न्यायालय का चाबुक चला न संपादकजी! तो आप भी ‘त्राहिमाम’ करते नजर आएंगे

प्रदेश में नंबर वन का दावा करने वाले अखबार के पहले कॉलम में छपे एक लेख का शीर्षक है- त्राहिमाम् ! लेख में पत्रकारिता के स्वयंभू पुरोधा कहलाने वाले इन महोदय ने जिस प्रकार से सरकार और सरकारी कर्मचारियों पर तंज कसे हैं, काबिले तारीफ है। 

तंज कसें भी क्यों न ? मामला जो न्यायालय की अवमानना का है। लेख में उनकी लेखनी ने बड़ी बड़ी बातें कही हैं। कहीं वे कर्मचारियों की पूरी जमात को डूब मरने की सलाह देते नजर आ रहे हैं तो एक जगह लिखते हैं- “छोटी अदालतों के फ़ैसले तो सरकार पान की तरह चबा जाती है।” 

मगर ज़नाब आप तो सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को भी पान में डालने वाली सुपारी से ज्यादा नहीं समझते। क्या मैं गलत कह रहा हूँ ? इसलिए आपकी कलम से ऐसी बातें शोभा नहीं देती हैं। सभी अखबारों सहित आपके संस्थान ने भी अभी तक मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को आज तक लागू नहीं किया है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को एक साल से ज्यादा का समय हो गया है। आप जिस प्रकार से कर्मचारियों का दमन कर रहे हैं, जिस दिन जनता को पता चला और न्यायालय का चाबुक चला, आप भी त्राहिमाम्, त्राहिमाम् करते नज़र आयेंगे।

कुलदीप सिद्धू के एफबी वाल से




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Comments on “न्यायालय का चाबुक चला न संपादकजी! तो आप भी ‘त्राहिमाम’ करते नजर आएंगे

  • आज राजस्थान पत्रिका के संपादक महोदय डॉ गद्दार गुलाब कोठारी ने त्राहिमाम सम्पादकीय मैं राजस्थान सरकार भारत सरकार न्याय व्यस्था पर प्रश्न उठाये अच्छा है परंन्तु दुनिया को उपदेश देनेवाले जरा अपने भी गृहवान मैं भी झांक के देख बुड्ढे की तू किनता ईमानदार है नालायक चोर भृष्ट तूने बी तो सुप्रीमकोर्ट के आदेःस के अवेहलना की हैं अपने कर्मचारियों का हक़ मारा है अगर इतना ईमानदार बनते हो तो मजीठिया वेजबोर्ड क्यों नहीं दिया आज 4 साल से मंहगाई भत्ता नहीं दे रहे हो वार्षिक वेतन वृद्धि क्यों नहीं दे रहे हो आज मंहगाई के समय मैं तुम्हारी औलादे बी एम डब्लू कारों मैं घूम रही है और कर्मचारियों को देने के नाम पर क्यों तुम्हे मौत आ रही है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे दिया फिर भी आज एक साल हो गया नया वेतन क्यों लागू नहीं कर रहे हो दुनिया को उपदेश दें बंद कर बहुत होगा गया हा अत तुम्हारी ही बारी है भारत सरकरण ने याकब मेनन को फांशी दे दी हैं अब तुम्हारा हे नंबर मानस के रचनाकार बहुत अति मचा राखी है सुधर जाओ बरना मरने के बाद बहुत बुरी गति होगी जैन धर्म के कलकलंकित समाज सुधारक जीओ मत जीने दो के अनुयाई बैईमानल

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