गुमला जिले में एक टीवी पत्रकार कर रहा है उगाही (सुनें टेप)

गुमला जिले में एक बड़े खबरिया चैनल के लोकल पत्रकार द्वारा लगातार पैसे की वसूली की बात सामने आ रही है। यह पत्रकार सरकारी स्कूलों में जा कर वहां के शिक्षकों को खबर चला देने की धमकी देकर रकम वसूल रहा है। एक स्कूल में जा कर इस पत्रकार ने अपने साथी पत्रकार के साथ मिल कर करीब 30 हजार रुपये की मांग की। पैसे न देने पर अंजाम भुगत लेने की धमकी भी दी। इस ऑडियो टेप में धमकी की बात साफ सुनाई दे रही है।

बिहार-झारखंड के एक प्रतिष्ठित चैनल के पत्रकार के द्वारा इस तरह की वसूली की सूचना मिलने से चैनल की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग गई है। इससे पहले भी इस पत्रकार पर एक निजी विद्यालय के द्वारा पैसे की मांग करने को लेकर न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया था। इसके बाद किसी तरह मामले में समझौता कराया गया। टेप सुनने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें…

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अंबानी के मैनेजरों ने ईटीवी चैनल्स के एडिटर्स को 180 करोड़ के विज्ञापन जुटाने के टारगेट दिए!

देश के मीडिया इतिहास की अभूतपूर्व घटना… देश के मीडिया इतिहास में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में सहारा की तरह अब रिलायंस ग्रुप ने नेटवर्क18 के तहत 18 राज्यों में संचालित 13 ईटीवी न्यूज़ चैनल्स के एडिटर्स को एक अप्रैल से शुरू हो रहे अगले वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 180 करोड़ रुपए के विज्ञापन जुटाने का टारगेट दिया है। रिलायंस के इस फैसले से सभी बड़े न्यूज़ चैनल्स में हड़कंप मच गया है। देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने रिलायंस के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि एडिटर्स को विज्ञापन लाने के लिए टारगेट दिए गए हैं।

इससे पहले सहारा ग्रुप ने न्यूज़ चैनल में ऐसी ही व्यवस्था की गई थी लेकिन बाद में वरिष्ठ पत्रकारों के विरोध के कारण उसे वापस ले लिया गया था। अब रिलायंस ने सहारा ग्रुप की इस पुरानी परंपरा को फिर गले लगा लिया है। यह फैसला 2 मार्च को मुम्बई में नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में नेट्वर्क18 तथा ईटीवी के सभी एडिटर्स व CEOs मौजूद थे। जैसे ही राहुल जोशी ने यह फैसला सुनाया वहां मौजूद एडिटर्स हक्के-बक्के रह गए क्योंकि उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी में भी उन्हें विज्ञापन लाने के टारगेट दिए जाएंगे। पिछले कुछ महीनों में ईटीवी के रेवेन्यू में जबरदस्त गिरावट आई है। उसे रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है।

जानकार सूत्रों के अनुसार, ईटीवी एडिटर्स में इस फैसले के खिलाफ बगावत जैसी स्थिति है क्योंकि कोई भी स्वाभिमानी एडिटर चैनल में एक सेल्स एग्जीक्यूटिव की तरह काम करने को तैयार नहीं है। नेटवर्क18 से जुड़े एक सूत्र ने यह खुलासा किया है कि रिलायंस ने राहुल जोशी को यह दो टूक सन्देश दिया है कि या तो चैनल के बिगड़े हुए हालात को सुधारो या फिर नौकरी छोड़ दो। ऐसे हालात में बहुत मजबूर और विवश हो कर बड़े भारी मन से राहुल जोशी ने यह फैसला लिया है। राहुल जोशी खुद एक बड़े पत्रकार हैं और नेटवर्क18 में आने से पहले वे इकनोमिक टाइम्स के सीनियर एडिटर हुआ करते थे। लेकिन अब रिलायंस की नौकरी में आने के बाद उनका सारा रुतबा ख़त्म हो चुका है और अब वे केवल एक मीडिया मैनेजर की तरह काम कर रहे हैं।

अलबत्ता रिलायंस के दबाव में लिए गए राहुल जोशी के इस फैसले से नेटवर्क18 बोर्ड के चेयरमैन आदिल ज़ैनुलभाई व दूसरे सीनियर डायरेक्टर्स काफी खफा हैं लेकिन रिलायंस के फैसले के आगे मुँह खोलने की हिम्मत किसी में नहीं है। सूत्रों का यह भी कहना है कि शायद रिलायंस राहुल जोशी का विकल्प तलाश रहा है और इसी क्रम में उपेन्द्र राय पिछले कुछ दिनो में दो बार मनोज मोदी से मुलाकात कर चुके हैं।

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खबर से भड़के डीएम ने जारी किया आदेश : ‘हिंदुस्तान’ अखबार के इस उगाहीबाज रिपोर्टर को आफिस में घुसने न दें!

