यूपी में दो पत्रकार मिलकर अवैध तरीके से चला रहे हैं अस्पताल और पैथालॉजी, स्वास्थ्य विभाग ने की छापेमारी

पत्रकारिता की हनक दिखा कर स्वास्थ्य विभाग में बिना रजिस्ट्रेशन कराये अवैध तरीके से चल रहे अपना हॉस्पिटल व अपना पैथोलॉजी लैब पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही… अस्पताल संचालक ई टीवी भारत के रिपोर्टर सुरजीत कुशवाहा को स्वास्थ्य विभाग का कारण बताओ नोटिस… अस्पताल के एमडी हिंदी खबर कन्नौज के रिपोर्टर अनुराग सिंह है… फर्जी जांच कर मामूली बुखार के मरीज को बना दिया था डेंगू का मरीज…

कन्नौज : पत्रकारिता की हनक जिले में अधिकारियों पर किस कदर होती है इसकी एक बानगी कन्नौज जिले में देखने को मिली. यहाँ ई टीवी भारत के रिपोर्टर सुरजीत कुशवाहा व हिंदी खबर कन्नौज के रिपोर्टर अनुराग सिंह ने मिलकर इंदरगढ़ थाना इलाके के मरहाला चौराहे पर अपना हॉस्पिटल व अपना पैथोलॉजी लैब स्वास्थ्य विभाग में बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित कर दिया. इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियो की छापा मारी में अस्पताल के अंदर अपना पैथोलॉजी चलती हुयी मिली. इस पर कार्यवाही करते हुए अधिकारियों ने पैथालाजी को सील कर दिया।

इंदरगढ़ थाना इलाके में अभी हाल में ही अपना हॉस्पिटल खुला है। उसमें अपना पैथोलॉजी लैब भी संचालित है। स्वास्थ्य विभाग में न तो हॉस्पिटल रजिस्टर्ड है और न ही पैथोलॉजी। ये स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का खुद कहना है। अपना हॉस्पिटल का उद्घाटन हो चुका है। प्रचार प्रसार किया जा रहा है। अस्पताल गेट पर कही नहीं लिखा कि अस्पताल निर्माणाधीन है। नर्स आ गयी है।

मामले का खुलासा 29 अक्टूबर को उस वक्त हुआ जब कलसान गाँव निवासी मान सिंह की मौत हो गयी। घरवालों ने कहा डेंगू से मौत हो गयी। स्थानीय पत्रकारों ने खबर बनाई। मृतक के इलाज के दस्तावेज लिए व उनके परिजनों की बाईट की तो परिजनों ने बताया की पहले बेला में भर्ती कराया। फिर घटना वाले दिन अपना हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। लेकिन हॉस्पिटल वाले ने शाम को डिस्चार्ज कर दिया और घर में उनकी मौत हो गयी।

अपना हॉस्पिटल के अंदर संचालित अपना पैथोलॉजी लैब की जांच रिपोर्ट जब जिले के सीएमओ के सामने आयी तो उन्होंने मीडिया में कहा कि इस नाम से कोई हॉस्पिटल व पैथोलॉजी विभाग में रजिस्टर्ड नहीं है। इसको लेकर सीएमओ डॉ के स्वरुप ने अपर मुख्यचिकित्साधिकारी डॉ राम मोहन तिवारी को जांच के लिए भेजा तो मौके पर अस्पताल के अंदर पैथोलॉजी चलती हुयी मिली। इसके बाद पैथोलॉजी को सील कर दिया। लेकिन डॉ राम मोहन तिवारी अस्पताल को बचाने के लिए कहते रहे कि मौके पर उनको कोई मरीज नहीं मिला। मृतक के परिजन मीडिया में पहले ही बयान दे चुके थे। मृतक मान सिंह को अपना हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। डॉ राम मोहन तिवारी ने एक बार भी मृतक के परिजनों से नहीं पूछा कि क्या मृतक अपना हॉस्प्टिल में भर्ती था।

जांच अधिकारी ने सीएमओ व डीएम को भी गुमराह किया। डीएम राकेश कुमार मिश्रा ने मीडिया में बयान दिया कि हॉस्पिटल सीलकर मुकदमा कराया गया है। लेकिन न हॉस्पिटल सील किया न फर्जी हॉस्पिटल व लैब संचालक पर मुकदमा हुवा।

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