मोदीजी, नागपुर में बैठे पेशवा लोग बहुत डेंजरस हैं, उन्होंने चुनाव न जिता पाने पर आडवाणी जी को नहीं छोड़ा

Dilip C Mandal :  नरेंद्र मोदी साहेब, ये यूपी है यूपी. उत्तर के पेरियार ललई सिंह यादव की मिट्टी है. मान्यवर कांशीराम की प्रमुख कर्मभूमि. महामना रामस्वरूप वर्मा और चौधरी चरण सिंह का सूबा. वैसे तो यह कबीर और रैदास की भी जन्मभूमि है. इधर 2017 में भी आपके लिए ठीक नहीं है. यहां का मूड आज आप देख ही चुके हैं. वैसे, मुझे नहीं मालूम कि यूपी से पहले के जब आप सारे विधानसभा चुनाव हार चुके होंगे, तो RSS केंद्र में नेतृत्व परिवर्तन कर चुका होगा या नहीं. नागपुर में बैठे पेशवा लोग बहुत डेंजरस हैं. उन्होंने चुनाव न जिता पाने पर आडवाणी जी को नहीं छोड़ा, तो आप क्या चीज हैं.

मनुस्मृति ईरानी ने मूर्खतापूर्ण तरीके से जब देश भर के हजारों छात्रों की फेलोशिप रोकी थी, तभी नरेंद्र मोदी को उनसे छुटकारा पा लेना था. इसकी वजह से देश भर के हर जाति, धर्म, बिरादरी के छात्र मनुस्मृति ईरानी से खफा बैठे थे. रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या ने एक चिंगारी लगा दी. वैसे भी यह इंसानियत का मामला था. एक चिंगारी पूरे जंगल में आग लगा सकती है. इससे पहले ईरानी अंबेडकर – पेरियार स्टडी सर्किल पर रोक लगाकर बदनाम हो चुकी थीं. छात्र तमाम तरह से नाराज थे. IIT रुड़की में बहुजन छात्रों को निकाले जाने का कांड हो चुका था. रोहित की हत्या के बाद देश भर के कैंपस उबल पड़े. आज यह नौबत आ गई कि मोदी सड़कों पर काला झंडा देख रहे हैं. मुर्दाबाद के नारे सुन रहे हैं…. महंगा पड़ेगा.

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक वॉल से.

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