Dinesh Singh : मैं नहीं जानता कि बाका के जिलाधिकारी के दावे में कितनी सच्चाई है। बिहार में हिन्दुस्तान की स्थापना के समय से जुड़े होने के चलते मैंने देखा है कि रिमोट एरिया में ईमानदारी के साथ काम करने वाले पत्रकार भी भ्रष्ट अधिकारियों के किस तरह भेंट चढ़ जाते हैं। मैं यह नहीं कहता कि सारे पत्रकार ईमानदार हैं मगर मैं यह भी कदापि मानने के लिए तैयार नहीं हूं कि सारे पत्रकार चोर और ब्लैकमेलर ही होते हैं।

सच यह है कि बिहार में मध्याह्न भोजन के नाम पर जहां भी हाथ डालिए और खास कर बाका, मुंगेर और जमुई जिले में, केवल लूट और बदबू ही मिलेगा। यदि किसी पत्रकार से शिकायत थी तो सबसे पहले संपादक से शिकायत करनी चाहिए थी। संपादक द्वारा कार्रवाई नहीं होने पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का रास्ता खुला था। मगर नहीं। डीएम ने सीधे तुगलकी फरमान जारी कर दी।

भागलपुर के संपादक बदले हैं और सुना है ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई भी करते हैं। किन्तु लगता है अनुभवहीन जिला अधिकारी ने भ्रष्ट अधिकारियों के प्रभाव में आकर कोई बड़ा बवंडर कर दिया हो। अखबार के संपादक से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि वे इस मामले मे तत्काल कार्रवाई करें ताकि पत्रकारिता की मर्यादा बिहार में अक्षुण्ण बनी रहें।

हिंदुस्तान अखबार के विशेष संवाददाता रह चुके पत्रकार दिनेश सिंह की एफबी वॉल से.

नीचे वो खबर है जिससे भड़के बांका के जिलाधिकारी ने रिपोर्टर को उगाहीबाज करार देते हुए आफिसियल लेटर जारी कर दिया…. खबर को साफ-साफ पढ़ने के लिए नीचे दी गई न्यूज कटिंग के उपर ही क्लिक कर दें :

उपरोक्त स्टटेस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Niraj Ranjan अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है. चौथे स्तंभ को हिलाना मुश्किल है.

Uday Murhan मीडिया संस्थानों और पत्रकारिता जगत पर भी सवाल है . दूसरे क्या करेंगे और करना चाहिये दूसरे जानें .मीडिया जगत सोचे .

Brajkishor Mishra सत्यप्रकाश जी को बधाई। एक जिला अधिकारी को आपके कारण इस ओछेपन पर आना पड़ा। डीएम द्वारा लिखे गए डिपार्टमेंटल लेटर के सेंटेंस से स्पष्ट है कि मामला मध्यान भोजन की रिपोर्टिंग का नहीं है। कही न कही आपकी किसी और रिपोर्टिंग से डीएम की फटी पड़ी है। जिसका खुन्नस वो मध्यान भोजन की रिपोर्टिंग के नाम पर निकल रहा है। यदि मामला उगाही का होता तो डीएम एफआईआर भी दर्ज करा सकता था। लेकिन शायद कोई सबूत नहीं। डीएम साहब मध्यान भोजन आप नहीं खाते। वो देश के भविष्य, बच्चो के विकास के लिए है। पत्रकार छोड़िये, यदि मध्यान भोजन के गुणवत्ता में किसी भी व्यक्ति को शक होता है तो रसोई देखना उसका अधिकार है। बांका के पत्रकार बंधुओ का आग्रह हैं की पता करें इस डीएम को मंथली उगाही कौन-कौन से विभाग से कितनी पहुँचती है। अखबार में खबर नहीं लग पाती तो इनकी ईमानदारी की सबूत सोशल मीडिया पर डालिये।

Jayram Viplav डीएम के लिखने का अंदाज दाल में काला है ।

Dinesh Singh उदय जी, सवालो के घेरे मे आज कौन नही है। कस्बाई पत्रकारिता की स्थिति जानिए । दस रुपये प्रति खबर पर काम करता है और महीने मे दस खबर नही छपती है। मिलता है एक खबर पर दस रुपये मगर खर्चा पड़ता है 50 रु। अखबार को उसी के माध्यम से विज्ञापन भी चाहिए । वह भ्रष्ट और चोरी नेताओ की चाकरी मे लगा रहता है कि कुछ ऐड मिलेगा । उसे परिवार भी चलाना है। कठिनाई तब हो जाती है जब ओहदा और सैलरी मिल जाने के बाद भी गंदगी फैलाते हैं। धुआं वही से उठता है जब कही आग लगा होता है । विशेश्वर प्रसाद के समय मे हिन्दुस्तान भागलपुर मे कंट्रोवर्सी मे रहा और खबर छापने के लिए पैसे मांगने के खिलाफ बहुत सारे होल्डिंग्स भी टंगे । मै नही जानता की उस आरोप मे कितनी सच्चाई थी मगर चुने हुए बदनाम पत्रकारो को मिला संरक्षण और शहर के धंधेवाजो से उनके रिश्ते उनकी बदनामी को हवा देता रहा। मगर आप ही बताइए विशेश्वर प्रसाद और अक्कु श्रीवास्तव जैसे लीग जो कभी -कभी संपादक बन जाते है वही पत्रकारिता के चेहरे बनेगे या ईमानदार संपादको की भी चर्चा होगी? मैं दावे के साथ कहा सकता हू की आज भी पत्रकारिता मे ईमानदारी अन्य सभी क्षेत्रो की तुलना मे ज्यादा बची हुई है।

