एकता कपूर की तिजोरी ठसाठस हो रही है तो यादव सिंह की तिजोरी खाली होने को है….

: सिंह इज किंग यानि यादव सिंह…. : बड़ा प्यारा नाम है इनका। लेकिन यादव का बाल टेडा करने की हिमाकत कौन कर रहा है. आम जनता में कन्फ्यूजन है. कन्फ्यूजन यादव शब्द को लेकर ज्यादा है. ये नाम एक आदमी का है या एक जाति का. यूपी में कोई फर्क नहीं पड़ता. आदमी हो या जाति. यादव तो यादव है.  कुछ लोग जातपांत की बात नहीं करते. जाति की बात सिर्फ राजनीति के लिए की जाये तो ही अच्छा. लालू भाई और मुलायम दादा उदाहरण हैं. राजनीति के पतित-पावन मचान को मजबूत करने के लिए जाति का खंभ काम आया. तेजप्रताप और राजलक्ष्मी के विवाह की रस्म मचान और खंभ को आपस मे बांधने वाली मजबूत रस्सी बन गई.

एक समय कहा जाता था. जात न पूछो साधु की. वास्तव में साधु-भिखारी और राजा की जात नहीं पूछी जाती. उस जमाने में पंडित जवाहरलाल जाति और धर्म के चक्कर में नहीं पड़े. वरना इंदिरा गांधी के दांपत्यसुख में बाधा आ सकती थी. वही इंदिरा गांधी ने किया. वरना राजीव गांधी का सुख छिन सकता था. राहुल के दांपत्य स्टैंड पर अभी सोनिया गांधी की सोच का खुलासा नहीं है.

हालांकि यह बात अलग है कि सलमान खान के परिवार में उनकी मुंहबोली बहन के जाति और धर्म को पूरी तबज्जो मिली. एक यतीम बालिका को पालपोस कर बड़ा कर उसकी जातीय पहचान बरकरार रखते हुए एक राजा परिवार में उसका विवाह किया. आजकल जोधाअकबर सीरियल की सफलता में एक बड़ा फैक्टर यही है. अकबर ने जोधा के जातिधर्म की बेपनाह इज्जत की. हर हिन्दु और मुसलमान को ये दरियादिली इतनी भा रही है कि एकता कपूर की तिजोरी ठसाठस हो रही है. और इधर यादव सिंह की तिजोरी खाली होने का नंबर लग गया है. देखिये ये कैसा इंसाफ है.

लेखक मुकेश मणिकांचन जनपद फिरोजाबाद के निवासी हैं. उनसे संपर्क 09411060600 या 08445112116 के जरिए किया जा सकता है. 

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