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पुण्य प्रसून के हटाए जाने को शहादत और चौकीदार के डर का रंग ना दीजिए!

Sanjay Singh : पत्रकार से फिर डरा चौकीदार.. हिटलर-शाही के इस दौर में सच बोलना कितना मुश्किल है यह @ppbajpai की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है, सूर्या TV भी उनको निकालने की तैयारी में है। हम सब बहुत नासमझ हैं। हमें कुछ नही पता किसके इशारे पर यह सब हो रहा है।

(आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह का ट्वीट)

Vinod Kapri : इसे शहादत और चौकीदार के डर का रंग ना दीजिए संजय जी! पुण्य के जाने से पहले भी वो जगह पत्रकारों के लिए नहीं थी,ये सब जानते समझते हुए भी वो वहाँ गए।ऐसे ही वो पहले सहारा भी गए थे।वहा् से क्यों बाहर निकले? तब भी मोदी ही वजह थे क्या? हर बात को मोदी के नाम पर शहादत कहना सही नहीं है।

(वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी का ‘आप’ नेता संजय सिंह को ट्वीट के जरिए जवाब)

कुछ अन्य टिप्पणियां…. फेसबुक से…

Nitin Thakur : बिस्किट बेचनेवाले लाला के यहां नौकरी करने गए प्रसून जी टीम समेत बाहर निकल गए। हर किसी में एंटी इस्टेब्लिशमेंट तेवर रखनेवालों को प्रश्रय देने का दम नहीं होता। यहां सब रामनाथ गोयनका ही हो जाते तो पत्रकारिता का ऐसा हश्र होता क्या!

Atul Chaurasia : मौका मिले तो सहारा का बेड़ा पार कराने पहुंच जाइए, मौका मिले तो ज़ी-न्यूज़ पर आपातकाल घोषित कर दीजिए, मौका मिले तो बिस्कुट वाले का बेड़ा पार कराने पहुंच जाइए, सभा सेमिनारों में माहौल एकदम दुरुस्त होने की मुनादी भी कर दीजिए. मेरा साफ मानना है कि पत्रकार को राजनेता की तरह अवसरवादी नहीं होना चाहिए.

Abhishek Parashar : उनकी पहचान बीजेपी-माले की विचारधारा वाले पत्रकार की रही है. बीच में वह आप से सटने की कोशिश कर रहे थे. पत्रकारिता में जो वह लकीर खींच रहे थे, वह कई दफे कांग्रेसी लाइन के बगल से होकर निकली. कुल मिलाकर दल समझ ही नहीं पाए कि यह आदमी है किस तरफ. इसी दुविधा में वह बार बार गोल हो गए.

https://www.youtube.com/watch?v=MEeOXI2M2GI
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