Uday Murhan एकदम सहमत . मेरा आशय आप से भिन्न नहीं है .

Brajkishor Mishra दिनेश सर, पत्रकारिता में सबसे बड़ी दिक्कत है की एक पत्रकार ही दूसरे पत्रकार की लेने में लगा हुआ है … अपने गिरेबाँ देखना किसी को पसंद नहीं।
Jayram Viplav पत्रकारिता और राजनीति “सेवा” के क्षेत्र है यहाँ कदम कदम पर नैतिकता और मूल्यों का तकाजा है लेकिन जब लोग इसे पैशन की जगह प्रोफेशन बना लेंगे तो क्या होगा? और हां यदि जिला ब्यूरो से नीचे प्रखंडों में काम करना हो तो आर्थिक रूप से मजबूत हो।

Dinesh Singh जिला अधिकारी के खिलाफ सत्यप्रकाश मानहानि का मुकदमा करें । मैं हर तरह से मदद के लिए तैयार हूं ।

Brajkishor Mishra विशेश्वर कुमार सर के साथ 12 साल पहले मुझे 2 साल काम करने का मौका मिला था, बड़े ही खड़ूस संपादक थे। जर्नलिज्म को छोड़ कर अपनापन नाम की कोई चीज ही नहीं। बड़े ही सेल्फिश संपादक हैं। सिर्फ खबर से मतलब रखते हैं। एक बार तो दूसरे संस्थान में किसी कारण परेशान हो उनसे नौकरी मांगा था सीधे ना कर बैठे। भविष्य में भी उनसे किसी फेवर की उम्मीद नहीं। लेकिन ये दावे के साथ कह सकता हूँ उनके जैसे पत्रकार और संपादक होना आसान नहीं। अकेले वो दस पत्रकार पर भाड़ी हैं। पत्रकार के सम्मान की सुरक्षा के लिए हमेशा सबसे आगे रहे है। वो कभी-कभी नहीं मेरे सामने बीते डेढ़ दशक में तीन जगहों पर स्थानीय संपादक के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किये हैं। मैंने बोल्ड जर्नलिज्म उनसे ही सीखा है।

Dinesh Singh पत्रकारिता केवल खबरों का लेखन नहीं है। यह एक आन्दोलन भी है । भारत मे पत्रकारिता का जन्म ही राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन से हुआ है। शहर का एक बड़ा व्यापारी शहर मे होर्डिन्ग लगाकर पैसा माँगने का आरोप लगाए और संपादक खामोश रहे यह कैसा वोल्डनेस है? काम करना और स्वाभिमान के लिए चट्टान से टकरा जाना अलग -अलग बात है। पत्रकारिता मे ईमानदारी और निर्भिकता बाहर से भी दिखनी चाहिए। यह मानहानि का मुकदमा बनता था। कुछ नही होने से पूरी टीम का सर शर्म से झुका रहा। मै मानता हूं कि आरोप गलत थे जैसे सत्यप्रकाश पर लगे आरोप गलत हैं। मगर चुप रह जाओगे तो लोग तरह -तरह के मतलब निकालेगे ही।
अजय झा ऐसे पत्रकार को सलाम जिसके लेखन से प्रशाशन की….

Sanjay Kumar Singh मैं भी एक पत्रकार हूँ। दो दशक से अधिक समय से इससे जुड़ा हूँ। मैंने कभी नहीं सोचा था कि पत्रकारिता कभी चाटुकारिता में बदलेगी लेकिन कुछ अपवादों को छोड़ दे तो यह अब इससे भी नीचे दलाली में बदल गई है। हर कोई अपना एजेंडा लेकर चल रहा है। जिसमे पत्रकारिता मुखौटा बना हुआ है। सिवान, छपरा, बांका से लेकर पटना तक ऐसे मुखौटाधारि बैठे हुए हैं। ऐसे लोगों को कौन बेनकाब करेगा, शायद कोई नहीं, क्योंकि ये लोग अब सिस्टम में शामिल हो चुके हैं। दिनेश जी को बधाई… सिवान की ईमानदारी भी सीबीआई जरूर सामने लाएगी

