मुझे इस चोर और बेईमान न्यायपालिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है : दयानंद पांडेय

Dayanand Pandey : इन सारे कमीनों, इन सारे चोरों और बेईमानों को इस न्यायपालिका में इतना यकीन होना आम आदमी को बार-बार डरा देता है। ख़ास कर तब और जब यह सब के सब एक सुर में कहते हैं कि न्यायपालिका में उन्हें पूरा यकीन है, पूरा भरोसा है! याद कीजिए कि अभी दो दिन पहले इस अपराधी सलमान खान ने बड़े गुरुर से कहा था कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है! लालू प्रसाद यादव भी यही बोलता है, मायावती, मुलायम, जयललिता आदि-आदि सारे बेईमान और अपराधी यह संवाद सर्वदा बोलते रहते हैं।

अरे कमीनों, यह भरोसा इस चोर न्यायपालिका पर तुम्हें नहीं होगा तो क्या हमें या हमारे जैसों को होगा? मैं तो चीख-चीख कर, चिल्ला-चिल्ला कर कर कह रहा हूं कि मुझे इस चोर और बेईमान न्यायपालिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है, नहीं है, नहीं है! यह न्यायपालिका नहीं, बेल पालिका है। बेईमानों और अपराधियों की सैरगाह है यह! अगर मेरे इस लिखे पर अवमानना का मुकदमा चलाना हो तो चलाइए। स्वागत है। न्यायपालिका में अब इतना दम नहीं रहा। हांफ-हांफ जाएगी, आप की यह न्यायपालिका। अब उसकी ऐसी हैसियत नहीं रही, न साहस! होती तो मेरे जैसा सामान्य व्यक्ति यह कहने की हिमाकत नहीं करता। और आप को बता दूं कि, ऐसा मुकदमा अवमानना का मैं भुगत भी चुका हूं अपने उपन्यास ‘अपने-अपने युद्ध’ को लेकर। वर्ष दो हज़ार में प्रकाशित इस उपन्यास में मैंने न्यायपालिका में उग आए कोढ़ की बखिया कस कर उधेड़ी है।

देश के क़ानून के साथ यह सामूहिक बलात्कार का मामला बनता है. मेरी एक दोस्त हैं Ritu Soni जी। मेरी एक टिप्पणी पर उन्हों ने ऐतराज जताते हुए अपने कमेंट में लिखा है कि : ”Sab Kuch thik hai… Lekin PoorI judiciary ko Ek saath galia Kar aap session court ke judge JiNhone convict Kiya Unka apman Kar rahe hai.”  ऋतु जी, यह आप क्या कह रही हैं? किस जज का अपमान? वह जज जो दस साल की जगह पांच साल की सज़ा तजवीज करता है? वह जज जो अपने आदेश में छेद ही छेद छोड़ देता है ताकि यह अपराधी फटाक से जमानत पा जाए? वह जज जो तीन घंटे तक हाईकोर्ट की जमानत के कागजात आने का इंतज़ार करता रहा? सात बजे शाम तक ताकि सलमान को एक क्षण भी जेल की हवा न खानी पड़े। कोई जज किसी मुलजिम की जमानत का कागज़ का इंतज़ार करता शाम सात बजे तक बैठा रहा हो, मेरी जानकारी में यह पहला मामला है। सच यह है कि सलमान खान के मामले में क़ानून के साथ पहला बलात्कार करने वाला यह जज देशपांडे ही है। हाईकोर्ट के जज थिप्से का नंबर दूसरे नंबर पर आता है। और फिर दोनों ही पक्ष के सारे वकील तीसरे नंबर पर। चौथे नंबर पर मुम्बई पुलिस। और इन सब से भी ऊपर यह मीडिया! देश के क़ानून के साथ यह सामूहिक बलात्कार का मामला बनता है। इन सब को एक लाइन में खड़ा कर सामूहिक रूप से गोली मार दी जानी चाहिए! इन सब के साथ इस्लामिक क़ानून का उपयोग किया जाना चाहिए।

प्रेमचंद ने एक जगह सच लिखा है: ”न्याय भी लक्ष्मी की दासी है।”

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.


