रिपब्लिक टीवी की महिला पत्रकार का यह चेहरा स्तब्ध करता है!

Prakash K Ray : जिस तरह से फ़ेक न्यूज़ और बुली चैनल रिपब्लिक की रिपोर्टर माइक छीनने झपट रही है, उसे देख कर लगता है कि किसी दिन लफंगे एंकर और लुम्पेन रिपोर्टर तार से गला घोंट कर गेस्ट/पैनलिस्ट की हत्या कर डालेंगे. दूसरे घामड़ चैनल टाइम्स नाउ वाली रिपोर्टर तुलनात्मक रूप से शक्तिशाली लग रही है, अन्यथा खींचतान में उस भले आदमी को चोट भी आ सकती थी. 

Dilip Khan : रिपब्लिक टीवी के लिए Shehla Rashid की निंदा करने वालों को वो वीडियो ज़रूर देखना चाहिए, जिसमें रिपब्लिक की पत्रकार प्रद्युम्न के पिता की कॉलर से लेपल माइक झटक देती है। रायन इंटरनेशनल स्कूल अभी मीडिया के लिए बिकाऊ माल है। कंसर्न वगैरह की दलील मत दीजिएगा, मीडिया शुद्ध रूप से इस घटना को बेच रहा है। TIMES NOW पर प्रद्युम्न के पिता लाइव कर रहे थे, रिपब्लिक की रिपोर्टर भी वहीं खड़ी थी। चैनल से फोन आया होगा कि लाइव चाहिए। एक संवेदनशील पत्रकार क्या करता/करती?  टाइम्स नाऊ के लोगों से वो लड़की कहती कि उसे भी लाइव लेना है, थोड़ा शॉर्ट रखें। लेकिन रिपब्लिक की रिपोर्टर ने क्या किया? लाइव के दौरान झपट्टा मारकर प्रद्युम्न के पिता के कॉलर से माइक खींचने लगी।  टाइम्स नाऊ और रिपब्लिक की दोनों लड़कियां कुश्ती लड़ने लगीं। यही संवेदनशीलता है?  अब ये मत कह दीजिएगा कि ये एक रिपोर्टर की चूक या ग़लती है और इसे उसी चैनल के दूसरे रिपोर्टर के साथ कंपेयर नहीं करना चाहिए। ये बेसिकली ट्रेनिंग का मामला है जो रिपब्लिक नाम की संस्था और इसके डॉन अर्नब गोस्वामी ने सभी स्टाफ को दी है।  रिपब्लिक टीवी के पक्ष में सिर्फ़ उसी दिन आऊंगा, जिस दिन डिसेंट के लिए सरकार उसपर कोई कार्रवाई करेगी। वरना सिविल सोसाइटी के लोग इनको गरियाए, लतियाए मैं उसे “‘मीडिया” और “मीडिया की आज़ादी” पर हमला नहीं मानूंगा।  सारा खेल आइडियोलॉजिकल है। रिपब्लिक चैनल बेसिकली गुंडई कर रहा है। असंवेदनशील और तलुवाचाट है।

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वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश के. रे और दिलीप खान की एफबी वॉल से.

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