Hari Prakash Latta आँख मूँदकर किसी को समर्थन देना या झुटला देना गलत है। बिना सत्यता जाने किसी एक व्यक्ति , घटना को केंद्रित कर सैद्धान्तिक बहस का कोई अर्थ नहीं होता है। हिंदुस्तान के सम्पादक को इन्क्वारी कर उचित निर्णय लेना चाहिए

Kumar Rudra Pratap मैंने देवरे को जाना है गया कार्यकाल के दौरान, ईमानदार और निडर अब तक।

Omprakash Yadav दिनेश जी जिलाधिकारी बाँका का तुगलकी भी कह सकते है और महाराष्ट्रीय फरमान भी कह सकते है आज के दौर का।जिस तरह महाराष्ट् में उत्तर भारत के लोगो को घुसने पर पावंदी हो गया है, चुकी बाँका के जिलाधिकारी महाराष्ट्रा के हैं और बाँका में उसी तर्ज पर काम कर रहे हैं। दिनेश जी आपने सही अनुमान लगाया की मध्यान भोजन बाला मामला बहाना है। एक समाचार पर जिलाधिकारी भड़के हैं।

Neel Sagar यदि सत्यप्रकाश जी पर आरोप गलत लगा है जो सत्य से परे है तो तत्काल उन्हे राय दिजिए कि डी0एम0 के खिलाफ भा0द0सं0 की धारा 499 के आधार पर मान-प्रतिष्ठा के साथ खेलने के लिए 25 लाख रूपया का मानहानि दायर करें।-सम्पादक-नील सागर दैनिक पटना -9835482126

Dinesh Singh अब तुगलकी फरमान जारी करने वाले बाका के जिला अधिकारी का असलियत सामने आ चुका है। —खबर पढ़कर बौखलाए जिला अधिकारी और कुछ नहीं बल्कि अहंकार का नाजायज पैदाइस है। –बिहार मे रहकर बिहारी को गाली देने वाले को तत्काल प्रभाव से सरकार निलम्बित करे। — पूरा बिहार सत्यप्रकाश के साथ है। अब बात साफ हो गई है कि माजरा क्या है । हमारी पत्रकार विरादरी कुछ आदत से लाचार है। ईमानदारी का सार्टिफिकेट हम मुफ्त मे बाटते है। यार पहले अपनी विरादरी पर गर्व करना सीखो। मै पहले ही कह चुका हूं कि पत्रकार विरादरी मे आज भी ईमानदारी बहुत हद तक कायम है। तुम बिहार की जनता की गाढ़ी कमाई पर पलते हो और बिहारी को ही गाली बकते हो। यहा का आदमी जब महाराष्ट्र काम की तलाश मे जाता है तो नपुंसको की परवरिश बनकर हमला करते हो और बिहार आकर बिहारी पर ही रोब गाठते हो। कम से कम सत्यप्रकाश जैसे पत्रकार के रहते यह नही चलने वाला है । सत्यप्रकाश की रिपोर्टिंग यह साबित करता है कि वह पत्रकारिता का हीरो है। सत्यप्रकाश को तुम सरकारी कार्यालय जाने से नही रोक सकते । तुम अपना देखो की तुम कैसे जाओगे । वक्त आ गया है पत्रकार विरादरी अपनी एकजुटता दिखाए।

Amit Roy सत्यप्रकाश जी दुर्गापूजा के बाद इस दिशा में कोई ठोस निर्णय ले।हमलोग आपके हर कदम पर साथ है।

Guddu Rayeen मेरा एक ही हिसाब है ऐसे कलकटर को बिहार से उठा कर बाहर फेक देना चाहिऐ

Himanshu Shekhar Hahaha sir ne article 19 Ni padhe Kya.??? Kabhi bihari word use krte hai kabhi Kuch ? Bhagwan bharose hai Banka zila soch samjhdar kr cmnt kijye sir PTA Ni it act me jail daal Diya jaye

Ashish Deepak इस प्रकार का फरमान पुर्वाग्रह से प्रेरित लगता है। कहीं पत्रकार महोदय ने कड़वा सत्य तो नही लिख डाला ।

Nabendu Jha इस बात को रखने का यह तरीका सही नहीं। बल्कि ,इसके लिए एक जिम्मेदार अधिकारी को बात रखने की सही जगह की जानकारी होनी चाहिए । इसे वापस ले।

Pushpraj Shanta Shastri जिलाधीश ने किसी साक्ष्य के बिना जो निर्देश जारी किया है, यह आश्चर्यजनक नहीं है। हमारी पत्रकारिता ने डीएम से लेकर सीएम की आलोचना की आदत छोड़ दी है। जिलाधीश के पास अगर संवाददाता के द्वारा रिश्वत मांगने के साक्ष्य थे तो उन्हें किसने प्राथमिकी दर्ज कराने से रोका था? मुझे इस फरमान की भाषा में जिलाधीश प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत हो रहे हैं। बिहार के वरिष्ठ पत्रकारों को इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेना चाहिए। मैं इस मसले के तथ्यान्वेषण में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हूँ, शर्त यह है कि अपने कुछ बंधु साथ शरीक हों। पत्रकारिता कथ्य के बावजूद तथ्य की मांग करता है। जिलाधीश के पक्ष-विपक्ष में तत्काल कोई राय प्रकट करना अनुचित है। महाराष्ट्र-बिहार के प्रदेशवाद की चर्चा फूहड़ता है। जिलाधीश का पत्र तथ्य के बिना कथ्य पर आधारित है इसलिए कथ्य के भीतर की हकीकत के पड़ताल की जरुरत है।

