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रवीश कुमार ने मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने की बात कहकर भाजपा नेता विजय गोयल की बोलती बंद कर दी

भाजपा के बड़बोले नेता विजय गोयल प्राइम टाइम में Ravish Kumar से उखड़ गए और बोले कि आप पत्रकार लोग भी तो मोटी तनखा लेते हो लेकिन जब रवीश ने कहा कि पहले मजीठिया तो लागू करवाइए तो चुप साध गए। अगर माकपा सांसदों को छोड़ दिया जाए तो आज तक भाजपा, कांग्रेस, सपा-बसपा-राजद व जदयू ने कभी नहीं कहा होगा कि अरे हमें तो भरपूर पैसा मिलता है, कृपया हमारी तनखा न बढ़ाएं। हर साल उनकी तनखा व वेतन भत्ते बढ़ जाते हैं लेकिन आज तक किसी सांसद ने यह नहीं बताया कि जब भी संसद में गंभीर बहस होती है वे बाथरूम या वाशरूम क्यों भाग जाते हैं। तनखा लेते हो तो अपने दायित्व भी स्वीकार करिए। और हिसाब दीजिए कि हर पांच साल में आपका बैंक एकाउंट बढ़ता क्यों रहता है।

<p>भाजपा के बड़बोले नेता विजय गोयल प्राइम टाइम में Ravish Kumar से उखड़ गए और बोले कि आप पत्रकार लोग भी तो मोटी तनखा लेते हो लेकिन जब रवीश ने कहा कि पहले मजीठिया तो लागू करवाइए तो चुप साध गए। अगर माकपा सांसदों को छोड़ दिया जाए तो आज तक भाजपा, कांग्रेस, सपा-बसपा-राजद व जदयू ने कभी नहीं कहा होगा कि अरे हमें तो भरपूर पैसा मिलता है, कृपया हमारी तनखा न बढ़ाएं। हर साल उनकी तनखा व वेतन भत्ते बढ़ जाते हैं लेकिन आज तक किसी सांसद ने यह नहीं बताया कि जब भी संसद में गंभीर बहस होती है वे बाथरूम या वाशरूम क्यों भाग जाते हैं। तनखा लेते हो तो अपने दायित्व भी स्वीकार करिए। और हिसाब दीजिए कि हर पांच साल में आपका बैंक एकाउंट बढ़ता क्यों रहता है।</p>

भाजपा के बड़बोले नेता विजय गोयल प्राइम टाइम में Ravish Kumar से उखड़ गए और बोले कि आप पत्रकार लोग भी तो मोटी तनखा लेते हो लेकिन जब रवीश ने कहा कि पहले मजीठिया तो लागू करवाइए तो चुप साध गए। अगर माकपा सांसदों को छोड़ दिया जाए तो आज तक भाजपा, कांग्रेस, सपा-बसपा-राजद व जदयू ने कभी नहीं कहा होगा कि अरे हमें तो भरपूर पैसा मिलता है, कृपया हमारी तनखा न बढ़ाएं। हर साल उनकी तनखा व वेतन भत्ते बढ़ जाते हैं लेकिन आज तक किसी सांसद ने यह नहीं बताया कि जब भी संसद में गंभीर बहस होती है वे बाथरूम या वाशरूम क्यों भाग जाते हैं। तनखा लेते हो तो अपने दायित्व भी स्वीकार करिए। और हिसाब दीजिए कि हर पांच साल में आपका बैंक एकाउंट बढ़ता क्यों रहता है।

आपको तो यह भी याद नहीं रहता कि गत चुनाव में आप एमए पास थे इस बार अचानक मेट्रिक फेल कैसे हो गए। योगी आदित्यनाथ कहने को तो योगी हैं पर पैसे के मामले पूरे भोगी हैं तब ही तो सांसदों की तनखा दूनी कर देने का प्रस्ताव लेकर आए हैं। अरे योगी महाराज आज तक किसी जज ने अपना मुकदमा नहीं सुना है पर आप लोग तो अपनी तनखा खुद ही बढ़वा लेते हो। इसे तो डाका कहते हैं महाराज!

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खैर मैं माननीय विजय गोयल को बता दूं कि पत्रकारिता में तो ऐसे-ऐसे लोग हुए हैं कि आचार्य महाबीर प्रसाद द्विवेदी ने डेढ़ सौ रुपये महीने की रिलवई की नौकरी छोड़कर 18 रुपये महीने पर इंडियन प्रेस इलाहाबाद में नौकरी की थी। प्रख्यात कार्टूनिस्ट हरिश्चंद्र शुक्ल काक कानपुर स्थित आर्डनेंस फैक्ट्री से साढ़े तीन हजार की सरकारी नौकरी छोड़कर जनसत्ता में ढाई हजार पर आ गए थे। ऐसे तमाम उदाहरण पत्रकारिता में मिल जाएंगे लेकिन जरा किसी त्यागी-विरागी का नाम इन सांसदों विधायकों से तो बताइए जो पहले फटीचर थे और जिनके घर चूल्हा तक नहीं जलता था राजनीति में आकर खरबों के मालिक बन बैठे। यही हाल नौकरशाहों का है। इसलिए गोयल साहब कृपया पत्रकारिता से अपनी तुलना न करें तो बेहतर।

वरिष्ठ पत्रकार शम्भूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से.

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