मजीठिया वेज बोर्ड मामले में बड़ी कार्रवाई, दैनिक भास्कर और अम्बिका प्रिंटर्स पब्लिकेशन्स को 17 (1) से जुड़ी नोटिस जारी

मुम्बई : देश भर के प्रिंट मीडिया के पत्रकारों के लिए उम्मीद की किरण बने मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मुम्बई के श्रम आयुक्त कार्यालय ने एक और कदम उठाया है। रिकवरी से जुड़े मामले में श्रम आयुक्त कार्यालय ने दैनिक भास्कर समाचार-पत्र समूह की प्रबंधन कंपनी डी बी कॅार्प के मुम्बई कार्यालय को तथा श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशन्स को उनके कर्मचारियों की शिकायत पर वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 17 (1) के मामले में नोटिस भेजा है।

इन कर्मचारियों से माननीय सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले में पत्रकारो के पक्ष में मुकदमा जीतने वाले अधिवक्ता उमेश शर्मा ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले में रिकवरी के लिए 6-7 पृष्ठों का एक निवेदन पत्र श्रम आयुक्त कार्यालय में जमा कराया था। दैनिक भास्कर के मुम्बई ब्यूरो में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने और मुम्बई में ही श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशन्स के समाचार-पत्र दैनिक यशोभूमि में उप-संपादक के पद पर कार्यरत पत्रकार शशिकांत सिंह सहित कई पत्रकारों और इसी कंपनी के कर्नाटक मल्ला समाचार-पत्र के कर्मचारियों ने हस्ताक्षर कर यह निवेदन-पत्र श्रम आयुक्त कार्यालय (मुम्बई शहर) में जमा कराया, जिसके बाद श्रीमती नीलांबरी भोसले, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर (मुंबई शहर) ने 17 (1) के तहत दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी बी कॅार्प और सी ए राउत, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर (मुंबई शहर) ने श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशन्स को 17 (1) के तहत नोटिस भेजा है।

इन सभी मामलों की सुनवाई 27 जून को मुम्बई के श्रम आयुक्त कार्यालय में होगी। डी बी कॅार्प मामले की सुनवाई 27 जून को दोपहर 12:30 बजे श्रीमती भोसले, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर (मुंबई शहर) की तरफ से किया जायेगा, जबकि श्री अम्बिका प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशंस से जुड़े मामलों की सुनवाई श्री राउत, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर (मुंबई शहर) द्वारा किया जायेगा। इन दोनों कंपनियों के खिलाफ लाखों रुपए के बकाया का क्लेम कर रिकवरी का निवेदन किया गया है। यहां जानना जरूरी है कि महाराष्ट्र सरकार ने 11 मई, 2016 को पहली बार 17 (1) के तहत कार्रवाई का अधिकार असिस्टेंट लेबर कमिश्नर को दिया है।

पहले इस कार्रवाई का अधिकार श्रम अधिकारियों के पास नहीं था। अभी भी कई प्रदेश में  वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 की धारा 17 (1)  तहत कार्रवाई का अधिकार श्रम अधिकारियों के पास नहीं है। मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय ने पहली बार इस धारा के तहत अखबार प्रबंधन को नोटिस भेजा है। आपको बता दें कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में जैसे-जैसे दिन नजदीक आ रहे हैं, मुंबई में बहुत से पत्रकार माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार श्रम आयुक्त कार्यालय की शरण में जा रहे हैं। इसी कड़ी में हमारा महानगर समाचार-पत्र के भी कुछ कर्मचारी अब श्रम आयुक्त कार्यालय की शरण में पहुंच चुके हैं।

‘आफ्टरनून’ और ‘मुम्बई लक्षद्वीप’ के आफिस पहुंची मजीठिया जाँच टीम

पत्रकारों और गैर पत्रकारों के अधिकारों ,वेतन तथा भत्ते से जुड़े मजीठिया वेजबोर्ड मामले में मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय की मजीठिया जाँच टीम ने मुम्बई के चर्चित अंग्रेजी दैनिक आफ्टरनून के साथ साथ मुम्बई लक्षदीप समाचार पत्र के कार्यालय पहुच कर मजीठिया वेज बोर्ड से जुड़े कागजातों की जांच पड़ताल की। इसी टीम ने बिजनेस स्टेंडर्ड समाचार पत्र के कार्यालय पहुंच कर भी जाँच पड़ताल की। मुम्बई लक्षदीप में सहायक कामगार आयुक्त सी जे किनिगे ,सरकारी कामगार अधिकारी स्वप्निल अखडमल और अनघा छीरसागर ने कागजातों की जांच की। इसी तरह आफ्टरनून में सहायक कामगार आयुक्त संकेत कानडे ,सरकारी कामगार अधिकारी शीतल कुलकर्णी तथा आर पी तोड़कर ने कागजातों की जांच पड़ताल की। बिजनेश स्टैंडर्ड में सहायक कामगार आयुक्त अशोक डोके और सरकारी कामगार अधिकारी नरेश झोले और वर्षा हाड़के ने कागजातों की जांच पड़ताल की।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई कार्यकर्त्ता
9322411335

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