सफलता के मुहावरे गढ़ते हैं आईआईएमसीएन… कभी इश्क़ की बात कभी खबरों से मुलाक़ात…

Amarendra A Kishore : बात की शुरुआत करने के पहले राजकमल प्रकाशन परिवार को बधाई– आज उसकी प्रकाशन यात्रा के ६६ वर्ष पूरे करने पर। जब भी किसी बड़े पुरस्कार या सम्मान की घोषणा होती है तो अमूमन भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का नाम उभर कर सामने आता है– चाहे गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार की बात हो या रामनाथ गोयनका सम्मान की– आईआईएमसी एक अनिवार्यता बन जाता है।

यह सुखद संयोग है कि हाल ही में जब रामनाथ गोयनका सम्मान की घोषणा हुई तो उसमें पांच नाम ऐसे थे जिन्होंने पत्रकारिता की शिक्षा भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में पूरी की थी। आज एक ख़ास अवसर है। इस साल का राजकमल प्रकाशन सृजनात्मक गद्य सम्मान रवीश कुमार की गुलाबी कृति ‘इश्क़ में शहर होना’ को देने की घोषणा हुई है। रवीश भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के छात्र रह चुके हैं। आज से ३ साल पहले इसी मंच पर मुझे भी सम्मानित होने का अवसर मिला था, मेरी कृति “बादलों के रंग हवाओं के संग” के लिए। इसलिए आज एक बार फिर से आईआईएमसी सम्मानित हो रहा है। आईआईएमसी में सहपाठी होने के नाते मेरी ओर से रवीश को बहुत सारी बधाई। राजकमल प्रकाशन पुरस्कार निर्णायक समिति को साधुवाद– जिन्होंने एक आईआईएमसीएन की कृति को सम्मान के योग्य एक बार फिर से समझा। रविश लगातार इश्क़ की दास्ताँ लिखते रहें, मेरी शुभ कामनाएं। बाकी बातें रवीश तुमसे मिलकर।

अमरेंद्र किशोर के फेसबुक वॉल से.

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