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सुख-दुख

पत्रकार को फंसाने चला था कोतवाल, खुद फंस गया!

पीलीभीत : दूसरों के लिए जाल बुनने वाला कभी कभी खुद ही उसमें फंस जाता है। ऐसा ही एक वाकया उत्तर प्रदेश में बेलगाम पुलिस के एक कोतवाल के साथ घटित हुआ है। यूपी में योगी राज में वैसे भी पुलिस के निशाने पर सबसे ज्यादा उनकी कारगुजारियों को उजागर करने वाले पत्रकार ही रहते हैं।

ऐसा ही एक मामला जनपद पीलीभीत के थाना बरखेड़ा का है, जहां कोतवाल बृजकिशोर मिश्रा ने एक शिकायतकर्ता का पैसे लेने के बाद भी जब काम नहीं किया तो मामला मीडिया की सुर्ख़ियों में आ गया। इसके बाद बौखलाए कोतवाल ने वर्दी के नशे में पीड़ित को बुलाया और थाने में धमका कर खबर छापने वाले पत्रकार के खिलाफ बयान लिखवाया।

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बाद में पत्रकार को बुलाकर बयान और पीड़ित का दबाव में दिया गया वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की। पत्रकारों ने भी पीड़ित को थाने से बाहर आते ही घेर लिया और कोतवाल की पत्रकारों के विरुद्ध साजिश का पर्दाफाश कर रहे पीड़ित का बयान कैमरे में कैद कर लिया। इसकी कोतवाल को उम्मीद नहीं थी।

मामला कोतवाल को उल्टा पड़ गया। श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने कोतवाल की पत्रकारों के विरुद्ध साजिश का पर्दाफाश करने वाला वीडियो अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जून को ट्वीट कर दिया, जिसके बाद एडीजी जोन बरेली व डीआईजी रेंज बरेली ने पीलीभीत पुलिस का जवाब तलब कर लिया।

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जवाब तलब होते ही कोतवाल के होश उड़ गए और वह पत्रकारों से मान-मनौब्बल करने लगे। गुरुवार देर रात पुलिस अधीक्षक ने बरखेड़ा कोतवाल की पत्रकारों के विरुद्ध साजिश वाले वीडियो पर जांच पुलिस क्षेत्राधिकारी बीसलपुर प्रवीण मलिक को सौंप दी।

बरखेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम नगरा ताल्लुके मूसेपुर के मुकेश कुमार ने डेढ़ माह पहले थानाध्यक्ष को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया था। मुकेश कुमार का कहना है कि ग्राम आमडार के प्रेमपाल से उसने बटाई पर खेतिहर जमीन ली थी लेकिन कुछ दिनों बाद शर्तों का उल्लंघन कर भू स्वामी ने जमीन वापस ले ली लेकिन उसका हिसाब नहीं किया। उसके प्रेमपाल पर 3 लाख 60 हजार हिसाब में आ रहे हैं। तब उसने बरखेड़ा थानाध्यक्ष को प्रेमपाल के विरुद्ध शिकायती प्रार्थना पत्र देकर न्याय की फरियाद की थी।

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जब बरखेड़ा थानाध्यक्ष ने एक बार उस पर शिकंजा कसा तो प्रेमपाल समझौते पर राजी हो गया और उसने अपने पास पैसा ना होना बताते हुए 2 बीघा जमीन का बैनामा कराने पर हामी भर दी लेकिन इसके बाद उसने ना तो पैसा लौटाया और ना ही जमीन का बैनामा कराया।

कार्य के लिए बरखेड़ा थानाध्यक्ष ने 50 हजार मांगे थे, जिसमें से 25 हजार वह दबाव बनाकर उसे ले चुके हैं लेकिन बरखेड़ा थानाध्यक्ष ना तो उसका काम करा रहे हैं और ना ही घूस की रकम लौटा रहे हैं।

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मुकेश कुमार मंगलवार को जब बरखेड़ा थाने गया तो गोकशी के एक मामले की सूचना पर पुलिस क्षेत्राधिकारी बीसलपुर भी थाने में आए हुए थे, उसने उनको पूरी बात बताई। पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रवीण मलिक के अनुसार उन्होंने पीड़ित के शिकायती प्रार्थना पत्र पर मुकदमा दर्ज करने के कोतवाल को आदेश दे दिए थे।

यह मामला जब अखबारों की सुर्खियां बना तो बरखेड़ा कोतवाल बौखला गए और कस्बे के पत्रकार उनके निशाने पर आ गए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों को सबक सिखाने की ठान ली।

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बरेली से बेबाक पत्रकार निर्मलकांत शुक्ला की रिपोर्ट.

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