लगता है ‘भास्कर’ के सम्पादक और प्रबंधक पाठकों को मूर्ख समझते हैं!

Krishna Kalpit : ‘भास्कर’ ख़ुद को सबसे विश्वसनीय और नम्बर 1 अख़बार बताता है। आज ‘भास्कर’ के जयपुर संस्करण में जाति-प्रथा के विरोध में एक ख़बर छपी है, जिसमें प्रदेश की सरकारी स्कूलों के रजिस्टर में छात्रों के लिये बने जाति के कॉलम का विरोध किया गया है और जाति-प्रथा को समाज और देश के लिये कलंक बताया गया है। ‘भास्कर’ के इसी अंक में श्री अग्रवाल समाज समिति, जयपुर द्वारा आयोजित श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव का पूरे पेज का विज्ञापन छपा है।

यही नहीं इसी अख़बार में हर रविवार को जो मेट्रीमोनियल के क्लासिफाइड विज्ञापन छपते हैं, वे भी जाति आधारित होते हैं। और आजकल तो ख़बरें भी जाति-आधारित होती हैं। करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, गुर्जर, मीणा इत्यादि। यदि ‘भास्कर’ जाति-प्रथा का विरोधी है तो उसे ऐसे विज्ञापन और ऐसी ख़बरें छापना बन्द करना चाहिये। लेकिन लगता है ‘भास्कर’ के सम्पादक और प्रबंधक पाठकों को मूर्ख समझते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और कवि कृष्ण कल्पित की एफबी वॉल से.

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