‘महिला मित्र’ के यहां नहीं, इन मुस्लिम बहनों के यहां डिनर पर गया था : अतुल अग्रवाल

Yashwant Singh-

अतुल अग्रवाल ने दो नई फेसबुक पोस्ट डालकर अपना पक्ष रखा है, साथ ही चरित्र हनन करने वालों को चेताया है. नई जानकारी उन्होंने ये दी है कि वे महिला मित्र के यहां नहीं बल्कि तीन मुस्लिम बहनों के यहां डिनर करने गए थे. अपनी पोस्ट के साथ अतुल ने मुस्लिम बहनों के साथ की सेल्फी भी पोस्ट की है जिसमें लड़कियों के चेहरे छिपा दिए गए हैं.

नोएडा पुलिस पर निशाना साधते हुए अतुल ने लिखा है कि सीसीटीवी फुटेज में वे अकेले दिख रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस के साहिबान ने अनुकूल सत्य के फेर में इस फुटेज को पीछे छोड़ दिया.

अतुल की पूरी पोस्ट पढ़ें व तस्वीरें देखें-

सबसे मजेदार ये है कि अतुल ने एक शब्द भी फर्जी लूट की सूचना देने के बारे में नहीं लिखा है. जिस मामले से पूरा बवाल शुरू हुआ, उसका कहीं जिक्र तक नहीं.

यहां एक सवाल है कि उस वक्त, जब फर्जी लूट कांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया था और अतुल अग्रवाल से न्यूज लांड्री वेबसाइट ने वर्जन लिया था, तब अतुल ने मुस्लिम बहनों के यहां डिनर करने का एक बार भी जिक्र नहीं किया था. ये सीन में अचानक मुस्लिम बहनें कहां से आ गईं? तब तो महिला मित्र के यहां डिनर करने की बात कहे लिखे जाने पर अतुल अग्रवाल को कोई आपत्ति न थी. देखें न्यूज लांड्री में प्रकाशित अतुल अग्रवाल का वर्जन-

इससे साफ जाहिर है कि नोएडा पुलिस ने जब महिला मित्र के यहां डिनर करने की बात का उल्लेख किया तब अतुल अग्रवाल ने डिनर मुस्लिम बहनों के यहां करने का कोई जिक्र न किया था. ऐसे में तो महिला मित्र बताने पर नोएडा पुलिस भी अतुल अग्रवाल के चरित्र हनन की अपराधी है. तब नोएडा पुलिस के खिलाफ एफआईआर कराने की हिम्मत अतुल को क्यों नहीं पड़ी?

महिला मित्र शब्द से आख़िर अतुल इतने असहज क्यों हो रहे हैं। क्या महिला मित्र शब्द अनैतिक है? किसी महिला दोस्त को महिला मित्र कहना कहाँ से ग़लत है? एक महिला के कई पुरुष दोस्त हो सकते हैं, एक पुरुष की कई महिला मित्र हो सकती हैं। क्या महिला सिर्फ़ बहन, पत्नी, माँ, चाची, बुआ, मौसी आदि के रिश्ते के दायरे में ही हो सकती है? क्या महिला से दोस्त-मित्र का रिश्ता नहीं हो सकता? हमारा समाज क्या इतना उदार नहीं है कि महिला से पुरुष की दोस्ती को सहज भाव से ले सके? मेरी कई महिला मित्र हैं। इसका आशय ये तो नहीं हुआ कि वे मेरी प्रेमिकाएँ हैं और उनसे मेरा अनैतिक संबंध है! एक सहज दोस्ती वाला संबंध भी तो होता है। चोर असल में अतुल के मन में है। वे खुद को जस्टीफाई करने की जितनी कोशिश कर रहे हैं, उतनी ही हंसी के पात्र बन रहे हैं।

आप मुस्लिम बहनों के यहां डिनर करो या महिला मित्र के यहां डिनर पर जाओ, इससे किसी दूसरे का क्या लेना देना हो सकता है. लेकिन जब आप न जाने किन कारणों से अचानक एक रात लूट लिए जाने की फर्जी कहानी गढ़ कर उसे सनसनीखेज बनाते हुए फेसबुक ट्वीटर पर पोस्ट करते हैं तो वहीं से आपकी कुंडली खुलने लगती है.

नोएडा पुलिस के ढेरों अफसरों और जवान कई दिन की मेहनत के बाद अतुल अग्रवाल की फर्जी लूट की कहानी की असलियत सामने ला सके. सोचिए, पुलिस का कितना वक्त और श्रम खराब हुआ. अतुल अग्रवाल की जगह ये ड्रामा किसी आम आदमी ने किया होता तो अब तक उसे जेल भेज दिया गया होता, बहुत सारी धाराओं में. लूट की फर्जी घटना की कहानी फैला कर समाज में शांति भंग करना व दहशत फैलाना, भ्रामक व असत्य सूचनाएं देकर पुलिस को परेशान करना, पुलिस से सहयोग न करना, सोशल मीडिया पर पुलिस को नीचा दिखाने वाली झूठी कहानी पोस्ट करना… गिन लीजिए कुल कितनी धाराएं बनती हैं.

