एक यूट्यूबर पत्रकार की व्यथा- क्या हम किसी ब्रांड से नहीं जुड़े हैं तो हमारी वैल्यू नहीं है?

हेल्लो यशवंत सर,

मैं मोहम्मद सिराज रतलाम मध्य प्रदेश से। मैंने स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन डीएवीवी इंदौर से एम ए किया है मास कम्युनिकेशन में। प्रभात कितना इंदौर से मैंने ट्रैनिंग की और फिर दबंग दुनिया और सिटी भास्कर में बतौर रिपोर्टर काम भी किया। लेकिन फिलहाल दो साल से से जॉब की तो बड़ी किल्लत है।

ऐसे में मैंने सोचा कि डिग्री तो है ही और 3 से 4 साल तक का प्रिंट में काम का तजुर्बा भी ही गया था तो मैंने खुद का YouTube पर channel जनरेट किया Daily Journal Hindi के नाम से अपना काम शुरू किया। अब तक कूल 17 विडियोज में अपलोड कर चुका शुरुआत है इसलिए स्टोरीज करने वक्त लग रहा है। आपसे मैंने YouTube पर channel बनाने से पहले मेसेज कर पूछा भी था कि क्या कोई परमिशन की जरूरत होगी तो अपने कहा था कि नहीं।

गुरुवार की ही बात है। मैं जिला चिकित्सालय में वीडियो शूट कर रहा था जिसमें डॉक्टर पेशेंट को देख रहा था, स्टोरी थी कि दूर से फिजिकल एग्जामिनेशन कैसे होगाऔर ट्रीटमेंट बिना फिजिकल के कैसे होगा? लेकिन उन डॉक्टर साहब ने मेरी कंप्लेंट कर चिकिस्तले में ही बनी पुलिस चौकी पर से एक हवलदार को बुलवा कर मुझे चौकी पर बैठा लिया। डॉक्टर साहब का कहना था कि मुझसे बिना पूछे मेरी वीडियो कर रहे थे। मरीजों पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा। अब चौकी में बैठे कुछ 1 स्टार और 2 स्टार मुझसे पूछने लगे कि आप किस मीडिया से या चैनल से हो?

मैंने कहा कि मेरा एक स्वतंत्र/ इंडिपेंडेंट चैनल है YouTube पर, उसके लिए स्टोरी की वीडियो कर रहा था। मेरा इतना बोलना था कि आपको बिना पूछे वीडियो बनाने का कानून पता है और मज़ाक बनाए हुए कहने लगे कि आपका मालिक कोन है और किससे ऑथराइज्ड हो आप? मैंने कहा कि ये एक independent platform है और मेरे पास डिग्री भी है एम ए की और कुछ अखबारों में भी काम किया है। वे मज़े कहते कि आप कोई पत्रकार नहीं हो और बोले इसको थाने भेजो और कहते कि हम पत्रकारों को ये कुर्सी देते है और इज्जत देते है। फिर उन्होंने कहा अभी लगते है आरिफ कुरैशी को, आरिफ कुरैशी नई दुनिया के काफी पुराने और तजुर्बेकार पत्रकार है। मैं उनसे काफी से अच्छे वाकिफ हूं। उन्हें कॉल कर पूरी परिस्थिति बताई गई। फिर मैंने कहा कि मेरी बात करवाइए तो उन्होंने मुझे यह बात कही की YouTube वालों को कोई परमिशन है और फर्जी में आते है। फिर आरिफ कुरैशी सर ने पुलिस वालों से बात कर मुझे जाने को कहा।

इस दौरान मुझे ये पता लगा कि पुलिस वाले किस लेहजे में बात करते है। उन्हें में सब कुछ दिखाने को तैयार हो गया था, मेरी डिग्री और मेरा काम। लेकिन वे मुझसे छिड़ कर और बदतमीजी से ही बात कर रहे थे। और सबसे बुरी बात यह लगी को उन्होंने कहा कि हम पत्रकारों को कुर्सी देते है।

क्या हम किसी ब्रांड से नहीं जुड़े है तो क्या हमारी कोई वैल्यू नहीं है, भले ही हमे तजुर्बा हो या डिग्री हो याने कि हमारी तब तक कोई वैल्यू नहीं है जब तक हम किसी ब्रांड से जुड़े नहीं हो।

यशवंत सर आप बताए कि में मेरे तजुर्बे ओर डिग्री को क्या करू ना तो मैं खुद का कुछ शुरू कर सकता ही ना जॉब मिल पाती है। यह मेरी नहीं मेरे जैसे हर उस नौजवान की स्टोरी है जिसकी मेरे जैसी परिस्थिति हो।

मुझे बताए में कैसे खुद को या मेरे YouTube channel के नाम को ऑथराइज करू या रजिस्टर करू। और मुझे उन पुलिस वालों की कुर्सी वाली बात का जवाब भी देना है। प्लीज़ मदद करें

यह मेरे चैनल के एक वीडियो का लिंक है अगर हो सके तो प्लीज़ शेयर कर दीजिएगा।

शुक्रिया
मोहम्मद सिराज
रतलाम
मध्य प्रदेश

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One comment on “एक यूट्यूबर पत्रकार की व्यथा- क्या हम किसी ब्रांड से नहीं जुड़े हैं तो हमारी वैल्यू नहीं है?”

  • MERE SATH BHI KUCH AINSA HI HO CHUKA H ..EK VIDEO CHALANE KE NAAM PAR SUB INSPECTOR NE MUJHSE APRADHIYON JAISE INVESTIGATION KI GAI …
    ME BHI EK YOUTUBE PR SAIFNILIVE (SLWEBNEWS) CHALATA HUN
    OR MERI QUALIFICATION (M.A. HINDI PATARKARITA ) H
    EK DO PORTAL AND NEWS PAPAR KE LIYE BHI KAR KAR CHUKA H.

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