पेट्रोल की कीमत कम करने की राजनीति और उसकी रिपोर्टिंग का खेल

केंद्र सरकार ने महीनों तक लाचारी दिखाने के बाद कल अचानक पेट्रोल के दाम कम कर दिए और भाजपा शासित राज्यों से भी कीमत कम करने के लिए कहा लिहाजा राज्यों ने भी ढाई रुपए प्रति लीटर कम कर दिए। खुद डेढ़ रुपए, तेल कंपनियों से कहकर एक रुपए औऱ राज्यों से कहकर ढाई रुपए – कुल पांच रुपए प्रति लीटर की कमी हुई है जो पर्याप्त न भी हो तो कम नहीं है। इसमें खास बात यह है कि दिल्ली में भाजपा की सरकार नहीं है तो दिल्ली में कीमत 2.50 रुपए ही कम हुए। दूसरी प्रमुख बात यह है कि राज्यों में चुनाव की घोषणा होने वाली है और उससे पहले यह एक महत्वपूर्ण लोक लुभावन फैसला है। इसमें केंद्र सरकार ने अपनी उस घोषणा का भी ख्याल नहीं रखा जिसका अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है।

केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के हवाले से 10 सितंबर की एक खबर में लिखा है, ”पेट्रोल के दाम कम होने चाहिए और हम इसका रास्ता निकालेंगे। पेट्रोल-डीजल की कीमत का बढ़ना हमारे हाथों से बाहर है। ओपेक देशों ने उत्पादन को सीमित कर दिया है। वेनेजुएला में अस्थिरता है, अमेरिका में अभी शेल गैस का उत्पादन शुरू नहीं हुआ है, ईरान पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं। इसलिए दुनिया में इसकी जो खपत है उसके लिए उत्पादन का अभाव है। हम कोई बचाव नहीं कर रहे हैं। हम जनता के साथ खड़े हैं. हमारे समय में पेट्रोल की कीमत घटी भी है और बढ़ी भी है। ये ऐसी समस्या है जिसका इलाज हमारे पास नहीं है।” आइए देखें किस अखबार ने इसे कैसे छापा है और किन्हें इसकी याद है और किसने कुछ अतिरिक्त जानकारी दी। अंग्रेजी अखबारों में हमेशा की तरह द टेलीग्राफ का शीर्षक मस्त है और हिन्दी में भास्कर का दूसरे अखबारों से अलग।

दैनिक भास्कर ने सात कॉलम में फ्लैग शीर्षक लगाया है, “चुनावी चाल : चार राज्यों में चुनाव की घोषणा से ठीक पहले सरकारों ने पेट्रोल डीजल की कीमत घटाई”। द टेलीग्राफ का शीर्षक है, “मिस्टर जेटलीज ऑयली वैन्ड”। वैंड मतलब छड़ी होता है और इसका प्रयोग जादू की छड़ी के संदर्भ में किया जाता है। हिन्दी में छड़ी को तेल पिलाई जाती है और आप उसमें तेल लगाकर उसे चिकना भी कर सकते हैं हालांकि यहां पेट्रोल और डीजल जैसे तेल का वास्ता है जो इस काम नहीं आता है। हालांकि, इस शीर्षक का मजा अंग्रेजी में ही है। संदर्भ यह है कि तेल की कीमत कम करेक जेटली को चुनाव में जादुई नतीजों की उम्मीद है। बहरहाल, देखा जाए कि अखबार ने इसके साथ और क्या खास जानकारी दी है। अखबार ने खबर की शुरुआत ही इस प्रकार की है, भारत में तेल की कीमत कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत से नहीं, बल्कि एक घटना से जुड़ी हुई है जिसे चुनाव कहा जाता है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने एक छड़ी घुमाकर और पेट्रोल व डीजल की कीमत कम से कम 2.50 रुपए लीटर कम करके इसे तकरीबन पुष्ट कर दिया है।