पर अतुल अग्रवाल संपादक हैं. वो भी न्यूज चैनल के संपादक हैं. न्यूज चैनल छोटा भले हो लेकिन है तो. योगी सरकार से दबाकर विज्ञापन भी पाता है. न्यूज चैनल के संपादक के तमाम आईपीएस-आईएएस अफसरों से रिश्ते होते हैं. ऐसे में अतुल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई करने में नोएडा पुलिस के हाथ कांप गए. हां, अतुल अग्रवाल की शिकायत पर पुलिस ने भड़ास4मीडिया पोर्टल, श्याम मीरा सिंह, अनिल सिंह समेत कई उन निर्दोष पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा जरूर लिख लिया जो इस फ़र्ज़ी लूट कांड के प्रकरण का पत्रकारीय विश्लेषण कर रहे थे. ये है योगी राज की पुलिस का असली चरित्र.

सीएम योगी ने काम करने के लिए फ्री हैंड क्या दिया, पुलिस वाले मनमानी पर उतारू हैं. जेनुइन एफआईआर लिखेंगे नहीं और दूसरों को फंसाने-परेशान करने के लिए एफआईआर फौरन लिख लेंगे. पूरे प्रदेश में यही हाल है पुलिस का. नोएडा पुलिस शुरू से इस खेल के लिए ज्यादा बदनाम है.

इस बीच, पुरानी मेल खंगालने पर अतुल अग्रवाल का एक माफीनामा हाथ लगा है. ये उस वक्त का है जब अतुल भास्कर टीवी में थे. इस मेल को पढ़ लीजिए और देख लीजिए किस तरह के कांड के कारण वहां नौकरी त्यागने को मजबूर हुए.


Date: 26 May, 2014

Respected Mam.

With great sense of sorrow, I am offering my resignation because some serious allegations have been made against me.

As per the allegations, “on 22 may, the party night I hugged that girl and kissed on her ‘head/hairs’ & this happened outside the office and party premises”. Now I really dont understand when and where this incident happened? why these allegations are imposing on me? I DONT REMEMBER this foolish incident and told the same to her also. She said me over phone that “thik hai sir aapko yaad nahi hai isiliye main aap ko maaf karti hu.” I gave her many thanks too.

But these allegations are in air now and ruined my family life very badly. My wife has decided not to continue our relationship further. Madam, this is the capital punishment for me & my family specially for my five years old son.

As the chief of our Bhaskar family and head of our women cell, I request you that I DONT REMEMBER any incident like these allegations, but that girl is also important part of our channel and if she says something, we should honour and get them cross checked.

Now being a Managing Editor, I think its not justified to be on duty because the internal probe is continue and its my moral responsibility to step down for free and fare investigation.

So till now I offer my resignation from the post of Managing Editor of Bhaskar News Channel and believe that may this state of confusion / allegation get over soon.

I again say that I DO NOT REMEMBER SUCH INCIDENT but these allegations ruined my social & professional image as well family life very badly. I am very sorry that this unfortunate incident happened with me. I say sorry to all the members involved in this shameful incident.

May God do the justice…!

Regards.
Atul Agrawal.


कुछ अपील भड़ास के पाठकों और शुभचिंतकों से. चूंकि अतुल अग्रवाल ने भड़ास4मीडिया पर मुकदमा कर दिया है, इसलिए हम लोगों को भी तैयारी करनी है. बहुत पहले अतुल अग्रवाल का एक टेप सामने आया था जो अब कहीं दिख नहीं रहा है. उस वक्त भड़ास के पास भी वो टेप था लेकिन मसले को ज्यादा तूल देते हुए सिर्फ खबर का प्रकाशन किया गया था, टेप अपलोड नहीं किया गया था. वो टेप डिलीट हो गया है. मेल पर भी कहीं नहीं दिख रहा है. संभवत: वो टेप समाचार प्लस या ईटीवी के वक्त का था जब अतुल यहाँ काम करता था. अगर किसी के पास वो टेप हो तो कृपया भड़ास के पास भेजें, bhadas4media@gmail.com पर मेल करें. भेजने वाले का नाम पहचान मेल आईडी सब गोपनीय रखा जाएगा.

अतुल अग्रवाल द्वारा किए गए इस मुकदमे का सामना करने के लिए नोएडा में एक क्रांतिकारी वकील चाहिए. कृपया इस तलाश में भी मदद करें और जो भी सूचना जानकारी हो उसे bhadas4media@gmail.com पर मेल करिए.

यशवंत सिंह, एडिटर, भड़ास4मीडिया
संपर्क- bhadas4media@gmail.com


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Comments on “‘महिला मित्र’ के यहां नहीं, इन मुस्लिम बहनों के यहां डिनर पर गया था : अतुल अग्रवाल

  • मैंने अतुल अग्रवाल की पोस्ट पर सिर्फ़ इतना पूछा था
    कि police के ख़िलाफ़ मानहानि क्यों नहीं करते
    तो मेसेंजर पर केस की धमकी दे रहा है —
    वैसे ये कोई पत्रकार थोड़े है

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  • वैसे trollers द्वारा उन की पत्नी का चरित्र हनन किया गया वो ग़लत था—

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