मोदी के खिलाफ अमेरिकी सम्मन ने गुजरात दंगों के घाव को हरा किया

Dilnawaz Pasha : अमरीका की संघीय अदालत ने गुजरात दंगों के संबंध में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सम्मन जारी किया है. मोदी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में वे अमरीकी कानूनों से ऊपर हैं. लेकिन मोदी के खिलाफ याचिका दायर करने वालों के लिए ये एक रणनीतिक जीत ज़रूर है. मोदी जब दुनिया के सामने एक स्टेट्समैन (प्रभावशाली नेता) के रूप में उभर रहे हैं ठीक उसी वक़्त उन्होंने दुनिया को गुजरात दंगों और उनमें मोदी की भूमिका की याद दिला दी है. सवाल यह भी है कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए राष्ट्रप्रमुख के खिलाफ़ अमरीकी अदालत का समन जारी करना कहां तक सही है?

बीबीसी में कार्यरत पत्रकार दिलनवाज पाशा के फेसबुक वॉल से. इस स्टेटस पर आए कुछ त्वरित कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Farhan Khan : इससे मोदी को घरेलु स्तर पर फायदा ही पहुंचेगा , उनकी कमज़ोर होती छवि को ये सम्मन प्रशंसकों के बीच मज़बूती देगा …
    
Suchhit Kapoor : खामखाँ का शगूफा..जो अपराध अमेरिकी अधिकार क्षेत्र हुआ ही नहीं उस पर क्या करेगी वो अदालत
 
Chandramauli Pandey : Narendra Modi getting US Court summons !! Experts say these summons in US are like “auto-reply” messages. As soon as someone files a petition, this has to trigger. And US Department of Justice shall act and throw this in dustbin considering the immunity Modi gets as Indian PM.

इस प्रकरण पर कुछ अन्य टिप्पणियां…

Ashish Maharishi : गुजरात नरसंहार में नरेंद्र मोदी की कोई भूमिका थी या नहीं, यह तय करना का अधिकार हम अमेरिका की अदालत को नहीं दे सकते हैं। ऐसी अदालतों के समन और सम्‍मान की ज्‍यादा चिंता मत कीजिए।

Kavita Srivastava : Sorry Ashish, you have got it all wrong, it was not Modi as an individual but as the head of the State Government who was not able to stop the violence, as a part of his responsibility. :Please read this carefully: In the words of David C. Mulford, who was U.S. ambassador to India at the time, “makes any foreign government official who ‘was responsible for or directly carried out, at any time, particularly severe violations of religious freedom’ ineligible for a visa to the United States.” Mulford made it clear that Modi’s ineligibility sprang not for from allegations of his individual culpability for the anti-Muslim violence but “on the fact that, as head of the State government in Gujarat between February 2002 and May 2002, he was responsible for the performance of state institutions at that time.” Please read more http://qz.com/…/what-modi-can-accomplish-in-the-us-and…/

Ashish Maharishi बात अच्‍छे या बुरे की नहीं है। आखिर दुनिया का ठेकेदार हम अमेरिका को कैसे बनने दे सकते हैं। आज तक भोपाल गैस कांड के गुनाहगार को अमेरिका सजा नहीं दे पाया है।

Kavita Srivastava It is in their law. Please read their law on religious freedom. So now Modi should get their law changed. Like we have laws and they are implemented for visa revocation. You should see how Indian Government applies similarly its laws on visa revocation.

Shafiq Ansari ” One out of four people in this country is mentally unbalanced.Think of your three closest friends, if they seem OK,then you’re the one”
 
Kavita Srivastava so the US was only implementing its law on religious freedom. It supports corporate crimes and does not want them prosecuted is another thing. Read that article that I have sent. The whole issue about not wanting to support India in the Nuclear programme is that they are saying take away the liability from the private suppliers. There are lots of double standards in the US, but if they have a law and they implement it, then we can oppose it, but their courts can act upon that law. so the summon on damages is through its law and the visa revocation in the past was accordingly.

Omkar Seth मैं खुद अमेरिका में हूँ और जानता हूँ कि वीसा का फॉर्म भरते वक्त आपको बेहद विस्तार से इस बात का उत्तर देना होता है कि क्या आपने आजतक कभी भी किसी साम्प्रदायिक, हिंसक, धार्मिक, आपराधिक, सामुदायिक गतिविधि में किसी भी प्रकार से भाग लिया है.. कभी किसी संस्था या सरकार से कोइ भी नाता रखा है जिसने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से साम्प्रदायिक हिंसा में भाग लिया हो। अगर आपका एक भी उत्तर हाँ है तो आपका वीसा मिलना असंभव सा होता है.. पर नियति देखिये.. ऐसे सैकड़ों मुक़दमे झेल रहे व्यक्ति को (मिडिया के अनुसार इम्युनिटी मिलने तक 155 के करीब हिंसा और साम्प्रदायिकता के मुक़दमे थे उनके खिलाफ) खुद उनका राष्ट्राध्यक्ष बुला रहा है।

Manoj Kumarjha अमेरिका तो अधिकार नहीं है और भारत को भी अधिकार नहीं है…जैसा नरसंहार हुआ गुजरात में, तो यूएन को कुछ अधिकार है कि नहीं…पर ये संस्थाएं हक़ीक़त में अमेरिका की ही गुलामी करती है…वैसे आपकी ‘देशभक्ति’ को सलाम..

Kavita Srivastava In 2003, the U.S. revoked Modi’s tourist/business visa under a section of its Immigration and Nationality Act

Kavita Srivastava exactly it is a court summon to pay damages for the death of two Americans. Don’t we demand payment of damages for caste based, religious based, gender based or ethnicity based murders and similar crimes. IT is a perfect court summon.

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