क्या सुरक्षा पाने के लिए अतुल अग्रवाल ने लूट की फर्जी कहानी गढ़ी?

अनिल सिंह-

एंकर और हिंदी खबर के एडिटर इन चीफ अतुल अग्रवाल ने कल अपने साथ लूट की दर्दनाक कहानी फेसबुक पर साझा की. शब्दों और भावनाओं के साथ बुनी गई इस कहानी को तो वायरल होना ही था. इस कहानी के साथ उन्होंने लुटेरों और कार की प्रतीकात्मक तस्वीर भी लगा दी. यानि पैकेज सालिड था. टीआरपी गिरनी ही थी. वेबसाइट्स, वाट्सअप ग्रुपों, ट्वीटर समेत तमाम जगहों पर अतुल अग्रवाल के साथ लूट की कहानी प्रसारित होने लगी. लोगों ने उनके सकुशल जिंदा बच जाने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं और नोएडा पुलिस को थू थू कहा.

फेसबुक से जन्मी कहानी नोएडा पुलिस तक पहुंची तो विभाग में खलबलाहट लाजिमी है. पुलिस वालों ने थाना-चौकी को टटोला. ऐसी कहीं कोई कंप्लेन या घटना दर्ज नहीं है. अतुल अग्रवाल को फोन लगाया गया. अतुल जी ने एफआईआर कराने से इनकार कर दिया. साथ ही पुलिस के सामने पेश होकर पूरे घटना का विवरण देने से भी मना कर दिया.

अब पुलिस पर डबल प्रेशर. कथित पीड़ित न तो कार्रवाई चाह रहा और न पुलिस को घटना के डिटेल दे रहा. सबसे बड़ी बात तो घटना के फौरन बाद से लेकर फेसबुक पर कहानी लिखे जाने तक अतुल अग्रवाल ने न तो सौ नंबर को कॉल किया और न ही किसी पुलिस अफसर को सूचित किया.

पुलिस के पास सिर्फ अतुल अग्रवाल की लिखी कहानी है जिसमें कई पेंच हैं. एक जगह अतुल अग्रवाल लिखते हैं कि बदमाश ने कहा- ज्यादा होशियारी दिखाई तो सबकी जान जाएगी.

गाड़ी में तो सिर्फ अकेले अतुल अग्रवाल थे. फिर बदमाश सबकी जान लेने की धमकी क्यों दे रहे थे. क्या अतुल के साथ कोई और भी था?

दूसरा सवाल है कि अतुल अग्रवाल ज़ब सोना नहीं पहने थे तो कोई बदमाश उनसे सोना उतरवायेगा क्यों?

अतुल ने लिखा है कि बदमाशों ने मोबाइल फ़ोन उँगली से घुमा कर खुलवाया? सवाल है कि उन बदमाशों ने फोन में क्या देखा, क्या कुछ डिलीट करवाया? क्या बदमाश पहले से परिचित थे अतुल से जो उनका फोन खुलवा कर चेक कर रहे थे?

उदार किस्म के बदमाश अतुल की बातों में आ गए और सर्विलान्स के डर से फोन नहीं ले गये! क्या बदमाश बिलकुल अनाड़ी थे जो उन्हें नहीं पता कि सर्विलांस पर किसी का भी फोन लग सकता है… वो चाहें बड़े पत्रकार का फोन हो या आम आदमी का फोन… अगर वो ये बात जानते थे फोन छीनकर ले जाना क्यों छोड़ दिया… मीडिया वाला आदमी जानने के बाद तो बदमाश वैसे भी फोन ले कर दूर कहीं फेंकते हैं ताकि फोन काल से फौरन पुलिस को सूचना न मिल जाए…

इस बीच मीडिया से जुड़े कुछ खुरपेंची किस्म के लोगों का कहना है कि अतुल अग्रवाल कहानियां गढ़ने में माहिर हैं… उनके साथ वाकई ऐसा कुछ हुआ होता तो वो अपने चैनल के जरिए पुलिस प्रशासन के खिलाफ महाअभियान चला दिए होते… पर आखिर वे इतने उदार कैसे हो गए कि इतनी बड़ी घटना के बाद न तो सौ नंबर को फोन किए, न ही पुलिस में एफआईआर करा रहे और न ही बदमाशों के खिलाफ कोई कार्रवाई कराने को इच्छुक हैं…

अगर बदमाशों के प्रति उनकी इतनी ही सदिच्छा है तो उन बदमाशों की कहानी लिखकर उन्हें परेशान करने की क्या जरूरत थी….