भाजपा शासित आठ राज्यों में वैट या मूल्यवर्धित टैक्स में कमी की गई है जिससे उपभोक्ताओं को होने वाला लाभ 5.00 रुपए लीटर तक जा सकता है। इस प्रक्रिया में मोदी सरकार ने अपने ही प्रिय विषय, सारे चुनाव एक साथ, को कमजोर किया है क्योंकि कुछ नागरिक कीमतें कम रखने के लिए हर हफ्ते या महीने चुनाव के लिए प्रार्थना करते हैं। अखबार ने लिखा है कि केंद्र की अपील पर भाजपा शासित राज्यों में कीमत 2.50 रुपए लीटर कम किया जाना जुगलबंदी लगता है। आगे यह भी कि भाजपा शासित राजस्थान ने सितंबर में भी दर कम की थी। और बताया है कि विपक्ष शासित बंगाल, केरल और कर्नाटक ने गए महीने एक से दो रुपए की कमी की थी और अब कहा है कि वे फिर दर कम नहीं करेंगे। अखबार ने कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के इस आरोप की भी चर्चा की है कि मोदी सरकार ने चार साल के अपने राज में पेट्रोल पर 211 प्रतिशत और डीजल पर 443 प्रतिशत शुल्क बढ़ाए हैं। और 22 महीनों में सिर्फ दो बार इसमे कमी की है। पहली बार गए साल अक्तूबर में दो रुपए लीटर और अब 1.50 रुपए लीटर।

अखबार ने लिखा है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स में वृद्धि से सरकार को उत्पाद शुल्क से अपना राजस्व दूना करने में सहायता मिली है और यह 2014-15 के 99184 करोड़ रुपए से बढ़कर 2017-18 में 229019 करोड़ रुपए हो गया है। अखबार ने लिखा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को तीन वरिष्ठ मंत्रियों के साथ कीमतें कम करने पर चर्चा की और याद दिलाया है कि इस साल मई में कर्नाटक चुनाव के दौरान 19 दिनों तक देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत नहीं बढ़ने दी गई थी। और चुनाव पूर्ण होते ही बढ़ा दी गई थीं। अखबार ने लिखा है कि गुजरात में भी चुनाव से पहले ईंधन के सरकारी सरकारी खुदरा विक्रेताओं ने हर दिन एक से तीन पैसे कम किए और चुनाव खत्म होने के बाद कीमतें बढ़ने लगीं। अखबार ने ट्वीटर पर इस बारे में हुई चर्चा का भी उल्लेख किया है और कहा है कि एक व्यक्ति को यह समझ में नहीं आ रहा है कि कीमत 20 रुपए बढ़ने के बाद 2 रुपए कम होने पर हम किस बात की खुशी मनाते हैं। अब इसके बाद आप देखिए कि हिन्दी अखबारों में किन बातों को प्रमुखता दी गई है?

दैनिक हिन्दुस्तान में फ्लैग हेडिंग है, बड़ी राहत : केंद्र और कंपनियों ने 2.50 रुपए घटाए, दिल्ली छोड़कर कई राज्यों ने भी ढाई रुपए कम किए। मुख्य शीर्षक है : पेट्रोल डीजल के दाम पांच रुपए तक घटे। हिन्दुस्तान टाइम्स ने वित्त मंत्री अरुण जेटली की फोटो के साथ उनका एक बयान प्रमुखता से छापा है जो इस प्रकार है, “सभी राज्य पेट्रोल डीजल पर बिक्री कर घटाएं। जो नेता तेल के ऊंचे दामों को लेकर सिर्फ बयानबाजी करते रहते हैं, यह अब उनके लिए इम्तहान का वक्त है।” हिन्दुस्तान ने मूल खबर के साथ यह भी छापा है कि इसलिए कीमत कम करना जरूरी था। इसमें तीन कारण दिए गए हैं – 1) 15 अगस्त से अब तक पेट्रोल के दाम 6.86 रुपए बढ़े 2) डीजल की कीमत 6.73 रुपए बढ़ी और 3) 2016 जून से रोजाना कीमतों की समीक्षा शुरू की गई।

