Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

”मनीष सिसोदिया और आशुतोष खुद पत्रकार रहे हैं और अब वही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोटना चाहते हैं”

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (डीजेए) केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली सचिवालय में पत्रकारों के प्रवेश पर प्रतिबंध की कड़ी निंदा करता है और साथ ही दिल्ली के उप-राज्यपाल से मांग करता है कि वह प्रेस की आजादी को बचाने के लिए हस्तक्षेप करें और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फौरन इस प्रतिबंध को हटाने का निर्देश दें। पिछली बार भी जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी तब भी केजरीवाल सरकार ने पत्रकारों के सचिवालय में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन पत्रकारों के प्रबल विरोध और सचिवालय पर धरना प्रदर्शन के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया था। इस बार भी पत्रकार इसके विरोध में मीडिया रूम में दो दिन से डटे हुए हैं।

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (डीजेए) केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली सचिवालय में पत्रकारों के प्रवेश पर प्रतिबंध की कड़ी निंदा करता है और साथ ही दिल्ली के उप-राज्यपाल से मांग करता है कि वह प्रेस की आजादी को बचाने के लिए हस्तक्षेप करें और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फौरन इस प्रतिबंध को हटाने का निर्देश दें। पिछली बार भी जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी तब भी केजरीवाल सरकार ने पत्रकारों के सचिवालय में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन पत्रकारों के प्रबल विरोध और सचिवालय पर धरना प्रदर्शन के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया था। इस बार भी पत्रकार इसके विरोध में मीडिया रूम में दो दिन से डटे हुए हैं।

डीजेए आंदोलनकारी पत्रकारों के साथ है और उनकी मांगों का समर्थन करता है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने केजरीवाल सरकार से सचिवालय में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर से फौरन प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए कहा कि दुख इस बात का है कि जिस मीडिया ने अरविंद केजरीवाल को अरविंद केजरीवाल बनाया, मुख्यमंत्री बनते ही वही अब मीडिया से न केवल दूरी बनाने लगे हैं बल्कि उसके प्रवेश पर प्रतिबंध तक लगा दिया है। तब और हैरानी होती है जब आम आदमी पार्टी के दो बड़े नेता, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आशुतोष खुद पत्रकार रहे हैं और अब वही संविधान द्वारा आम आदमी को दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का गला घोटना चाहते हैं।

मनोज वर्मा ने कहा कि केजरीवाल सरकार के लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के घला घोटने के फैसले से साफ पता चलता है कि वह लोकतंत्र और उसके बुनियादी वसूलों में विश्वास नहीं करती और उसका रवैया तानाशाही का है। एसोसिएशन के पदाधिकारी इस बारे में जल्दी ही दिल्ली के उप राज्यपाल, केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री और प्रेस काउंसिल के चेयरमैन से मिल कर इस प्रतिबंध को हटाने की मांग करेंगे। अगर जल्द ही प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो डीजेए सड़कों पर उतर कर केजरीवाल सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाएगा।

भवदीय
अनिल पांडेय
महासिचव
डीजेए

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन