नौकरशाहों के चलते प्रियंका के बिछाए जाल में फंस गए योगी!

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस महासचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की जो सियासत शुरू हुई है, वह कोरोना महामारी के दौर में नहीं दिखाई पड़नी चाहिए थी। राजस्थान बार्डर पर खड़ी एक हजार बसों को उत्तर प्रदेश में प्रवेश की अनुमति दिए जाने की मांग के सहारे प्रियंका वाड्रा ने योगी को सियासत के दलदल में ढकेला तो वहां से योगी को बाहर निकालने की बजाए उनके नौकरशाहों ने योगी को और भी मुसीबत में डाल दिया।

प्रियंका की सियासत का जबाव सियासत से दिया जाना चाहिए था। यह काम बीजेपी के तमाम नेता और मंत्री टीवी डिबेट से लेकर सोशल मीडिया तक पर कर भी रहे थे। लेकिन न जाने किन नौकरशाहों ने योगी को समझा दिया कि प्रियंका के आरोपों का जवाब पत्र के माध्यम से दिया जाना चाहिए। जबाव भी ऐसा दिया गया जिसमें ‘छेद ही छेद’ नजर आ रहे थे। बस फिर क्या था। प्रियंका टीम ने योगी को बुरी तरह से फंसा लिया। योगी की फजीहत हुई तो नौकरशाह किनारे खड़े हो गए। योगी-प्रियंका के वार-प्रतिवार से उत्तर प्रदेश भाजपा के योगी विरोधी खेमें और जनता के उन नुमांइदों के भी दिलों तक ठंडक पहुंच गई जो योगी से इस लिए नाराज चल रहे थे क्योंकि योगी पार्टी नेताओं और जनप्रतिनिधियों से अधिक नौकरशाही पर भरोसा कर रहे हैं।

बहरहाल, कोरोना महामारी के समय जिस तरह से योगी और प्रियंका अपनी सियासत चमकाने के लिए एक-दूसरे को घेरने में लगे हैं, वह संकट की इस घड़ी में अच्छा संकेत नहीं है। यह तो तय माना जा रहा है कि योगी ने प्रियंका के आरोपों का पत्र के माध्यम से जो जबाव दिया,वह पूरी तरह से नौकरशाहों की सोच रही होगी। नौकरशाहों ने ही योगी को समझाया होगा कि उन्हें प्रियंका वाड्रा के आरोपों का जबाव देना जरूरी है। यदि योगी अपनी पार्टी के नेताओं से इस संबंध में सलाह लेते तो कोई योगी को यह राय नहीं देता कि वह प्रियंका वाड्रा के पत्रों का जबाव दें।

योगी, प्रियंका को जबाव देने की बजाए मोदी की तरह चुप्पी का आवरण ओढ़ लेते तो ज्यादा बेहतर रहता। मोदी कई मौकों पर शांत चित्त से अपने विरोधियों को पटकनी दे चुके हैं। विरोधियों को मोदी तब ही जबाव देते हैं जब वह चुनावी जंग में होते हैं। योगी कोरोना महामारी से निपटने के लिए मेहनत कर रहे हैं और उसके सार्थक परिणाम भी आ रहे हैं। योगी को यह नहीं भूलना चाहिए था कि जो काम करता है उससे ही गलती होती । अब प्रियंका के ऊपर कोई जिम्मेदारी तो है नहीं? इसलिए वह सारा ध्यान दूसरों की गलती निकाल कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने में लगाए रहती हैं। वैसे भी गांधी परिवार का दूसरों के कंधों पर बंदूक रखकर दागने का पुराना शगल रहा है। निशाना लग गया तो गांधी परिवार की जयकार होने लगती है और चूकने पर दूसरे का कंधा आगे कर दिया जाता है।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन के कारण उत्तर प्रदेश के लाखों प्रवासी श्रमिक और कामगार दूसरे राज्य में फंसे हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों और कामगारों के लिए 1000 बसों का प्रस्ताव रखा था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। यूपी के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने कांग्रेस के इस 1000 बसों के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए बसों और ड्राइवरों का विवरण मांगा था। इस पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने मीडिया को तो बसों की सूची दिखाई ही, कुछ घंटे बाद प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह ने अपर मुख्य सचिव गृह को ई-मेल के जरिए एक हजार बसों की सूची भी भेज दी।

इस संबंध में उत्तर प्रदेश भाजपा नेता कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा पर ओछी राजनीति का आरोप लगा रहे हैं। योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर प्रवासी कामगारों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह ओछी सियासत कर रही हैं। सिंह ने एक बयान में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। प्रियंका उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसें भेजने की बात कर रही हैं। इससे जाहिर होता है कि उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी ही नहीं है और वह केवल ओछी राजनीति कर रही हैं। श्री सिंह ने कहा, प्रवासी कामगार उत्तर प्रदेश से नहीं बल्कि पंजाब, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों से आ रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि वह अपने ही मुख्यमंत्रियों से यह बात नहीं कह पा रही हैं और उत्तर प्रदेश सरकार पर उंगली उठा रही हैं। यह उनकी नासमझी को जाहिर करता है। यूपी की योगी सरकार के दावे के मुताबिक सैकड़ों ट्रेनों से अभी तक 16 लाख 60 हजार प्रवासी श्रमिक-कामगार अब तक उत्तर प्रदेश लाए जा चुके हैं। वहीं, हर दिन दस हजार से ज्यादा बसों के फेरे हो रहे हैं, जिनसे लाखो लोगों को गंतव्य तक पहुंचाया गया है। ऐसे में यह एक हजार बसें चलती हैं या नहीं और चलती हैं तो कितनी मदद कर पाएंगी, यह देखना होगा।

कांग्रेस की बसों की लिस्ट में बाइक-ऑटो के नंबर

कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने राजस्थान में रहे रहे उत्तर प्रदेश के मजदूरों को वहां से बस के माध्यम से यूपी भेजने की जो सियासत शुरू की थी,उसको उन्हीं की पार्टी के कुछ नेताओं ने पलीता लगा दिया है। योगी सरकार को कांग्रेस की तरफ से बसों के नंबर वाली जो लिस्ट उपलब्ध कराई गई थी,उसमें कई नंबर बाइक और आॅटो के निकले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने दावा किया है कि इस लिस्ट में घालमेल है। कांग्रेस द्वारा सौंपी गई लिस्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने एक वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर का जिक्र किया है। 10 नवंबर 2016 को रजिस्टर हुई वाहन संख्या यूपी83टी1006 की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा है कि ये बस नहीं बल्कि एक थ्री व्हीलर है. मृत्युंजय कुमार ने दावा किया है कि कांग्रेस ने राज्य सरकार को जो बसों की लिस्ट दी है, उसमें कई नंबर तिपहिया वाहन, मोटरसाइकिल और कार के हैं. सीएम के सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने इसकी लिस्ट भी जारी की है.

लेखक अजय कुमार लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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