जी न्यूज वाले सोशल मीडिया पर स्वनियमन को जरूरी मानते हैं

नोएडा, 21 अप्रैल । तथ्यों की जांच किए बगैर हम सोशल मीडिया पर निजता को शेयर कर रहे हैं, एक तरफ जहां सब कुछ छुपा लेना चाहते है वहीं एक दूसरा तंत्र है जो आप पर नजर जमाये हुये है । आज की जरूरत है फेक न्यूज से बचने की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर स्वनियमन आवश्यक है। फेक न्यूज आज मुख्यधारा की पत्रकारिता में हावी हो रहा है, जिस पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। उक्त विचार ज़ी न्यूज के डिजिटल संपादक दयाशंकर मिश्र ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में आयोजित ‘सोशल मीडिया : अवधारणा और विश्वसनीयता’ विषय पर अपने उद्बोधन में व्यक्त किए।

दयाशंकर मिश्र ने कहा कि समाजहित के पहलुओं को जागृत करना ही सोशल मीडिया का धर्म होना चाहिए । अपने आपको सही साबित करने की भूख ही खबरों की विश्वसनीयता को कम कर रही है। डिजिटल मीडिया पर हमें त्वरित प्रतिक्रिया से बचना चाहिए। सोशल मीडिया के खबरों की जांच करके करके फेक न्यूज को कम किया जा सकता है।

अकेलापन को भरती है सोशल मीडिया : अदिति राजपूत

एनडीटीवी की समाचार एंकर अदिति राजपूत ने कहा कि जो दूसरे के दर्द को शब्द दे वही पत्रकारिता कहलाती है। पत्रकारिता का क्षेत्र निरंतर सीखने का है। सोशल मीडिया ने जहां एक ओर संचार के क्षेत्र में बेहतर मंच उपलब्ध कराया है वहीं इस पर झूठ और फरेब की खबरें भी बढ़ी है। इस प्रकार की खबरों से संवेदनशीलता घटती जा रही है और मानवीय संवेदना खोखली होती जा रही है, आदमी-आदमी से दूर होता जा रहा है।

डिजिटल मीडिया में कैरियर की अपार संभावनाएं : अभिषेक महरोत्रा

पत्रकार अभिषेक महरोत्रा ने कहा कि सोशल मीडिया के आगमन से जहां चुनौतियाँ बढ़ी हैं वहीं डिजिटल मीडिया में कैरियर की संभावनाओं में भी अपार वृद्धि हुई । एक ओर जहां सोशल मीडिया स्वयं संपादक और लेखक बनने का अवसर देती है वहीं दूसरी ओर आपकी रचनात्मकता और सजगता को मंच प्रदान करती है।

सोशल मीडिया में साख का संकट : विष्णु सोनी

न्यूज-18 के ऑटो मोबाइल एडिटर विष्णु सोनी ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ भी निजी नहीं है। सोशल मीडिया पर आप की साख का ध्यान नहीं रखा जाता है। सोशल मीडिया वर्तमान में लगभग 225 करोड़ उपभोक्ताओं का एक अलग देश बनता जा रहा है यहाँ पर लोग व्यक्तिगत खबरों को बिना जाँचे परखे साझा कर देते हैं इससे खबरों की सार्थकता खत्म हो रही है। इस पर नियंत्रण की आवश्यकता बढ़ रही है। सरकार मीडिया का नियमन न करे इससे पहले हमें स्वनियमन कर लेना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक सूर्य प्रकाश, लाल बहादुर ओझा, डॉ रामशंकर, मधुकर सिंह, ऋचा चाँदी, अनिरुद्ध सुभेदार और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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