सलमान को जेल की जगह बेल मिलने से दुखी कुछ अन्य पत्रकारों / छात्रों / सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों के कमेंट इस प्रकार हैं…

Sheetal P Singh : मीडिया चैनलों ने मुम्बई हाईकोर्ट से ज़मानत दिलाई. जेल नहीं जायेंगे सलमान! फत्ते रहिमन चिखुरी गनेस समेत ढाई लाख से ज़्यादा under trials जेहल में ही रहेंगे. मोकदमे ज़्यादा / अदालतें कम होने और चैनलों के बिजी रहने से “देस” का फ़ैसला!

Anwesha :  Totally disgusting ….salman khan got bail…..lost faith on indian judiciary system…..

Sushant Sareen : That the Indian criminal justice system is broken is well known. Its more criminal and very little justice. My issue isn’t that salman khan got undeserved relief from this dysfunctional system. If you are rich, can hire the big shot lawyers who pontificate on TV, know how to work the system, the law which is an ass will take its logical and natural course and you will get away.  My problem is with the pervasive sickness of a society that instead of shunning the wrongdoer, celebrates him. My problem is with the shitty Bollywood fraternity that is so steeped in chamchagiri and ass licking that it sees nothing wrong in what salman did. India has no future because its a sick society. Its a society with no moral fiber, a society with no moral compass and a society with no conscience. But what do you expect from a people who fete their murderers by lighting candles at wagah?

Kumar Sauvir : चुलबुल पांडे ने किसी के पीछे कितने छेद बनाये हैं, हमें इसका तो कोई पता नहीं है। पर इस पांडे ने इतना तो साबित कर ही दिया कि अगर जेब भारी हो तो चंद मिनट में क़ानून का भी पाँव भारी किया जा सकता है। जी हाँ, इतने छेद किये जा सकते हैं कि फिर पता भी न चले कि हवा कहाँ से आ रही है और कहाँ जा रही है…

Zafar Irshad : सलमान खान का “पतंग उड़ाना और पेंच लड़ाना” और उनके अब्बा सलीम का “उर्दू वेबसाइट” चलाने का सुखद फल उन्हें आज मिल गया.. और अब वो आज़ाद पंछी की तरह घूमेंगे…

Omendra Bharat : आज भारतीय कानून व न्यायप्रणाली का एक काला दिन है। सलमान खान जैसे अपराधी को सिर्फ इसलिए जमानत मिल गई कि वो एक रसूख वाले इंसान हैं। शर्म आनी चाहिए उस पुलिस सिस्टम को जो अपने एक कर्मचारी.. “रविंद्र पाटिल” की ईमानदारी की कद्र न कर सका और उसे मरने के लिए छोड़ दिया। वो अपनी अंतिम साँस तक सलमान के खिलाफ गवाही देता रहा… पर न पुलिस सुन सकी और न ही जज… उल्टा उसे जेल भेज के प्रताड़ित किया। काश कि आज अपराधी सलमान खान को जज ने 5 साल के कठोर सश्रम जेल भेज दिया होता…. तो पूरे देश का… देश की न्याय प्रणाली पर विश्वास बढ़ गया होता। सबको विश्वास हो जाता कि… हिंदुस्तान में अमीर-गरीब, आम-ख़ास सबके लिए क़ानून बराबर है। पर दुर्भाग्य… ऐसा न हो सका…!! जहाँ भी होगी उन सभी ग़रीबों की आत्माएं… जो उस दुर्घटना के शिकार हुए थे… वो आज कोस रहे होंगे जजों को… और बेचारे वो रविन्द्र पाटिल की आत्मा तो सोच रही होगी कि… यार मैं फोकट में ही मर गया। और शायद कोई भी रविन्द्र पाटिल की तरह किसी रसूखदार इंसान के खिलाफ कभी भी गवाही देने की हिम्मत न उठा सके। शर्म करो… देश में कानून के ठेकेदारों… शर्म करो।

Nitin Thakur : मी लॉर्ड भी टीवी देखते हैं और उनको भी पता होता है कि जमानत की सुनवाई से एक रात पहले पीएम का करीबी जफर सरेशवाला किसके घर गया था..

