लव जेहाद के हंगामे को कैसे देखें

Awadhesh Kumar : आज जैन टीवी पर हमने पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी एवं लव जेहाद पर चर्चा की। पिछले एक दशक से हम लव जेहाद शब्द सुन रहे हैं। मैंने कभी इस शब्द को गंभीरता से लिया ही नहीं। कई बार लोग मेरे पास आते थे कि इस विषय को उठाइए। मुझे लगता था कि ये अतिवादी लोग हैं और सांप्रदायिक बातें करते हैं। लेकिन अब जिस तरह की घटनाएं आ रहीं हैं उनसे भले मैं इस शब्द को स्वीकार न करुं या नहीं इस बात को स्वीकराने को विवश होना पड़ रहा है कि अगर ऐसी घटनाएं हो रहीं हैं तो इससे आंखें नहीं मूंदी जा सकती है।

रांची में राष्ट्रीय स्तर की शूटर तारा शाह देव की कथा ने पूरे देश को झकझोड़ दिया है। वह एक पढ़ी लिखी, खुले दिल की और अच्छे परिवार की लड़की है। उसका अपना नाम और ग्लैमर भी है। उसे एक रणजीत नामक लड़के से प्यार हुआ और घरवालों ने उसकी खूब धूमधाम से शादी भी कर दी। लेकिन ससुराल जाते ही उसे पता चला कि वह रणजीत है ही नहीं, वह तो मुसलमान है। उसे वहां जाते ही कहा गया कि कुरान पढ़ों और इस्लाम स्वीकार करो। उसके मना करने पर मारा पीटा जाता था। उसे कम खाना दिया जाता था। उससे शादी करने वाला युवक उसके साथ एकदम जबरदस्ती यौन संबंध बनाता था। उसे कहा जाता था कि तुम इस्लाम स्वीकार कर लो, यहां से जा नहीं सकती, तुम्हें पता नहीं तुम कहां फंस गई हो। उसके परिवार का कहना है कि जब हम शादी के पहले उसके घर गए तो व्यवहार या हाव भाव से यह पता ही नहीं चला कि वह हिन्दू नहीं है।

खैर, अब ताराशाह देव वहां से भागकर घर आ चुकी है। पुलिस छानबीन कर रही है। लेकिन उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न इतन ज्यादा हुआ है कि वह अभी ठीक से चल नहीं पाती। एक खबर के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीने में 50 से ज्यादा ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिनमें एक हिन्दू लड़की को प्यार के बाद पता चला कि उसके साथ छल हुआ है। यानी जो लड़का चंदन लगाकर हिन्दू बना हुआ था वह मुसलमान है। बाद में उसे धर्म परिवर्तन कराने की कोशिशें हुईं हैं।

कोई हिन्दू लड़की लड़का किसी मुसलमान से अपनी मर्जी से शादी करे, उनके बीच प्यार हो जाए तो इसका विरोध नहीं किया जा सकता। दो मजहबों, दो जातियों में शादियां किसी सभ्य समाज की स्वाभाविक स्थिति है। लेकिन अगर किसी मजहब का लड़का दूसरे मजहब का वेश रखकर किसी लड़की को प्रेम जाल में फांसे और उसे बाद में शादी करके अपने मजहब में परिवर्तित करने की कोशिश करे तो फिर इसे किसी सूरत मंे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसी घटनाएं ज्यादा संख्या में हो तो फिर आशंका उठना स्वाभाविक है। मेरे मत में मुस्लिम समाज के सम्मानित लोगों को ही इसके खिलाफ सामने आना चाहिए, वक्तव्य देना चाहिए। उलेमा इसकी निंदा करें। सरकार का दायित्व है कि ऐसी घटनाओं का संज्ञान लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष जांच दल या ऐसी कोई जांच दल गठित करे।

आलोक कुमार : “लव जेहाद” की परिकल्पना निहायत जाहिल मानसिकता की उपज है।- प्रेम न बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाय।

Nitin Thakur : लव जिहाद पर सालों पहले आईबीएन-7 पर एक आधे घंटे का शो देखा था। दक्षिण भारत में ऐसी कई घटनाओँ पर आधारित उस शो का रिपोर्टर कोई मुस्लिम था। मेरठ, मुज़फ्फरनगर में मैंने भी बहुत सालों तक करीने से देखा है तो ये उतना भी झूठ नहीं लगता। आपको अच्छा-लगे या बुरा लेकिन कुछ लोग तो हैं जिन्होंने मुहब्बत को मज़हब के लिए इस्तेमाल किया है। इसके इतर एक सच ये भी है कि लव-जिहाद के ‘खतरे’ को प्रचारित करनेवाले तत्व आडवाणी और सुब्रह्मण्यम स्वामी के घरों की तरफ नज़र डालने से बच रहे हैं। अब लव जिहाद हिंदू-मुस्लिमों में कितना ज़हर घोलेगा..देखते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, आलोक कुमार और नितिन ठाकुर के फेसबुक वॉल से.

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