दैनिक हिन्दुस्तान ने एक बॉक्स में लाल शीर्षक के साथ प्रमुखता से यह भी बताया है कि कटौती के बाद दिल्ली में पेट्रोल यूपी से महंगा हो गया है। इसमें दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में पेट्रोल और डीजल की दर लिखी है। अखबार ने मूल खबर में भी लिखा है कि दिल्ली सरकार ने दामों में कटौती नहीं की। मै दिल्ली संस्करण की बात कर रहा हूं जो दिल्ली में ही बंटने के लिए हैं और इसलिए यह सूचना जरूरी मानी गई होगी। अखबार में यह बताया गया है कि दिल्ली में केंद्र की कमी तो लागू होगी पर भाजपा राज्यों की तरह दिल्ली सरकार ने कमी नहीं की इसलिए यहां कमी 2.50 रुपए लीटर की ही होगी जबकि दूसरे राज्यों में यह ज्यादा है। अखबार ने एक अलग शीर्षक से यह भी बताया है कि किन राज्यों में मूल्य घटाए हैं। यह भी कि कुछ राज्यों ने सिर्फ पेट्रोल में और कुछ ने सिर्फ डीजल में राहत दी है।

नवोदय टाइम्स ने इस खबर को लीड बनाया है और शीर्षक लगाया है, तेल की धार से सहमी सरकार। नवभारत टाइम्स ने भी इस खबर को लीड बनाया है और शीर्षक है, तेल की जलन पर ढाई रुपए का मरहम। इसके ऊपर फ्लैग हेडिंग है, “केंद्र और तेल कंपनियों ने सस्ता किया पेट्रोल डीजल। नवभारत टाइम्स ने भी हिन्दुस्तान की रह अरुण जेटली की फोटो के साथ उनका एक कोट प्रमुखता से छापा है। उन्होने कहा है, केंद्र ने तेल के दाम घटा दिए हैं, अब राज्यों की बारी है। यह उन नेताओं के लिए परीक्षा की घड़ी है जो सिर्फ मौखिक सहानुभूति जताते हैं और ट्वीट करते रहते हैं। इसके नीचे एक बॉक्स में बताया गया है कि दाम किस तरह कितने कम हुए। इसके मुताबिक 1.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी में की है, एक रुपए लीटर सस्ता करने का बोझ तेल कंपनियां उठाएंगी और 2.50 रुपए टैक्स घटाया यूपी हरियाणा समेत 12 राज्यों ने।

नभाटा ने इस बात को भी प्रमुखता से बताय़ा है कि चार साल के भाजपा राज में दूसरी बार एक्साइज ड्यूटी घटी है और पिछले साल अक्तूबर में भी दो रुपए घटाए थे। हालांकि, अखबार ने इसके साथ ही यह भी बताया है कि केंद्र (की भाजपा सरकार) ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच नौ किस्तों में पेट्रोल पर 11.77 रुपए और डीजल पर 13.77 रुपए बढ़ाए थे। नवभारत टाइम्स ने खबर की शुरुआत इस प्रकार की है, “लगातार महंगे होते तेल से परेशान लोगों को सरकार ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले थोड़ी राहत दे दी है।” अखबार ने लिखा है कि केंद्र ने राज्य सरकारों से वैट कम करने के लिए कहा और यूरी हरियाणा समेत 12 राज्यों ने अपने-अपने टैक्स 2.50 रुपए कम कर दिए। इससे इन राज्यों में पेट्रोल डीजल पांच रुपए सस्ता हो गया। दिल्ली सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। इसके बाद यूपी और हरियाणा में दिल्ली से भी सस्ता पेट्रोल डीजल मिलेगा। नई दरें शुक्रवार सुबह छह बजे से लागू होंगी। जाहिर है, कम से कम आज, कल ऊंची कीमत पर खरीदा गया उत्पाद कम कीमत पर बिकेगा। किसी ने ये नहीं बताया कि पेट्रोल पंप मालिकों ने जो पेट्रोल ऊंची कीमत पर खरीद लिया वे अब कम कीमत पर बेचेंगे तो घाटा उठाएंगे? या उसकी भरपाई होगी?

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क : anuvaad@hotmail.com

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