Dinesh Singh जिला अधिकारी किसी वजह से इस तुगलकी हरकत पर उतरे वह प्रकाशित खबर तथ्य बनकर सामने है।

Awadhesh Kumar arajak bihar ka namuna. Jab rajneeti fail karte hi to yehi hota hi.ek dm bihar mei…

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धंधेबाज ‘समाचार प्लस’ चैनल : रिपोर्टरों को उगाही का टारगेट, पूरा न करने पर कइयों को हटाया

समाचार प्लस राजस्थान में सभी स्टिंगरों को दिया गया एक लाख से 2 लाख रुपये उगाही का लक्ष्य. नहीं देने वाले रिपोर्टरों को निकाला. 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस के नाम पर उगाहने हैं लाखों रुपये. समाचार प्लस में मैं कई सालों से कार्य कर रहा था.  5 हजार रुपये मुझे मेरी मेहनत के मिलते थे. काम ज्यादा था, पैसे कम. लेकिन चैनल को कुछ और ही प्यारा था. समाचार प्लस राजस्थान टीम ने मुझे फ़ोन कर कहा-

”आप ब्यूरो हैं, आपको हम 1 लाख से 2 लाख रुपये का लक्ष्य दे रहे हैं. हमे जल्दी विज्ञापन दे दो. नहीं दे सकते हो तो टीवी में दिखना कम हो जाओगे और हमें कई स्टिंगरों को इस वजह से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा. आप पर भी गाज गिर सकती है, इसलिए आप भी खबरें कम कर दो और विज्ञापन दो. नहीं दे सकते तो मैनेजमेंट आपको हटा देगा.”

उन लोगों ने फोन पर ही बताया कि अजमेर के ब्यूरो चीफ संतोष सोनी और उदयपुर के अब्बास रिजवी को बाहर का रास्ता टारगेट पूरा न करने के कारण दिखा दिया गया है. इनको हटाने की वजह यह कि इन्होंने पैसे देने से मना कर दिया. उसी दिन हटाकर नए स्टिंगरों को लगा दिया गया. राजस्थान के सारे स्टिंगरों को मेल पर 1 से 2 लाख रुपये देने का आदेश दे दिया गया है. आखिरकार मैनेजमेंट ने हमें बाहर क्यों निकाला. हम उन्हें हर ओकेजन पर विज्ञापन देते थे. लेकिन जब बार-बार विज्ञापन समाचार प्लस राजस्थान टीम मांग रही है तो हम कहां से दें.

अभी दीपावली पर ही लाखों रुपये के विज्ञापन दे चुके हैं. उनका ही पेमंट नहीं हुआ. लेकिन अब फिर से 1-2 लाख रुपये विज्ञापन के नाम पर मांग लिए. धंधेबाजी और उगाही की हद होती है. आप से गुजारिश है कि आप इस दुःखद मेल को अच्छे से लगायें और मीडिया कर्मियों का साथ देवें. यह सबको जानना जरूरी है कि रिपोर्टर अब चैनल के लिए कमाई करेगा. यही कारण है कि अब समाचार प्लस ग्रुप के दावे फेल होने लगे हैं. यह साबित होने लगा है कि इसका मालिक उमेश कुमार पहले से ही धंधेबाज रहा है और फिर से अपने ओरीजनल रूप में आ गया है. इसकी धंधेबाजी के चर्चे उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत पूरे राजस्थान में होने लगे हैं. इसकी नेताओं अफसरों सरकारों की दल्लागिरी के कारण एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया.

ग्रुप ने जिला स्तर पर राजस्थान में जो संवाददाता रखे थे, रिटेनर, उन पर मार्केटिंग का भारी दबाव बनाया जा रहा है. अब रिपोर्टर खबरें करे या विज्ञापन मांगता फिरे, समझ ही नहीं आ रहा. चैनल ने कमाई न करके देने पर बीकानेर, अजमेर समेत कई जिलों के रिपोर्टरों को हटा कर वहां स्ट्रिंगर रख दिए हैं. अब 26 जनवरी के लिए 1 लाख का टार्गेट दिया है. समझ नहीं आ रहा है कि इस चैनल के मार्केटिंग विभाग वाले क्या कर रहे हैं. बड़ी तनख्वाह पर काम कर रहे हैं और दबाव रिपोर्टर पर बना रहे हैं. सरकार के खिलाफ खबर नहीं चलाते, भले ही कुछ भी हो जाए. धमकी दी जा रही है कि रुपए नहीं उगाहे तो हटा दिया जाएगा. नीचे वो मेल है जो चैनल की तरफ से सभी को भेजा गया है>

Dear All,

this is a reminder regarding spot/scroll advt on 26 jan-2016 (Republic day ) as per instructions of Channel Head- Mr. Ajay Jha
District head quarter – advt Amount should be Rs. 1 lakh
Tahsil and others advt Amount should be Rs. 50,000 /-

Plz make sure for this target.

