जागरण प्रबंधन चाहता है किसी तरह पुराने कर्मचारियों से निजात मिल जाए!

Shrikant Singh :  जंग ‘जागरण’ ने शुरू की, समापन हम करेंगे… मित्रों, आज कल मैं फेसबुक पर दैनिक जागरण प्रबंधन की हरकतों के बारे में कुछ नहीं लिख रहा हूं। इस पर कुछ मित्रों ने शिकायत भी की है। क्‍या करूं, आप तो जानते ही हैं-सबसे बड़ा रुपैया। ऐसा न होता तो जागरण प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धता क्‍यों बताता। तमाम कर्मचारियों को बेवजह क्‍यों परेशान करता। कभी कचहरी का भी मुंह न देखने वाले लोग सुप्रीम कोर्ट में दस्‍तक क्‍यों देते। बेजुबान लोग क्रांतिकारी क्‍यों बन जाते।

सन्‍नाटे को चीरते हुए जो आवाज उठी है, वह कोई निष्‍कर्ष निकाले बगैर शांत नहीं हो सकती। जब आपने तय ही कर लिया है, गलत को गलत ही कहेंगे, चाहे वह दैनिक जागरण प्रबंधन ही क्‍यों न हो तो आपकी आवाज को समूची समष्टि सुन रही है। उसे वह भी सुनाई दे रहा है, जो दैनिक जागरण प्रबंधन अपनी हरकतों से कहना चाहता है और वह भी जो कर्मचारियों के विद्रोह से पैदा हुआ है। विद्रोह की आग में बड़े-बड़े साम्राज्‍य तबाह हो गए, तो दैनिक जागरण प्रबंधन की क्‍या औकात है। अदालतों में दैनिक जागरण प्रबंधन के पास बकलोली करने के सिवा कुछ नहीं बचा है। और अदालतें लंबे समय तक बकलोली बर्दाश्‍त नहीं करतीं। करना भी नहीं चाहिए। गलती से यदि ऐसा हुआ, तो सारी व्‍यवस्‍था तहस-नहस हो जाएगी। अराजकता फैल जाएगी। और अराजकता सहने की कूबत न तो सरकार में है और न ही दैनिक जागरण प्रबंधन में। शायद इसीलिए दैनिक जागरण प्रबंधन समय-समय पर रंग बदलता रहता है।

दैनिक जागरण प्रबंधन चाहता है कि किसी तरह पुराने कर्मचारियों से निजात मिल जाए, लेकिन उसे उस प्रवृत्ति से निजात कभी नहीं मिलेगी, जो कर्मचारियों में पैदा हो गई है। बगावत का संदेश सूक्ष्‍म रूप से कई पीढि़यों तक पहुंच गया है। इन पीढि़यों में टकराव तय है। एक पीढ़ी होगी शोषकों की तो दूसरी शोषितों की। यह दुर्भावना पहले जागरण प्रबंधन ने ही पैदा की है। मतलब फर्स्‍ट अटैक के लिए जिम्‍मेवार वही है। हम तो जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। आपको बता दें कि प्रत्‍येक क्रिया की जो विपरीत प्रतिक्रिया होती है, वह क्रिया से अधिक संवेगवान होती है। ठीक उसी प्रकार जैसे दवा तो धीरे-धीरे काम करती है, लेकिन जब वह रिएक्‍शन करती है तो तेजी से बहुत कुछ नस्‍ट कर देती है। तो यह समझ लीजिए कि दैनिक जागरण प्रबंधन तेजी से नस्‍ट होने के लिए ईंधन खुद जुटा रहा है और ऐसा ईंधन जिस पर पेट्रोल-डीजल की तरह महंगाई की मार नहीं पड़नी है। बस। अभी मुझे कुछ जरूरी लिखना है, जिसका मिलेगा रुपैया।

दैनिक जागरण में वरिष्ठ पद पर कार्यरत और मजीठिया वेज बोर्ड के आंदोलन को लीड करने वालों में से एक श्रीकांत सिंह के फेसबुक वॉल से.



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