकीन आपको दिलाता हूँ। आगे से चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आपको पूरे फॉर्म में दिखेंगे। उल्टी गिनती शुरू हो गयी इनकी।

वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन, पंकज चतुर्वेदी और नदीम अख्तर की फेसबुक वॉल से.

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3 Comments

3 Comments

  1. Sanjay

    April 20, 2019 at 4:52 pm

    Khel hi khela ja rha hai….Rafel, Election Commission,Pragya, black box etc…jaise bato se dhyan bhatkane k liye….

  2. Santosh Mishra Yash

    April 21, 2019 at 6:33 am

    अख्तर जी आप सच मे बहुत ही दूर दर्शी व्यक्ति हैं। इस प्रकरण किन पोर्टल साइट्स ने छापा है? वो चारो घोर मोदी और बीजेपी विरोधी हैं। वास्तविकता तो ये है कि राहुल गांधी के प्रकरण की सुनवाई के अलावा अभी अगले हफ्ते कोई बड़ी सुनवाई नही है जबकि माननीय मुख्य न्यायधीश श्री गोगोई जी उल्लेख किया है। आप से निवेदन है कि आप दूषित मानसिकता के उबरिये।

  3. Bhavi

    April 22, 2019 at 9:00 am

    सीजेआई अगले हफ्ते राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका, पीएम मोदी की बॉयोपिक के रिलीज के साथ-साथ तमिलनाडु में वोटरों को कथित तौर पर रिश्वत देने की वजह से वहां चुनाव स्थगित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने वाले हैं। rafel nahi

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