पूंजीपतियों पर रहम, मध्यवर्ग पर सितम, ए मोदिया ये जुल्म न कर…

Yashwant Singh : आज गुस्सा आ रहा है। टैक्स टैक्स टैक्स। रेल टिकट ऑनलाइन बुक करने पर। बैंक में अकाउंट रखने पर। अकाउंट में पैसा कम रखने पर। रेस्टोरेंट में खाने पर। गूगल से पैसा कमाने पर। सर्वर की सेवा लेने पर। तीर्थ यात्रा के लिए जाने पर। UFFFFFFFF…..

आज एक टिकट ऑनलाइन बुक किया तो सर्विस टैक्स, सुपरफास्ट चार्ज आदि के बाद दस रुपया ऑनलाइन पेमेंट करते वक्त आनलाइन बैंकिंग के नाम पर काट लिया। ये मोदिया क्या चाहता है कि ऑनलाइन कामकाज बंद कर सब मैनुअल किया जाए? तो फिर डिजिटल इंडिया की नौटंकी क्यों कर रहा है?

ये मोदिया तो भारतीय मध्यवर्ग को बधिया करके मानेगा। मनमोहना चुप्पी साध कर टेंटुआ दबाता था और ये मुंह का बवासीर लात खा खा के आम भारतीयों को लूट चूस रहा है। कहाँ गए हरामखोर भजपईए जो तेल सब्जी आदि की महंगाई को लेकर जगह जगह रैली धरना प्रदर्शन निकालते थे। लगता है अब सबने अपने मुंह में मोदी की लेमनचूस चांप रखी है जिसके कारन बोल नहीं निकल रहे। चुप्पा मनमोहना से महा घटिया निकला ये बकबकी मोदिया।

शेम शेम शेम भजपयियों। तुम जैसा दोगला, जन विरोधी और झुठ्ठा कोई दूजा नहीं। अब भी समझ लीजिये कि राज करने में फेल ये ससुरे क्यों बार बार मुल्ला पाकिस्तान पलायन मस्जिद मंदिर करते रहते हैं। इन भजपयियों को मारो चार जूते और गिनो एक, तभी इनका दिमाग दुरुस्त होगा।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के इस एफबी पोस्ट पर आए कुछ पठनीय कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Sanjaya Kumar Singh गुस्सा तो तब आता है जब अस्पताल के बिल में, चेक लौटने पर लगने वाले बैंक चार्ज में और क्रेडिट कार्ड के बिल के भुगतान में भी सर्विस टैक्स लगा होता है। अस्पताल में इसलिए पैसे देने पड़ते हैं क्योंकि सरकारी अस्पताल ठीक नहीं हैं, चेक लौट आया लेकिन सर्विस टैक्स लग गया और क्रेडिट कार्ड का पेमेंट मतलब उधार चुकाना। सरकार को सब में हिस्सा चाहिए। और मोदी जी दावा कर रहे हैं यहां बचाया वहां बचाया।

Kumar Pal आज बड़े गुस्से में लग रहे हो भैया। सही है। सरकार टैक्स बढ़ाने की बजाये टैक्स चोरी रोकने में जोर दे तो स्तिथि बेहतर हो। और टैक्स बढाने की जरुरत न पड़े उस और ध्यान ही नहीं है बस आम जनता को मारते रहो। सब की हालात एक सी है राज्‍य जनता द्वारा अदा किये गये टैक्‍स का 50 प्रतिशत भी वसूल नहीं कर पाती। जनता 100 रूपये टैक्‍स देती है तो सरकार के खाते में मात्र 50 रूपये ही पहुंचते है। बकाया 50 रूपया व्‍यापारी, अधिकारी और नेता मिलकर खा जाते है और जो 50 रूपये सरकार के खाते में पहुंचते है सरकार उससे बजट बनाती है, तरह तरह की योजनाएं बनाई जाती है और उनके लिए धन आवंटित होता है। और फिर उस 50 रूपये मे से 45 कमिशन खोरी भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ जाता है…

Vivek Dutt Mathuria भईया आप सही फरमाए हैं कि मोदिया मध्य वर्ग को बधिया कर रहा है ….पर बीच वाले फिर भी तालियां पीट रहे हैं और मोदी जी नेग में टैक्स दे रहे हैं। पूंजीपतियों पर रहम, मध्यवर्ग पर सितम… ए मोदिया ये जुल्म न कर…

Rahul Gupta बड़े जोर शोर से हल्ला मचाया था, 1 जून से टिकट पर बैंकिंग का पैसा नहीं लगेगा। लेकिन लग रहा है। मैंने भी अभी जल्द में यात्रा की है, कासगंज से कानपुर और कानपुर से बरेली तक, 4 टिकट से सब पर टैक्स लगा। लूट मची है लूट मची है। जी भर के लूट।

Bhagwat Shukla भाई साहब भड़ास तो निकलनी ही चाहिए आखिर आम आदमी का यही तो एक हक बचा है… वैसे कल योगा कर लीजियेगा, काफी राहत मिलेगी।

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