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राष्ट्रीय सहारा में हड़ताल के कारण मास्टर एडिशन छपा

राष्ट्रीय सहारा में कल हड़ताल होने के कारण प्रबंधन किसी तरह मास्टर एडिशन छापने में कामयाब रहा. बताया जा रहा है कि नोएडा में मास्टर पेज तैयार कर उसे लखनऊ व अन्य सेंटरों को भेज दिया गया. लखनऊ से सूचना है कि वहां हड़ताल के कारण राष्ट्रीय सहारा की फाइल कापी यानि मास्टर एडिशन ही प्रकाशित करना पड़ा. इस फाइल कापी में लखनऊ की एक भी खबर नही हैं. ऐसा ही अन्य सेंटर्स पर भी हुआ.

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राष्ट्रीय सहारा में कल हड़ताल होने के कारण प्रबंधन किसी तरह मास्टर एडिशन छापने में कामयाब रहा. बताया जा रहा है कि नोएडा में मास्टर पेज तैयार कर उसे लखनऊ व अन्य सेंटरों को भेज दिया गया. लखनऊ से सूचना है कि वहां हड़ताल के कारण राष्ट्रीय सहारा की फाइल कापी यानि मास्टर एडिशन ही प्रकाशित करना पड़ा. इस फाइल कापी में लखनऊ की एक भी खबर नही हैं. ऐसा ही अन्य सेंटर्स पर भी हुआ.

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लखनऊ से एक अन्य सूचना के मुताबिक सहारा समय टीवी और राष्ट्रीय सहारा अखबार के कई विभागों के वरिष्ठ लोगों ने बीमारी और सेलरी एडवांस के नाम पर अच्छी खासी रकम ले रखी है लेकिन आम सहाराकर्मियों को सेलरी तक मयस्सर नहीं है. किसी ने दो लाख रुपये, किसी ने 1.90 लाख तो किसी ने एक लाख रुपया एडवांस में अत्यधिक जरूरी कार्य इलाज आदि दिखा कर ले लिया है. इसी तरह किसी ने पिता की बीमारी के नाम पर 5.00 लाख रुपये और किसी ने 4 लाख तो किसी ने 5 लाख रुपये एडवांस ले लिया है. इसका कर्मचारी जबरदस्त विरोध कर रहे हैं.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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0 Comments

  1. sanjib

    April 21, 2016 at 7:05 pm

    Ab to bhaiyye Sir se paani ooper chalaa gaya hai.. Jab Pet bhookha ho, pariwar bhookha ho aur saamney wala Majey kar rahaa ho, to ek hi charaa bachta hai… wah hai “PATAK KE MAARO SAALON KO AUR CHHEEN LO APNAA HAQ”…..

  2. BEBAK

    April 22, 2016 at 2:31 pm

    बनारस में अभी भी हड़ताल जारी है. मास्टर एडिशन ही छप रहा है, यहाँ शशि प्रकाश राय संपादक है, जिन्होने गत वर्र्स हुए हड़ताल के समय कर्मचारीओ के पीठ में छुरा घोपा था. हड़ताल तुड़वाने के बदले में मैनेजमेंट ने उनको बनारस का संपादक बना दिया था`कर्मचरिेयो के गुस्से को देख संपादक ने चेंबर में बैठना छोड़ दिया है. शाम को होने वाली मीटिंग भी बंद हो गई है. अभी तक कर्मचारीओ को अपनी पहुँच से डराने वाले संपादक की बोलती इन दिनों बंद है` वह अब बोरिया- बिस्तर समेटने की तयारी कर रहे है` अपने चमचो से वह इस बात को कह भी चुके है`

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