आरके सिन्हा ने अघोषित रूप से ‘हिन्दुस्थान समाचार’ छोड़ा, अरविन्द मार्डीकर बने कार्यकारी अध्यक्ष, देखें पत्र

पूर्व राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा अघोषित रूप से हिन्दुस्थान समाचार का दामन छोड़ चुके हैं। उन्होंने तीन महीने से कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दिया। वेतन का बढ़ता खर्च देखकर उन्होंने एक साल (30 जून 2021 तक) का अवकाश ले लिया। अपने पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि वे निदेशक मंडल की सहमति से अवकाश ले रहे हैं। साथ ही हिन्दुस्थान समाचार के उपाध्यक्ष अरविन्द मार्डीकर को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की बात भी पत्र में कही।

आर के सिन्हा ने सन 2016 में हिन्दुस्थान समाचार की कमान संभाली थी। कमान संभालने के बाद उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार को देश की सर्वोच्च समाचार एजेंसी बनाने के लिए बड़े-बड़े वादे किए। जून 2016 को देहरादून में हुई देश भर के कर्मचारियों और संवादसूत्रों की बैठक उन्होंने कहा था- ‘हिन्दुस्थान समाचार को हम वैचारिक अधिष्ठान के साथ चलने वाला व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाएंगे।’

2019 के लोकसभा चुनाव में जब उनको टिकट न मिला तो और राज्यसभा की सीट भी दोबार नहीं मिली तो वे नाराज हो गए। इसके बाद हिन्दुस्थान समाचार संस्थान का बुरा दौर शुरू हो गया। कर्मचारियों का दमन, शोषण, उत्पीड़न, इधर से उधर मनमाना स्थानांतरण आदि ऐसा वातावरण बनाया जाने लगा कि संस्थान ही बंद हो जाए।

सिन्हा को हिन्दुस्थान समाचार लेने से व्यावसायिक फायदे अनेक मिले। पिछले करीब साढ़े तीन साल में सिन्हा ने झारखंड, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश जैसे कई राज्यों में विकास संवाद का आयोजन कर वहां के तात्कालिक मुख्यमंत्रियों से व्यक्तिगत सम्बन्ध बनाकर अपनी निजी कम्पनियों में खूब लाभ उठाया। कोरोना काल के कठिन दौर में भी सिन्हा की सिक्योरिटी कंपनी (एसआईएस) सहित अन्य सभी कंपनी अपना सुव्यवस्थित कारोबार कर रहीं हैं और मोटी रकम कमा रहीं हैं। यहां तक भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण जैसे बड़े संस्थानों में एसआईएस की घुसपैठ हुई। सड़क परिवहन मंत्रालय से भी करोड़ों के ठेके मिले।

हिन्दुस्थान समाचार की आड़ में सिन्हा ने हर तरह का फायदा उठाया। अपने निजी समाचार पत्र, पत्रिकाओ और पोर्टल जिसमें यथावत, देशप्राण, युगवार्ता, एचएस न्यूज आदि को हिन्दुस्थान समाचार समूह से जोड़कर इस सहकारी समाचार एजेंसी के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की और सारे व्यकिगत प्रकाशनों का खर्च (उनके कर्मचारी) भी हिन्दुस्थान समाचार के माथे मढ़ दिया गया। इस वजह से हिन्दुस्थान समाचार हो हर साल घाटा होता रहा और सिन्हा आरएसएस के सामने हमेशा यह रोना रोते रहे कि वे किस तरह अपना पैसा लगाकर संस्थान को चला रहे हैं।

उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार प्रबन्धन में सभी उच्च पदों पर अपनी सिक्योरिटी कम्पनी के अधिकारियों को बिठा दिया, ताकि सिन्हा का दबदबा बना रहे और पल पल की सूचना उनके लोग उन्हें देते रहें। अब जबकि सिन्हा एक साल का अवकाश ले चुके हैं फिर भी उनकी सिक्योरिटी कम्पनी के पूर्व अधिकारी ही हिन्दुस्थान समाचार का प्रबंधन देख रहे हैं और मोटी सैलरी भी ले रहे हैं जबकि पत्रकार पाई पाई के लिए मोहताज हैं।

तीन वर्षों में बड़ी संख्या में एसआईएस के अधिकारियों/कर्मचारियों को हिन्दुस्थान समाचार का शेयर होल्डर बनाया गया, ताकि अध्यक्ष के चुनाव और नीति निर्धारण में सिन्हा का बोलबाला बना रहे। दूसरी ओर हिन्दुस्थान समाचार से वर्षो से जुड़े कर्मचारियों को उनके शेयर नहीं दिए गए।

खबर यह भी है कि सिन्हा की अवकाश वाली करतूत भी उनकी रणनीति का ही हिस्सा है, जिससे वे भाजपा और संघ के सामने नाराजगी जताते हुए बिहार चुनाव में अपनी राजनीति महत्वकांक्षा पूरी कर सकें। वे अपने पुत्र ऋतुराज सिन्हा को टिकट दिलाने और स्वयं किसी राज्य का राज्यपाल बनने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। इसके लिए उन्होंने इस बार हिन्दुस्थान समाचार को अपना आखिरी मोहरा बनाया है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे पूरी तरह इस संस्थान को टाटा कर सकते हैं।



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