Thanks
Manoj Gotherwal
Manager Marketing
Samachar Plus Channel- Raj.
08233229289

भड़ास के पास राजस्थान के कई टीवी जर्नलिस्टों द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (8) : पहले स्टिंग फिर वसूली का ये रहा सबसे बड़ा प्रमाण… (देखें वीडियो)

‘आपरेशन जोंक’ के नाम पर उगाही करने वाले न्यूज नेशन चैनल की पूरी कथा सात पार्ट में आप पहले ही पढ़ चुके हैं. जाने माने खेल पत्रकार पदमपति शर्मा उगाही के खेल के सारे दांव-पेंच का रहस्य एक-एक कर उदघाटित करने का कार्यक्रम संपन्न कर चुके हैं. चूंकि पदमपति शर्मा न्यूज नेशन चैनल में कार्यरत रहे हैं, इसलिए उन्हें इस चैनल के अंदरखाने के चाल-ढाल रंग-रूप सोच-समझ के बारे में सब कुछ अच्छे-से पता था. इसलिए उन्होंने जब उगाही कथा का वर्णन शुरू किया तो लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली कि क्या सरोकारी होने का दावा करने वाला यह न्यूज चैनल इतने बड़े गंदे खेल में पूरी तन्मयता से लिप्त है!

लोग कहने लगे हैं कि ये मीडिया तो बड़ा गंदा है, क्योंकि उगाही इसका मूल धंधा है. इस गंदे धंधे के प्रमाण कम ही सामने आ पाते हैं. आज जो ये प्रमाण सामने रखा जा रहा है यह लंबे समय तक पत्रकारिता के छात्रों को सिखाता रहेगा कि आधुनिक मुख्य धारा की मीडिया के अंतरमन का रहस्य असल में ‘जन सरोकार’ नहीं बल्कि ‘धन अपार’ है और इसको हासिल करने के लिए कोई भी तिकड़म रचा जिया जा सकता है. आपके समक्ष वो वीडियो रखा जा रहा है जिसमें न्यूज नेशन उगाही कथा का प्रमाण मौजूद है. लगभग आधे घंटे के इस वीडियो को न सिर्फ देखिए बल्कि अपने दोस्तों परिचितों परिजनों को भी दिखाइए. वजह ये कि इसे न तो कोई न्यूज चैनल दिखाएगा और न ही कोई अखबार इस वीडियो के डिटेल प्रकाशित करेगा.

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=GKjK0E1nmiQ


आप अगर पूरे मामले से अवगत नहीं हैं तो नीचे दिए गए शीर्षकों पर एक-एक कर क्लिक करते जाएं:

‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (1) : स्टिंग ‘आपरेशन जोक’ के नाम पर जमकर माल कूटा!

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‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (2) : This channel, its reporters and stingers are extorting money

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‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (3) : स्टिंग से बाहर करने की एवज में भुगतान चेक से किया गया

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‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (4) : सफदरजंग पुलिस ने रंगे हाथ बरामद किया छह लाख का चेक

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‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (5) : छत्तीस लाख फिरौती मांगने वाली शीतल कपूर आज भी आजाद

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‘न्यूज नेशन’ की उगाही कथा (6) : शीतल कपूर के बारे में क्राइम ब्रांच को मिले सनसनीखेज साक्ष्य

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‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (7) : दिल्ली-एनसीआर के डाक्टर्स, डयग्नोस्टिक सेंटर्स एकजुट, आपात बैठक

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सरोकारी चैनलों का सच : एनडीटीवी मनी लांड्रिंग में दोषी… न्यूज नेशन उगाही में लिप्त…

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‘न्यूज नेशन’ की उगाही कथा (6) : शीतल कपूर के बारे में क्राइम ब्रांच को मिले सनसनीखेज साक्ष्य

