सेलरी के लिए सहारा कर्मियों की हड़ताल की वजह से सहारा मीडिया का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जानकारी के मुताबिक दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर और वाराणसी में अखबार नहीं छप सका. सिर्फ पटना में सिर्फ रेलवे स्टेशन एडिशन व एक डाक एडिशन मात्र छपा. बताया जाता है कि गोरखपुर के प्रबंधक पीयूष बंका के एडिशन निकालने की अपील पर अखबारकर्मियों ने कहा कि पटना वालों की तरह हम दोगलापन नहीं कर सकते.
पटना में सहारा इंडिया ग्रुप के पूर्व डायरेक्टर डी.के. श्रीवास्तव के नजदीकी किशोर केशव ने अखबार कर्मियों को हड़ताल के लिये पहले तो उकसाया फिर फिर लगे डाक एडिशन का अखबार निकालने में सहयोग करने. पटना में स्टेशन एडिशन देर रात की खबरों वाला एडिशन होता है, जिसे दूसरे प्रदेशों में सांध्य दैनिक कहा जाता है. इस हड़ताल में सहारा टीवी नोयडा के लोग सबसे आगे दिखे. चैनल के लोगों ने नई खबरें देना बंद कर दिया जिससे चैनल पर पुरानी खबरें चलाई जा रही हैं.
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कुमार कल्पित
June 3, 2016 at 11:31 am
राष्ट्रीय सहारा देहरादून के साथियों को बधाई। एक हडताल की कामयबी के लिए और दूसरे कानपुर से आये दलाल मानसिकता के नम्बर दो के अधिकरी की कुत्सित चाल में न आने के लिए।
गौरतलब है कि इसके पहले की हडताल में तत्कालीन एडोटोरियल हे और गणेश शंकर पुरस्कार (किस लिए नवाजे गए यह उनके आलावा किसी को नहीं मालूम। यहाँ उनके सम्पादक रहते अखबार रसातल में ही गया) से नवाजे गए दिलीप चौबे ने अपनी उम्र का रोना रोकर अखबार ही नहीं छपवा लिय बल्कि दिल्ली भी भिजवा दिया। इसबार इइ अधिकारी ने इसी तरह की हरकत करनी चाही ताकि संपादक की गैरमौजूदगी में वाहवाही मिले।
Jai Hind
June 4, 2016 at 2:07 am
हाल ही में सहारा मीडिया से हटे सीईओ के कृपापात्र लोग हड़ताल का साथ व हवा दे रहे हैं. उन्हें आशा है आका फिर आने पर रेवड़ियाँ बांटेंगे. पिछली बार एक हड़ताल कर्मी को बनारस का एडिटर बना दिया था. पटना में भी दो स्पष्ट कृपापात्र है. एक को हाल ही में १८००० वेतन बाधा दिया गया और दुसरे पहले से सेकंड इन कमांड है. नाम है केशव. ये अपने को मैनेजमेंट का स्यंभू नेता घोषित कर दिए है और खुद पेज बनाने से मना कर दिया है. धन्य है मैनेजमेंट जो काम नहीं करने के लिए उकसा रहा है. हो सकता है जितने हड़ताल कर्मी है उन्हें रेवड़ियाँ मिल जाये और जो काम करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं उन्हें सजा सुना दी जाये. यहाँ सब संभव है. निवेदन है एक जांच कमिटी बनायीं जाये .
Mansi Shukla
June 4, 2016 at 7:01 am
सही कहा गया है सहारा मीडिया के कर्मचारी यो को तो प्रेस वालो या मीडिया का सपोर्ट मिल रहा है तो हड़ताल जारी है मगर सहारा परिवार के अन्य कर्मचारियों का क्या होगा जिन के पास कोई सपोर्ट नहीं है उनको तो २ साल से सैलरी नहीं दे रहे है (कमांड ऑफिस में) ऐसे में वे बेचारे अपना पेंडिंग पाने के इंतज़ार में बैठे है उस पर से कंपनी उनका ट्रान्सफर दूर स्थान पर कर रहे है और नहीं ज्वाइन करने वालो को टर्मिनेट करने में कोई देरी नहीं की जा रही है अरे भाई जब ऐसे ही भारी हो रहे है तो सीधे से बहार क्यों नहीं निकल देते , जबकि सहारा अच् आर के लोग बेचारे नयी नही तरकीबे निकाल रहे है की कैसे इनको ( कर्मचारियी को )कम किया जाये ताकि पैसा न देना पड़े और जब जमा करता का नहीं देने के मूड में है तो एम्प्लाइज का क्या हो गा मगर यह भूल गए है की एम्प्लाइज को सब मालूम है की कहा क्या है जमा करता का पैसा कहा लगाया गया है सब मालूम है, कैसे रिकॉर्ड मेन्टेन होते है कमांड के एम्प्लाइज सब जानते है मगर वह कहा बताये क्यों की कौन सुनेगा आप मीडिया भड़ास फॉर मीडिया की टी. र. प. कितनी है कितने लोग यह सब पड़ते होंगे खैर सर हमारा कही से आप को ऐसे कहेने का कोई इरादा नहीं है आप ही तो है जो सहारा के बारे में कुछ छाप रहे है बाकि तो सबका दिख हे रहा है की कितनी न्यूज़ आती है सिर्फ प्रचार करना ही काम है की सहारा की बड़ाई सामने आ सके बाकि सब घोटे बैठे है जब की सब को काली करतूतों के बारे में जनकरी है मगर कोई कुछ नहीं छापता है . क्यों की पोलिटिकल रिश्तो का सब को डर है या फिर पैसा मिल चूका है कोई न कोई तो वजहे है
एक सहारा का सताया हुआ कर्मचारी की बेटी
bharat
June 5, 2016 at 6:52 am
वाराणसी यूनिट में नया संपादक व प्रबंधक कौन?
एक वर्ष की सैलरी बकाया व अपने भविष्य की चिंताओं के बीच घिरे वाराणसी राष्ट्रीय सहारा यूनिट में २० अप्रैल से आंदोलनरत कर्मचारी ४ मई की रात नोएडा एचआर रामवीर सिंह के निर्देश पर आये फरमान के बाद व अफवाहों के बीच वाराणसी यूनिट के आंदोलन के अगुआ रिपोर्टर सिटी हेड मनोज श्रीवास्तव, जनरल डेस्क इंचार्ज सत्यप्रकाश सिंह, सिस्टम इंचार्ज वीजेंद्र सिंह, सिटी डेस्क इंचार्ज कौशल कुमार सिंह स्थानीय संपादक शशि प्रकाश राय की ही तरह अपने कर्मचारियों के साथ गद्दारी कर गये। बकाया वेतन की मांग व प्रतिमाह वेतन की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों के साथ दगाबाजी का नतीजा यह हुआ की स्वच्छ छवि के कर्मचारी अपने आंदोलनकारी नेताओं मनोज श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश सिंह, कौशल कुमार सिंह समेत विजय राय के खास विजेंद्र सिंह से कर्मचारी राहुल सिंह की जबरदस्त नोकझोंक हो हुई। मामला हाथापाई तक पहुंच गया कर्मचारियों ने दोनों को अलग कर मामला शांत कराया। आंदोलन को अगुआ जो आर-पार की लड़ाई व हर कीमत पर वेतन पाने की लड़ाई का दंभ कर्मचारियों में भर रहे थे वह महज स्थानीय संपादक व प्रबंधक को हटाये जाने के बाद खाली पड़ी कुसिर्यों की लालच में एक बार फिर अपना ़जमीर बेच कर सरदार गद्दार की भूमिका में हो गये।