मीडिया के कुछ विघ्नसंतोषियों का मानना है कि मामला सुरक्षा पाने का हो सकता है… आजकल सुरक्षा गार्ड रखना फैशन हो गया है… संभव है अतुल को लगा हो कि एक तगड़ी कहानी सुरक्षा पाने की उनकी मनोकामना पूर्ण कर देगी….

वैसे नोएडा पुलिस को चाहिए कि अतुल अग्रवाल को फौरन सुरक्षा मुहैया करा दे. अगर अतुल के साथ ये लूट वाली घटना हुई है तो वाकई गंभीर मामला है. यूपी में पत्रकार वैसे ही प्रशासन व अपराधियों, दोनों के निशाने पर रहते हैं. अतुल के दिए गए विवरण से लगता है कि बदमाश उन्हें किसी खबर या किसी पत्रकारीय कारण से नहीं पकड़े थे बल्कि उनका मकसद केवल लूट था लेकिन अतुल जी ने अपनी विराट बुद्धि से न तो उन्हें लूटने दिया और न फोन ले जाने दिया… कुल मिलाकर बदमाशों को भी परास्त कर अतुल जी ने अपनी बहादुरी साबित की है.

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि हो सकता है अतुल का कुछ परसनल मैटर रहा हो, कोई चक्कर वक्कर रहा हो, कोई आफिस का मैटर रहा हो जिसमें थर्ड पार्टी ने उन्हें पकड़ कर मामला सेटल किया कराया हो….

फिलहाल तो नोएडा पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. अब एक ही बड़ा तरीका है केस खोलने का. मौके के आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएं और देखे जाएं कि उस वक्त अतुल अग्रवाल की कार उधर से गुजरी थी या नहीं. जिस जगह वारदात की बात अतुल बता रहे हैं, उस मौके की घटना के वक्त की रिकार्डिंग अगर मिल जाए तो फिर अपराधी पकड़ ही लिए जाएंगे…. और केस भी फर्जी की बजाय सौ फीसदी असली कहा जाने लगेगा…

फिलहाल अतुल अग्रवाल के साथ हुई लूट की घटना के बाद हर मीडियाकर्मी इस भयानक घटना की निंदा कर अतुल के सकुशल होने पर उन्हें शुभकामना दे रहा है. हम सबकी दुवाएं अतुल जी के साथ हैं. वे ऐसे ही सबको परास्त-मात करते रहें!

मूल खबर-

चैनल हेड के साथ नोएडा में हुई लूट, किसी तरह जान बची

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Comments on “क्या सुरक्षा पाने के लिए अतुल अग्रवाल ने लूट की फर्जी कहानी गढ़ी?

  • आमिर किरमानी, पत्रकार, हरदोई says:

    पता नहीं क्यो आप (लेखज महोदय) अतुल अग्रवाल के साथ घटी घटना को इतना संदिग्ध क्यों मान रहे हैं, शायद कोई पर्सनल खुन्नस या फिर इसका कारण एक पत्रकार की दूसरे पत्रकार के साथ जन्म जन्म का बैर और जलन है कि वह खुद किसी को बड़ा पत्रकार नहीं मानते। अगर उनके साथ घटना घटी है तो उसकी निंदा होनी चाहिए, सुरक्षा मांगी है तो सुरक्षा मिलनी चाहिए।
    जब आम नागरिक को सुरक्षा मिल सकती है तो पत्रकार को क्यों नहीं। खुदा न करे कि इस तरह की घटना हमारे आपके साथ या किसी के साथ घटे। घटना सच है या झूठ यह मैं नहीं जानता, लेकिन अगर आप वास्तव में पत्रकार हैं तो बजाय आलोचना और इन्वेस्टिगेशन करने के, आपको और हमको अतुल अग्रवाल की मदद करनी चाहिए।

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  • Raj tiwari says:

    Atul agarwal bahut bada wala hai..1 no ka fraud..koi ladki wadki ka chakkar ho sakta hai…1 baje raat ko ghar k pass gaadi ka music band hone par koi itna bechain nahi ho jayega ki music k Bina ghar na pahunche…puri kahani me jhol hai…

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  • अरे ये बहुत बड़ा झूठा और गपोड़ी है। झूठी कहानियां बनाने में माहिर। इसकी बीवी से पूछो इसकी असलियत। 

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