Padampati sharma : [हे भगवान ! यह क्या हो रहा है…? मेरी वाल से पोस्ट कौन डीलिट कर रहा है ? कोई आईटी एक्सपर्ट मेरी वाल पर नजर गड़ाए हुआ है…स्टिंग में उगाही पर खेल को लेकर दस दिन पहले मेरी दो पोस्ट हटा दी गयी थीं और एक भारतीय टीम के चयन पर मैने लिखी थी वह भी गायब हो गयी…सात जून को कड़ी की चौथी पोस्ट डाली थी…काफी सूचनात्मक थी…..वह थोड़ी देर पहले ही हैक कर ली गयी…जबसे मैने स्टिंग राग छेड़ा है तब से लोग लग गए हैं पीछे. फोन आ रहे हैं, चेज कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि मंशा ठीक नहीं है लोगों की….लेकिन यदि डराना चाहता है कोई तो मैं चुनौती देता हूं कि सामने आओ…मैं डरने वालों में नहीं हू. कौन जाने कि मेरी शहादत मीडिया की गंदगी साफ करने में सहायक बने…..] ….शीतल को शो के पहले ही स्टिंग की रॉ फुटेज, कैसे हाथ लग गयी थी…पुलिस की सघन जांच, में सनसनीखेज सुबूत हाथ लगे !! ‘आपरेशन जोंक’ में हुए Extortion मामले की जांच में जितना अंदर जा रहा हूं, उतनी ही उलझनें बढ़ती जा रही हैं. बीता दिन इसी चक्कर में निकल गया…शनिवार को ही एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का फोन आया जिसमें उन्होंने मेरी मुकम्मल सिक्योरिटी को लेकर आश्वस्त भी किया. पर मैं तो चाहता हूं कि इस मुद्दे पर जान जाने से यदि मीडिया में गंदगी साफ होती है तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है. 

हां मैं न्यूज नेशन के आकाओं से यह आग्रह जरूर करना चाहता हूं कि वे इस मामले की घरेलू स्तर पर जांच करांए और देखें कि जो भी इसमें संलिप्त पाया जाता है, उसे धक्के खाने के लिए बाहर छोड़ दें, भले ही वह शीर्ष प्रबंधन में ही क्यों न हो. मैं जानता हूं कई निदेशकों को और समझता हूं कि उनका इसमें दूर दूर तक उनका कोई हाथ नहीं होगा. मगर कोई एक तो है, इस धतकरम में शामिल. पुलिस के पास जो दो घंटे की रेकार्डिंग है, यदि देखेंगे तो वे भी मेरी बात पर यकीन करने लगेंगे. 

जहां तक जांच का सवाल है तो दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को शीतल कपूर के बारे में सनसनीखेज साक्ष्य मिल रहे हैं. बनारस से जुड़े दिल्ली पुलिस के एक अफसर ने मुझे बताया कि न्यूज़ नेशन चैनल के लिए स्टिंग ऑपरेशन के नाम पर उगाही कर रही दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट के सामने रहने वाली व्यवसायी पिता और अध्यापिका माता की संतान मॉडल शीतल कपूर चैनल के कई पत्रकारों के अलावा सीधे सीधे प्रबंधन को जानती थी. शीतल कपूर के कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. शीतल कपूर ने पहली पूछताछ में कई बड़े पत्रकार और मैनेजमेंट के अफसरों के नाम लिए थे.शीतल कपूर ने ये भी बताया था कि दिल्ली के कई डायग्नोस्टिक सेंटर्स से उसने भारी रकम वसूल कर oxxy के अपने मालिक पंकज गुप्ता को दी थी. ऐसा समझा जा रहा है कि पंकज गुप्ता ने अपना कमीशन काट कर स्टिंग के नाम पर वसूल की गई रकम प्रबंधन को दी थी.

पुलिस को कुछ और डॉक्टर्स से पूरे रैकेट के बारे में भी ठोस जानकारी मिली हे. इधर न्यूज़ चैनल जांच रुकवाने के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह और पुलिस कमिश्नर को अप्रोच कर रहा है. चैनल के दो बड़े पत्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लेकर बीजेपी के कई नेताओं के पैर पकड़ रहे हैं . इस बीच जानकारी मिली हे कि क्राइम ब्रांच शीतल कपूर और पंकज गुप्ता के न्यूज़ नेशन में डायरेक्ट कांटेक्ट के लिंक जोड़ने में लगी है. शीतल कपूर को स्टिंग ऑपरेशन दिखाने से पहले स्टिंग की रॉ फुटेज कैसे मिली इसको लेकर पुलिस को शक है कि चैनल में स्टिंग की हार्ड डिस्क तक कपूर का हाथ पहुँच चुका था. यानी कुल मिलाकर चैनल संगठित तरीके से स्टिंग के नाम पर उगाही कर कर रहा था . वैसे हे परमात्मा जो अपराधी हैं उनको सजा मिले पर चैनल बेदाग साबित होकर बदस्तूर चलता रहे.

