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अंबानी के मैनेजरों ने ईटीवी चैनल्स के एडिटर्स को 180 करोड़ के विज्ञापन जुटाने के टारगेट दिए!

देश के मीडिया इतिहास की अभूतपूर्व घटना… देश के मीडिया इतिहास में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में सहारा की तरह अब रिलायंस ग्रुप ने नेटवर्क18 के तहत 18 राज्यों में संचालित 13 ईटीवी न्यूज़ चैनल्स के एडिटर्स को एक अप्रैल से शुरू हो रहे अगले वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 180 करोड़ रुपए के विज्ञापन जुटाने का टारगेट दिया है। रिलायंस के इस फैसले से सभी बड़े न्यूज़ चैनल्स में हड़कंप मच गया है। देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने रिलायंस के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि एडिटर्स को विज्ञापन लाने के लिए टारगेट दिए गए हैं।

देश के मीडिया इतिहास की अभूतपूर्व घटना… देश के मीडिया इतिहास में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में सहारा की तरह अब रिलायंस ग्रुप ने नेटवर्क18 के तहत 18 राज्यों में संचालित 13 ईटीवी न्यूज़ चैनल्स के एडिटर्स को एक अप्रैल से शुरू हो रहे अगले वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 180 करोड़ रुपए के विज्ञापन जुटाने का टारगेट दिया है। रिलायंस के इस फैसले से सभी बड़े न्यूज़ चैनल्स में हड़कंप मच गया है। देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने रिलायंस के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि एडिटर्स को विज्ञापन लाने के लिए टारगेट दिए गए हैं।

इससे पहले सहारा ग्रुप ने न्यूज़ चैनल में ऐसी ही व्यवस्था की गई थी लेकिन बाद में वरिष्ठ पत्रकारों के विरोध के कारण उसे वापस ले लिया गया था। अब रिलायंस ने सहारा ग्रुप की इस पुरानी परंपरा को फिर गले लगा लिया है। यह फैसला 2 मार्च को मुम्बई में नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में नेट्वर्क18 तथा ईटीवी के सभी एडिटर्स व CEOs मौजूद थे। जैसे ही राहुल जोशी ने यह फैसला सुनाया वहां मौजूद एडिटर्स हक्के-बक्के रह गए क्योंकि उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी में भी उन्हें विज्ञापन लाने के टारगेट दिए जाएंगे। पिछले कुछ महीनों में ईटीवी के रेवेन्यू में जबरदस्त गिरावट आई है। उसे रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है।

जानकार सूत्रों के अनुसार, ईटीवी एडिटर्स में इस फैसले के खिलाफ बगावत जैसी स्थिति है क्योंकि कोई भी स्वाभिमानी एडिटर चैनल में एक सेल्स एग्जीक्यूटिव की तरह काम करने को तैयार नहीं है। नेटवर्क18 से जुड़े एक सूत्र ने यह खुलासा किया है कि रिलायंस ने राहुल जोशी को यह दो टूक सन्देश दिया है कि या तो चैनल के बिगड़े हुए हालात को सुधारो या फिर नौकरी छोड़ दो। ऐसे हालात में बहुत मजबूर और विवश हो कर बड़े भारी मन से राहुल जोशी ने यह फैसला लिया है। राहुल जोशी खुद एक बड़े पत्रकार हैं और नेटवर्क18 में आने से पहले वे इकनोमिक टाइम्स के सीनियर एडिटर हुआ करते थे। लेकिन अब रिलायंस की नौकरी में आने के बाद उनका सारा रुतबा ख़त्म हो चुका है और अब वे केवल एक मीडिया मैनेजर की तरह काम कर रहे हैं।

अलबत्ता रिलायंस के दबाव में लिए गए राहुल जोशी के इस फैसले से नेटवर्क18 बोर्ड के चेयरमैन आदिल ज़ैनुलभाई व दूसरे सीनियर डायरेक्टर्स काफी खफा हैं लेकिन रिलायंस के फैसले के आगे मुँह खोलने की हिम्मत किसी में नहीं है। सूत्रों का यह भी कहना है कि शायद रिलायंस राहुल जोशी का विकल्प तलाश रहा है और इसी क्रम में उपेन्द्र राय पिछले कुछ दिनो में दो बार मनोज मोदी से मुलाकात कर चुके हैं।

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