Daya Sagar :  हिट एंड रन का केस उस वक्त नहीं था जब सलमान की कार की रफ्तार 90-100 किमी प्रति घंटा थी। असली हिट एंड रन का केस ये है। यहां कानून को हिट कर सलमान ने अपनी सजा सस्पेंड करा ली। जमानत की रफ्तार देखिए जबकि देश में 4 लाख लोग बरसों से जेल में बेल का इंतजार कर रहे हैं।

Mukesh Kumar Singh : सलमान ने शुरुआत से ही इस मामले से जुड़े गवाहों और तथ्यों को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन कोर्ट ने चश्मदीद गवाह को ही सुनवाई का आधार माना। वह गवाह जो 4 अक्टूबर, 2007 को मर चुका है। सिपाही रविंद्र पाटिल इस केस के मुख्य गवाह थे। वही रविंद्र पाटिल जिनकी गवाही इस केस के फाइनल फैसले पर असर डाल गई। रविंद्र पाटिल के करीबी इस फैसले से बेहद सुकून में हैं। उनके मुताबिक मौत से पहले रविंद्र पर इस मामले में अपना बयान बदल लेने के लिए बेहद दबाव था। इसका जिक्र कई फ्रीलांस ब्लॉगर्स ने अपने ब्लॉग में भी किया था, जिन्हें बाद में हटा लिया गया। कुछ लोगों ने शक जताया कि ब्लॉगर्स ने ऐसा सलमान के दबाव में आकर किया, क्योंकि सभी ने अपने पोस्ट के लिए लिखित माफी मांगी थी। पाटिल ही एकमात्र ऐसे गवाह थे, जिनका कहना था कि कार ऐक्सिडेंट सलमान के नशे की हालत में तेज रफ्तार पर कार चलाने से हुआ। वह कोई टेक्निकल एरर नहीं था। पाटिल ने अपना यह बयान मरते दम तक नहीं बदला। इन ब्लॉग्स की मानें तो पाटिल सिपाही रैंक पर थे। फोर्स में सबसे छोटी और कमजोर रैंक पर। वह अकेले इस मामले में कुछ भी कर पाने में अक्षम थे। 2006 में जब सलमान ने मुंबई के बेस्ट डिफेंस लॉयर को हायर किया, तो पहला टारगेट पाटिल को ही बनाया गया। क्रॉस एग्जामिनेशन में उसे घेर लिया गया। उसी से परेशान होकर पाटिल एक दिन घर से भाग गया, जिसकी कंप्लेंट पाटिल के भाई ने पुलिस में करवाई थी। यह बात हैरान करने वाली थी कि मामले की एफआईआर करने वाला पुलिसिया सिपाही ही मामले में फंसा दिया गया था। पाटिल के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी किए गए, तो डर के मारे पाटिल ने तारीख पर जाना बंद कर दिया। बाद में उसे पकड़कर आर्थर रोड जेल भेज दिया गया। पाटिल ने क्राइम ब्रांच में अपनी दुहाई भेजी, जिसे अनसुना कर दिया गया। बहरहाल, जब पाटिल जेल से छूटा तो उसे पुलिस में वापस नौकरी नहीं मिली। तकरीबन एक साल के शोषण के बाद 2007 में मुंबई के एक सरकारी हॉस्पिटल में पाटिल भर्ती पाए गए, जिन्हें मुंबई की रेड लाइट्स पर भीख मांगते वक्त बेहोश होने पर हॉस्पिटल लाया गया था। पाटिल के परिवार वालों के पास उनकी कोई सूचना नहीं थी। सरकारी वॉर्ड के बेड नंबर 189 पर दवाइयों के अभाव में पाटिल लंबे वक्त तक तड़पते रहे और उनकी टीबी विकराल रूप लेती गई। कुछ ही दिन बाद उनकी मौत हो गई। उनके भाई ने उनका अंतिम संस्कार किया। जिस दोस्त ने पाटिल से आखिरी बार मुलाकात की थी, उसने कहा कि मरते दम तक पाटिल की दो इच्छाएं थीं। एक थी दोबारा पुलिस में भर्ती होना और दूसरी थी सलमान को सजा दिलवाने की कोशिश करना।

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