पदमपति शर्मा के एफबी वॉल से

इससे पहले की न्यूज नेशन की उगाही कथा की पांच कड़ियां यहां पढ़ सकते हैं

‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (1) : स्टिंग ‘आपरेशन जोक’ के नाम पर जमकर माल कूटा! : https://bhadas4media.com/tv/5799-nn-ugaahi

 

‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (2) : THIS CHANNEL, ITS REPORTERS AND STINGERS ARE EXTORTING MONEY : https://bhadas4media.com/tv/5801-news-nation-complaint

 

‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (3) : स्टिंग से बाहर करने की एवज में भुगतान चेक से किया गया : https://bhadas4media.com/tv/5802-newsnation-complaint-ugahi

 

‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (4) : सफदरजंग पुलिस ने रंगे हाथ बरामद किया छह लाख का चेक : https://bhadas4media.com/tv/5811-tvchannel-newsnation-delhi

 

‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (5) : छत्तीस लाख फिरौती मांगने वाली शीतल कपूर आज भी आजाद : https://bhadas4media.com/tv/5831-newsnation-story-5

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‘न्यूज नेशन’ उगाही कथा (3) : स्टिंग से बाहर करने की एवज में भुगतान चेक से किया गया

Padampati Sharma : ‘उगाही’ उद्योग बना तो पैसा भी चेक से दिया गया…!! अजीब दास्तां है ये, कहां शुरू कहां खतम !! याद आ रहा है पुरानी फिल्म का यह गाना जो विषय से काफी जुड़ा लगता है. देखिए जो यह कहते हैं कि मैं कहां था, मीडिया की काली दुनिया भयावह हो चुकी है, तो उनको जवाब है कि मैं यहीं था ओर हूं पर जिस तरह एक्सटार्शन यानी उगाही को एक उद्योग बना दिया गया, वह हैरतअंगेज है. मैं पूछता हूं कि क्या कभी आपने पहले यह सुना था कि स्टिंग से बाहर करने की एवज में भुगतान नंबर एक यानी चेक से दिया गया ? जी हां आपरेशन जोंक में यही तो हुआ. 

चलिए बात शुरू करते हैं ‘हरि अनंत हरा कथा अनंता’ की तर्ज पर. पिछली जुलाई में न्यूज नेशन ने आपरेशन जोंक पार्ट वन में दिखाया कि किस तरह डायगोनस्टिक लैब में मरीजों की जांच में भारी कमीशनखोरी हो रही है. मजेदार बात तो यह कि जरा सी भी समझ रखने वाला जानता है कि बिना कमीशन दिए ये सेंटर चल ही नहीं सकते. सिस्टम ही इतना ढीला ढाला है कि कोई कुछ नहीं कर सकता. सरकारी जांचों में कैसे फर्जीवाड़ा होता है,,,, तमाम खेल दिखाए गए उस शो में. कुल नौ लैब को दिखाया गया था.

चलिए यह स्टिंग तो हो गया. अब आते हैं उस बात पर कि कैसे उगाही को नंबर एक का धंधा बनाया गया. बात बीते दिसंबर की है. एक लैब के संचालक से एक महिला मिलने आती है. वह एकांत में बात करना चाहती थी. खाली होने के बात संचालक महोदय नें जब महिला की बात सुनी तो एकदम से घबरा गए. महिला ने डाक्टर साहब को बताया कि जुलाई का स्टिंग पहला था..दूसरे पार्ट में आपका डायगनोस्टिक सेंटर भी हैं. यदि आप 36 लाख रुपए दे देते हैं तो आपको स्टिंग से बाहर कर दिया जाएगा. और हां हम यह रकम चेक के माध्यम से नंबर एक में लेंगे और इसमें हमारी कंपनी अपना कमीशन काट कर शेष पैसा चैनल में बैठे ‘ऊंचे’ लोगों के पास पहुंचा देगी. 

डाक्टर साहब के माथे पर पसीना आ गया जब उस महिला ने बताया कि जुलाई वाले आपरेशन में 14 सेंटर्स का स्टिंग किया गया था पर दिखाया गया सिर्फ नौ को. बाकी से सेटिंग हो गयी थी. उसने स्टिंग करने वालों में जिन तीन के नाम बताए उनमें दो न्यूज नेशन के हैं. यही नहीं महिला ने यह भी कहा कि हमारी कंपनी केवल स्टिंग से आपको बाहर ही नहीं करेगी बल्कि आपकी पाजीटिव मार्केटिंग के अलावा और भी बहुत कुछ करेगी. इस करार का हर छह महीने बाद नवीनीकरण होता रहेगा. 

संचालक महोदय के तो होश ही फाख्ता हो गए. उन्होंने पुलिस में जाने का मन बनाया और रिपोर्ट लिखा दी. पुलिस को बात में दम लगा और जाल बिछाया गया……उस महिला का भी स्टिंग हुआ…कैसे ? वह महिला किस कंपनी से जुड़ी हुई है, उसका नाम क्या है और जो कुछ भी उसने दावा किया था ? वह कितना सच निकला ? इसको जानने के लिए इंतजार कीजिए कल तक का….

वरिष्ठ खेल पत्रकार पदमपति शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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‘न्यूज नेशन’ चैनल पर स्टिंग ‘आपरेशन जोक’ के नाम पर उगाही का आरोप : https://bhadas4media.com/tv/5799-nn-ugaahi

 

न्यूज नेशन स्टिंग उगाही का था (2) : ये है, पढ़िए शिकायत की कापी : https://bhadas4media.com/edhar-udhar/5801-news-nation-complaint?hitcount=0

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