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यादव सिंह की काली कमाई से मुलायम खानदान हुआ मालामाल, सीबीआई का खुलासा

अकूत संपत्ति के मालिक और करोड़ों के भ्रष्टाचार में संलिप्त नोएडा प्राधिकरण के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ हो रही सीबीआई जाँच में नित नए खुलासे हो रहे हैं. ताजा खुलासा यादव सिंह से यूपी की सत्ताधारी पार्टी और मुलायम परिवार से कनेक्शन का हुआ है. मुलायम सिंह के भतीजे और समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव के यादव सिंह से कारोबारी रिश्ते का पता चला है. अक्षय यादव फिरोजाबाद से सांसद भी हैं. अक्षय यादव ने यादव सिंह के सहयोगी से एनएम बिल्डवेल नाम की कंपनी ली थी. अक्षय ने सितंबर 2013 में एनएम बिल्डवेल कंपनी के 9 हजार 995 शेयर यादव सिंह के सहयोगी राजेश मनोचा से 10 रुपये के भाव पर खरीदे थे. पांच शेयर अक्षय की पत्नी ऋचा के नाम ट्रांसफर हुए थे. उस समय इस कंपनी के शेयर की कीमत लगभग 2050 रुपये होनी चाहिए थी.

अकूत संपत्ति के मालिक और करोड़ों के भ्रष्टाचार में संलिप्त नोएडा प्राधिकरण के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ हो रही सीबीआई जाँच में नित नए खुलासे हो रहे हैं. ताजा खुलासा यादव सिंह से यूपी की सत्ताधारी पार्टी और मुलायम परिवार से कनेक्शन का हुआ है. मुलायम सिंह के भतीजे और समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव के यादव सिंह से कारोबारी रिश्ते का पता चला है. अक्षय यादव फिरोजाबाद से सांसद भी हैं. अक्षय यादव ने यादव सिंह के सहयोगी से एनएम बिल्डवेल नाम की कंपनी ली थी. अक्षय ने सितंबर 2013 में एनएम बिल्डवेल कंपनी के 9 हजार 995 शेयर यादव सिंह के सहयोगी राजेश मनोचा से 10 रुपये के भाव पर खरीदे थे. पांच शेयर अक्षय की पत्नी ऋचा के नाम ट्रांसफर हुए थे. उस समय इस कंपनी के शेयर की कीमत लगभग 2050 रुपये होनी चाहिए थी.

उसी के बाद यूपी सरकार ने सस्पेंड चल रहे यादव सिंह को नोएडा अथॉरिटी में बहाल कर दिया था. यादव सिंह के घर से पिछले साल नवंबर में सीबीआई ने 10 करोड़ ऑडी कार से बरामद किए थे. कार उसी मनोचा की बताई जा रही है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एनएम बिल्डवेल हवाला कारोबार के शक के घेरे में है. इनकम टैक्स कंपनी की जांच कर रहा है.  मनोचा मैक्कन इंफ्रा नाम की कंपनी में निदेशक भी है. यादव सिंह केस में मैक्कन कंपनी भी जांच के घेरे में है. 2013 तक यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता भी निदेशक थी लेकिन फिर इस्तीफा दे दिया था.

सीबीआई जांच कर रही है कि क्या यादव सिंह फर्जी आवेदनों के जरिए मैक्कन को 30 औद्योगिक प्लॉट दिलाए थे. यूपी सरकार पर यादव सिंह को लेकर नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं. पिछले महीने अखिलेश यादव की सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट चली गई थी जिसमें सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था. समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव के परिवार से भी यादव सिंह एंड कंपनी के तार जुड गए है. आय़कर विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव और उनकी पत्नी ऋचा यादव को यादव सिंह की सहयोगी कंपनी मैकान्स ग्रुप के मालिक राजेश मिनोचा ने 2048 रुपये मूल्य के दस हजार शेयर मात्र दस रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेच दिए. दस्तावेजो के मुताबिक दस हजार शेयर मात्र एक लाख रुपये में अक्षय यादव और उसकी पत्नी रिचा यादव को बेच दिए गए जबकि जिस कंपनी के पूरे शेयर इन दोनों को मालिक बनाया गया उस कंपनी की कुल एसेट चार करोड़ रुपये से ज्यादा थी.

फिलहाल पूरे मामले पर अक्षय यादव चुप्पी साध गए हैं. यादव सिंह से जुडे मैकान्स ग्रुप ने एनएम बिल्डवैल प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी साल 2007 में बनाई इस कंपनी में कुल दस हजार शेयर थे और ये शेयर राजेन्द्र मिनोचा और नम्रता मिनोचा के नाम आधे आधे थे. राजेन्द्र मिनोचा ने अपने शेयरो में से 2500 शेयर संजीव बाबा नाम के आदमी को बेच दिए और उसके बाद कंपनी ने नौयडा के सेक्टर चार में ए 57 नाम का एक प्लाट ले लिया. 2007 में इस प्लाट की वैल्यू 1 करोड 58 लाख से अधिक थी और इसे बनाने में एक करोड 88 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए. साल 2012 में संजय बाबा ने अपने 2500 शेयर वापस राजेश मिनोचा को बेच दिए उस समय प्रापर्टी की वैल्यू लगभग साढे तीन करोड रूपये थी. इसके साथ ही कंपनी के दो अन्य शैयर होल्डर राजेन्द्र मिनोचा और नम्रता मिनोचा ने भी अपने शेयर राजेश मिनोचा के नाम कर दिए और कंपनी का पूरा मालिक राजेश मिनोचा हो गया.

इसके बाद इस मामले मे नया मोड आया और राजेश मिनोचा ने सितंबर 2013 में अपनी कंपनी के 9995 शेयर रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को औऱ पांच शेयर उसकी पत्नी रिचा यादव को दस रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेच दिए इस तरह से पूरी कंपनी का अधिकार अक्षय यादव औऱ उसकी पत्नी के पास आ गया. रिपोर्ट के मुताबिक जिस समय इन दोनों को ये शेयर दस रुपये के हिसाब से बेचे गए उस समय इस कंपनी के शेयर की कीमत लगभग 2050 रुपये होनी चाहिए थी और कंपनी के पास मौजूद प्लाट की कीमत चार करोड़ रूपये से ज्यादा थी जो मात्र एक लाख रुपये में दे दिया गया. आयकर विभाग ने इस मामले मे अक्षय और उसकी पत्नी के खातो की जांच के आदेश दिए है. उधर इस मामले में जाचं कर रही सीबीआई यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस कंपनी ट्रांसफर के पीछे यादव सिंह का ट्रासफर तो नही जुडा हुआ था सीबीआई अक्षय औऱ उसकी पत्नी को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है.

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